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निरुपमा के पिता ने दी थी बुरे अंजाम की धमकी- प्रियभांशु

image निरुपमा के साथ प्रियभांशु

निरुपमा की मौत के बाद प्रियभांशु गहरे अवसाद में है और मीडिया से बात करना बंद कर चुका है. लेकिन जिस प्रकार से निरुपमा के घरवाले इस पूरे मामले को टर्न देने की कोशिश कर रहे थे उसमें प्रियभांशु का बोलना जरूरी हो गया था. प्रियभांशु का कहना है कि निरुपमा के पिताजी ने तीन बार फोन करके उसके पिता को धमकी दी थी कि अपने बेटे को समेट लीजिए नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा. प्रियभांशु से की गयी बातचीत का महत्वपूर्ण अंश.

सवाल- आपको कब पता चला की निरुपमा की मृत्यु हो गई है और पता चलते ही आपने क्या किया?

जवाब- 29 अप्रैल को दोपहर 2 बजे उसकी (निरुपमा की) एक मित्र द्वारा पता चला. पता चलते ही पहले उसकी एक दोस्त को फ़ोन किया। फिर खुद ही निरुपमा की माँ के मोबाइल पर फोन किया, जो कि उनके एक पड़ोसी ने उठाया और जवाब में उसके करेंट लगने से मौत हो जाने की बात कही. फिर उसके पापा, भैया सभी को फ़ोन लगवाया. सभी ने कहा की मृत्यु हो गई है. पर उनका लहजा बिलकुल सामान्य था और बोलने के ढंग से लग ही नहीं रहा था कि इतना बड़ा हादसा उनके अपने घर में उनकी अपनी बेटी के साथ हुआ है।

घरवालों द्वारा इस तरह से बताने के बाद मैंने वहाँ के एसएचओ राजीव रंजन से संपर्क किया और एक थानेदार निरुपमा के घर गया. लेकिन पहली बार में उसने भी यही कहा की करेंट लगने से हादसा हुआ है। एसपी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने कार्यवाही की.

सवाल- आखरी बार आपकी निरुपमा से कब मुलाकात हुई थी?

जवाब- 19 अप्रैल को  जब मैं उसे स्टेशन छोड़ने गया था तब मिला था। 
 
सवाल- क्या बात हुई थी आपकी उस वक्त निरुपमा से?

जवाब- निरुपमा का कहना था की उसका जाने का मन नहीं है और माँ कि बीमारी की बात उसे गलत लग रही थी। पर फिर भी उसको ऐसा भी लग रहा था कि अगर वह बात सही हुई तो न जाना गलत होगा. वह एक अच्छी बेटी होने का फ़र्ज़ निभाना चाहती थी. वो कभी अपने फर्ज से पीछे नहीं हटती थी।

सवाल-निरुपमा के कोडरमा जाने पर आपकी उससे कब-कब बात हुई और  क्या?

जवाब- बहुत कम। अधिकतर एसएमएस ही आते थे। उसका कहना था कि इस बार पहरेदारी ज्यादा है और बात हो पाना मुश्किल है. जब वो बाथरूम में जाती थी तो मेसेज कर देती थी। (निरुपाम के मेसेज का हवाला देते है).

28 अप्रैल को जो आखिरी बात हुई थी उसमे वो रो रही थी क्योंकि उसे आने नहीं दिया जा रहा था। मैं भी रो रहा था पर मैंने उसे समझया कि एक हफ्ता वेट कर लो सब ठीक हो जायेगा। लोग थोडा शांत हो जायेंगे और मम्मी या भैया के दोस्त कब तक निगरानी करेंगे, आम तौर पर होता भी यही है।

सवाल- क्या आपने खुद कभी बात करने की कोशिश की थी?

जवाब- नहीं, मैंने खुद बात करने की कोशिश नहीं की क्योंकि उसने मना किया था और हमेशा जब वो घर जाती थी तब ऐसा ही होता था. वो खुद ही फ़ोन करती थी। पर हाँ, हमेशा कम से कम दिन में दो बार जरुर फ़ोन करके बात करती थी. पर इस बार ऐसा नहीं था. उसे बात नहीं करने दिया जा रहा था।

सवाल- जब आप लोगो की शादी 06 मार्च को होनेवाली थी तो फिर क्यों नहीं हुई?

जवाब- क्योंकि निरुपमा ऐसा चाहती थी। वो घर वालों से एक बार बात करके सबको राज़ी करना चाहती थी।

सवाल- आप ने उस पर दबाव नहीं डाला उसी दिन शादी कर लेने के लिए ?

जवाब- नहीं।

सवाल- क्या निरुपमा ने कभी आपको बताया कि वह आपके बच्चे की मां बननेवाली है?

