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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>साहित्य को शर्मशार करते हंस और नया ज्ञानोदय</title>

								<link>http://www.visfot.com/corporate_media/4122.html</link>

								

										

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Mon, 18 Oct 2010 17:23:00 +0600</pubDate>

								<description>नेट खंगालते-खंगालते, सहज ही मन में इच्छा हुई कि साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका हंस पढ़ी जाए। पत्रिका का अक्टूबर,2010 अंक डाउनलोड लिया। करीब एक दशक बाद हंस को पढ़ रहा था। पर यह क्या, एक दशक में काफी बदलावा दिखा। साहित्य की इस प्रतिष्ठित पत्रिका में पटना के रामधारी सिंह दिवाकर की एक कहानी रंडियां शीर्षक से छपी हैं। जिस संवदेना को कहानी का आधार बनाया गया है, उसका तानाबाना गजब का है। पर यथार्थ दिखाने के चक्कर में यह इस शब्द का प्रयोग शर्मशार करने वाला है।</description>

							

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								<title>यह जुल्म की इन्तहा नहीं तो क्या है.....?</title>

								<link>http://www.visfot.com/voice_for_justice/3998.html</link>

								

										

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								<category>बियाबान में शोर</category>

								<pubDate>Tue, 21 Sep 2010 10:03:00 +0600</pubDate>

								<description>18 सितंबर को राजस्थान के झालावाड़ में एक दुखद घटना हुई जिसका आज के सामाजिक और राजनीतिक माहौल में विश्लेषण जरूरी है. इस दिन भील समाज की एक नवविवाहिता का कुछ मुस्लिम युवकों ने जबरन अपहरण करके उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. भील समाज ने जब इसका विरोध किया और आरोपियों को पकड़ने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू किया तो राज्य की पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने की बजाय भोले भाले भीलों पर ही जुल्म ढाना शुरू कर दिया. संजय स्वदेश की रिपोर्ट-</description>

							

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								<title>निवास पर आने से समस्या हल नहीं होती-विभूति</title>

								<link>http://www.visfot.com/corporate_media/3922.html</link>

								

										

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Mon, 06 Sep 2010 11:32:00 +0600</pubDate>

								<description>महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के विवादास्पद कुलपति ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों के जवाब में वी.एन.राय ने विवि के जनसंपर्क विभाग के माध्यम से कहा है कि विद्यार्थियों को अपनी समस्याअें को पहले विवि प्रशासन के समक्ष रखना था। रात 11 बजे उनके निवास पर आने से समस्या हल नहीं हो सकती थी। विवि प्रशासन व छात्रों के समन्वय व शांति से ही काम आगे बढ़ सकता है।</description>

							

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								<title>कश्मीरी आवाम से अहिंसा की उम्मीद क्यों?</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3816.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Thu, 12 Aug 2010 13:53:00 +0600</pubDate>

								<description>कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग के रूप में शामिल वाला पूरे भारत की ओर से कश्मीर को क्या मिला है? वहां कश्मीर घाटी की हिंसा में मरने स्थानीय लोगों की खबरों हमें नहीं झकझोरती हैं। देश ने केवल यह दावा किया की कश्मीर हमारा है। लेकिन इस दावे के बाद भी पूरा कश्मीर उपेक्षित हो गया। भूख तो पशु भी बर्दाश्त कर सकते हैं, लेकिन उपेक्षा नहीं। फिर भला एक पूरी समुदाय उपेक्षित हो तो उसे अहिंसक होने की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?</description>

							

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								<title>सेक्स क्षमता बढ़ाने की गलतफहमी से गधों पर संकट</title>

								<link>http://www.visfot.com/newsnetwork/3813.html</link>

								

										

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								<category>बारूद</category>

								<pubDate>Wed, 11 Aug 2010 15:29:00 +0600</pubDate>

								<description>&amp;#039;दो बैलों की कथा&amp;#039; प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी है। कहानी की शुरुआत में प्रेमचंद गधा पुराण से करते हुए बताते हैं कि कैसे गधा चुपचाप मेहनत करता है और मालिक की मार खाता है। सच कहें तो गधे जैसा मेहनती कोई अन्य पशु नहीं। खैर बदले दौर में गदहों की उपयोगिता कम हो गई थी। लेकिन आधुनिक जमाने में गधों के प्रति फिर से एक नया समाजिक गलतफहली फैलने से इसकी उपयोगिता बढ़ गई है।</description>

