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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4221.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Thu, 11 Nov 2010 13:43:00 +0600</pubDate>

								<description>बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।</description>

							

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								<title>खुद ही खुदा बनने चला संघ</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4210.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Tue, 09 Nov 2010 02:34:00 +0600</pubDate>

								<description>आर एस एस ने अब शायद बी जे पी को हाशिये पर लाने का मन बना लिया है .अपनी आबरू बचाने के लिए १० नवम्बर को आरएसएस के नेता खुद सडकों पर उतरेगें और धरना प्रदर्शन करेगें . उनकी शिकायत है कि यूपीए सरकार संघी आतंकवाद के ब्रैंड को प्रचारित करने में लगभग कामयाब हो गयी है और बीजेपी वाले कोई भी राजनीतिक पहल नहीं कर रहे हैं. नाराज़ संघी नेतृत्व अब खुद ही मैदान ले रहा है .</description>

							

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								<title>शाबाश ओबामा, पहले दिन ही दस अरब डालर का बिजनेस</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4208.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Sat, 06 Nov 2010 12:42:00 +0600</pubDate>

								<description>अपने भारत दौरे के पहले दिन ही बराक ओबामा दस अऱब डालर का बिजनेस कर गए। बेशक भारत को कुछ न मिले। पर भारत ओबामा को काफी कुछ देगा। भारत अमेरिकी बेरोजगारी को दूर करेगा। बेशक आतंकी हमलों से संबंधित भाषण में ओबामा ने पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, पर भारत ने अपनी सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ी। भारत सरकार और भारत के प्राइवेट कारपोरेट ने ओबामा को खुश कर दिया है। चीन से परेशान बराक ओबामा को भारत दौरे से राहत मिली है।</description>

							

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								<title>भारत के रुख से चीन बेचैन</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4185.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Mon, 01 Nov 2010 14:49:00 +0600</pubDate>

								<description>इस समय चीन बैचेन है। बैचेनी का कारण भारत की विस्तारवादी विदेश नीति है। इस विदेश नीति के तहत भारत ने उन देशों से दोस्ती बढ़ानी शुरू कर दी है, जो देश चीन से किसी न किसी मसले पर भीड़े है। चीन काफी बैचेने से भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की हाल ही में हुई विदेश यात्रा और बराक ओबामा का नवंबर के दूसरे सप्ताह में होने वाली दक्षिण एशिया की यात्रा पर नजर रखे है। भारतीय प्रधानमंत्री की जापान, मलेशिया, दक्षिण कोरिया, वियतनाम यात्रा की आलोचना चीनी अखबार पीपुल्स डेली कर रहा है। जबकि ओबामा की यात्रा को भी चीनी अखबार विस्तारवादी यात्रा बता रहा है।</description>

							

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								<title>चड्ढी पहन के फूल खिलाने वाले उपेक्षित</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4181.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Sat, 30 Oct 2010 22:34:00 +0600</pubDate>

								<description>छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में कुछ साल पहले ‘ विकास बनाम संस्कृति ’ पर चर्चा करते हुए डा. रमन सिंह ने एक बड़ी अच्छी बात कही थी. बकौल डा. सिंह ‘आखिर कब तक आप संस्कृति के नाम पर गरीब आदिवासियों के सिर पर सिंह लगा उन्हें नचाते रहेंगे ? उनको भी विकास और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर दीजिए.’ तो ज़ाहिर सी बात है कि अगर हम प्रदेश को बदलते वैश्विक परिवेश के अनुसार आगे बढते और विकसित प्रदेश के रूप में उसकी पहचान बनाना देखना चाहते हों तो हमें नवाचार को बढ़ावा देना होगा.</description>

							

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								<title>बस, एक सरदार चाहिए कश्मीर के लिए!</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4174.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 21:52:00 +0600</pubDate>

								<description>कश्मीर समस्या ने इस मिथक को भी तोड़ दिया की  विकास  की योजनाओं और बुनियादी अवशक्ताओ की पूर्ति से किसी भी समस्या का हल ढूंढा जा सकता है ,कश्मीर में वो सब प्रयास विफल रहे है। वो हाथ जो डल झील में नाव चलाते थे, अब पत्थर-बाजी में शरीक है। इन स्थितियों में तो ऐसा लगता है काश आज सरदार पटेल के कद और राजनीतिक दृढता वाला कोई नेता देश में  होता तो अब तक ये विवाद कब का हल हो गया होता। </description>

