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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

	<link>http://www.visfot.com/</link>

	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>इस देश में भाजपा के लिए संजीवनी हैं मुसलमान</title>

								<link>http://www.visfot.com/index.php/bat_karamat/886.html</link>

								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Fri, 01 May 2009 20:58:00 +0600</pubDate>

								<description>1984 के लोकसभा में चुनाव भाजपा केवल दो सीटें जीतकर मर चुकी थी। केवल अन्तिम संस्कार शेष था।  लेकिन राजीव गांधी की अपरिपक्व मंडली ने हिन्दुओं को खुश करने के लिए फरवरी 1986 में बाबरी मस्जिद पर लगे ताले को खुलवाकर बोतल में बंद जिन्न को बाहर निकाल दिया। ताला खुलने के बाद आखिरी सांसें गिन रही भाजपा को जैसे &amp;#039;संजीवनी&amp;#039; मिल गयी। लालकृष्ण आडवाणी सहित कल्याण सिंह, साध्वी रितम्भरा, उमा भारती, अशोक सिंहल, विनय कटियार, प्रवीण तोगड़िया और न जाने कितने लोगों ने राम मंदिर को ही अपना एकमात्र मुद्दा बना लिया। गली-गली रामसेवकों की फौजें तैयार हो गयीं। नफरत,घृणा और कत्लोगारद का ऐसा माहौल तैयार किया गया कि हिन्दुस्तान का धर्मनिरपेक्ष ढांचा चरमरा कर रह गया।</description>

							

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										<title>Suresh Chiplunkar</title>

										

											<link>http://http://sureshchiplunkar.blogspot.com</link>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Fri, 01 May 2009 22:16:56 +0600</pubDate>

										<description>संजय तिवारी जी, विस्फ़ोट.कॉम की नीति बदल गई है क्या? इस प्रकार के सौ लेख मैं भी भेज सकता हूँ, जिसमें कथित &amp;quot;शर्मनिरपेक्षता&amp;quot; की पोल खोली जाये और साथ ही एक तथाकथित &amp;quot;इंसानियत के धर्म&amp;quot; के बारे में भी कई तथ्य और आँकड़े पेश किये जायें, क्या उसे भी विस्फ़ोट पर जगह दी जायेगी? मैं अपने ब्लॉग पर अलग प्रकार के लेख लिखता हूँ और विस्फ़ोट को मैं एक समसामयिक पोर्टल समझता था। अब &amp;quot;भाजपा रूपी ड्राक्यूला&amp;quot; जैसे घटिया शब्द भी विस्फ़ोट पर आने लगे? यदि आपकी नीति बदल गई हो तो अलग बात है… अन्यथा इस लेख को तत्काल यहाँ से हटाइये… ये लेख वहीं पर ठीक है, जहाँ से यह चेपा गया है। और आपकी नीति बदल गई हो तो सूचित करें, मैं भी इस प्रकार के लेख भेजता हूँ…</description>

									</item>

								

									<item>

										<title></title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Fri, 01 May 2009 22:51:11 +0600</pubDate>

										<description>एसे लेख घटिया मानसिकता दर्शाते हैं खुशी की बात है कि विस्फोट भी बाकी मीदिया से कदमताल करने लगा&lt;br /&gt;
जब सारे कुओ में भांग पड़ी हो तो विस्फोट में भी एसे  लेख आने दो</description>

									</item>

								

									<item>

										<title></title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Fri, 01 May 2009 22:56:03 +0600</pubDate>

										<description>&amp;quot;क्या कोई भाजपाई यह बतायेगा कि क्या केवल दूसरे समुदायों के प्रति अनाप-शनाप बोल कर ही वोट हासिल किए जा सकते हैं ?&amp;quot;&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
नहीं, वोट हासिल करने के लिये तो कांग्रेसिओं की तरै मुस्लिम तुष्तिकरन करना होता है, मुसलमानों को पीछड़ा रखना होता है जिससे वह बेअक्ल बने रह कर कांग्रेस को खुदा माने &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
जैसे कि सलिम सिद्दीकी कर रहे हे</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>Dinesh</title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Sat, 02 May 2009 00:28:03 +0600</pubDate>

