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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

	<link>http://www.visfot.com/</link>

	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>ईसाईयत के अपवित्र निशान</title>

								<link>http://www.visfot.com/index.php/news_never_die/dalit_christian_jems_1.html</link>

								<category>बड़ी खबर</category>

								<pubDate>Wed, 18 Jun 2008 16:56:00 +0600</pubDate>

								<description>आज भारत में धर्मपरिवर्तन धंधा बन चुका है जिसके मूल में राजीनीतिक साम्राज्यवाद और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पैसा लगा हुआ है. </description>

							

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										<title>ranjana singh</title>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Wed, 18 Jun 2008 17:26:59 +0600</pubDate>

										<description>विस्फोटक भाई,&lt;br /&gt;
आपने अपने लेख में जो कुछ कहा है वह शत प्रतिशत सही है,बल्कि जो कुछ वर्तमान में घटित हो रहा है उस सत्य का कुछ ही भाग है और परिस्थिति सचमुच ही अत्यन्त शोचनीय है.कोई भी धर्म बुरा नही होता पर उसके अनुयायी इसे जिस तरह अपने कुत्सित अभिलाषाओं की पूर्ति के लिए व्यवहृत करते हैं वह अंततः समाज के लिए बुरा हो जाता है.साम्राज्यवादी लिप्सा कि पूर्ति मुस्लिम धर्मावलम्बियों से लेकर किसने नही किया है अपने देश में?.इन्हे पता है कि किसी भी देश को विघटित कर उसपर कब्जा करने का सबसे आसान रास्ता व्यक्तियों के आस्था को बांधकर बड़ी आसानी से किया जा सकता है.पूरे देश में जहाँ कहीं भी विकास से अछूता गावँ है देखिये इनका साम्राज्य किस तेजी से फलता फैलता जा रहा है.जिस तेजी से यह बढ़ रहा है अभी ही स्थिति सोचनीय हो चुकी है.कुछ वर्ष और गुजरे और इन्हे रोकने के लिए कोई सार्थक प्रयास न किया गया तो स्थिति कहाँ तक पहुँचेगी पता नही.</description>

									</item>

								

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										<title>HARI MOHAN SINGH</title>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Wed, 18 Jun 2008 18:08:55 +0600</pubDate>

										<description>क्‍या फर्क पडता कि कौन ईसाई बना या कौन अन्‍य धर्म में गया । अगर सारा भारत ईसाई या मुस्लिम भी हो गया तो क्‍या बदल जायेगा</description>

									</item>

								

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										<title>Anand</title>

										

											<link>http://www.anand-ka-chittha.blogspot.com</link>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Wed, 18 Jun 2008 19:17:04 +0600</pubDate>

										<description>&amp;#039;‍यह एक बहुराष्ट्रीय कंपनी के व्यापार में बदल चुका है.&amp;#039; &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
कृपया खोलकर बताएं कि धर्म परिवर्तन के पीछे आर्थिक मंशा क्‍या हो सकती है? क्‍यों इसके पीछे इतना पैसा लग रहा है। क्‍या यह एक तरीक़े का इनवेस्‍टमेंट है? यदि हाँ तो कृपया विस्‍तार से समझाएँ। मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि भारत में किसी ईसाई या किसी विशेष धर्म का बहुतायत हो जाएगा तो भी इसमें पैसा लगाने वालों का हित कैसे सधेगा? - आनंद</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>Anunad</title>

										

											<link>http://pratibhaas.blogspot.com</link>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Wed, 18 Jun 2008 19:44:31 +0600</pubDate>

										<description>आँखें खोलने वाला लेख पढ़वाने के लिये साधुवाद!&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मजहब बदलने से बहुत फ़र्क पड़ता है। यह बात सिद्ध हो चुकी है कि इसाई मिशनरियों ने दुनिया को गुलाम बनाने के लिये जमीन तैयार की और  साम्राज्यवादियों ने  इसाईकरण के लिये सारी सुविधायें उपलब्ध कराई। इस तरह इसाई कठमुल्ले और साम्राज्यवादी एक दूसरे को मदद करते रहे हैं।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मजहब परिवर्तन से-&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
** कल तक जो सोच-समझकर वोट देता था, आज वोट-बैंक का हिस्सा बन जाता है। &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
** कल तक जो इस धरती को माँ कहता था, इसकी पूजा करता था, कल वह किसी और धरती का पूजक हो जाता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
** इतना ही नहीं, वह नयी भाषा, नये रीति-रिवाज, नये कपड़े, नये तरह का खान-पान करने लग जाता है। यहाँ तक कि वह कल एक नये पेड़ को पसन्द करने लगेगा, एक नये जानवर को पसन्द करने लगता है।&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
** इसी लिये कहते हैं कि धर्मान्तरण एक तरह से राष्ट्रान्तरण है।</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>visfot .com</title>

