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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>रामदेव का राजनीतिक रंग</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3157.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Thu, 18 Mar 2010 01:10:00 +0600</pubDate>

								<description>अब बाबा रामदेव अपने असली रंग में दिख रहे हैं. बात करते हैं तो बार बार उत्साह को बनाये रखने की सलाह देते हैं. जयपुर, दिल्ली और जोधपुर में तीन सभाओं के दौरान उन्होंने कमोबेश एक बात ही कही कि राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन को आगे बढ़ाना है और &amp;quot;चोर&amp;quot; &amp;quot;लुटेरे&amp;quot; &amp;quot;डाकुओं&amp;quot; से देश को मुक्त कराना है. यह विशेषण बाबा रामदेव किसके लिए इस्तेमाल कर रहे हैं यह बताने की जरूरत नहीं है. ये चोर लुटेरे और डाकू कोई और नहीं बल्कि इस देश के वही नेता हैं जिन्हें अपने योग शिविरों में बुलाकर रामदेव अपना कद बढ़ाते रहे हैं. </description>

							

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								<title>जी हां, मैं महिला आरक्षण विरोधी हूं</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3143.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Tue, 16 Mar 2010 16:20:00 +0600</pubDate>

								<description>पत्रकारों की जमात से मैं अपने आप को महिला आरक्षण का विरोधी घोषित करता हूं. मेरा तर्क ये है कि अगर महिलाओं को सही मायनों में पुरुषों के बराबर हक देने की बात हो रही है तो, महिलाओं के लिए अलग कोना खोजकर उन्हें कमजोर ही बनाए रखने की और देश में नेतृत्व खत्म करने वाला ये बिल क्यों लाया जा रहा है?</description>

							

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								<title>दंगे भड़काएंगे, मोदी मुस्कुराएंगे</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3131.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Sun, 14 Mar 2010 18:18:00 +0600</pubDate>

								<description>गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के संभावित दावेदार के रूप में पेश करके बीजेपी अध्यक्ष,नितिन गडकरी ने एक साथ कई निशानों पर तीर मारा है.पार्टी के आडवाणी गुट से मिल रही चुनौती को उन्होंने बिलकुल भोथरा कर दिया है .इस गुट के  बाकी नेताओं की यह हैसियत तो है नहीं कि अपने ही गुट के अन्नदाता नरेन्द्र मोदी से पंगा लें. इस लिए अब दिल्ली में रहकर सियासी शतरंज खेलने वाले नेता लोग राग मजबूरी में काम करने लगेंगें.</description>

							

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								<title>लोहियावाद के हत्यारे</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3120.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Sat, 13 Mar 2010 12:03:00 +0600</pubDate>

								<description>लालू ,मुलायम सरीखे धुरंधरों ने खुद को लोहियावादी बताते हुए लोकतंत्र की छाती पर अपने मड़हे ताने ,उन मडहों  में अपने भाई, भतीजों सालों, बीबियों और बच्चों का भरा पूरा कुनबा बसाया और खुद सिंहासन पर जा बैठे। भारत के इतिहास में किसी व्यक्ति के नाम को भुनाने का ये अब तक का सबसे बड़ा उदहारण था, देश में जितनी राजनीति लोहिया का नाम लेकर की गयी उतनी राजनीति न तो गाँधी और न ही इंदिरा गाँधी का नाम लेकर की गयी, मगर अफ़सोस लोहिया का नाम लेकर राजनीति करने वालों ने उनकी विचारधारा की  बार बार गण हत्या की और कुर्सियों के अंकगणित के लिए देश के सबसे उपजाऊ हिस्से में कुकुर भिडंत शुरू करा दी।</description>

							

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								<title>पूरा हुआ आधी आबादी का आधा सफर</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3091.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Wed, 10 Mar 2010 00:45:00 +0600</pubDate>

								<description>इतिहास नहीं बना, दोहरा इतिहास बनाया गया। चौदह साल में सरकारें आईं-गईं पर महिला बिल ढाई कोस भी नहीं चला लेकिन अबके संसद ने दोहरा इतिहास रचा। महज दो दिन में आधी आबादी का आधा सफर तय हो गया। पर मंजिल अभी आसान नहीं। राज्यसभा ने प्रचंड बहुमत के साथ संविधान के 108वें संशोधन को मंजूरी दे दी। पक्ष में 186 वोट पड़े, तो विरोध में महज एक, पर बिल के पैरोकार हों या विरोधी, राजनीतिक खुशी की लहर सबमें दौड़ी।</description>

