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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>इस सरदार की समझ पर तरस आता है</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/4165.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Tue, 26 Oct 2010 13:36:00 +0600</pubDate>

								<description>जैसे-जैसे गरीबी कम होती है, महंगाई बढ़ती जाती है। अर्थशास्त्र की कोई स्थापना भले ही इसे मानने से इनकार करे, लेकिन मशहूर अर्थशास्त्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ऐसा ही मानते हैं। विकसित देशों के योजनाकार जिस तरह 2008 में आई भयानक मंदी के लिए तेज आर्थिक विकास को ही जिम्मेदार मानते थे, मोंटेक सिंह का बयान भी कुछ ऐसा ही है। चूंकि अहलूवालिया अर्थशास्त्री हैं, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं, देश के वित्त सचिव रह चुके हैं, सबसे बड़ी बात यह कि वे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भी नौकरी कर चुके हैं। जाहिर है उनके विचार को तरजीह दिया ही जाएगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या उनका यह विचार स्वीकार के काबिल है?</description>

							

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								<title>शेयर बाजार में ठगी का कारोबार</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3877.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Thu, 26 Aug 2010 14:52:00 +0600</pubDate>

								<description>क्या आप अपनी पूंजी दोगुनी करना चाहते है? वो भी एक माह से कम समय में! आपको लग रहा होगा कि लेखक के पास कौन सी जादू की छड़ी आ गयी है कि यह एक माह से कम समय में पूंजी को दुगनी कर रहा है वो भी ऐसे मंदी के माहौल में जब दुनिया की बड़ी-बड़ी आर्थिक संस्थाएं दिवालिया हो रही हैं. लेकिन यकीन मानिये यह सच है बाम्बे स्टाक एक्सचेंज में लिस्टेड एक कंपनी जिसका नाम “ओड़िसा मिनरल डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड” है.</description>

							

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								<title>मंदी के रास्ते आई मंहगाई बनी हरजाई</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3838.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Tue, 17 Aug 2010 18:53:00 +0600</pubDate>

								<description>सन २००८ में आयी आर्थिक मंदी के बाद से विश्व भर में तमाम देशों की आर्थिक सेहत खराब बनी हुई है। कभी ऐसा लगता है कि अब हालत ठीक है तो कभी स्तिथि खराब लगने लगती है। इस बड़े आर्थिक प्रहार के बाद से दो वित्तीय वर्ष पूर्ण होने के उपरांत भी आर्थिक मंदी से अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है और ये आर्थिक मंदी सीधे –सीधे बढती महंगाई के लिये जिम्मेदार है।</description>

							

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								<title>स्विस बैंक में सेंध और भारत की भूमिका</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3735.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Thu, 22 Jul 2010 22:37:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत के करोड़ों ईमानदार टैक्सदाताओं और नागरिकों के लिये यह एक खुशखबरी है कि फ़्रांस के HSBC बैंक के दो कर्मचारियों हर्व फ़ेल्सियानी और जॉर्जीना मिखाइल ने दावा किया है कि उनके पास स्विस बैंकों में से एक बैंक में स्थित 180 देशों के कर चोरों की पूरी डीटेल्स मौजूद हैं। 2 साल से इन्होंने लगातार यूरोपीय देशों की सरकारों को ईमेल भेजकर &amp;quot;टैक्स चोरों&amp;quot; को पकड़वाने में मदद की पेशकश कर रखी है। जर्मनी की गुप्तचर सेवा को भेजे अपने ईमेल में इन्होंने कहा था कि ये लोग स्विटज़रलैण्ड स्थित एक निजी बैंक के महत्वपूर्ण डाटा और उस कम्प्यूटर तक पुलिस की पहुँच बना सकते हैं।</description>

							

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								<title>तेल के नाम पर खतरनाक खेल</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3695.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Mon, 12 Jul 2010 15:02:00 +0600</pubDate>

								<description>हम सभी को समझना होगा कि भारत में एक लीटर पेट्रोल की कींमत ५३ रूपये है ऐसा क्यों? और सरकार लगातार पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी करती जा रही है. आखिर तेल के नाम पर अपने देश के हुक्मरान कौन सा खतरनाक खेल खेल रहे हैं?</description>

