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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>पीएमओ वाले पृथ्वीराज</title>

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Thu, 11 Nov 2010 12:05:00 +0600</pubDate>

								<description>महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है.</description>

							

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								<title>चंबल की वादियों से बिग बॉस के घर तक सीमा परिहार</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/4056.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Mon, 04 Oct 2010 19:46:00 +0600</pubDate>

								<description>चंबल की खूंखार वादियो मे अपने आंतक का डंका मचाने के बाद अपनी हकीकत की कहानी मे खुद को उतारने वाली सीमा परिहार अब टेलीविजन पर नजर आयेगी। यह पहला मौका होगा जब बिग बॉस जैसे कार्यक्रम के जरिये किसी खूखांर महिला अपराधी को छोटे पर्दे पर दर्शक देखेगे। वुंडेड नामक फिल्म के जरिये सीमा परिहार की कहानी देशवासी पहले ही देख चुके है जिसमे खुद सीमा परिहार ने किरदार अदा किया है।</description>

							

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								<title>सहज उकेरी पीर घनेरी</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3866.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Mon, 23 Aug 2010 16:47:00 +0600</pubDate>

								<description>क्षमा कुलश्रेष्ठ जब अठारह साल की थी तो उन्होंने एक कविता लिखी थी. ‘बन के तारा झिलमिलाऊं, चंाद मेरे पास हो, ऐसा कुछ मैं कर दिखाऊं, सबको मुझपर नाज हो, मानती हूं मेरा जीवन,  गहरी काली रात है, दिन में तारों का नजारा, एक असंभव बात है।’ आज क्षमा की उम्र होगी यही कोई तीस साल के आसपास, लेकिन जब आप उनसे मिलेंगे, आपको कोई जब तक उनकी उम्र का हिसाब ना बताए, आप उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकते।</description>

							

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								<title>आधी आबादी के इन्साफ की लड़ाई और शबाना आजमी</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3837.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Tue, 17 Aug 2010 15:13:00 +0600</pubDate>

								<description>आज़ादी के 63 साल बाद भी देश में आज़ादी पूरी तरह से नहीं आई है. शायद इसीलिये आज़ादी का जो सपना हमारे महानायकों ने देखा था वह पूरा नहीं हो रहा है. सबसे मुश्किल बात यह है कि राज-काज के फैसलों से देश की आधी आबादी को बाहर रखा जा रहा है. अपने देश में आज भी महिलायें मुख्य धारा से बाहर हैं. असंवेदनशीलता की हद तो यह है कि जनगणना में गृहिणी को अनुत्पादक काम में शामिल माना गया है और उन्हें भिखारियों की श्रेणी में रखने की कोशिश की गयी. लेकिन हल्ला गुल्ला होने के बाद शायद यह मसला तो दब गया लेकिन महिलाओं को सत्ता से बाहर रखने में अभी तक मर्दवादी राजनीति के पैरोकार सफल हैं और उन्हें संसद और विधानमंडलों में बराबर का हक नहीं दे रहे हैं.</description>

							

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								<title>राजनीति के बांका बहादुर को अंतिम सलाम</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3634.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Thu, 24 Jun 2010 19:08:00 +0600</pubDate>

								<description>दिग्विजय सिंह का राजनीतिक जीवन न तो इतना लंबा है कि उसकी विधिवत समीक्षा की जाए और न ही उनकी राजनीतिक उपलब्धियां इतनी बड़ी थीं कि उनके निधन पर राष्ट्रीय राजनीतिक शोक का आयोजन किया जाए. मीडिया के लिए भी दिग्विजय सिंह के जाने से बड़ी खबर जसवंत सिंह के भाजपा में वापस आने की बनी. फिर भी दिग्विजय सिंह का भारतीय राजनीतिक परिदृश्य़ से जाना उतनी ही बड़ी क्षति है जितनी बड़ी क्षति माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट या प्रमोद महाजन के जाने से हुई थी. </description>