							

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								<title>लोकतंत्र का गला घोंटता लोकतंत्र</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3088.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Tue, 09 Mar 2010 20:21:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत में लोकतंत्र की जड़े कमजोर हो रही है यह अनेक उदाहरणों से स्पष्ट हो सकता है । अब तो वोट देने के अधिकार को छोड़कर अन्य कही भी लोकतंत्र के दर्शन ही दुर्लभ है। किन्तु विचारणीय विषय यह है कि ऐसा हुआ क्यों ?</description>

							

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								<title>राजस्थान में नर्क का दूसरा नाम है नरेगा</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3079.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Mon, 08 Mar 2010 22:14:00 +0600</pubDate>

								<description>अगर भ्रष्टाचार नर्क है तो इस नर्क का दूसरा नाम नरेगा ही होना चाहिए. कम से कम राजस्थान की हकीकत यही है. देश के ग्रामीण विकास मंत्री सीपी जोशी राजस्थान से आते हैं. यही वह मंत्रालय है जो मनरेगा को देशभर में लागू करता है. लेकिन विडम्बना देखिए कि राजस्थान में मनरेगा के ऊपर जो भी सर्वे आ रहे हैं वे सब इसे भ्रष्टतम व्यवस्था साबित कर रहे हैं. पहले सोशल आडिट में यह बात सामने आयी और अब एक सर्वे नरेगा की पोल खोल रहा है. </description>

							

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								<title>लोकतंत्र को खारिज करने की साज़िश</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3062.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Fri, 05 Mar 2010 18:23:00 +0600</pubDate>

								<description>गोधरा में ट्रेन के एक डिब्बे में लगी आग के बाद जिस तरह से  खून खराबा हुआ, उससे दुनिया भर में तकलीफ महसूस की गयी थी. उसके बाद से लोकतंत्र के औचित्य पर सवाल  उठाने लगे थे. कई पुरस्कारों से सम्मानित लेखिका, अरुंधती रॉय ने पहला हमला किया था. उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए मुख्यमंत्री, नरेन्द्र मोदी के गोधरा के बाद के काम को निशाने में लेकर यह तर्क दिया था कि कल्याणकारी राज्य की स्थापना कर सकना लोकतंत्र के बूते की बात नहीं है.</description>

							

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								<title>वार्ता में भारत की उदारता का अनादर</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/3030.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Sat, 27 Feb 2010 18:58:00 +0600</pubDate>

								<description>प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने पुणे में हुए विस्फोट के बावजूद, भाजपा और अन्य दलों के विरोध के बावजूद पाकिस्तान के साथ बातचीत आगे बढ़ाने का फैसला किया था। उन्होंने अपनी राजनैतिक साख को दांव पर लगा दिया था। लेकिन बातचीत का नतीजा क्या निकला? कहीं ऐसा तो नहीं है कि भारत की उदारता का पाकिस्तान अनावश्यक अनादर कर रहा है?</description>

							

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								<title>मंहगाई की मार, रिलायंस जिम्मेदार</title>

								<link>http://www.visfot.com/peoples_power/2981.html</link>

								

										

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								<category>जनता दरबार</category>

								<pubDate>Mon, 22 Feb 2010 14:00:00 +0600</pubDate>

								<description>आम आदमी का जीना मुहाल कर देने वाली महंगाई पर तरह-तरह के विश्लेषण किए गए हैं लेकिन किसी ने भी यह जहमत उठाने की कोशिश नहीं की है कि आखिर हमारे देश में प्रचुर उत्पादन के बावजूद एकाएक शक्कर के साथ अन्य सभी खाद्य पदार्थों की कीमतों में क्यों बढ़ोत्तरी हुई है। आखिर ऐसा क्यों है कि रिलायंस समूह खुदरा बाजार के जिस कारोबार पर हाथ रख देता है उस वस्तु के दाम आसमान छूने लगते हैं?</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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