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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>पुलिस रिकार्ड में बलात्कारी भी हैं कृपालु महाराज</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/3140.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Tue, 16 Mar 2010 01:55:00 +0600</pubDate>

								<description>इस कथित धर्म ध्वजावाहक संत कृपालु महाराज की संतई का भांडा पहली बार मई 1991 में उस समय फूट गया जब इस कथित धर्माचार्य को लड़कियों का अपहरण करने का ही आरोप नहीं लगा बल्कि लड़कियों के साथ जबरिया बलात्कार करने के आरोप भी लगा. इस आरोप में जगतगुरु कृपालु जी महाराज के विश्वश्त सहयोगी प्रिया शरण महाराज को नागपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया था।</description>

							

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								<title>कामदेव के कलियुगी अवतार: कृपालु महाराज</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/3137.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Mon, 15 Mar 2010 11:16:00 +0600</pubDate>

								<description>जरा सोचिए, क्या किसी व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति ब्यभिचारी-बलात्कारी मानसिकता के बीच सम्भव है? विशुद्ध रूप से आध्यात्म के रास्ते पर चलकर क्या करोड़ों-अरबों रूपयों की अचल सम्पत्तियों का अम्बार लगा देना संभव है ? अपने मूल नाम के साथ दस उपमाएँ लगाकर आज तक क्या कोई योग्य बन सका है? अपने को श्रीकृष्ण का अवतार बताकर किसी के साथ बलात्कार करना क्या किसी धर्मात्मा का कार्य हो सकता है? पुत्री समान अपनें ही शिष्याओं के साथ बलात्कार करने वाला बहुरूपिया कपटी संत क्या पूजनीय हो सकता है?</description>

							

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								<title>सोने में क्यों सजे साईं बाबा ?</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/2908.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Wed, 10 Feb 2010 01:14:00 +0600</pubDate>

								<description>करोडों रूपए का चढावा आने वाले मन्दिरों में सबसे उपर दक्षिण भारत में तिरूपति के निकट तिरूमला की पहाडियों पर विराजे भगवान बालजी जिन्हें तिरूपति बाला जी के नाम से जाना जाता है, सबसे आगे हैं। इसके बाद नंबर आता है उत्तर भारत में जम्मू के निकट त्रिकुटा पहाडी पर विराजीं मातारानी वैष्णो देवी का। इन दोनों ही के बाद महाराष्ट्र प्रदेश के अहमदनगर जिले के शिरडी गांव के फकीर साई बाबा के धाम का नाम लिया जाता है।</description>

							

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								<title>फिर प्रकट हो गये पायलट बाबा</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/2182.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Sat, 12 Dec 2009 11:09:00 +0600</pubDate>

								<description>हजारों लोगों  की गाढ़ी कमाई पर कुंडली मारकर बैठे कथित महायोगी पायलट बाबा आखिरकार प्रकट हो ही गए हैं।  वही पायलट बाबा जो उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान  और छत्तीसगढ़ में आठ हजार लोगों को एक रुपये में कंप्यूटर शिक्षा के नाम से करीब 412 करोड़ 90 लाख रुपया बटोरकर गायब थे।</description>

							

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								<title>रामभद्राचार्य की रामायण पर महाभारत</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/1924.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Thu, 05 Nov 2009 21:11:00 +0600</pubDate>

								<description>रामभद्राचार्य की रामायण पर उत्तर प्रदेश के धर्म समाज में महाभारत मचा हुआ है. रामानंद संप्रदाय के शंकराचार्य राम भद्राचार्य ने राम चरित मानस में अशुद्धियां बताकर अपने जिस राम चरित मानस को दोषमुक्त करार दिया है उसे लेकर अयोध्या में बवाल मचा हुआ है. यहां विद्वानों का कहना है कि श्रीरामचरितमानस जैसे लोकहितकारी सदग्रन्थ के प्रति आम जन मानस में किसी भी प्रकार की भ्रान्ति फैलाना या फिर खुद को मानसजी का प्रकाण्ड विद्वान प्रदर्शित करनें के लिए इस पर कुतर्क प्रस्तुत करना निश्चित रूप से घोर एवं अक्षम्य अपराध है। क्योंकि इससे मानव एवं मानवता दोनों का ही अहित होता है।</description>

							

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								<title>अप्प दीपो भव !</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/1819.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Sat, 17 Oct 2009 01:14:00 +0600</pubDate>

								<description>जैन धर्म के अंतिम तीर्थकर भगवान महावीर ने दीपावली की रात को इस प्रकाश पर्व के लिए श्रेश्ठ संदेश दिया। भगवान महावीर को मिले दिव्य ज्ञान को ज्योति का प्रतीक माना गया उनकी शिक्षा मानव के अतंरमन को अलोकित करने का मार्ग दिखाती है। बुद्व की अमृत वाणी ``अप्प दीपो भव´´ अर्थात् `अपने लिए दीपक बन´ इसी भावना को बताती है। जनमानस में दीपावली एक संस्कृतिक पर्व है लेकिन इससे कई महापुरुषों के प्रसंग भी जुड़े हुए है। एक तरह से देखा जाये तो दीपावली लौकिक के साथ आध्याित्मकता का अनूठा संगम है।</description>

