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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>ममता के दरबार में कांग्रेस की सरकार</title>

								<link>http://www.visfot.com/newsnetwork/3908.html</link>

								

										

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								<category>बारूद</category>

								<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 20:11:00 +0600</pubDate>

								<description>पश्चिम बंगाल में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं स्थानीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान और चूहे बिल्ली का खेल बढ़ता जा रहा है. इसका एक उदाहरण उस वक्त देखने को मिला जब कांग्रेस के युवा नेता और केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट पश्चिम बंगाल के दौरे पर गये. </description>

							

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								<title>आतंकवाद की राजनीति और मीडिया</title>

								<link>http://www.visfot.com/seminar/3907.html</link>

								

										

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								<category>सभा-संगत</category>

								<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 16:15:00 +0600</pubDate>

								<description>क्या आतंकवाद बौद्धिक स्तर पर इतना विकसित हो चुका है कि उसका राजनीतिक धरातल तैयार हो सके? इस जटिल प्रश्न का उत्तर सरल नहीं है. जो लोग अल-कायदा को आतंकी संगठन बताकर उसके खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं वे भी शायद इसे इस्लामिक चरमपंथ कहना ज्यादा मुनासिब समझेंगे बनिस्बत कि आतंकवाद के दर्शन में निहित राजनीति को मान्यता प्रदान करें. लेकिन मुस्लिम देशों में आतंकी गतिविधियों के द्वारा दुनियाभर में थरथराहट पैदा करनेवाले इस्लामिक विद्वान इसे उस राजनीति की प्रतिक्रिया मानते हैं जिसके वैचारिक आक्रमण के कारण इस्लाम को खतरा पैदा हो गया है. शायद इसीलिए &amp;quot;जिहाद&amp;quot; जरूरी हो गया था. </description>

							

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								<title>राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/3906.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 15:57:00 +0600</pubDate>

								<description>हिन्दुओं का ठेकेदार बनने की आरएसएस और उसके मातहत संगठनों की कोशिश को चुनौती मिल रही है. भगवान् राम के नाम पर राजनीति खेलकर सत्ता तक पंहुचने वाली बीजेपी के लिए और कोई तरकीब तलाशनी पड़ सकती है क्योंकि कांग्रेस की नयी लीडरशिप हिन्दू धर्म के प्रतीकों पर बीजेपी के एकाधिकार को मंज़ूर करने को तैयार नहीं है. कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने साफ़ कहा है कि हिन्दू धर्म पर किसी राजनीतिक पार्टी के एकाधिकार के सिद्धांत को वे बिल्कुल नहीं स्वीकार करते.</description>

							

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								<title>कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्</title>

								<link>http://www.visfot.com/dharma/3905.html</link>

								

										

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								<category>धर्म-अधर्म</category>

								<pubDate>Thu, 02 Sep 2010 09:42:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत भूमि में जन्मा कौन ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीकृष्ण का नाम न सुना हो? श्रीकृष्ण को वन्दे जगदगुरु भी कहा जाता है। श्रीरामचन्द्र के समान श्रीकृश्ण भी करोड़ों भारतवासियों की श्रद्वा और भक्ति के पात्र रहे है। वास्तव में श्रीकृष्ण की सम्पूर्ण जीवन लीला, उनका दुष्टों से लड़ना और सज्जनों की रक्षा करना, उनकी राजनीतिक क्षमता और सबसे अधिक उनका गीता के द्वारा दिया हुआ कर्मयोग का संदेश भारतीय संस्कृति की अमूल्य निधि है।</description>

							

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								<title>हरिप्रसाद का लोकतंत्र &#039;हठ&#039;</title>

								<link>http://www.visfot.com/voice_for_justice/3904.html</link>

								

										

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								<category>बियाबान में शोर</category>

								<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 14:37:00 +0600</pubDate>

								<description>हरिप्रसाद को एक हफ्ते तक पुलिस हिरासत में रखने के बाद जमानत मिल गयी है. जेल से छूटने के बाद हैदराबाद पहुंचे हरिप्रसाद ने कहा है कि वे इस गिरफ्तारी से न झुकेंगे न टूटेंगे बल्कि ईवीएम मशीनों की धोखाधड़ी के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेंगे. हरिप्रसाद की यह दिलेरी और लोकतंत्र के प्रति हठ निश्चित रूप से काबिले तारीफ है. </description>

							

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								<title>&#039;हिंदुस्तान&#039; ने पूर्णिया को शर्मसार कर दिया</title>

								<link>http://www.visfot.com/newsnetwork/3903.html</link>

								

										

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								<category>बारूद</category>