										<description>जेहाद के नाम पर ये लोग बेक़सूर हिन्दुओं का कत्लेआम करते रहे और साथ में हमे इंसानियत और धर्मनिरपेक्षता का भी पाठ सिखाते रहे| बहुत खूब|&lt;br /&gt;
गुजरात के दंगे इनको याद है पर उन लाखों कश्मीरी हिन्दुओं के बारे  में बोलना इन्हें मंजूर नहीं| &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
http://voiceofhindus.blogspot.com/</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>sanjay tiwari</title>

										

											<link>http://visfot.com/author/sanjaytiwari</link>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Sat, 02 May 2009 00:47:38 +0600</pubDate>

										<description>यह लेख एक ब्लाग पर भी छपा दिख रहा है. हो सकता है सलीम सिद्दीकी ने वहां भी भेजा हो लेकिन आम तौर पर मैं खुद वे लेख नहीं प्रकाशित करता जो पहले ही किसी ब्लाग पर प्रकाशित हो चुके हैं. इसके कारण संपादकीय नहीं बल्कि तकनीकि हैं. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
फिर भी ऐसा देखने में आया है कि &amp;quot;हिन्दुस्तान का दर्द&amp;quot; ब्लाग पर लगभग उसी समय वे लेख आते हैं जब विस्फोट पर प्रकाशित होता है. मैं उन्हें मना तो नहीं कर सकता लेकिन इस ब्लाग को चलानेवाले सज्जन से भी मेरी विनती है कि थोड़ी समझदारी दिखाएं. इससे ज्यादा मैं न कुछ कह सकता हूं न कर सकता हूं. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
रही बात भाजपा को ड्राक्यूला कहने की तो इसकी शिकायत लेखक को भी की जा सकती है. मुझे लगता है यह ज्यादा जिम्मेदार तरीका होगा. एक संपादक चाहे तो शब्दों के साथ तोड़-मरोड़ कर सकता है लेकिन बेहतर हो कि लेखक खुद इतना सावधान रहे. जहां तक मुसलमानों के बारे में लिखने की बात है उस समाज पर निष्पक्ष रूप से जितना हमने लिखा है मुख्यधारा की मीडिया से कल्पना भी नहीं की जा सकती. हमारा इरादा सबको मंच देना है और वह भी पूरी तरह से निष्पक्ष. हमारी कोशिश है कि हम निष्पक्ष वाले निष्पक्ष हों न कि किसी पक्ष वाले.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
हम तो सिर्फ कोशिश कर रहे हैं. सफलता-असफलता हमारे हाथ में तो है नहीं...</description>

									</item>

								

									<item>

										<title> azk</title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Sat, 02 May 2009 02:32:09 +0600</pubDate>

										<description>सलीम भाई &lt;br /&gt;
कुछ कश्मीर के बारे में भी लिखो न &lt;br /&gt;
दे गई न हिम्मत जवाब &lt;br /&gt;
तुमको पता है न  यदि हिन्दू शहिष्णु नहीं होता तो हिंदुस्तान के मुसलमानों की हालत स्वातघाटी के सिखोंजैसी हो रही होती . &lt;br /&gt;
और भी अच्छा होता अगर आप स्वात घटी के जंगल राज  या आपकी नजर में शरीयत राज के बारे में कुछ लिखते &lt;br /&gt;
कोई बात नहीं आप अपनी आठ दस पुश्तों के बारे में ही कुछ लिखें &lt;br /&gt;
शायद आपको पता चले कि या तो आपके बाप दादे इस देश के बहर से आये थे या फिर आपके पितामह या प्र्दादादी परनानी ;या उनके परदादा दादी या  पर नाना नानी कोई लालच में या भय से इसलाम कुबूले हों . &lt;br /&gt;
तब शायद आपको सद्बुद्धि आये .</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>RAJKUMAR SINGH</title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Sat, 02 May 2009 08:10:56 +0600</pubDate>