							

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								<title>चीनी आर्थिक चमत्कार के पैबंद</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3600.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Thu, 17 Jun 2010 12:54:00 +0600</pubDate>

								<description>चीन से आ रही मजदूरों के आत्महत्या करने की खबरों से चीनी आर्थिक चमत्कार के ‘रहस्य‘ खुलने लगे हैं। क्या इस साम्यवादी राष्ट्र के विकास की बुनियाद निर्धन मजदूरों के शोषण पर टिकी है? क्या सस्ते उत्पादन के पीछे चीन में मजदूरों का अंतहीन शोषण है जो आत्महत्या के रूप में सामने आ रहा है?</description>

							

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								<title>भारत के लिए जरूरी है व्यापक आर्थिक परिदृश्य</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3520.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Thu, 27 May 2010 18:29:00 +0600</pubDate>

								<description>भले ही हमारे देश में आर्थिक महाशक्ति बनने की संभावना है लेकिन हम इससे आत्मसंतोष नहीं कर सकते. हमें सफलता प्राप्त करने केलिए हर स्तर पर पूरी दृढ़ता के साथ सही कदम उठाने होंगे. सफलता केलिए हमें कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत है. </description>

							

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								<title>मंहगाई की मनमोहनी मार</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3497.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Sat, 22 May 2010 21:07:00 +0600</pubDate>

								<description>मंहगाई-मंहगाई के इस खेल में फायदे में रहेंगे मनमोहन और उनकी तिकड़ी तथा वे ताकतें ( बहुराष्ट्रीय निगम) जिनके लिए मंहगाई बढ़ाई जा रही है और घाटे में रहेगी इस देश की आम जनता, यूंपीए गठबंधन और गठबंधन की प्रमुख घटक कांग्रेस क्योंकि मनमोहन और उनकी तिकड़ी के नीतियों की वजह से कांग्रेस का हाथ बहुराष्ट्रीय निगमों के साथ है, देश के आम आदमी के नहीं । इसका हिसाब आम आदमी चुनाव में जरूर लेगा किन्तु हिसाब लेने में अभी चार साल बाकी है सो मंहगाई फ़िलहाल कम होगी यह उम्मीद करना दिवास्वप्न ही है ।  </description>

							

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								<title>शेयर बाजार को ले डूबेंगी डब्बा कंपनियां</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3462.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Mon, 17 May 2010 18:59:00 +0600</pubDate>

								<description>शेयर बाजार की नियामक संस्था सेबी ( सेक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के ठीक नाक के नीचे काले धन को सफेद करने का कारोबार धड़ल्ले से जारी है । डब्बा कंपनियों के माध्यम से इसे अंजाम दे रहे हैं डब्बा ट्रेडर्स। दरअसल डब्बा ट्रेडर्स एक ऐसे कुख्यात कारोबारी तरीके का नाम है जो काले धन को सफेद करने का कारोबार धड़ल्ले से कर रहे हैं । </description>

							

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								<title>आइये समझें अर्थ का शास्त्र</title>

								<link>http://www.visfot.com/economics/3346.html</link>

								

										

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								<category>अर्थ-अनर्थ</category>

								<pubDate>Fri, 23 Apr 2010 16:08:00 +0600</pubDate>

								<description>बहुत सारे लोग अनिल सिंह को अनिल रघुराज के नाम से जानते हैं. किसी दौर में आर्थिक पत्रकार के तौर पर दिल्ली में झंडा गाड़नेवाले अनिल सिंह मुंबई गये तो अनिल रघुराज के रूप में ब्लागिंग शुरू की. मुस्कुराते हुए बात करतें हैं और बात करते हुए बीच बीच में खांसते हैं. उन्हें खांसने का कोई रोग नहीं है लेकिन ऐसा लगता है कि यह उनका स्टाइल है. बोलते बहुत धीरे हैं लेकिन जो बोलते हैं वह समझा हुआ सा लगता है इसलिए मन में बहुत सारे सवाल जवाब नहीं आते हैं. ऐसे ही अनिल सिंह उर्फ अनिल रघुराज ने अपनी एक वेबसाइट शुरू की है- अर्थकाम. </description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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