								<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 14:13:00 +0600</pubDate>

								<description>उम्र-78 साल और ये उम्र मैंने अपने घर के बंद कमरों में नहीं काटी. पूर्णिया की तमाम साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से हर दिन का साबका रहा है. कचहरी चौक पर धरना-प्रदर्शन से लेकर छोटे-बड़े तमाम मंच पर सक्रिय रहा हूं. जानता हूं कि खबरें कैसे बनती हैं और कैसे छपती हैं. &amp;#039;हिंदुस्तान&amp;#039;, &amp;#039;दैनिक जागरण&amp;#039;, &amp;#039;प्रभात खबर&amp;#039;, &amp;#039;राष्ट्रीय सहारा&amp;#039; और ऐसे ही तमाम अखबारों में छपता रहा हूं. पत्रकारिता को लेकर खट्टे-मीठे अनुभव रहे हैं. उम्र और अनुभव का तकाजा कुछ ऐसा रहा कि कभी शाबाशी में पत्रकारों की पीठ ठोंकी तो कभी उनकी तीखी आलोचना भी की, लेकिन पिछले दिनों शहर में घटी एक घटना के बाद से बेचैन हूं, दुखी हूं, शर्मिंदा हूं- समझ नहीं आ रहा कि कैसे मन की पीड़ा व्यक्त करूं?</description>

							

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								<title>सुखाड़ का शिकार हो गया बिहार</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/3902.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 13:46:00 +0600</pubDate>

								<description>उत्तरी बिहार के कुछ इलाकों में आए बाढ़ के बारे में टीवी चैनल पर खबर देखने या फिर किसी सामाचार पत्र में खबर पढ़ कर यह अंदाजा मत लगाइए कि बिहार में इस साल भी खूब बारिश हो रही है। दरअसल बिहार के कुछ इलाकों में आई बाढ़, नेपाल की नदियों से बहकर आया पानी है जिसकी वजह से कुछ क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। लेकिन इस पानी से किसानों का भला नहीं होने वाला है।</description>

							

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								<title>टाटा-बिड़ला-अंबानी, पीयेंगे मध्य प्रदेश का पानी</title>

								<link>http://www.visfot.com/news_never_die/3901.html</link>

								

										

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								<category>बड़ी खबर</category>

								<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 13:28:00 +0600</pubDate>

								<description>वेतन-भत्तों और सुविधाओं के विस्तार को लेकर लगातार हाय तौबा करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता की बुनियादी ज़रुरतों से पल्ला झाड़कर औद्योगिक घरानों की ताल पर थिरकते दिखाई दे रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में पानी,बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएँ जुटाने का ज़िम्मा सरकारों को सौंपा गया है। मगर सरकारें अब जनहित के कामों को छोड़कर एक के बाद एक योजनाओं को निजी हाथों में सौंपती चली जा रही है, फ़िर चाहे वो प्राकृतिक संसाधन हों, ज़मीन हो या आम जनता की सेवा से जुड़े मुद्दे हों। इसी कड़ी में अब नेताओं और उद्योगपतियों को पानी मुनाफ़े का सौदा नज़र आने लगा है।</description>

							

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								<title>प्रेस क्लब ने खाना नहीं खिलाया, नोटिस थमा दिया</title>

								<link>http://www.visfot.com/newsnetwork/3900.html</link>

								

										

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								<category>बारूद</category>

								<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 13:11:00 +0600</pubDate>

								<description>चंडीगढ़ प्रेस क्लब की तानाशाही का एक और नमूना सामने आया है। दैनिक भास्कर चंडीगढ़ के ब्यूरो चीफ ब्रजमोहन सिंह को क्लब ने कार्रवाई संबंधी नोटिस भेज दिया गया है। दिलचस्प बात है कि क्लब के अंदर ब्रजमोहन सिंह को दो घंटे तक खाना के आर्डर के बावजूद खाना नहीं देकर पहले बेइज्जति की गई और उसके बाद जब ब्रजमोहन सिंह ने शिकायत की तो उन्हें नोटिस दिया थमा दिया गया।</description>

							

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								<title>असफल गृहमंत्री का सफल &#039;आतंकवाद&#039;</title>

								<link>http://www.visfot.com/bat_karamat/3898.html</link>

								

										

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								<category>बात-करामात</category>

								<pubDate>Tue, 31 Aug 2010 16:01:00 +0600</pubDate>

								<description>हमारे केंद्रीय गृहमंत्री पी.चिदबरम ने पुलिस प्रमुखों के समेलन में &amp;#039;&amp;#039;भगवा आतंकवाद&amp;#039;&amp;#039; का नया शगूफा छोड़ दिया। वैसे इस केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई मंत्री बयानों के मामले में शूरवीर की प्रसिद्धी प्राप्त कर चुके है। पी. चिदबरम भी ऐसे ही मंत्री हैं जो अपने बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं. आतंकवाद का मामला हो, नकसलवाद का मामला हो, कश्मीर समस्या का मामला हो, या देश में घटित कोई भी अन्य महत्वपूर्ण मामला हो उनके आतंकवाद की थ्योरी भले ही सफल हो रही हो लेकिन बतौर गृहमंत्री वे असफल साबित हो रहे हैं.</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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