							

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								<title>महिलाएं बन गयी विकास की पहरुआ</title>

								<link>http://www.visfot.com/story_of_india/3802.html</link>

								

										

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								<category>भारत की कहानी</category>

								<pubDate>Mon, 09 Aug 2010 13:02:00 +0600</pubDate>

								<description>कहते हैं कि राजनीति की चाबी से हर ताले खुलते हैं, परन्तु बिहार के समाज में महिलाओं को यह चाबी वर्षों से नहीं मिली थी। इक्कीसवीं सदी के पहले दशक के जाते-जाते करिश्मा हुआ। वर्ष 2001 में लोकतंत्र की सबसे निचली इकाई, ग्राम पंचायत में आरक्षण के माध्यम से महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करा दी गई।</description>

							

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								<title>नक्सलियों के डर से नहीं आये गृहमंत्री</title>

								<link>http://www.visfot.com/newsnetwork/3776.html</link>

								

										

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								<category>बारूद</category>

								<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 19:54:00 +0600</pubDate>

								<description>नागपुर। महाराष्ट्र के सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिले गढ़चिरोली में इन दिनों काफी कुछ चल रहा है जिससे राज्य सरकार पूरी तरह से भयभीत है। पिछले दिनों नक्सली नेता आजाद की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद गढ़चिरोली जिले में सक्रिय खूंखार नक्सलियों की घातक गतिविधियों को देखते हुए राज्य के गृह मंत्री आर.आर. पाटिल &amp;#039;आबा&amp;#039; का गढ़चिरोली दौरा रद्द हो गया। आबा 29 जुलाई को गढ़चिरोली के दौरे पर आने वाले थे। आर.आर. पाटिल गढ़चिरोली के पालकमंत्री भी हैं।</description>

							

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								<title>खैरलांजी: सजा बदली तो दलितों पर फिर बढ़ा अत्याचार</title>

								<link>http://www.visfot.com/newsnetwork/3756.html</link>

								

										

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								<category>बारूद</category>

								<pubDate>Tue, 27 Jul 2010 10:58:00 +0600</pubDate>

								<description>नागपुर। खैरलांजी हत्याकांड में दोषियों की फांसी की सजा आजीवन कारावास में बदलने का विरोध अभी भी जारी है। सोमवार को रिजर्व बैंक चौक पर आधे दर्जन से भी ज्यादा संगठनों ने इस निर्णय के विरोध में प्रदर्शन किया। दीक्षाभूमि महिला धम्म संयोजन समिति, राष्ट्रीय संबुद्ध  महिला संगठन, ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन्स ऑर्गनाइजेशन, संजीवनी सखी मंच, जरीपटका, दलित महिला संघ, गौतमी महिला मंडल, नालंदा महिला मंडल, रमाबाई आंबेडकर महिला संगठन कोराड़ी आदि संगठन के कार्यकर्ताओं ने चौक पर धरना देते हुए फैसले के विरोध में नारेबाजी की।</description>

							

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								<title>असंयमित भाषा के बहाने असली मुद्दा टालने की राजनीति</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3684.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Sun, 11 Jul 2010 00:47:00 +0600</pubDate>

								<description>भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी के बयान पर राष्ट्रीय राजनीति में संयत भाषा को लेकर बवाल मचा हुआ है। आम आदमी का लहू बहाने वाले आतंकियों को फांसी की सर्जा मुकरर्र होने के बाद आखिर सरकार उन्हें क्यों पाल रही है। गड़करी ने जो सवाल उठाया, वह उनका निजी सवाल नहीं, देश की जनता का है।</description>

							

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								<title>मम्मी मुझे पापा से मिलने दो</title>

								<link>http://www.visfot.com/newsnetwork/3617.html</link>

								

										

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								<category>बारूद</category>

								<pubDate>Sun, 20 Jun 2010 21:28:00 +0600</pubDate>

								<description>नागपुर। रविवार को &amp;#039;फादर डे&amp;#039; के मौके पर कई लाड़लों ने अपने पापा को विश करते हुए उन्हें छोटे-मोटे उपहार देकर उनका दिल जीता लेकिन वहीं नागपुर के कई बच्चे और अभिभावक रविवार की सुबह रामदासपेठ स्थित लैंड्रा पार्क में उपस्थित हुए। यहां आए बच्चे अपने पापा का प्यान पाने के लिए जज साहब से गुहार लगाने की तख्ती लिए हुए थे।</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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