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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>चिकित्सक के अभाव में बागी &#039;शेरा&#039; मौत के कगार पर</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3991.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Sun, 19 Sep 2010 17:45:00 +0600</pubDate>

								<description>लखनऊ प्राणि उद्यान से आए गजराज सुमित की अव्यवस्थाओं और समुचित उपचार के अभाव में विगत माह जुलाई में हुई असमय लाचारी और बेबसी वाली दर्दनाक मौत दुधवा नेशनल पार्क के इतिहास का काला अध्याय बनी ही साथ में दुधवा की व्यवस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह भी लगाया। इसके बाद भी दुधवा नेशनल पार्क प्रशासन ने ऐसा लगता है कि कोई उससे सबक नहीं लिया है। शायद इसी का परिणाम है कि मेरठ से लाए गए बागी हाथी &amp;#039;शेरा&amp;#039; के जिन्दगी की जीवन की डोर भी धीरे-धीरे संकुचित होने लगी है।</description>

							

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								<title>पाँचना से फोन पर पानी पहुँचा घना</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3899.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Tue, 31 Aug 2010 17:32:00 +0600</pubDate>

								<description>घना पक्षी विहार को इस बर्ष पानी मिल गया है। करौली जिले के पाँचना बाँध से छोडा गया पानी अब भरतपुर की सीमा में पहुँच गया है। इस पानी के बाद संभावना है घने का ताज बच जाये। पानी से रिक्शा चालकों से लेकर होटल मालिक सब प्रसन्न है, लेकिन इस पानी पहुँचने के कारणों में भरतपुर सांसद का करौली कलक्टर को फोन करना चर्चा का विषय बना हुआ है।</description>

							

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								<title>यमुना में पानी बढ़ा है, बाढ़ नहीं आयी!</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3873.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Wed, 25 Aug 2010 12:42:00 +0600</pubDate>

								<description>24 अगस्त 2010. पुरानी दिल्ली के इलाके में पुराने लोहेवाले पुल के आस पास टीवी चैनलों के ओवी वैन की लंबी कतारें खड़ी हैं. हर बड़े चैनल की ओवी वैन वहां मौजूद हैं और उन वैन में लगे हुए जनरेटर पूरी क्षमता से चल रहे हैं. संकेत साफ है कि लाइव वगैरह भी किया जा रहा है. कुछ ओवी वैन में भले ही ड्राइवर सीट पर ही सो रहे थे लेकिन रिपोर्टर और कैमरामैन दिल्ली में आयी &amp;quot;बाढ़&amp;quot; को कवर करने के लिए पूरी तत्परता से तैनात थे. </description>

							

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								<title>मुंबई के पर्यावरण का डूबता जहाज</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3815.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Thu, 12 Aug 2010 13:42:00 +0600</pubDate>

								<description>मुंबई के समुद्री तट के पास जवाहरलाल नेहरु पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) से करीब 5 (नॉटिकल) समुद्री मील की दूरी पर अरब सागर में 7 अगस्त शनिवार की सुबह 9.30 बजे पनामा के दो मालवाहक जहाज एमएससी चित्रा और एमवी खलिजिया की जोरदार टक्कर हुई इस हादसे में जहाज में सवार 33 क्रू मेंबरों को बचा लिया गया किन्तु इस टक्कर से एमएससी चित्रा के ईंधन  टैंक में दरार आ जाने से जहाज (एमएससी चित्रा) डूब रहा है.</description>

							

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								<title>मानसून की टेढ़ी चाल</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3775.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 14:52:00 +0600</pubDate>

								<description>मानसून की टेढ़ी चाल से भारत में सभी हतप्रभ हैं। पिछले कुछ वर्षो से जिस तरह से मानसून दगा दे रहा है वो भारत  जैसे कृषि प्रधान देश में भारी  चिंता का विषय हैं। सामान्यतः मानसून शब्द का उपयोग भारी वर्षा के पर्याय के रूप में होता है, लेकिन वस्तुतः यह हवा कि दिशा बदलने का प्रतीक है, जिससे वर्षा कि सम्भावनाएं ज्ञात होती है।</description>

							

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								<title>गिद्ध के बाद अब सारस पर संकट</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3622.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Mon, 21 Jun 2010 19:56:00 +0600</pubDate>

