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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>बिकाऊ ब्रांड बन गए हैं प्लेटलेट्स, डेंगू, वायरल!</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/4145.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Sat, 23 Oct 2010 15:05:00 +0600</pubDate>

								<description>करीब पच्चीस साल पहले फोरहंस नामक टूथपेस्ट बनाने वाली कंपनी ने अपने प्रचार अभियान को नया फोकस देते हुए एक नारा गढ़ा था कि डाक्टर का बनाया टूथपेस्ट जो देता है आपके मसूड़ों को सुरक्षा, क्योंकि मसूड़ों का सुरक्षित होना ही दांतों की मजबूती का आधार है। जो केवल फोरहंस ही प्रदान करता है। फोरहंस इस प्रचार अभियान के चलते कई गुणा माल बेचने में कामयाब रहा जबकि हकीकत ये थी कि सभी कंपनियों के टूथपेस्ट भी मसूड़ों के लिए सुरक्षित थे व टूथपेस्ट में ये गुण बहुत पहले से ही मौजूद थे।</description>

							

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								<title>बुर्के को बैन करो</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/4132.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Wed, 20 Oct 2010 18:17:00 +0600</pubDate>

								<description>चार पांच दिन पहले मुंबई के वीएन देसाई अस्पताल में एक बच्चा चोरी हुआ जिसके संदर्भ में सामना ने अपने संपादकीय में सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से बुर्के को प्रतिबंधित करने की मांग क्या की, तथाकथित सेकुलरवादियों और मुल्ला मौलवियों ने स्यापा शुरू कर दिया है. बुर्का प्रतिबंधित करने की मांग सुनते ही इस्लाम एक बार फिर खतरे में आ गया है. इस इस्लाम का और बुर्के का असल में कोई लेना देना नहीं है. मुल्ला मौलवियों ने महिलाओं को माल-ए-गनीमत समझकर उसे गुलामी के बंधनों में बांधने का जरिया बुर्के को बना रखा है.</description>

							

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								<title>पाकिस्तान और पानी से घिरा सरहद का आखिरी गांव</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/4106.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Fri, 15 Oct 2010 00:31:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत-पाकिस्तान सरहद पर स्थित श्रीगंगानगर जिले की अनूपगढ़ तहसील का सीमावर्ती क्षेत्र इन दिनों घग्घर के पानी से घिरा हुआ है। करीब ढाई माह से यहां पसरे पानी ने जहां अंतिम छोर पर बसे बिंजौर गांव को चारों ओर से घिर रखा है, वहीं यहां तैनात बीएसएफ के जवानों की हालत बदतर है। गांव के सभी रास्ते बंद हो चुके हैं और ग्रामीण कड़ाहे के सहारे आ-जा रहे हैं। सेना के जवान भी निरंतर बोट के सहारे और पानी में पैदल ही सरहद की सुरक्षा में चाक-चौबंद ड्यूटी दे रहे हैं।</description>

							

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								<title>छत्तीसगढ़ में सुरक्षित नहीं हैं मजदूर</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/4079.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Fri, 08 Oct 2010 12:19:00 +0600</pubDate>

								<description>छत्तीसगढ़ की राजधानी के औद्योगिक क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर दूसरी दुर्घटना यह प्रमाणित करने के लिए काफी है कि औद्योगिक सुरक्षा के प्रति लापरवाही का कोई ओर-छोर नहीं है और सुरक्षा का कामकाज केवल कागजों पर चल रहा है। यह गहन चिंता का विषय है कि रायपुर, रायगढ़ एवं कोरबा के औद्योगिक संयंत्रों में आए दिन कोई न कोई दुर्घटना होते रहती है जिसमें या तो श्रमिकों की जान जाती है या वे घायल होकर स्थायी अपंगता के शिकार होते हैं।</description>

							

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								<title>एक परत हो शिक्षा की</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/4024.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Wed, 29 Sep 2010 10:14:00 +0600</pubDate>

								<description>‘स्कूल चले हम’ कहते वक्त, अलग-अलग स्कूलों में पल रही गैरबराबरी पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता. एक ओर जहाँ क, ख, ग लिखने के लिए ब्लैकबोर्ड तक नही पहुंचे हैं, वहीं दूसरी तरफ चंद बच्चे प्राइवेट स्कूलों में मंहगी ईमारत, अँग्रेजी माध्यम और शिक्षा की जरूरी व्यवस्थाओं का फायदा उठा रहे हैं.</description>

							

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								<title>जान दे रहे हैं, जमीन नहीं देंगे</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/3917.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 14:18:00 +0600</pubDate>

