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	<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

	<link>http://www.visfot.com/</link>

	<copyright>&amp;copy;2007 Spoonlabs d.o.o.</copyright>

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		<title>visfot.com । विस्फोट.कॉम</title>

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								<title>शहीदे आजम भगत सिंह की &#039;जयंती&#039;</title>

								<link>http://www.visfot.com/index.php/seminar/813.html</link>

								<category>सभा-संगत</category>

								<pubDate>Tue, 31 Mar 2009 13:20:00 +0600</pubDate>

								<description>इसी 23 मार्च की शाम मुझे एक असहज अनुभव हुआ। शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बलिदान दिवस पर आयोजित एक छोटे से समारोह में शामिल होने का अवसर मिला। श्रोताओं की अधिकतम संख्या एक सौ रही होगी। इनमें भी बूढ़े अधिक थे, युवा कम। बूढ़े लोग खुद से तथा अपने अतीत से मोहग्रस्त और आत्म-मुग्ध थे तो युवा लगभग निस्पृह या कि तटस्थ मुख-मुद्रा में।</description>

							

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										<title>visfot .com</title>

										

											<link>http://visfot.com</link>

										

										<category>सभा-संगत</category>

										<pubDate>Tue, 31 Mar 2009 13:54:29 +0600</pubDate>

										<description>विष्णु जी,&lt;br /&gt;
मोबाईल श्मशान में भी पहुंच चुका है. जब भी किसी के मरने पर श्मशान जाते हैं और शव की अंतिम क्रिया के बराबर में किसी को मोबाईल पर बात करते हुए सुनते हैं तो अंदर से कितनी पीड़ा होती है इसे लिखा नहीं जा सकता. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मैं एक बार बनारस गया था. कैमरा हमेशा साथ होता ही है. मणिकर्णिका घाट पर टहलते हुए मैंने कुछ ऐसी फोटो ले ली जो फोटो पत्रकारिता के लिहाज से बहुत उम्दा थी. तब तक वहां बैठी एक आठ-दस साल की लड़की ने मुझे ऐसा करते देख लिया. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
उसने तुरंत मुझे चेतावनी देते हुए कहा कि यहां फोटो मत लो. अभी कोई देखेगा तो तुम्हारा कैमरा तोड़ देगा. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
मुझे बड़ा झटका लगा. मुझे लगा कि मैं इतना मूर्ख कैसे हो सकता हूं कि मुझे यह भी याद नहीं रहा कि श्मशान में हमें कैसे व्यवहार करना चाहिए? प्रायश्चित वश मैंने सारे फोटो डिलिट कर दिये. &lt;br /&gt;
&lt;br /&gt;
लेकिन तकनीकि ने हमारे व्यवहार को कितना प्रभावित किया है कि हम भूल ही गये हैं कि हम एक इंसान है और हमें संस्कारित रूप से व्यवहार करना चाहिए. जीवन, मरण, शोक और प्रसन्नता के क्षणों में किसका प्रवेश हो और किसका निषेध इसका संस्कार मर गया है. और ऐसा करनेवाले मूर्ख अपने आप को आधुनिक और पढ़ा लिखा कहते हैं.</description>

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										<title>pankaj  vyas </title>

										

										<category>सभा-संगत</category>

										<pubDate>Tue, 31 Mar 2009 16:41:55 +0600</pubDate>

										<description>bairagi ji aapko yahan dekhar accha laga.</description>

									</item>

								

									<item>

										<title>साहित्यिक पत्रकार</title>

										

											<link>http://sahityikpatrakar.blogspot.com</link>

										

										<category>सभा-संगत</category>

										<pubDate>Thu, 28 May 2009 09:11:24 +0600</pubDate>

										<description>विष्णु वैरागी जी का ‘असहज अनुभव’ कुछ खास असहज नहीं लगा। पूरे संस्मरण में न कोई नई बात है, न कोई नया विचार। मोबाइल की महिमा से कौन परिचित नहीं है! रहा सवाल भगत सिंह की ‘जयंती’ का, तो पूरे देश में यही हाल है- चाहे भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव, पाश, चंद्रशेखर आदि की जयंती हो या शहादत दिवस। हम ‘बुद्धिजीवियों’ का जयन्ती या शहादत दिवस मनाने का ढंग चाहे अलग हो लेकिन अपने व्यवहार में हम उन ‘मोबाइल वालों’ से भिन्न नहीं हैं। मुमकिन है कि भगत सिंह या किसी अन्य शहीद पर हम अपनी ‘बुद्धि’ से कुछ अच्छा भाषण दे दें लेकिन उससे क्या होता है? जैसा कि माक्र्स ने कहा कि हमारी विचारधारा हमारे सिद्धांत में नहीं, व्यवहार में होती है।&lt;br /&gt;
विष्णु वैरागी जी को पता नहीं देशभक्ति से जुड़ी हुई फिल्मों से क्या परेशानी है कि उन ‘मोबाइल वालों’ के साथ उन फिल्मों और उनके कलाकारों पर भी टूट पड़े। मैं समझता हूँ कि मुझे वैरागी जी को यह बताने की आवश्यकता नहीं कि आज जितने लोग भगत सिंह और उनकी शहादत से परिचित हैं, उनमें से आधे से अधिक इन्हीं फिल्मों के माध्यम से परिचित हैं। आपके महान विचार और तथाकथित स्तरीय साहित्य या तो आम जन की पहुंच से बाहर है, या आम जन की उसमें दिलचस्पी ही नहीं है। फिल्मों और कलाकारों का नाम गिनाते वक्त वैरागीजी ने भूलवश या जानबूझकर ‘द लीजेंड आॅफ भगत सिंह’ का नाम नहीं लिया। मैं यह नहीं कहता कि भगत सिंह पर लोगों को किताबें नहीं पढ़नी चाहिए, लेकिन किताबों के साथ अच्छी फिल्में भी देखनी चाहिए। जानने वाले जानते हैं कि ‘द लीजेंड आॅफ भगत सिंह’ कई सामान्य किताबों से महत्वपूर्ण और प्रभावी है।</description>

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<description>visfot.com । विस्फोट.कॉम</description>

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