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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>आलोक तोमर जी, मैं राजीव शर्मा बोल रहा हूं</title>

								<link>http://www.visfot.com/index.php/bat_karamat/1087.html</link>

								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Thu, 25 Jun 2009 06:56:00 +0600</pubDate>

								<description>उस दिन मेरे आश्चर्य की सीमा नहीं रही जब देश के ख्यातिनाम संघर्षशील कहे जाने वाले पत्रकार आलोक तोमर का ई मेल अपने इनवॉक्स में देखा। सच कहूं तो बहुत देर तक उसे खोलकर पढ नही सका, लेकिन उस दिन सौमवती अमावस्या को गोर्वधन महाराज की परिक्रमा देने और उनसे ये अनुरोध करने जा रहा था कि प्रभू अब तो अपने इस नातुक्ष भक्त पर कुछ कृपा कर दीजिए जिससे जीवन के अनवरत संघर्षों में कुछ राहत मिल सके।</description>

							

					</item>

					

							

								

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										<title>hridayendra pratap singh</title>

										

											<link>http://fuhaar.blogspot.com</link>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Thu, 25 Jun 2009 10:10:02 +0600</pubDate>

										<description>संजय भैय्या ये क्या हो गया है आपको, आप हमेशा बिना किसी विवाद या बहस में पड़े अपना काम करते रहते हैं फ़िर आप न तो कुछ बोल रहे हैं न आप ये कह रहे हैं की आप आलोक जी से गुस्सा हैं न ये कह रहे हैं की आप उनसे खुश हैं, बल्कि कुछ कुछ ऐसा हो रहा है जिससे समझ में यही आता है की आप बिना कुछ कहे भी आलोक जी की बातों को दिल में गहरे तक ले गए हैं, शायद तभी हम जैसे तमाम साथियों के अनुरोध के इस मुद्दे को लगातार तूल देते जा रहे हैं, भैय्या आलोक जी ने बाकायदा एक पोस्ट में आपसे विनम्रता से मुद्दे के समापन का अनुरोध किया है, फ़िर पता नही क्यूँ आप लगातार बढाते जा रहे हैं, ऑफिस आने के बाद कुछ साइट्स की लिस्ट है जिनपर अपने २ घंटे रोज देता हूँ उनमे विस्फोट भी है, दादा ये बताइए क्या राजीव जी का ताजा लेख इस लायक है की उसे विस्फोट पर जगह दी जाती, बिला शक राजीव जी का पिछला लेख संग्रहनीय था उसे पढ़ा आनंद आया, पर ये क्या की आलोक तोमर की सांकेतिक आलोचना करने वाले उनके बेहद घटिया और एकपक्षीय लेख को आपने छाप दिया, विस्फोट के किसी लेख को देख लीजिये आपकी नजर में विस्फोट का जो सबसे सतही लेख हो उसकी भी तुलना राजीव शर्मा जी के ताजा लेख से कर लीजिये यकीन जानिए इसको विस्फोट पर प्रकाशित करने का इसके सिवाय दूसरा कोई कारण आपको नजर नही आएगा की &amp;#039;&amp;#039; आपके मन में अभी भी कहीं आलोक तोमर के प्रति खलिश बाकी है&amp;#039;&amp;#039; दादा मयंक सक्सेना, मैंने और दूसरे कई युवा साथियों ने आपसे अपील की है की कृपा करके इस मामले का पटाक्षेप कर  दें, पर पता नही क्या वजह है, विस्फोट जिसका शायद आपने कभी बेजा इस्तेमाल किया हो उसे उस दिशा में लेके चले जा रहे हैं जहाँ आपसे कई सवाल करने का मन करता है, दादा हाथ जोड़ता हूँ कृपा करके कुछ ज्वलंत और पहले की तरह बढ़िया आलेखों से दो चार कराइए,  जो काम आपने आज तक नही किया आज भी न कीजिये, उम्मीद है मुझ नाचीज की बातों का मान रखेंगे, बिना किसी स्वार्थ के आपसे और आलोक जी दोनों से जुडाव है इसलिए आपसे प्रार्थना करता हूँ, न मैंने आलोक जी से कभी नौकरी की अपेक्षा की है ना आपसे किसी फायदे की अपेक्षा है, तो अब मान भी जाइए वरना दरियागंज आकर अनशन ही शुरू करना पड़ेगा, फ़िर पान खिलाने से भी मामला सुलझेगा नही, &lt;br /&gt;