जवाब- नहीं। कभी नहीं।  
 
सवाल- निरुपमा से संबंधों के बारे में आपके घरवालो को पता था?

जवाब- हाँ, हमारे बारे में मेरे घरवालों को पता था. जब निरुपमा से शादी की रजामंदी हुई तो मैंने अपने घरवालों को बताया था. मेरे घरवाले निरुपमा से मिल भी चुके थे। उन्हें इस रिश्ते और हमारी शादी से कोई एतेराज़ नहीं था।

सवाल- आपने अपने घरवालों से निरुपमा के पिता से बात क्यों नहीं करायी?

जवाब- मेरे पिता अपनी तरफ से इसलिए रिश्ता नहीं ले जा सकते थे क्योंकि मेरी बड़ी बहन अभी अविवाहित है. ऐसे में उनके लिए रिश्ता ले जाना संभव नहीं था।

सवाल- क्या कभी निरुपमा के पिता ने आपसे बात करने की कोशिश की?

जवाब- कभी नहीं, बल्कि मैंने निरुपमा को अपना बायोडाटा दिया था कि अपने भाई को दे दें और उसने अपने छोटे भाई को मेल भी किया था पर किसी ने मुझसे सीधे कभी कोई संपर्क नहीं किया।

सवाल- निरुपमा के पिता का कहना है कि उन्होंने आप के पिता से शादी को लेकर के छ: बार बात करने की कोशिश की। क्या यह सच है?

जवाब- छ: बार तो नहीं पर तीन बार उनका फ़ोन आया था मेरे पाप के पास। लेकिन शादी की बात करने के लिए नहीं बल्कि वे मेरे पिताजी को धमकी दे रहे थे. धमकी देनेवाला आखरी फ़ोन 8 अप्रैल को सुबह 9:54 पर आया था जिसमे उन्होंने मेरे पापा से कहा "अपने बेटे को समेट लीजिये वरना अंजाम बहुत बुरा होगा". अब ये कोई रिश्ता ले जाने वाली बात है? संयोग से मैं उस दिन घर पर दरभंगा में ही था।

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on 13 May, 2010 23:44;50
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एक पक्षीय रिपोर्टिंग
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rambharose on 14 May, 2010 02:51;48
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Jabse Koderma court ne Priyabhaanshu ke khilaaf Fir kaa aadesh diyaa hai tab se use, uske "doston' sirjee logon ayr pitaa ko nirupama aur usase judi baaten yaad aane lagi hain.
Abhi teen din pahle nirupama ke shraddh ke baad uske pita ne ek tv channell dwar poochhe jaane par bataayaa thaa ki march me wah dilli gaye the aur wahan Nirupama se sab sunane ke baad unhone Priyabhanshu ke pitaa se phone karke is sambandh aur dono ke vivah ke baare me baat ki thi.Par Priyabhanshu ke pitaa raaji nahi the.
Ab nirupamaa ke pitaa ke is kathan ke baad Priyabhanshu ko bhiTeen baar phone ki baat yaad aa gayi hai,wah ise dhamki bataa rahaa hai.aakhir cheejon ko spi dene ki training IIMC se milee hai na!
ab dekhiye ,khud Pribhanshu ke Pitaa pchhale ek hafte me do se adhik baar media se baat kar chuke hain par unhe is 'dhamki' ka jikra jaroori nahi lagaa.
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Virendra on 14 May, 2010 04:40;15
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कुछ भी कहो ये बन्दा शक्ल से ही बदमाश और शातिर लगता है. बाकी इसे हीरो बना दो तो आपकी मर्जी.
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on 14 May, 2010 07:26;12
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यह सब ये शख्स अपनी गर्दन से फन्दा बचाने के लिये कह रहा है. ये और इसके मीडिया के सहयोगी इसे बचाने के लिये हाथ पैर मार रहे है.

इसका कच्चा चिठ्ठा निम्न लिंकों पर है
http://tutikiawaz.blogspot.com/2010/05/blog-post_13.html

http://tutikiawaz.blogspot.com/2010/05/blog-post_06.html

http://tutikiawaz.blogspot.com/2010/05/blog-post_09.html

http://tutikiawaz.blogspot.com/2010/05/blog-post_08.html

http://tutikiawaz.blogspot.com/2010/05/blog-post_05.html
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चक्रधर on 14 May, 2010 09:47;24
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प्रियभांशु से बातचीत पर यहां कुछ भद्दे और कपटपूर्ण कमेन्ट दिख रहे हैं. ये वही लोग हैं जो खुद तो प्यार करना चाहते हैं लेकिन प्यार कोई और करे तो इनकी नैतिकता दहाड़े मारकर रोने लगती है.

