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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>अमिताभ की नजर में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Thu, 21 Oct 2010 18:40:00 +0600</pubDate>

								<description>गुजरात के ब्राण्ड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन का मानना है कि इस देश में नरेन्द्र मोदी सबसे बड़े सेकुलर हैं. मुंबई से प्रकाशित होनेवाले मिड डे अखबार को दिये इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन ने कहा है कि उन्हें “नरेन्द्र मोदी को सेकुलर मानने में कोई आपत्ति नहीं है. आखिरकार वे एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं जिन्हें वहां की जनता ने बहुमत से चुनकर भेजा है.” अमिताभ बच्चन का कहना है कि नरेन्द्र मोदी से दोस्ती न करने की कोई संवैधानिक रोक नहीं है. अमिताभ कहते हैं कि बतौर ब्राण्ड एम्बेसडर वे गुजरात को प्रमोट करते रहेंगे, फिर नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री रहें या फिर कोई और.</description>

							

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								<title>साहित्य को शर्मशार करते हंस और नया ज्ञानोदय</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Mon, 18 Oct 2010 17:23:00 +0600</pubDate>

								<description>नेट खंगालते-खंगालते, सहज ही मन में इच्छा हुई कि साहित्य की प्रतिष्ठित पत्रिका हंस पढ़ी जाए। पत्रिका का अक्टूबर,2010 अंक डाउनलोड लिया। करीब एक दशक बाद हंस को पढ़ रहा था। पर यह क्या, एक दशक में काफी बदलावा दिखा। साहित्य की इस प्रतिष्ठित पत्रिका में पटना के रामधारी सिंह दिवाकर की एक कहानी रंडियां शीर्षक से छपी हैं। जिस संवदेना को कहानी का आधार बनाया गया है, उसका तानाबाना गजब का है। पर यथार्थ दिखाने के चक्कर में यह इस शब्द का प्रयोग शर्मशार करने वाला है।</description>

							

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								<title>पत्रकार के ऊपर हमलावर हुए बुखारी</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Thu, 14 Oct 2010 19:43:00 +0600</pubDate>

								<description>प्रेस को संबोधित कर सपा को खुश करने लखनऊ पहुंचे जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी को उस वक्त गुस्सा आ गया जब एक मुसलमान पत्रकार ने ही उनसे सवाल पूछ लिया कि जब दोनों पक्ष सहमति की ओर आगे बढ़ने को राजी हैं तो आप अनायास सवाल क्यों खड़ा कर रहे हैं? क्या कोर्ट के फैसले के बाद भी जमीन हिन्दुओं को नहीं सौंपी जा सकती? </description>

							

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								<title>अहा! क्या कॉमन रिपोर्टिंग है</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Mon, 04 Oct 2010 13:05:00 +0600</pubDate>

								<description>कॉमनवेल्थ खेलों का उद्घाटन भी हो गया और आज अखबारों ने उस उद्घाटन की जमकर रिपोर्टिंग भी कर दी. दिल्ली से प्रकाशित होने वाले सभी अखबार कॉमनवेल्थ की चकाचौंध भरे उद्घाटन से अभिभूत हैं. कुछ अखबार तो हेडिंग लगाना ही भूल गये है. सिर्फ इतना लिख दिया है- अद्भुद.</description>

							

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								<title>छह महीने के भीतर ही एक हिन्दी वेबसाइट ने रच दिया इतिहास</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Wed, 06 Oct 2010 21:59:00 +0600</pubDate>

								<description>हिंदी समाज को वित्तीय रूप से साक्षर बनाने की मुहिम के साथ शुरू हुई वेबसाइट अर्थकाम ने छह महीने बीतते-बीतते ही अपना प्रताप दिखाना शुरू कर दिया है। उसे देश में नए बिजनेस के सर्वोत्तम 74 ‘पावर ऑफ आईडियाज’ में चुन लिया गया है। दो चरणों में होनेवाली ‘पावर ऑफ आइडियाज’ नाम की प्रतियोगिता का आयोजन इकनॉमिक टाइम्स, आईआईएम अहमदाबाद और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की तरफ से किया जाता है।</description>

							

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								<title>प्रचार की छूट हो तो रुक जाएगा पेड न्यूज</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Tue, 05 Oct 2010 20:57:00 +0600</pubDate>

