राजनीति में आध्यात्मिक भावना रखनी चाहिए-राजनाथ सिंह
भाजपा अध्यक्ष के रूप में चार साल की राजनीतिक पारी खेलनेवाले राजनाथ सिंह को भाजपा का सबसे बेचारा अध्यक्ष कहा गया. लेकिन राजनाथ सिंह कहते हैं कि जिन कारणों से उन्हें बेचारा कहा जाता है वह उनकी उदारता है. राजनीति में आध्यात्मिक भावना रखने की सलाह देने वाले राजनाथ सिंह से चार साल के अपने अध्यक्षीय कार्यकाल और अन्य कई महत्वपूर्ण मसलों पर विस्फोट.कॉम ने विशेष बातचीत की.
सवाल: क्या आप भाजपा अध्यक्ष बनना चाहते थे या पार्टी के आग्रह पर आपने पद सम्हाला ?
जवाब: मुझे तो पता भी नहीं था इस बारे में. मैं तो वाराणसी में १४ दिनों से धरने पर बैठा था. यहाँ सब लोगों ने फैसला कर लिया कि राजनाथ सिंह अध्यक्ष होंगे, मुझे तो यात्रा के दौरान इत्तला की गई. दिल्ल्ली तो मैं महीने भर से नहीं आया था.
सवाल: अध्यक्ष के रूप में आप की उपलब्धिया क्या रही ?
जवाब: यह तो लोग बताएँगे इसका सही आकलन तो आम लोग ही कर सकते है जिसने काम किया है वो तो सही आकलन नहीं कर सकता फिर भी भाजपा ने मेरे अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान उत्तराखंड, हिमाचल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में सरकारें बनी और तो और दक्षिण भारत की पहली भाजपा सरकार बनी. गुजरात में हम दोबारा जीते, जम्मू कश्मीर में भी अभी तक की सबसे अधिक सीटें हमारे ही कार्यकाल में आई हैं.
सवाल: आपके ही कार्यकाल में दिल्ली कैसे हार गए ?
जवाब: दिल्ल्ली में भी हम निगम के चुनाव जीते पर विधान सभा की हार और लोक सभा की हार तो बहुत ही अप्रत्याशित हार थी हमारे लिए.
सवाल: भाजपा में निरंतर गिरावट आ रही है और अब तो इसके अस्तित्व पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं?
जवाब: इतनी सारी जीतों के बाद मैं नहीं समझता की कोई गिरावट है. हाँ एक दो कमियां रह गई हैं उन्हें हम सुधारेंगे, विपक्ष की भूमिका भी हम प्रभावी तरीके से निभा रहे हैं चाहे वो महंगाई का मुद्दा हो या आतंरिक और बाहरी सुरक्षा का.
सवाल: रंगनाथ मिश्र की रिपोर्ट पर बात हो रही है आपका क्या कहना है?
जवाब: हम इसका पुरजोर विरोध करेंगे यह पूरी तरह से संविधान विरोधी कदम है. सामाजिक समरसता को हम भंग नहीं होने देंगे.
सवाल: आप के कुछ घटक दल जैसे जेडीयू के कुछ संसद इसका समर्थन कर रहे हैं?
जवाब: कोई भी समर्थन करे पर हम खूब जम के इसका विरोध करेंगे धर्म के नाम पर एक बार देश का बटवारा हो चुका है दुबारा नहीं होने देंगें. भारत एक राष्ट्र है मुहम्मद अली जिन्ना के द्वि राष्ट्र की निति यहाँ नहीं चलने देंगे भारत की समरसता को किसी भी सूरत में बाधित नहीं होने देंगें और ये पूरी तरह से संविधान विरोधी कदम है.
सवाल: राजनाथ सिंह एक व्यक्ति के तौर पर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के ४ साल के कार्यकाल को कैसे आंकते है?
जवाब: संसद और संसद के बाहर भाजपा की भूमिका प्रभावी हुई. भारतीय जनता पार्टी एक सशक्त विपक्ष के रुप में सामने आयी. पहली बार ७० % तक बूथ कमेटी बनायी गई है ये भाजपा के इतिहास में पहली बार हुआ है. चुनाव में जीत हार के कई कारण होते है पर हमने संगठनात्मक ढांचा तैयार करने का प्रयास किया है. जनसंघ से लेकर अब तक की अबसे ज्यादा बूथ कमेटी इन्ही ४ सालों में गठित हुई हैं.
सवाल : अध्यक्ष के तौर पर आप अलग थलग पड़ गए अध्यक्ष की प्रधानता को महत्व कम दिया गया?
जवाब : हमारी पार्टी की परंपरा रही है सामूहिक निर्णयों की मैं उसी परंपरा पर चला हूँ अन्यथा कहीं कोई ऐसी बात नहीं हैं मीडिया में एक दो जगह ऐसी बात जरुर आई है पर इसमें कोई सच्चाई नहीं है.