								<description>सारस पक्षी पर आया संकट एक तरह से गिद्ध पर आये संकट से किसी मायने मे कम नही लग रहा है. इस बात को वन अधिकारियों के अलावा पर्यावरणीय संस्था से जुड़े हुए लोग भी मानने लगे है.सारस पक्षी की गणना को लेकर कई लोग सवाल उठाने लगे है कि जब सारस के संरक्षण की हकीकत मे जरूरत थी उस वक्त वन अमले ने कोई काम नही किया अब लकीर पीट कर दिखवा करने की कोशिश की जा रही है. </description>

							

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								<title>अरावली में अवैध खनन का गोरखधन्धा</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3604.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Thu, 17 Jun 2010 23:08:00 +0600</pubDate>

								<description>राजस्थान की पहचान वैसे तो रेगिस्तान से है। लेकिन अरावली की श्रृखलाऐं भी उसके बहुत बडे हिस्से में फैली हुई है। अभी तक अरावली की इन श्रृखलाओं को हरा भरा करने के नाम पर देश और विदेशी मदद के पैसे को अकेला वन विभाग हडप करता रहा। अब इन श्रृखलाओं से पत्थर और लकडी का दोहन सरकार के दर्जनों विभाग और उनकी आड़ में खुद सरकारें कर रही है। राजस्थान के भरतपुर जिले में अवैध खनन के गोरखधंधे की पडताल करती एक रिपोर्ट। 
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								<title>पन्ना के बाघों का वंशनाश</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3599.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Thu, 17 Jun 2010 12:35:00 +0600</pubDate>

								<description>पन्ना नेशनल पार्क के जंगल का गहरा भूरा रंग अब मानसून की आहट के साथ हरे रंग में बदल गया है, यहां का धुंधवा पहाड़ बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन और उसके नवजात 4 बच्चों की अठखेलियों से पुन: पुलकित हुआ था और पार्क के फील्ड डायरेक्टर व डीएफओ हर्ष व्यक्त कर पत्रकारों को मिठाइयां भी खिला चुके हैं पर वास्तव में पन्ना क्षेत्र की जनता को फिलहाल कोई विशेष हर्ष नहीं है। उनके लिये दु:ख की बात यह है कि हमारे इलाके के जन्मजात बाघ समाप्त हो गये हैं। अब जो भी बाघ-बाघिन हैं, वे बाहर से लाये जा रहे हैं।</description>

							

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								<title>किस दिन मनाएं हम अपना पर्यावरण दिवस?</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3550.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Thu, 03 Jun 2010 21:03:00 +0600</pubDate>

								<description>पर्यावरण दिवस का आयोजन 1972 के बाद शुरू हुआ। 5 से 15 जून 1972 को स्वीडन की राजधानी स्टाकहोम मेें मानवी पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन हुआ। जिस में 113 देश शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन की स्मृति बनाए रखने कि लिए 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस घोषित कर दिया गया। सवाल तो यह है कि पर्यावरण दिवस के इस दिन का हमारे से क्या रिश्ता? क्या 1972 के बाद लगातार पर्यावरण दिवस मना लेने से हमारा पर्यावरण ठीक हो रहा है? या फिर ठिकाने लगाया जा रहा है? यह विवेचना आप करिए।</description>

							

					</item>

				

					<item>

						

								<title>जान का दुश्मन बना इलेक्ट्रानिक कचरा</title>

								<link>http://www.visfot.com/paryavaran/3518.html</link>

								

										

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								<category>पर्यावरण</category>

								<pubDate>Thu, 27 May 2010 18:12:00 +0600</pubDate>

								<description>आज के इस आधुनिक युग में जब संचार क्रांति के परिणाम परिलक्षित हो रहे हैं। ऐसे समय में यह ध्यान देना और सोचना भी बहुत आवश्यक है कि, क्या यह संचार क्रांति के अत्याधुनिक उपकरण कहीं मानव जीवन से खिलवाड़ तो नहीं कर रहे, कहीं ऐसा न हो कि आधुनिकता की दौड़ में भागते-भागते हमारा दम निकल जाए ।</description>

							

					</item>

				

			

		

<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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