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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>कश्मीर में अलगाववाद को मनोवैज्ञानिक मदद कर रहा है भारत</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/3957.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Sat, 11 Sep 2010 23:08:00 +0600</pubDate>

								<description>अजय च्रंगू पनुन कश्मीर के अध्यक्ष हैं जो कि निर्वासित कश्मीरी पण्डितों की सबसे बड़ी प्रतिनिधि संस्था है. कश्मीर घाटी में पिछले एक महीने से हो रहे उपद्रव के बारे में अजय च्रंगू कहते हैं कि अलगाववादियों की &amp;quot;बाटमलाइन&amp;quot; सेपरेशन है. यानी वे तब तक शांत नहीं होंगे जब तक कि कश्मीर घाटी को भारत से अलग नहीं कर दिया जाता. ऐसे में भारत सरकार की ढुलमुल नीतियां कश्मीर को भारत के साथ रखने की बजाय भारत से दूर करेंगी. कश्मीर मसले पर अजय च्रंगू से एक बातचीत-</description>

							

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								<title>विरोधियों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे-कुठियाला</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/3912.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Fri, 03 Sep 2010 11:50:00 +0600</pubDate>

								<description>पत्रकारिता की पढ़ाई के लिए भोपाल में स्थापित माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय अक्सर विवादों में रहा है. छह महीने पहले जब प्रशासन ने नये कुलपित प्रो. बी के कुठियाला की नियुक्ति की तो एक बार फिर विश्वविद्यालय में तूफान खड़ा हो गया. प्रो. कुठियाला की नियुक्ति से लेकर अब तक विश्वविद्यालय पत्रकारिता की पढ़ाई का नहीं बल्कि राजनीति का अखाड़ा बन गया है. कुलपति पर आरोप है कि वे एक खास विचारधारा (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) से संपर्क रखते हैं इसलिए उनकी नियुक्तियों और कार्यपद्धति में उस विचारधारा का प्रभाव है जिसे वे बर्दाश्त नहीं करेंगे. जबकि कुलपति का कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर विश्वविद्यालय का माहौल खराब कर रहे हैं ताकि विश्वविद्यालय में जो बदलाव होने चाहिए उसे वे प्रभावित कर सकें. भोपाल में उनके घर पर हुई बातचीत में हमने उन पर लगे आरोपों और विश्वविद्यालय को लेकर लंबी बातचीत की. </description>

							

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								<title>शब्दों की चौकीदारी संभव नहीं-अनुपम मिश्र</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/3069.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Sat, 06 Mar 2010 19:16:00 +0600</pubDate>

								<description>अनुपम मिश्र पानी और पर्यावरण पर काम करने के लिए जाने जाते हैं. लेकिन उनकी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब के साथ उन्होंने एक ऐसा प्रयोग किया जिसका दूरगामी दृष्टि दिखती है. उन्होंने अपनी किताब पर किसी तरह का कापीराईट नहीं रखा. इस किताब की अब तक एक लाख से अधिक प्रतियां प्रकाशित हो चुकी हैं. मीडिया वर्तमान स्वरूप और कापीराईट के सवाल पर हमने विस्तृत बात की. यहां प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश-</description>

							

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								<title>निरुपमा के पिता ने दी थी बुरे अंजाम की धमकी- प्रियभांशु</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/3443.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Thu, 13 May 2010 20:54:00 +0600</pubDate>

								<description>निरुपमा की मौत के बाद प्रियभांशु गहरे अवसाद में है और मीडिया से बात करना बंद कर चुका है. लेकिन जिस प्रकार से निरुपमा के घरवाले इस पूरे मामले को टर्न देने की कोशिश कर रहे थे उसमें प्रियभांशु का बोलना जरूरी हो गया था. प्रियभांशु का कहना है कि निरुपमा के पिताजी ने तीन बार फोन करके उसके पिता को धमकी दी थी कि अपने बेटे को समेट लीजिए नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा. प्रियभांशु से की गयी बातचीत का महत्वपूर्ण अंश.  </description>

							

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								<title>गुजरात दंगों का प्रायश्चित है गांधी कथा - नारायण भाई</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/3304.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Fri, 16 Apr 2010 11:12:00 +0600</pubDate>

