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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>गदराये बदन गड़करी के लिए कुछ जरूरी सुझाव</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/3123.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Sat, 13 Mar 2010 15:40:00 +0600</pubDate>

								<description>हो सकता है नितिन गडकरी अंदर से मंजे हुए राजनीतिज्ञ हों लेकिन देखने में राजनीतिक व्यक्तित्व कदापि नहीं लगते. वेशभूषा, भाषा और कार्यशैली तीनों ही स्तरों पर वे कहीं से देश की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के अध्यक्ष दिखाई नहीं देते. ऐसे में गडकरी को चाहिए कि अगर उन्हें नौजवानों के बीच राजनीति करनी है तो कार्यशैली से पहले इमेज बिल्डिंग और एक्सरसाईज दोनों पर ध्यान दें. </description>

							

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								<title>महिला आरक्षण: कहीं खुशी का खाना, कहीं चिंता की चाय</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/3108.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Thu, 11 Mar 2010 22:41:00 +0600</pubDate>

								<description>बलवा खत्म, तो समझो महिला बिल अटक गया। यादवी तिकड़ी के हंगामे पर फिलहाल सरकार ने सरेंडर कर दिया। अब फिर बात होगी बिल के हर पहलू पर। सभी पक्षों से बात कर ही अब लोकसभा में बिल आएगा। आखिर आम बजट पास कराने की मजबूरी में सरकार को भरोसा देना पड़ा। एक बार नहीं, तीन-तीन बार। संसदीय कार्यमंत्री तो बुधवार को ही सभी से सलाह-मशविरे का एलान कर चुके। गुरुवार को लोकसभा में लालू-शरद-मुलायम ने अपनी बात रखी तो प्रणव दा ने भरोसा दिलाया। फिर भी यादवी तिकड़ी का दिल नहीं भरा।</description>

							

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								<title>बीजेपी-कांग्रेस फंस गईं एक-दूसरे के जाल में</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/3102.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Wed, 10 Mar 2010 21:39:00 +0600</pubDate>

								<description>बलात ही सही, राज्यसभा ने अपना काम निपटा दिया पर राज्यसभा से निकली महिला बिल की लपटें अब लोकसभा को झुलसा रहीं हैं। बिल विरोधियों ने बुधवार को भी लोकसभा नहीं चलने दी। जब बिल से पहले इस कदर हंगामा तो बिल आने पर क्या होगा?</description>

							

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								<title>बिहार में गड़ेगे या उखड़ेंगे गड़करी?</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/3020.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Fri, 26 Feb 2010 19:47:00 +0600</pubDate>

								<description>इस साल के अंत तक बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं. बिहार में भाजपा जद (यू) के साथ मिलकर सत्ता में है. लेकिन सत्ता में रहते हुए संगठन के स्तर पर पार्टी बेहद कमजोर हो चुकी है. नवनिर्वाचित भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के लिए बिहार में भाजपा को दोबारा सत्ता में लाना जितनी बड़ी चुनौती होगा उससे बड़ी चुनौती साबित हो रही है वहां नये पार्टी अध्यक्ष का चुनाव. बिहार भाजपा की राजनीति पर एक विश्लेषण-</description>

							

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								<title>बाबर के बराबर हुए राम</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/2960.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Thu, 18 Feb 2010 19:48:00 +0600</pubDate>

								<description>इंदौर के कुशाभाऊ ठाकरे नगर में भारतीय जनता पार्टी का तीन दिवसीय अधिवेशन चल रहा है.इस अधिवेशन से भाजपा कि भावी दिशा तय होनी है.भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी ने इस अधिवेशन में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में मुसलामानों को राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने का प्रयास किया है.</description>

							

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								<title>बैतालों से कैसे निपटेंगे बीजेपी के विक्रमादित्य?</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/2953.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Thu, 18 Feb 2010 02:22:00 +0600</pubDate>

								<description>राख से तो नहीं, पर गोबर से उठने की कोशिश जरूर कर रही बीजेपी। जब बीजेपी में काल, कपाल, महाकाल एपीसोड चल रहा था। अनुशासन हांफ रहा था। तब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी कहा था। राख से भी उठ खड़ी होगी बीजेपी। पर जब नेतृत्व परिवर्तन की रेस खत्म हो गई। गडकरी, सुषमा, जेतली मैडल पा गए। तो अब समूची बीजेपी का ढर्रा बदलेगा।</description>

							

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								<title>शिवसैनिकों से सहानुभूति की जरूरत</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/2940.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Tue, 16 Feb 2010 01:20:00 +0600</pubDate>

								<description>महाराष्ट्र में शिवसेना और उसके शिवसैनिकों का उत्पात एक बार फिर चर्चा में है. वरिष्ठ पत्रकार शेष नारायण सिंह का मानना है कि अगर महाराष्ट्र में स्थायी शांति लानी है और भविष्य में मुंबई को उत्पात से बचाना है तो कांग्रेस और भाजपा की जिम्मेदारी है कि वे शिवसैनिकों के लिए अपने-अपने दलों के दरवाजे खोल दें ताकि वे मुख्यधारा की राजनीति में शामिल हो सकें.</description>

							

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								<title>बीजेपी को जनता ने हराया या ईवीएम ने?</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/2927.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Sun, 14 Feb 2010 08:22:00 +0600</pubDate>

								<description>क्या वाकई अपना लोकतन्त्र जोखिम में है? क्या दो टर्म से मनमोहन की सरकार सचमुच जनता ने नहीं चुनी? आप मानें या न मानें, पर देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी यही मान रही है। भले शब्दों को घुमाफिरा कर सवाल उठा रही। पर निचोड़ यही- ईवीएम में बड़ा गड़बड़झाला।</description>

							

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								<title>बुढ़ापे में बाल ठाकरे का बहू से सामना</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/2915.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Wed, 10 Feb 2010 17:33:00 +0600</pubDate>

								<description>शिवसेना प्रमुख का बुढापा खराब हो रहा है। या यूं भी कहा जा सकता है कि वे खुद ही अपना बुढ़ापा खराब करवा रहे हैं। अकसर किसी भी वृद्ध के लिए किसी के भी मन में सम्मान ही होता है। और इस उमर की सबसे बड़ी जरूरत भी सम्मान ही हुआ करती है। हर बूढ़ा इंसान चाहता है कि कोई भी उसके विरोध में ना बोले। खासकर घर के लोग इतना तो खयाल करे, ताकि इस उमर में उसके मान सम्मान की रक्षा होती रहे। पर, बाल ठाकरे के साथ उल्टा हो रहा है।</description>

							

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								<title>भाजपा भाग्य विधाता</title>

								<link>http://www.visfot.com/politics/2907.html</link>

								

										

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								<category>राजनीति</category>

								<pubDate>Wed, 10 Feb 2010 00:48:00 +0600</pubDate>

								<description>बीजेपी में हल्दी की रस्म पूरी हो गई। नितिन गडकरी अब मनोनीत नहीं, निर्वाचित अध्यक्ष हो गए। तेरह राज्यों और संसदीय दल को मिलाकर कुल 19 सैट में परचा दाखिल हुआ। बस तीन घंटे में परचा दाखिल से लेकर जांच और चुनाव तमाम हो गया। पहली दफा बीजेपी में चुने हुए अध्यक्ष को सर्टिफिकेट भी मिला। अब बाराती अगले हफ्ते इन्दौर पहुंचेंगे।</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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