आपका नालायक&lt;br /&gt;
हृदयेंद्र&lt;br /&gt;
..........................&lt;br /&gt;
भाई राजीव के नाम एक पाती,&lt;br /&gt;
भाई राजीव जी आपके संघर्ष को सलाम, आपके शब्दों से बेहतर पत्रकारिता करने की ललक किसी भी ठीक-ठाक आदमी को समझ आ जायेगी, पर भैय्या ये क्या गुड गोबर कर डाला आपने,  &lt;br /&gt;
एक मामला जिसका समापन हर कोई चाहता है उसे फ़िर से तूल दे दिया और ऐसा वैसा नही बल्कि न जाने क्या क्या अनाप शनाप लिख डाला ख़ुद पढिये &amp;#039;&amp;#039;क्या दिल्ली जिसे देखने की अभी तमन्ना बाकी है, में रहने वाले सभ्य समाज और विशेषकर मीडिया के लोगों के बीच आपसी खीचंतान और व्यवहार कुछ ऐसा ही है जैसा असभ्य कहे जाने वाले हम जैसे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के बारे में कहा जाता है। क्या दिल्ली हमारे उन इलाकों से भी बदतर है जहॉ लोग थूक कर चाटते है?&amp;#039;&amp;#039; भैय्या दिल्ली में चाट तो बहुत खायी है मैंने और मुझ जैसे कई तेवर वाले साथियों ने लेकिन थूक कर शायद ही किसी ने चाटाहो और आप ये शब्द उस आदमी के बारे में कह रहे हैं जिसके  इतिहास और भूगो़ल के बारे में भी आपको नही मालूम, राजीव जी आप पत्रकारिता में आना चाहते हैं लेकिन बात एकतरफा करते हैं, भाई आपकी पोस्ट पढ़ कर यही लगा की आपने आलोक जी से ये आशा की थी की वो अपने संपर्कों के चलते कहीं न कहीं नौकरी दिला देंगे, भाई मेरे भी खानदान में कोई पत्रकार नही है लखनऊ से दिल्ली आया और बिना किसी की मदद के आज ठीकठाक मुकाम पर हूँ, यकीनन रास्ता बहुत ज्यादा कठिन था, पर धीरे धीरे रास्ता बनता गया, आपके लिए भी रास्ता बनेगा और कोई नही बनाएगा आप ख़ुद बना लेंगे, और अगर आप किसी से अपेक्षाएं कर रहे हैं की वो आपको पत्रकारिता में स्थापित करेगा तो ये आपका पलायनवादी रवैय्ये के सिवा और कुछ नही हो सकता, आलोक जी को आपने इसलिए बहुत कुछ संकेतों में भला बुरा कह दिया क्यूंकि वो आपको एक अदद नौकरी दिलाने में मददगार नही रहे , ये कहीं न कहीं किसी मुद्दे पर आपका स्टैंड कम  खुन्नस ज्यादा लगती है, भाई हमसे आपसे तोमर जी उम्र में बेहद बड़े हैं और उनके लिए आप जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं क्या अपने घर के बड़ों के लिए थूक के चाटना, और ना जाने क्या क्या शब्द इस्तेमाल करते हैं भैय्या इस दर्जे की भाषा के साथ आप पत्रकारिता में कीर्तिमान बनाने की उम्मीद करते हैं, जरा ठंडे दिमाग से सोचियेगा क्या सही है क्या ग़लत है, बहुत सारे उथले और बाजारू लोगों की तरह आप भी कीचड उछालने में जुट गए और आप चाहते हैं इस शैली को गले लगाया जाए, संजय जी से आपसे कम प्रेम नही करता हूँ &lt;br /&gt;