इस पूरे मामले में प्रियभांशु को दोषी वही लोग ठहरा रहे हैं जो खुद अपराधी किस्म के व्यक्ति है. ऐसे लोगों का अपना नैतिकता का एक ढोंग होता है जिसे निभाने के लिए ये लोग हत्या तक करने से गुरेज नहीं करते. ये सब जो निरुपमा की हत्या को अभी भी जायज ठहराने की हिमाकत कर रहे हैं असल में निरुपमा के पिता धर्मेन्द्र पाठक के हमशक्ल हैं. इन लोगों को भी मौका मिलेगा तो अपने ही घर के बेटे बेटी को जान से मारने में गुरेज नहीं करेंगे.
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on 14 May, 2010 10:30;31
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भैया चक्रधर साहेब तो अपनी बेटी को प्रियाभंशु जैसे लंपटो के आगे परोस देंगे पयार के नाम पर महान आत्मा है बाकि लोग भाई जी सामान्य मानव है उनको अपने बेटी की गलती पर गुस्सा भी आएगा हालाँकि हत्या करना कोई संधान नहीं है परन्तु अभी तो ये सिद्ध भी नहीं हुआ की निरपमा की हत्या हुई भी है
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anjule on 14 May, 2010 12:02;25
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चक्रधर सर देख लिए ना आपने नैतिकता का ढोंग करने वाले किस नैतिकता से यहाँ आपके कमेंट्स के उपर कमेंट्स कर रहे हैं....महान लोग हैं ये..
इनके लिए एक बात है....तुम करो तो श्वामिन हम करें तो हरामीं...उसी भाह्सअ का उसे कर रहा हूँ जिस भाषा को ये लोग अच्छी तरह जानते हैं...
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shirish khare on 14 May, 2010 12:15;51
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काफी अच्छा interview है.

सवाल-जवाब से पूरा मामला और ज्य़ादा साफ़-साफ़ हो गया है. वैसे भी यह मामला बहुत साफ़-साफ़ ही है, मगर नैतिकता और कमजोर व्यवस्था की आड़ में इसे बेवजह उलझाया गया है. ख़ैर, अब तो झारखण्ड पुलिस ने भी पड़ताल के बाद यह कह दिया है कि निरुपमा की हत्या हुई है. यक़ीनन, निरुपमा के लिए न्याय की लड़ाई का यह पहला कदम है. इसलिए मैं उम्मीद कर रहा हूं कि प्रियभांशु इस मुश्किल समय में भी धैर्य, संयम और विवेक से काम लेंगे और न्याय के एक लम्बे रास्ते के लिए ख़ुद को तैयार करेंगे.

झारखण्ड पुलिस की जांच की प्रगति रिपोर्ट सामने आने के बाद निरुपमा की हत्या के दोषियों को फ़ौरन गिरफ़्तार किया जाना ज़रूरी है. मगर बड़ी अजीब बात है कि फ़िलहाल वह ख़ुलेआम तो घूम ही रहे हैं, प्रियभांशु को फ़र्जी मुकदमों के तहत फ़साने के लिए सहयोग भी पा रहे हैं.

अगर जातिवादियों द्वारा एक की हत्या करके दूसरे को ठिकाने लगाया जाएगा तो इससे ग़लत संदेश जाएगा. इसलिए जो लोग आनर किलिंग के ख़िलाफ और संवैधानिक हक़ों के लिए लड़ी जा रहीं विभिन्न लड़ाइयों का समर्थन करते हैं, उन्हें जातिवादियों के विपक्ष में उतर ही आना चाहिए.
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rahul sinha on 14 May, 2010 14:00;56
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yah priybhanshu shakl sey hi harami lagata hai.nahi to jab khud uski bahan avivahit hai to wah kam sey kam dusrey ki bahan ko pregnent to na karta.kya wah ya uskey smarthak chahengey ki unki bhi bahan ko koi shadi sey pahele pregnent kar dey.
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deepa kumari on 14 May, 2010 14:13;48
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priyebhansu apne aap koo bchane ke liye aapne doostoo ki help se media manage kar raha hai.woo lgataar jooth bool raha hai. uski hooniwali wife pragnenet thai aur uskoo ptaa nahi thaa.drasal woo atamhatya ke liye prerit karne aur rape ke case se khud koo bacane ki kosis kar raha hai.is kaam me uski help uske hi jase kuch loog kar rahe hai.
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image shruti awasthi पत्रकारिता की राजनीतिक समझ विरासत में लिए श्रुति अवस्थी ने पत्रकारिता की औपचारिक पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से की है. प्रथम प्रवक्ता पाक्षिक में रिपोर्टिंग के साथ साथ विस्फोट से बतौर युवा पत्रकार के नाते रिपोर्टिंग और लेखन.
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