								<description>सोमवार को सभी पार्टियों के नेताओं के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ने नयी दिल्ली में बैठक की और उनसे पैसा लेकर खबर लिखने और प्रकाशित करने की समस्या पर बात की. लगभग सभी पार्टियों की राय थी कि चुनाव आयोग ने जो खर्च पर सीमा बाँध दी है उसकी वजह से पेड न्यूज़ का सहारा लेना पड़ रहा है. नेताओं ने कहा कि जुलूस, पोस्टर, भोंपू और अखबारों में विज्ञापन पर लगे प्रतिबन्ध की वजह से सभी पार्टियां अपनी बात पंहुचाने के लिए कोई न कोई रास्ता तलाशती हैं और पेड न्यूज़ उसमें से एक है.</description>

							

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								<title>खबरी अपराधियों का सरगना साबित हुआ दैनिक जागरण</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Mon, 11 Oct 2010 17:56:00 +0600</pubDate>

								<description>नक्सलवाद जमीन पर जितना है उससे अधिक अखबारों में है. टेलीवीजन चैनलों पर है. मीडिया में नक्सलवाद का जोर अनायास नहीं है. एक ओर जहां सरकार को मीडिया के इस रुख से फायदा मिल रहा है वहीं मीडिया घराने विज्ञापनदाता कंपनियों के हित साधने के लिए नक्सलवाद को अखबारों में बढ़ावा दे रही हैं. दैनिक जागरण ने हाल में ही ऐसी ही एक करतूत की जो सिर्फ और सिर्फ अपने विज्ञापनदाताओं को फायदा पहुंचाने के लिए खबर गढ़ी गयी थी.</description>

							

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								<title>भाजपा कांग्रेस में साइबर वार</title>

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Mon, 04 Oct 2010 13:02:00 +0600</pubDate>

								<description>भाजपा और कांग्रेस नये जमाने के साइबर वार को अंजाम दे रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को एक नोटिस भेजा है जिसमें कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाया गया है कि वह एक ऐसे डोमेन से कांग्रेस की वेबसाइट की ओर पाठकों को मोड़ रही है जो भारतीय जनता पार्टी के नाम का सार संक्षेप है.</description>

							

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								<title>सर्वे है या राहुल राग अलापने का षण्यंत्र?</title>

								<link>http://www.visfot.com/corporate_media/4051.html</link>

								

										

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Sun, 03 Oct 2010 15:15:00 +0600</pubDate>

								<description>देश में कामनवेल्थ गेम्स का आयोजन हो रहा है और उभरते युवराज की कहीं चर्चा ही न हो यह भला कैसे हो सकता है? ठीक खेलों से एक दिन पहले व्यापारी घरानों की लॉबिंग करनेवाली एक संस्था एसोचैम की एक संस्था द एसोचैम सोशल डेवलपमेन्ट फाउण्डेशन ने एक सर्वे जारी किया है जिसमें बताया है कि देश में 72 प्रतिशत नौजवान ऐसे हैं जो यह चाहते हैं कि अगर खेलों के लिए राहुल गांधी को ब्राण्ड ऐम्बेसडर चुना जाता तो अच्छा होता.</description>

							

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								<title>कमाल है, जो बात प्रधानमंत्री को बोलनी चाहिए वह प्रीती जिंटा बोल रही हैं</title>

								<link>http://www.visfot.com/corporate_media/4037.html</link>

								

										

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								<category>कारपोरेट मीडिया</category>

								<pubDate>Fri, 01 Oct 2010 11:33:00 +0600</pubDate>

								<description>दिल्ली से प्रकाशित होनेवाले सभी अखबारों ने आज अयोध्या पर फैसले को ही लीड स्टोरी बनाया है. अंग्रेजी दैनिक टाइम्स आफ इंडिया और हिन्दुस्तान टाइम्स ने पूरे मसले पर तफ्शील से रिपोर्टिंग करने का प्रयास किया है. टाइम्स आफ इंडिया ने लीड बनाया है- 2 Parts To Hindus, 1 Part to Muslims. हालांकि सच्चाई के बाद भी यह हेडिंग थोड़ा परेशान करनेवाली है लेकिन हिन्दुस्तान टाइम्स ने ज्यादा सटीकता से रिपोर्टिंग की है. एचटी की हेडलाइन है- Disputed site is Ram birthplace-HC.</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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