रह कोई अपेक्षा भी नही है, उनके ख़िलाफ़ कही एक-एक बात पर खून &lt;br /&gt;
खौलता&lt;br /&gt;
 है इसलिए क्यूंकि उनके सरोकार मैंने भी  देखें हैं, यकीनन आलोक जी ने जो विस्फोट के बारे में कहा उससे सहमत नही हूँ, पर बंधू आपको पता है इसके पीछे कितनी बड़ी साजिश काम कर रही है, पहले हमारे एक साथी को बलात्कारी साबित करने का कुचक्र उस घटिया जानवर अविनाश दाश ने किया अब वही नीच संजय जी और आलोक जी के बीच दुराव पैदा करने में लगा है क्या आपको पता है ये सब, शायद नही क्यूंकि आप राजस्थान के एक गाँव में बैठकर वो सब देख सुन नही पा रहे हैं जो हम देख समझ रहे हैं, ये सही है आलोक जी को थोड़ा सा उकसाइए और वो किसी की ऐसी तैसी करने के लिए तैयार हो जाते हैं, बेहद भावुक और भले आदमी हैं हाँ गुस्सा बहुत तेज आता है इसी का फायदा बहुतों ने उठाया और आज भी उनकी इसी कमजो़री का फायदा उठाकर कुछ नीच अपना उल्लू सीधा करने में जुटे हैं &lt;br /&gt;
आप जिस मुद्दे पर बिना वजह दाना पानी लेकर कूद पड़े हैं उसके पीछे की कहानी जानते तो बेहतर होता, और यूँ ही सारे दिल्ली वालों और मीडिया वालों को गरियाकर अपने बारे में घटिया सोच बनाने के लिए मजबूर न करें, हो सकता है जिनसे आप मिले हों उनसे आपके अनुभव अच्छे न रहे हों लेकिन इसका मतलब ये नही की आप सबको एक तराजू में तौलें, आपको नौकरी नही दिला सकता पर वायदा है दिल्ली आइये जितना दिन रहना है मेरे घर रहिये मजे से और संघर्ष कीजिये आपको जरूर अपनी राय बदलने में मदद मिलेगी मेरे साथ रहकर, ये सही है पत्रकारिता में योग्य आदमी हैं नही और जो हैं वो हाशिये पर हैं, लेकिन इसका मतलब ये नही हर पत्रकार गड़बड़ है, &lt;br /&gt;
अंत में भैय्या ये बता दूँ संजय जी को कोई चुनौती नही दे रहा, आपकी ग़लतफ़हमी है, आलोक जी के मन में संजय जी के प्रति कोई दुराव नही है, बस आप जैसे भाई बंधू इसे तूल न दें तो सब कुछ मजे में चलेगा, और भाई एक बार आलोक तोमर से मिलिए तो उनके बारे में आपकी राय वो नही रहेगी जो आपके ताजा लेख में है, मेरा आपसे निवेदन है दिल्ली आइये और यहाँ संजय भाई साहब से मिलिए और आलोक जी से भी मिलिए इसलिए नही की ये आपको कोई नौकरी दिलाएंगे बल्कि इसलिए क्यूंकि पत्रकारिता के लिए बहुत कुछ नया बहुत कुछ अलहदा जानने समझने को आपको मिलेगा साथ ही मैं भी इसी बहाने बहुत कुछ जान लूँगा &lt;br /&gt;
 कई मायनों में आपसे बहुत कम ज्ञान रखता हूँ, लेकिन अपने अनुभवों से इतना ही सीखा है की बड़ों को सिर्फ़ आदर ही दीजिये जीवन बड़ा चंगा बीतेगा, और जिनको आप लगभग गरिया रहे थे वो जब नही रहेंगे तब यकीन जानिए उनके बारे में किताबें और महाग्रंथ लिखे जायेंगे, जनसत्ता एक इतिहास है और उसमे काम करने वाले कई लोग इतिहासपुरुष रहे हैं, आपको बहुत बाद में पता चलेगा की एक छोटीसी खुन्नस में आपने किसको शब्दों की सूली पर चदा दिया है, आप जैसा भला आदमी  मेरी बात पर गौर करेगा उम्मीद ऐसी ही है, ये सब संजय भैय्या और आलोक जी के बीच का मामला है वो बड़े लोग हैं हम क्यूँ उनके बीच में आए&lt;br /&gt;
हृदयेंद्र</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>ALOKTomar</title>

