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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>जातिवाद, क्षेत्रवाद, धर्मवाद का शिकार माओवाद</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3934.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Tue, 07 Sep 2010 15:52:00 +0600</pubDate>

								<description>बिहार में हुई हाल की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि माओवादी अब महज डकैतों और माफिया गुंडों का समूह है जिनसे सिर्फ डरा जा सकता है. विचारधारा और शोषण के खिलाफ लड़ने के उनके जज्बे के कारण लोगों में उनके प्रति जो सम्मान बचा था वह भी अब खत्म होने की कगार पर है. मगर इस क्राइसिस के बाद जो सबसे चौकाने वाली बात उभर कर सामने आयी है वह इन समूहों की वास्तविकता बन चुके जातिवादी झगड़े हैं.</description>

							

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								<title>चलाचली की बेला में चिदम्बरम</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3923.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Mon, 06 Sep 2010 11:46:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत गणराज्य के गृह मंत्री पलनिअप्पम चिदम्बरम की रूखसती की बेला आ गई है। एक के बाद एक हर मोर्चे पर नाकामी का सेहरा अपने सर बांधने वाले चिदम्बरम के खिलाफ कांग्रेस में भी अंदर ही अंदर रोष और असंतोष के स्वर खदबदाने लगे हैं। </description>

							

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								<title>असफल गृहमंत्री का सफल &#039;आतंकवाद&#039;</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3898.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Tue, 31 Aug 2010 16:01:00 +0600</pubDate>

								<description>हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में &amp;#039;&amp;#039;भगवा आतंकवाद&amp;#039;&amp;#039; का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं.</description>

							

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								<title>मुसलमान ही सुलझाएं अयोध्या विवाद</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3887.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Sat, 28 Aug 2010 13:39:00 +0600</pubDate>

								<description>अयोध्या विवाद के संभावित फैसले पर मुझे झटका तब लगा, जब  मेरे एक दोस्त की पन्द्रह साल की बेटी का एक एसएमएस मिला। एसएमएस में लिखा था- &amp;#039;बाबरी मस्जिद का फैसला आने वाला है। दुआ कीजिए कि फैसला मुसलमानों के हक में हो। इस एसएमएस को अपने मुसलिम भाईयों को फॉरवर्ड करें।&amp;#039; इस बात का मतलब यह है कि अयोध्या फैसले की सुरसराहट उन बच्चों में भी हो गयी है, जिन्होंने 1992 के बाद दुनिया देखी है। </description>

							

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								<title>नियमगिरी में अमन चैन की वापसी</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3885.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Fri, 27 Aug 2010 20:56:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत अपने विकास के पथ पर तो बढ़ता जा रहा है लेकिन साथ-साथ देश में अमीर-गरीब के बीच  की दूरियां भी लगातार बढती ही जा रही हैं। देश के कई भू-भागों में आज भी प्राकृतिक संसाधनों पर स्वामित्व का संघर्ष अपने चरम पर हैं, जहाँ एक ओर अपने जीवन यापन के लिए जंगल और प्रकृति पर निर्भर आदिवासी समुदाय है, तो उनके सामने सर्वाधिकार युक्त एवं सशक्त उद्योगपति हैं। इस संघर्ष में जीत किसी होगी ये एक बड़ा सवाल होता हैं। भय और औद्योगिक आतंक के साए में जी रहे उड़ीसा के कालाहांडी जिले के नियमगिरि पहाड़ों के आसपास निवास करने वाले आदिवासी समुदाय के लोग अब निस्संदेह चैन की साँस ले सकते है।</description>

							

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								<title>जयराम की जय हो!</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3878.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Thu, 26 Aug 2010 15:22:00 +0600</pubDate>

								<description>अगर दिल्ली दरबार में एक मंत्री भी अपना काम इमानदारी से करने का फैसला कर ले तो बहुत कुछ बदल सकता है. आज के ६३ साल पहले व्यवस्था बदल देने के लिए सत्ता में आई कांग्रेस के शुरुआती मंत्री तो बहुत ही इमानदार थे ,शायद इसीलिये बहुत सारी चीज़ें ऐसी हुईं जिनकी उम्मीद आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले वीरों ने देखी थी लेकिन वक़्त के साथ बेईमानों की संख्या बढ़ने लगी और बहुत सारे फैसले पैसे के बल पर होने लगे.</description>