										

											<link>http://visfot.com</link>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Wed, 18 Jun 2008 20:02:03 +0600</pubDate>

										<description>अगर हम अब तक यह नहीं समझ पाये हैं कि किसी अर्थव्यवस्था का आखिरी मकसद सांस्कृतिक विजय होता है तो हमें मानना चाहिए कि हम अर्थव्यवस्था नहीं बल्कि सांख्यिकी की बात भर करते हैं. अर्थव्यवस्था का आखिरी मकसद तो सांस्कृतिक पताका फहराना होता है. आप घर में पैसा कमाकर लाते हैं तो क्यों? और जब आपकी जरूरतें पूरी हो जाती हैं फिर भी आप पैसा कमाना जारी रखते हैं तो क्यों? क्योंकि पैसा कुछ नहीं होता. वह किसी अभीष्ट को पूरा करने का माध्यम भर होता है. &lt;br /&gt;
भारत को तो दोहरी मार पड़ी है. एक ओर ईसाई अर्थव्यवस्था के जरिए पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल बनाया गया है तो दूसरी ओर उनकी लूट से अभावग्रस्त लोगों को ईसाई बनाने का अभियान चलाती है. मनीला में 1989 में मिशन के रणनीतिकार लुईश बुश ने एक पेपर रखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि दुनिया के गरीबों में 95 प्रतिशत ऐसे हैं जिनको अभी भी ईसाईयत के बारे में बताना है. सवाल है तो क्या अर्थव्यवस्था के रास्ते गरीबी और बेसहारा लोगों की फौज इसलिए खड़ी की जा रही है कि उन्हें ईसाईयत में शामिल करने में मुश्किल न हो. &lt;br /&gt;
इसलिए यह कहना कि फर्क नहीं पड़ता ठीक नहीं है. दुनिया का आखिरी आदमी भी ईसाई हो जाए तो कोई हर्ज नहीं लेकिन इसके लिए लालच, प्रलोभन, जोर-जबर्दस्ती और सरकारों का समर्थन ठीक नहीं है.</description>

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										<title>ता.च. चन्दर</title>

										

											<link>http://http://cartoonpanna.blogspot.com</link>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Wed, 18 Jun 2008 23:20:22 +0600</pubDate>

										<description>हिन्दू सपने में भी ईसाइयों को मिटाने की बात नहीं सोच सकता। यदि ऐसा चाहते तो वे आरम्भ में ही ईसाइयों को समाप्त कर सकते थे जब पहले-पहल उन्होंने इस देश में पैर रखे। यदि वे शिक्षा, गरीबों की डॉक्टरी सेवा और ऐसे ही मानव-दया के कामों तक सीमित रहने की बजाय अपने इन कामों का उपयोग धर्म परिवर्तन के लिए करेंगे तो मैं चाहूंगा कि वे यहां से चले जाएं।-यह बात कही थी महत्मा गांधी ने, यंग इंडिया के २४ अप्रैल १९३१ व हरिजन के ७ फ़रवरी १९३१ के अंक में।</description>

									</item>

								

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										<title>tulsisinghbisht@gmail.com</title>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Thu, 19 Jun 2008 11:12:17 +0600</pubDate>