सवाल: भाजपा की आतंरिक काल्ह की वजह से प्रधानमंत्री ने कमजोर पड़ते विपक्ष पर चिंता जताई थी और आपने उसका जवाब भी दिया था?
जवाब : वह पूरी तरह राजनैतिक बयान था. अगर भाजपा यह कहे कि आन्ध्र में जो हो रहा है उसकी हमे चिंता है तो कांग्रेस को कैसा लगेगा? लेकिन हमारी कार्यशैली है कि हम दूसरी पार्टियों के मामले में हस्तक्षेप नहीं करते. हमारा मानना है कि कांग्रेस को भी यह समझना चाहिए कि दूसरे दलों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
सवाल: लेकिन उनको मौका तो दिया ही गया आपकी तरफ से?
जवाब : भाजपा इतना बड़ा राजनेतिक दल है तो कहीं ना कहीं तो आतंरिक विरोध पैदा हो जाना कोई असाधारण बात नहीं है. ऐसे छुटपुट विरोधों को इतना महत्व नहीं दिया जाना चाहिए.
सवाल: नए अध्यक्ष के लिए आपको क्या कहना है?
जवाब: हम उनका पूरा समर्थन करेंगे और पूरी पार्टी नये अध्यक्ष के साथ मिलकर काम करेगी. हम नये अध्यक्ष के सहयोगी की भूमिका निभाएंगे.
सवाल: अध्यक्ष के बाद हम राजनाथ सिंह को किस भूमिका में देखेंगे? क्या अब राजनाथ सिंह की भूमिका महज एक सांसद तक सिमटकर रह जाएगी?
जवाब: पार्टी के सबसे बड़े पद पर आसीन हो चुका. अब तो एक साधारण कार्यकर्ता की हैसियत से ही काम करना है.
सवाल: उत्तर प्रदेश को ले कर आप कुछ सोच रहे है?
जवाब: उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जहां जहां भी भाजपा कमजोर हुई सब राज्यों में भाजपा को मजबूत करने के लिए काम करेंगे.
सवाल: उत्तर प्रदेश तो कमजोर नहीं था, लेकिन बाद में हो गया. आप क्या कारण देखते हैं?
जवाब: हाँ ये सही है. और इसका सबसे बड़ा कारण है भाजपा का बसपा के साथ समझौता. हालाँकि ये एक राजनैतिक बाध्यता थी. बहुत जल्दी जल्दी चुनाव ना हो हमारी तो यही सोच थी. लेकिन उसका हमें राज्य में नुकसान हुआ.
सवाल: कल्याण सिंह जी के बारे में कहा जा रहा है कि वो फिर भाजपा में आना चाहते है?
जवाब: उन्होंने इस बारे में कोई बात नहीं की है.
सवाल: २००७ में आपने कल्याण सिंह को भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया गया तो अचानक इतनी तल्खी क्यों आ गई ?
जवाब : वो तो मैंने ही किया था , पर पता नहीं तल्खी क्यों आ गई ये तो उनसे पूछा जाये भाजपा से सपा में गए फिर भाजपा में आये फिर सपा में गए अब फिर भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं .
सवाल : संघ भाजपा को अपना राजनैतिक मुखौटा बनाना चाहता है ?
जवाब : ये सारी गलत रिपोर्टिंग मीडिया में होती रही है संघ तो सिर्फ सलाह देता है या हमे अगर जरुरत हो तो हमरा मार्ग दर्शन करता है और वह बड़े अनुभवी लोग है तो परामर्श तो करते ही रहना चाहिए.
सवाल : तो फिर भाजपा में बदलाव के लिए सरसंघचालक खुद इतने सक्रिय क्यों हुए ?
जवाब: सक्रिय नहीं हुए. टीवी चैनलों ने अपने से उन्हें सक्रिय कर दिया.
सवाल : नये अध्यक्ष को आपकी क्या सलाह होगी ?
जवाब : जो सलाह वो चाहेंगे वो सलाह हम देंगे उनको.
सवाल : भाजपा का कांग्रेसीकरण हो गया है. हर नेता सत्ता की दौड़ में लगा हुआ है पार्टी और उसके हित तो कहीं पीछे छूट गए हैं ?
जवाब : ये तो समाज की समस्या है. समाज का भौतिकीकरण हो गया है. हर आदमी की ज्यादा पाने की लालसा रखता है इसीलिए राजनीति के लिए कहा गया है कि राजनीति में आध्यात्मिक सोच और आध्यात्मिक भावना रखनी चाहिए.
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"barrey beabru ho kar terey koochey sae raj nath nikley,bahut nikley raj nth g k ansu ,lakin lagta hai k kamm nikle"
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