										

											<link>http://www.datelineindia.com</link>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 04:05:09 +0600</pubDate>

										<description>Sanjay bhai, Ye ho kyaa raha hai? dismanee lakh karo, par ye gunjaaish rahe, ki jab kabhee hum dost ban jaayen to sharmindaa na hon.&lt;br /&gt;
kahne ko sabke pas bahut kuchh hai, magar............?</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>मयंक</title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 08:22:57 +0600</pubDate>

										<description>संजय जी.&lt;br /&gt;
आपने तो बात खत्म कर दी थी....क्या बात पर टिके रहने का पत्रकारिता में चलन खत्म हो गया...पहले सर्वाधिकार असुरक्षित वाली बात और अब ये....आप कम से कम अपने स्तर और कद का तो ध्यान करें....&lt;br /&gt;
आपस में ही लड़ते रहेंगे क्या....पहले मामला खत्म किया और कहा कि कोई नाराज़गी नहीं और अब....दिल में कोई गुबार हो तो खुल के कहें...खुद कुछ लिखें...इस तरह पर्दे के पीछे से क्यों खेल हो...&lt;br /&gt;
जब किसी से कोई गिला रखना &lt;br /&gt;
सामने अपने आईना रखना &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
यूँ उजालों से वास्ता रखना &lt;br /&gt;
शम्मा के पास ही हवा रखना &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
घर की तामीर चाहे जैसी हो &lt;br /&gt;
इस में रोने की जगह रखना &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मस्जिदें हैं नमाज़ियों के लिये &lt;br /&gt;
अपने घर में कहीं ख़ुदा रखना</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>अवधेश आकोदिया</title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Fri, 26 Jun 2009 10:04:31 +0600</pubDate>

										<description>हृदयेंद्र भाई, &lt;br /&gt;
आपकी तरह मैं भी इस बेवजह विवाद से बेहद दुखी हूं। सबसे ज्‍यादा दुख की बात तो यह है कि इसे यहीं दफन करने की बजाय तूल दिया जा रहा है। आपकी तरह संजय भाई को मैं भी गुजारिश कर रहा हूं कि &amp;#039;बीती ताही बिसार दे, आगे की सुध ले...&amp;#039; &lt;br /&gt;
वैसे हृदयेंद्र जी आपने राजीव जी को कुछ ज्‍यादा ही भला-बुरा कह दिया। वे भले आदमी हैं और इस विवाद से दुखी हैं। आलोक भाई के लिए उनके मन में कोई द्वेष नहीं है। दरअसल, वे भी भावनाओं में बहकर इतना कुछ कह गए। संजय जी से उनका जु़डाव ज्‍यादा गहरा है, इसलिए अनजाने में थोड़ी सी तरफदारी कर गए। चलिए, उम्‍मीद करते हैं इस विवाद पर मेरी यह पोस्‍ट आखरी होगी और सब मिलजुल कर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे...</description>

									</item>

								

							

						

				

			

		

	

	

	

	

<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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