										<description>इस लेख का आलोचना भी काफी हुई पढ़कर पता चला लेकिन जिन्होंने भी आलोचना की है लगता है वो लोग कुछ नहीं जानते बस अपने स्वार्थ के लिये दो रोटी सुखी की खाने और समाज की चिन्ता नहीं करना। मैं इन आलोचकों को कहूंगा कि जिन्दगी में अगर ऊपरवाला आपको एक अच्छी नौकरी और एक अच्छा जीवन व्यतीत करने को देता है तो फिर आपका फर्ज बनता है कि आप समाज के बारे में भी सोचे और अपने गांव के बारे में भी ताकि किस तरह औरों का गुजारा भी चल सके। रही बात धर्म परिवर्तन की, जो लोग धर्म परिवर्तन कर रहे हैं वो लोग गरीब है और गरीबी के कारण धर्म परिवर्तन कर रहे है। इसमें आप जैसे आलोचक ही होंगे जिन्होंने अपने खाने का सोचा बाकी दुनिया का नहीं सोचा आपको बुरा लगे तो लगे लेकिन सत्य यह है कि अगर समाज में रहना है तो समाज में उत्पन्न बुराईयों को दूर भगाने के लिए इस प्रकार का लेख लिखना भी जरूरी है। अगर बहस का मुद्दे है तो हम सब लोग एक जगह एकत्रित होते है फिर बहस करते हैं।</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>asahmat</title>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Sat, 21 Jun 2008 22:53:55 +0600</pubDate>

										<description>kya likh rahe hain Visfot bhai? Bharat mein jitne galat kaam hote hain Hindu Savarnon dwara kiye jaate hain. aap aisi baate likh rahein alpsankhyakon ke baare mein! jarror aapka koi sapmradyakik agenda hai. waise aapki jaati kya hai? agar aap Dalit,Isai ya Muslim nahi hai to aapko aisi baate likhne ka koi adhikar nahi hain</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>visfot .com</title>

										

											<link>http://visfot.com</link>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Sun, 22 Jun 2008 01:45:33 +0600</pubDate>

										<description>उत्तर प्रदेश में कामिक्स के जरिए ईसाईयत का प्रचार किया जा रहा है. ईसाई संगठन गास्पेल मिशन आफ इण्डिया द्वारा हाल में ही एक कामिक्स प्रकाशित किया गया था जिसका नाम है सर्वश्रेष्ठ उपहार. इस सर्वश्रेष्ठ उपहार नामक कामिक्स में कहानी के जरिए बाईबिल की जानकारी दी गयी है. कहानी के मुख्य पात्र विशाल व वैशाली नाम के दो बच्चे हैं. बच्चों का यह चरित्र आपस में बातचीत करते हुए कामिक्स में कई बार कहता है कि उन्हें यीशू पर भरोसा है और वे चाहते हैं कि “यीशू उनका प्रभु हो जाए.”&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
गास्पेल मिशन आफ इण्डिया के इस अभियान पर प्रदेश के हिन्दू संगठनों और मुस्लिम उलेमाओं दोनों ने गंभीर आपत्ति जताई है. उनका आरोप है कि यह पुस्तक देश के हिन्दू, मुस्लिम बच्चों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसा रही है. संगठनों ने राज्य सरकार से इस कामिक्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है. उलेमाओं और हिन्दू संगठनों ने मुख्यमंत्री मायावती से सरकारी परिसर में धर्म परिवर्तन से जुड़े साहित्य को वितरित किये जाने की जांच कराने की भी मांग की है.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
ज्ञात हो कि गास्पेल मिशन आफ इंडिया संगठन ने आपरेशन क्रिसमस चाईल्ड नाम से एक अभियान शुरू किया है. इसके तहत ही यह “सर्वश्रेष्ठ उपहार” बच्चों में मुफ्त बांटी जा रही है. बुधवार को एक यूरोपीयन महिला के साथ गास्पेल के कुछ कार्यकर्ता लखनऊ चिड़ियाघर के आस-पास यह पुस्तक बांट रहे थे जिसकी जानकारी फैलने पर विरोध शुरू हो गया.&lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
दैनिक भास्कर, 21 जून 2008, नई दिल्ली</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>bharat sagar</title>

										

										<category>बड़ी खबर</category>

										<pubDate>Mon, 23 Jun 2008 06:09:55 +0600</pubDate>

										<description>Jab tak Hindustan ke pande Ram Mandir ke liye daharte rahenge aur in Pando ke jhhande Setu Samudram ke liye lah-rate rahenge, tab tak desh men ISAYEE Dharma fail-ta rahega. ISAYEE desh men &amp;quot;Manav-Seva&amp;quot; karke Dharma parivartan karwa rahen hain,aur Hindu sangathan kewal ho-halla kar rahen hain.</description>

									</item>

								

							

						

				

			

		

	

	

	

	

<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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