							

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								<title>निश्छल राजनीतिज्ञ राजीव गांधी</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3479.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Thu, 20 May 2010 16:45:00 +0600</pubDate>

								<description>राजीव गांधी नाम के जिस व्यक्तित्व पर कलम चलानी है, वह सहज संभव नहीं है । सौम्य छवि, अविचल मुस्कान से सदा परिपूर्ण रहने वाला चेहरा । यदि यह कहा जाये कि आज जिस संचार क्रांति के दम पर भारत विश्व के शीर्षस्थ देशों में से एक है, उस क्रांति को भारत भूमि पर व्याप्त करने वाला युगदृष्टा, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। उनकी पुण्यतिथि 21 मई के मौके पर राजीव गांधी के बारे में और विस्तार से बता रहे हैं पंकज चतुर्वेदी.</description>

							

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								<title>शिक्षा में &#039;सिद्ध&#039; प्रयोग की साधना</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3458.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Mon, 17 May 2010 00:20:00 +0600</pubDate>

								<description>कलकत्ते में पैदा हुए, दिल्ली आई,आई टी से सिविल इंजिनियरिंग मे पढ़ाई की और कुछ दिन तक उत्तर बिहार में रसायन का उद्योग चलाया। लेकिन मन उखड़ा और कुछ अलग करने की धुन लगी तो चले आये मसूरी। पिछले बीस साल से सिद्ध संस्था के माध्यम से मसूरी के आस पास के इलाके में शिक्षा का प्रयोग कर रहे है। इनका नाम है पवन कुमार गुप्ता। आप पूछ सकते हैं कि ये पवन गुप्ता आखिर हैं कौन? </description>

							

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								<title>बेदाग व्यक्तित्व थे भैरो सिंह शेखावत</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3454.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Sat, 15 May 2010 20:05:00 +0600</pubDate>

								<description>भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और देश के एक कद्दावर राजनेता भैरो सिंह शेखावत नहीं रहे. शनिवार की सुबह जयपुर के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. 87 साल के भैरोसिंह शेखावत ने लगभग छह दशक तक भारतीय राजनीति में अपना सशक्त हस्ताक्षर बनाये रखा. </description>

							

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								<title>चला गया &#039;नदिया के पार&#039; का सूत्रधार</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3417.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Sat, 08 May 2010 16:56:00 +0600</pubDate>

								<description>नदिया के पार के सूत्रधार गोविंद दा चले गये. गोविंद दा माने उस फिल्म के निर्देशक, पटकथा लेखक गोविंद मूनिस. पूरा नाम था गोविंद नारायण दुबे. गुरुवार की सुबह अचानक उनके सेलनंबर से कॉल आया. मैंने उनका फोन कट किया. एक मैसेज भेजा- &amp;quot;&amp;quot;दादा, मैं ठीक हूं. आप कैसे हैं. आज आपको एक मेल करूंगा. एक पत्र भी भेजा हूं. जवाब दीजिएगा.&amp;#039;&amp;#039;</description>

							

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								<title>उदयन शर्मा: जन पत्रकारिता का जोरदार पहरुआ</title>

								<link>http://www.visfot.com/real_hero/3339.html</link>

								

										

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								<category>आदमीनामा</category>

								<pubDate>Thu, 22 Apr 2010 18:45:00 +0600</pubDate>

								<description>उदयन शर्मा की पुण्य तिथि 23 अप्रैल पर उनको याद करना 1977 में शुरु हुई उस हिन्दी पत्रकारिता को भी याद करना है, जब उदयन शर्मा, एमजे अकबर और एसपी सिंह ने &amp;#039;रविवार&amp;#039; के माध्यम से हिन्दी पत्रकारिता को नए तेवर प्रदान किए थे। 11 जुलाई 1949 को जन्मे उदयन शर्मा प्रख्यात पत्रकार ही नहीं बल्कि विचारों से पक्के समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शख्स थे।</description>

							

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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