							

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								<title>शुक्र मनाओ कि तुम भारत में हो अरुंधती</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4163.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Tue, 26 Oct 2010 11:28:00 +0600</pubDate>

								<description>भारतीय समाज में बुद्धजीवी का दर्जा पा चुकी अरुंधती रॉय ने कहा है कि कश्मीर कभी भी भारत का अभिन्न हिस्सा रहा ही नहीं है. गिलानी दिल्ली में सेमिनार में कह रहें है कि उन्हें आज़ादी से कम कुछ भी नहीं चाहिए. गिलानी अगर ऐसी बात कहें तो कोई हैरानी नहीं होती लेकिन अरुंधती ऐसा कहें तो आश्चर्य होता है. हालांकि इसके पहले भी अरुंधती रॉय एक ऐसा ही बयान दे चुकी हैं. तब उन्होंने मावोवाद का समर्थन किया था. कश्मीर को भारत का अभिन्न हिस्सा ना मानने सम्बन्धी बयान वहां पर अपनी जान कि बाज़ी लगा रहे जवानों के लिए एक तमाचा है. साथ ही शेष देश के लोगों के लिए क्षोभ और शर्मिंदगी की वजह है.</description>

							

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								<title>आइये अरुंधती को लानत भेंजे</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4154.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Mon, 25 Oct 2010 11:58:00 +0600</pubDate>

								<description>उसका बस चले तो वो हिंदुस्तान के सिर्फ इसलिए टुकड़े टुकड़े कर दे क्यूंकि ऐसा करने से वो भीड़ से अलग नजर आएगी। उसके पास हत्याओं को वाजिब ठहराने के तमाम तर्क हमेशा मौजूद रहते हैं ,क्यूंकि इसे वो  खुद को महान साबित करने का औजार समझती है। संभव है इसके बहाने वो नोबेल पुरस्कार पाने की कोशिश कर रही हो। वो वामपंथ का ऐसा क्रूर चेहरा है जिसका इस्तेमाल मीडिया कभी अपनी टीआरपी बढाने में तो कभी व्यवस्था के विरुद्ध अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए करता है। संभव है बहुतों को उससे मोहब्बत हो लेकिन हम अरुंधती को लानत भेजते हैं क्योंकि उसे राष्ट्र के अस्तित्व से नफरत है।</description>

							

					</item>

				

					<item>

						

								<title>टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4153.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Mon, 25 Oct 2010 11:45:00 +0600</pubDate>

								<description>पुरानी कहानी है कि एक परिवार के तीन तोतलों की शादी नहीं हो पा रही थी। पिता ने हिदायत दी कि इस बार जो लडकी वालों के सामने बोलेगा उसको घर से निकाल दिया जाएगा। लकड़ी वाले आए, बडे बोला -‘पितादी ती बात याद है न।‘‘ मंझला बोला -‘‘टुप्प भईया।‘‘ छोटा बोल उठा -‘‘टुम बोले टुम बोले हम टो टुप्पई टाप!‘‘ इस तरह तीनों की पोल खुल गई। कांग्रेसनीत केंद्र सरकार में भी कमोबेश एसा ही कुछ होता दिख रहा है।</description>

							

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								<title>संघ को बदनाम करने की कांग्रेसी साजिश</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/4151.html</link>

								

										

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								<category>बात करामात</category>

								<pubDate>Sun, 24 Oct 2010 23:31:00 +0600</pubDate>

								<description>राजस्थान सरकार के आतंकवाद विरोधी दस्ते ने अजमेर दरगाह शरीफ पर कुछ साल पहले हुूए बम धमाके के मामले में कुछ तथाकथित अभियुक्तों के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया है। इस आरोप पत्र में जिन आरोपियों को नाम हैं उनमें इन्द्रेश कुमार का नाम नहीं है। यहां तक का किस्सा सामान्य जांच प्रक्रिया का अंग है। परंतु उसके बाद की कहानी राजनैतिक कहानी है।</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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