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सेन्सरशिप स्वीकार नहीं करेंगे -एरिक स्मिथ

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गूगल कारपोरेशन के अध्यक्ष और सीईओ एरिक स्मिथ ने न्यूजवीक मैगजीन से बात करते हुए कहा है कि चीन में उनके ऊपर कई तरह के अनावश्यक प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही थी जिसे वे स्वीकार नहीं करते. इसलिए गूगल ने वहां से बाहर जाने की धमकी दी थी. प्रस्तुत है न्यूजवीक में प्रकाशित एिरक स्मिथ से फरीद जकारिया की बातचीत-

सवाल- आपके इस निर्णय से पूरी दुनिया के लोग हैरान हैं. आपने यह निर्णय क्यों लिया?

जवाब- अपने काम काज के लिहाज से गूगल एक अलग तरह की कंपनी है. चीन में हमें लगातार कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. हमारे ऊपर इस तरह का प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही थी जो हमें कतई स्वीकार नहीं है. फिर भी हमें लगता है कि चीन में काम करना हम सबके लिए बेहतर होगा. फिर चाहे वह कंपनी हो या फिर चीन के उपभोक्ता. हां, हम और अधिक सेन्सरशिप को स्वीकार नहीं करेंगे.

सवाल- पिछले महीने ऐसा क्या हुआ आपको चीन छोड़ने की धमकी देनी पड़ी?

जवाब- चीन में गूगल पर कुछ ज्यादा ही नजर रखी जा रही है. हमारे पास कुछ ऐसे प्रमाण हैं जो यह साबित करते हैं कि गूगल पर हर तरफ से नजर रखी जा रही थी. अब ऐसे में क्या कर सकते हैं? हमारे पास पुख्ता प्रमाण हैं कि चीन में कौन हमारे ऊपर इस तरह की मानिटरिंग कर रहा है.

सवाल- क्या गूगल पर इतनी नजर रखी जा रही है?

जवाब- जितना सोच सकते हैं उससे भी अधिक.

सवाल- तो फिर चीन सरकार से बात करके कोई समाधान निकालने की बजाय आपने इसे पब्लिक क्यों कर दिया?

जवाब- हम जल्द ही चीन सरकार से मिलने वाले हैं. हमें उम्मीद है कि हम कोई बेहतर रास्ता निकाल लेंगे. लेकिन हम चाहते थे कि गुपचुप बात करने से पहले लोगों को भी पता होना चाहिए कि हमारे साथ चीन में क्या हो रहा है. अब हमारी चीन के अधिकारियों से बातचीत हो रही है.

सवाल- क्या आपको लगता है कि अपनी सेन्सरशिप नीति पर चलते हुए भी चीन वैश्विक उभार पा सकेगा?

जवाब- चीन ने गरीबी को खत्म करने के लिए जिस तरह से काम किया है वह बहुत ही सराहनीय है. उन्होंने ऐसी योजनाएं बनायी हैं जिसके कारण करोड़ों लोगों के लिए बेहतर जीवन मुहैया हुआ है. लेकिन दुर्भाग्य से कुछ और देशों की तरह चीन में भी सूचनाओं पर सख्त पहरा है. चीन ही दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है जहां हम स्थानीय भाषा में सेन्सरशिप के साथ सर्च सुविधा देने के लिए बाध्य हैं. दुनिया के किसी भी देश में हम ऐसा नहीं करते. न ही कोई देश हमें ऐसा करने के लिए कहता है. दुनिया के कुछ देशों में यू ट्यूब के वीडियो को लेकर अक्सर सवाल खड़े होते हैं और कुछ देश यू ट्यूब को प्रतिबंधित कर देते हैं. लेकिन हम उनसे बातचीत करते हैं और उन्हें बताते हैं कि किसी एक वीडियो के लिए आप लाखों वीडियो को कैसे प्रतिबंधित कर सकते हैं? और बात बन जाती है. लेकिन चीन में ऐसा नहीं है. वहां जरूरत से ज्यादा सेन्सरशिप है.

सवाल- तो क्या इससे चीन को आर्थिक नुकसान होगा?

जवाब- मुझे ऐसा लगता है कि लंबे समय में ऐसा हो सकता है. गूगल में हम विश्वास करते हैं कि हर व्यक्ति को और अधिक सक्षम बनाया जाए. हम गूगल में एक ऐसा माहौल देने की कोशिश करते हैं कि कोई भी व्यक्ति अपनी पूरी संभावना को व्यक्त कर सके.

सवाल- इस पूरे विवाद में आखिरकार क्या होगा? क्या चीन की स्थानीय सर्च इंजन कंपनी बैदू चीन के बाजार पर राज करेगी?

जवाब- एक परिणाम तो यह होगा ही. इसके अलावा अब हम चीन सरकार से एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की कोशिश करेंगे और उसके बाद अपनी सेवाएं जारी रखेंगे. आज भी चीन में हमारे इंजीनियर, प्रोग्रामर काम कर रहे हैं. हम चीन को और चीन के लोगों को प्यार करते हैं. इसलिए हमारा बाहर जाने का कोई इरादा नहीं है. हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि सूचना पर अनावश्यक की सेन्सरशिप न की जाए. उस पर रोक लगनी चाहिए। 

सवाल- आपके ऊपर आरोप है कि आप अपने शेयरधारकों को सामंती तरीके से अधिक से अधिक मुनाफा देना चाहते हैं?

जवाब- जब हम आईपीओ मार्केट में आये थे तो हमने एक डाक्युमेन्ट भी जारी किया था. उस समय भी हमने कहा था कि हम अलग तरह से व्यापार करने जा रहे हैं. हमने साफ कहा था कि हम व्यापार से कुछ अलग करने जा रहे हैं. गूगल में हम एक विचारधारा को प्रमुखता देते हैं जो सूचना के स्वतंत्रता से जुड़ी है. हम चीन में भी इसे जारी रखना चाहते हैं.

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Yashovardhan Nayak on 23 October, 2010 01:08;29
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गूगल कारपोरेशन को केवल चीन ही सुधार सकता है .भारत भर में गूगल ने यौंन-क्रान्ति फैला दी है . अ दबाओ और गन्दी कहानी या पोर्नोग्राफी चालू .सात साल के आयु से तेरह साल तक के बच्चे सबसे ज्यादा इंटरनेट उपयोग करते है.यह जहर रोकने के लिए एरिक स्मिथ साहब के पास क्या योजना है.इंटरनेट से अश्लीलता हटाना गूगल की जिम्मेदारी है .
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