								<description>यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित शहरों को बसाने के लिए मायावती सरकार ने किसानों को मुआवजा देने के लिए जो फार्मूला निकाला है उसे किसानों ने खारिज कर दिया है. मायावती ने फार्मूला निकाला है कि या तो किसान अगले 33 साल तक 20 हजार रूपये प्रति एकड़ के हिसाब से हर साल भुगतान ले लें या फिर एकमुश्त 2 लाख 40 हजार प्रति एकड़ के हिसाब से भुगतान लेकर जमीन जेपी समूह को सौंप दें. </description>

							

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								<title>सड़ते अनाज की आग में जलती जनता</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/3914.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Fri, 03 Sep 2010 16:02:00 +0600</pubDate>

								<description>लगता है कि विवाद और शरद पवार के बीच चोली-दामन का रिश्ता कायम हो गया है। ताजा विवाद 12 अगस्त को सर्वोच्च न्यायलय के द्वारा भारतीय खाद्य निगम के गोदामों के अंदर और बाहर सड़ते हुए अनाजों को गरीबों के बीच मुफ्त उपलब्ध करवाने के आदेश के बाबत है। दिलचस्प बात यह है कि शरद पवार सर्वोच्च न्यायलय के इस आदेश को समझ ही नहीं सके जिसके कारण पुनः 31 अगस्त को सर्वोच्च न्यायलय ने सड़ते अनाज के मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि 12 अगस्त का उनका निर्णय आदेश था, न कि सुझाव। जब एक कैबिनट मंत्री को अदालत की भाषा समझ में नहीं आ रही है तो आम आदमी का क्या होगा?</description>

							

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								<title>सुखाड़ का शिकार हो गया बिहार</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/3902.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Wed, 01 Sep 2010 13:46:00 +0600</pubDate>

								<description>उत्तरी बिहार के कुछ इलाकों में आए बाढ़ के बारे में टीवी चैनल पर खबर देखने या फिर किसी सामाचार पत्र में खबर पढ़ कर यह अंदाजा मत लगाइए कि बिहार में इस साल भी खूब बारिश हो रही है। दरअसल बिहार के कुछ इलाकों में आई बाढ़, नेपाल की नदियों से बहकर आया पानी है जिसकी वजह से कुछ क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। लेकिन इस पानी से किसानों का भला नहीं होने वाला है।</description>

							

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								<title>बाढ़ के बाद पाकिस्तान पर मंहगाई की मार</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/3859.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Sun, 22 Aug 2010 10:54:00 +0600</pubDate>

								<description>बाढ़ के कहर के बाद बढ़ी महंगाई ने पाकिस्तानी जनता की कमर तोड़ दी है। रमजान के महीनें में महंगाई ने पाकिस्तानी जनता को भारी परेशानी में डाल दिया है। बाढ़ के कारण सब्जियों की फसल तबाह हो गई है। आलू, टमाटर और मटर की कीमतें आसमान छू रही है। शहरों में टमाटर जहां १३० रुपये किलो बिक रहा है, वहीं आलू की कीमत भी चालीस से पचास रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। मजबूरी में पाकिस्तानी व्यापारियों ने अमृतसर से आलू, प्याज और टमाटर का आयात शुरू कर दिया है। उधर आम लोगों के पास अब इस बढ़ती महंगाई के कारण टमाटर और आलू खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है।</description>

							

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								<title>हिन्दुओं ने खोल दिए दिल के दरवाजे</title>

								<link>http://www.visfot.com/jan_jeevan/3851.html</link>

								

										

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								<category>जन-जीवन</category>

								<pubDate>Fri, 20 Aug 2010 21:24:00 +0600</pubDate>

								<description>पिछले एक सदी के भयंकर बाढ़ से जूझ रहे पाकिस्तान ने भले ही भारत की पांच मिलियन डॉलर की सहायता लेने में आनाकानी की हो लेकिन यहां के हिंदू समुदाय ने संकट की इस घड़ी में मुसलमान भाइयों की ऐसी मदद की है जिसने नफरत की राजनीति करनेवाले पाकिस्तान के हुक्मरानों की आंखें खोल दी है। बाढ़ प्रभावित इलाके में हिंदू समुदाय के लोग जहां आर्थिक सहायता दे रहे है, वहीं रमजान के महीनें में लोगों को सहरी और रोजा खोलने के वक्त खाना बनाकर भी ला रहे है। हिंदुओं के इस भावना से पाकिस्तान के दछिणपंथी राजनीति करने वाले नवाज शरीफ भी खासे प्रभावित हो गए है। वे अपने भाषणों में हिंदुओं की जोरदार तारीफ कर रहे है।</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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