							

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								<title>हिन्दुस्तानी होने की आम बीमारी</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3871.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Wed, 25 Aug 2010 00:16:00 +0600</pubDate>

								<description>हिंदुस्तानी आदमी की सबसे बड़ी कमजोरी है कि उसमें किलर इंस्टिंक्ट का सर्वथा अभाव होता है. दैनंदिन राजनय से लेकर खेल के मैदान तक उसकी यह कमी देखी जा सकती है. हमेशा हिन्दवी समुदाय  इस तथ्य को बिसार देता है कि &amp;#039;क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो. &amp;#039; अर्थात क्षमा उस सर्प का आभूषण है जिसके पास गरल यानी जहर हो. जिसके पास जहर ही नहीं होगा उस सांप को कोई केचुए से ज्यादा महत्त्व क्यों देगा? हिंदुस्तानी हमेशा बिना जहर दिखाए क्षमा करने निकल पड़ते हैं इसलिए जीवन के हर क्षेत्र में उन्हें अपमान का घूँट पीना पड़ता है.</description>

							

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								<title>अंधेरे में रहने को मजबूर है राजमाता की रियाया</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3860.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Sun, 22 Aug 2010 11:15:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत गणराज्य में छोटे बच्चे से अगर पूछा जाए कि देश पर वास्तव में शासन कौन कर रहा है तो निश्चित तौर पर उसका जवाब होगा ‘सोनिया गांधी‘। नेहरू गांधी परिवार के नाम पर आधी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस ने अघोषित तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी को अपनी राजमाता और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को अपना युवराज मान ही लिया है। क्या आप जानते हैं कि राजमाता और युवराज की सल्तनत का आलम क्या है?</description>

							

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								<title>सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं है जन धन की लूट</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3855.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Sat, 21 Aug 2010 20:22:00 +0600</pubDate>

								<description>पिछले कुछ समय से ऐसा कोई सप्ताह नहीं बीतता जब समाचार माध्यमों में किसी न किसी सरकारी अधिकारी, राजनेता, या ठेकेदार के यहाँ पड़े छापों में करोड़ों रुपयों का अवैध धन और किलो की तौल में सोना निकलने का समाचार नहीं आता। समाचार माध्यमों का आम पाठक, श्रोता या दर्शक इसे कौतूहल या ईर्षा के भाव से देखता है और निरीह सा अपनी व्यवस्था में आस्था घटाते हुये चुप बैठ जाता है। इन समाचारों से केवल अल्पकालीन सनसनी भर पैदा होती है, और फिर आरोपियों को मामला रफा दफा करने के लिए पर्याप्त समय देते हुये ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।</description>

							

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								<title>आजाद कर दो कश्मीर</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3826.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Sun, 15 Aug 2010 09:09:00 +0600</pubDate>

								<description>अगर कश्मीरी हिंदुस्तान में नहीं रहना चाहते तो उन्हें यह अनुभव कर लेने दिया जाना चाहिये कि वे जंगी और आर्थिक समस्याओं से घिरे अस्थिर पाकिस्तान में रह लें या फिर नेपाल या बांग्लादेश की तरह आजाद रहकर तय तक लें कि प्रगति के दौर में वह कहां तक जा पाते हैं. हालांकि इस देश ने अपने किसी वासी को यह तय करने का मौका नहीं दिया कि वह देश में रहना चाहता है या नहीं मगर अगर कश्मीर खुद को थोड़ा अलग महसूस कर रहा है तो उसे मौका दिया जाना चाहिये. बनिस्पत उसे हर साल दसियों हजार करोड़ के स्पेशल पैकेज दिये जायें और उसमें अपनी हजारों फौजों को मौत से मुकाबला करने के लिये ढकेल दिया जाय.</description>

							

					</item>

				

			

		

<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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