										<description>कोयी आस्चर्य नही .मुसल्मनोन को डर दिखा कर मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान बन्वा लिया , कन्ग्रेस्स ने ६० साल राज्य किय . अब भाजपा कर रही है !</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>संजय बेंगाणी</title>

										

											<link>http://www.tarakash.com</link>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Sat, 02 May 2009 10:39:10 +0600</pubDate>

										<description>तो विस्फोट ने विस्फोट कर दिया. नीति बदल गई या सम्पादक बहक गया? विस्फोट को मौहल्ला या हाशिया मत बनाओ. यहाँ तर्क गायब है और नफरत ही नफरत है. जो स्वस्थ पत्रकारिता में नहीं आता. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भाजपा हो या हिन्दु इनकी तर्क संगत आलोचना करना गलत नहीं है. हमें स्वागत करना चाहिए. मगर यह आलोचना नहीं है, यह आप भी समझ सकते है. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
भाईजान इतना बता दे कि देश तोड़ कर पाकिस्तान किसने बनवाया? क्या तब भी नरेन्द्र मोदी जुल्म कर रहा था? कश्मीर से हिन्दुओं का सफाया किस मोदी ने किया? दे दे जवाब तो बदले में अपन भारत में शरिया कानून लगवाने में जनाब कि मदद करेंगे. वरना अपनी बकवास बन्द करे और मुसलमानों को पोंगापंथियों के चंगुल से निकलवाने में उर्जा लगाए.</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>म्यां मरदूद</title>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Sat, 02 May 2009 10:54:32 +0600</pubDate>

										<description>सही गोटी फिट की है म्यां! लेकिन सच्चाई तो यह है कि इस देश में मुसलमानों के लिये संजीवनी है भाजपा. याद करो भाजपा के आने से पहले मुसलमानों की देश में राजनैतिक औकात क्या थी? वोट तो सारे कांग्रेस वैसे ही लेकर जाती थी. मुसलमान साइड में पड़े सिसक रहे थे. न उनके लिये कोटे की बात उठती थी, न उत्थान की. संजय गांधी ने उनकी जो गत बनाई थी कि आज भी मुसलमान उनके नाम पर रोते हैं. फिर संघ के आने पर जब राजीव गांधी को कांग्रेस की नैया डूबती दिखाई दी तो मुसलमानों का दामन थामा और उन्हें राजनैतिक पहचान मिली. वरना सिर्फ लीग-लीग बिलबिला कर मुसलमान पिस रहे थे (वैसे आज भी पीस रहें हैं मुल्ला-मौलवी).&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुसलमानों को तो दुआ देनी चाहिये भाजपा और आडवाणी को जिन्होंने कांग्रेसी और वामपंथी नरपिशाचों को मुसलमानों का दामन थामने पर मजबूर किया, वरना आज जितना मुसलमान राजनीती में दबाव रखते हैं इतना न होता.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
तो सभी मुसलमानों को चाहिये कि बोलिये मुसलमानों की भी राजनैतिक उत्थान करने वाली भारतीय जनता पार्टी की जय!</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>anup</title>

										

											<link>http://indiandba.blogspot.com</link>

										

										<category>बात करामात</category>

										<pubDate>Sat, 02 May 2009 11:22:05 +0600</pubDate>

										<description>संजय जी,&lt;br /&gt;
यह संपादक की भी जिम्मदारी होती है की उसके पत्र में क्या लिखा जा रहा है.&lt;br /&gt;
येसे लेख से आप सावधान रहे..........&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
अनूप</description>

									</item>

								

							

						

				

			

		

	

	

	

	

<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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