							

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								<title>अफजल खान से अफजल गुरू तक</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/1530.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Wed, 09 Sep 2009 13:15:00 +0600</pubDate>

								<description>हाल ही में सम्पन्न गणेश उत्सव के दौरान मुम्बई में &amp;quot;अफ़ज़ल गुरु और कसाब को फ़ाँसी कब दी जायेगी?&amp;quot; का सवाल उठाते हुए, कुछ झाँकियों और नाटकों में इसका प्रदर्शन किया गया। वैसे तो यह सवाल समूचे देश को मथ रहा है, लेकिन मुम्बईवासियों का दर्द ज़ाहिर है कि सर्वाधिक है, इसलिये गणेशोत्सव में इस प्रकार की झाँकियाँ होना एक आम बात थी, इसमें भला किसी को क्या आपत्ति हो सकती है? लेकिन नहीं साहब, &amp;quot;सेकुलरिज़्म&amp;quot; के झण्डाबरदार और &amp;quot;महारानी की गुलाम&amp;quot; महाराष्ट्र सरकार की वफ़ादार पुलिस ने ठाणे स्थित घनताली लालबाग गणेशोत्सव मण्डल को धारा IPC 149 के तहत एक नोटिस जारी करके पूछा है कि &amp;quot;मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाली अफ़ज़ल गुरु की झाँकियाँ क्यों निकाली गईं?&amp;quot;।</description>

							

					</item>

				

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								<title>कंधमाल पर चर्च नेतृत्व का नाटक</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/1428.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Tue, 25 Aug 2009 22:06:00 +0600</pubDate>

								<description>भारतीय चर्च नेताओं ने कल 24 अगस्त को `नेशनल कंधमाल डे´ मानया। चर्च नेतृत्व तो 23 अगस्त `स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती´ की हत्या के दिन को ग्लोबल शांति के दिन के रुप में मनाना चाहता था। इसके लिए चर्च नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र संघ तक गुहार लगाई। पर अफसोस! हिन्दू नेताओं ने चर्च की रणनीति को पलीता लगा दिया । चर्च नेता अब `नेशनल कंधमाल डे´ मनाकर ही संतोष कर रहे है।</description>

							

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								<title>ताकि फिर न हो कोई और कंधमाल</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/1185.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Tue, 07 Jul 2009 22:08:00 +0600</pubDate>

								<description>पिछले साल उड़ीसा के कंधमाल जिले में `ईसाई समुदाय´ के विरुद्ध हुए दंगों की वजह से देश को बहुत बदनामी झेलनी पड़ी। पोप बेनेडिक्ट ने इन दगों पर रोम में कड़ी प्रतिक्रिया दी। इटली की सरकार ने भारतीय राजदूत को तलब कर सफाई मांगी, योरुपीयन यूनीयन ने अलग से शोर मचाया एवं अमेरिका के अंतराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने इन दंगों की जांच के लिए भारत आने की इजाजत मांगी जो उसे अभी तक नही दी गई है। भारतीय चर्च ने भी मौके का लाभ उठाते हुए देश भर के कैथोलिक स्कूलों को बंद कर सरकार को ब्लैकमैल करते हुए झुकने पर मजबूर कर दिया। आखिर यह सब क्यों किया गया?</description>

							

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								<title>धर्मों के बहुराष्ट्रीयकरण की सियासत</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/1004.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Wed, 10 Jun 2009 21:40:00 +0600</pubDate>

								<description>किसी एक देश में घटने वाली घटनाओं की गूंज-अनुगूंज अब, धार्मिक आधार पाकर, दूसरे कई देशों में सुनाई देनी शुरू हो गई है। बहुराष्ट्रीय होते इन और अन्य बहुत से धर्मों-संप्रदायों की एक और खासियत यह है कि इनकी संस्थाओं की चंदों-अनुदानों से पाई गई सार्वजनिक संपत्ति का निजीकरण होता रहता है, जिससे इन्हें सीमित किस्म की `आत्मशासी´ व्यवस्था मिल जाती है। इसीलिए इन संस्थाओं से जुड़ी किसी भी अप्रिय घटना की वजह से जो प्रतिक्रिया होती है-गुस्सा और विरोध सामने आता है- वह भी `संपत्ति´ और `व्यवस्था´ पर फूटता है। एक अनुमान के अनुसार हाल में धार्मिक गुरू के अपमान के विरोध में हुए प्रदर्शनों के कारण पंजाब में चार दिनों में सत्तर हजार करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ और इन धर्मों की बहुराष्ट्रीयता से अहसास होता है कि जैसे इनसे जुड़े मसले पूरी मानवजाति के साझे मसले हो।</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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