								<description>गांधी की गोद में पैदा हुए नारायणभाई देसाई महात्मा गांधी के निजी सचिव महादेवभाई देसाई के बेटे हैं. उन्होंने सक्रिय रूप से दस साल तक महात्मा गांधी के साथ काम किया है. महात्मा गांधी को बेहद करीब से देखने जाननेवाले नारायणभाई ने 80 साल की उम्र में गांधी कथा कहना शुरू किया तो संभवत: वे गांधी को उन्हीं के तरीकों से लोगों के सामने लाने जा रहे थे जो सेमिनारी गांधी और सरकारी गांधी से अलग थे. नारायणभाई देसाई अब तक 82 गांधी कथा कह चुके हैं. उनकी 82वीं गांधी कथा के मौके पर हमने उनसे लंबी बात की. बातचीत के प्रमुख अंश-</description>

							

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								<title>अमर सिंह अच्छे, मुलायम अवसरवादी- कल्याण सिंह</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/2506.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Sun, 24 Jan 2010 16:42:00 +0600</pubDate>

								<description>अमर सिंह बहुत अच्छे इंसान हैं, राजनीतिक प्रबंधन का कौशल उनके टक्कर का किसी और नेता में नहीं है. उन्होंने मुलायम सिंह यादव की पार्टी को बहुत मजबूती दी और आय से अधिक संपत्ति के मामले में उनको अमर सिंह ने ही बचाया. अमर सिंह एक बहुत अच्छे नेता हैं और मैं उनका बहुत आदर करता हूँ .उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, कल्याण सिंह ने विस्फोट से एक विशेष बातचीत के दौरान यह बातें कहीं हैं. </description>

							

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								<title>सेन्सरशिप स्वीकार नहीं करेंगे -एरिक स्मिथ</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/2471.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Wed, 20 Jan 2010 21:21:00 +0600</pubDate>

								<description>गूगल कारपोरेशन के अध्यक्ष और सीईओ एरिक स्मिथ ने न्यूजवीक मैगजीन से बात करते हुए कहा है कि चीन में उनके ऊपर कई तरह के अनावश्यक प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही थी जिसे वे स्वीकार नहीं करते. इसलिए गूगल ने वहां से बाहर जाने की धमकी दी थी. प्रस्तुत है न्यूजवीक में प्रकाशित एिरक स्मिथ से फरीद जकारिया की बातचीत-</description>

							

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								<title>डिजिटल मीडिया में विज्ञापन की मांग बढ़ रही है- लिन डिसूजा</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/2353.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Sat, 02 Jan 2010 20:58:00 +0600</pubDate>

								<description>देश की तीन  सबसे बड़ी विज्ञापन एजेंसियों  में शुमार है लिंटास मीडिया ग्रुप (एलएमजी) और इसकी चेयरमैन व सीईओ हैं लिन डिसूजा। लिन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की 50 सबसे प्रभावशाली हस्तियों में गिनी जाती हैं। उनका मानना है कि विज्ञापनदाताओं के लिए डिजिटल माध्यम काफी तेजी से उभर रहा है। लिन डिसूजा से बातचीत के चुनिंदा अंश।
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								<title>राजनीति में आध्यात्मिक भावना रखनी चाहिए-राजनाथ सिंह</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/2335.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Wed, 30 Dec 2009 22:03:00 +0600</pubDate>

								<description>भाजपा अध्यक्ष के रूप में चार साल की राजनीतिक पारी खेलनेवाले राजनाथ सिंह को भाजपा का सबसे बेचारा अध्यक्ष कहा गया. लेकिन राजनाथ सिंह कहते हैं कि जिन कारणों से उन्हें बेचारा कहा जाता है वह उनकी उदारता है. राजनीति में आध्यात्मिक भावना रखने की सलाह देने वाले राजनाथ सिंह से चार साल के अपने अध्यक्षीय कार्यकाल और अन्य कई महत्वपूर्ण मसलों पर विस्फोट.कॉम ने विशेष बातचीत की.</description>

							

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								<title>मैं अकेला आया हूं और निरंतर चलता रहूंगा- नितिन गडकरी</title>

								<link>http://www.visfot.com/interview/nitin_gadkari_interview.html</link>

								

										

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								<category>आमने-सामने</category>

								<pubDate>Fri, 25 Dec 2009 00:26:00 +0600</pubDate>

								<description>भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष नितिन गडकरी ने गुरुवार को नई दिल्ली में विधिवत भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान संभाली. इस मौके पर उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों से भी बातचीत की. लगभग एक घण्टे चली इस प्रेस कांफ्रेस में नितिन गडकरी से पत्रकारों ने खुलकर सवाल पूछे. इस प्रेस कांफ्रेस में पूछे गये कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उस पर गडकरी के जवाब यहां प्रकाशित कर रहे हैं- संपादक</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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