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मेरा कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है-बाबा रामदेव

सवाल- आपकी दृष्टि में योग क्या है?
योग एक जीवन दर्शन है, योग आत्मानुशासन है, योग एक जीवन पद्धति है, योग व्याधिमुक्त व समाधियुक्त जीवन की संकल्पना है। योग आत्मोपचार एवं आत्मदर्शन की श्रेष्ठ आध्यात्मिक विद्या है। योग व्यक्तित्व को वामन से विराट बनाने का समग्र रूप में स्वयं को रूपांतरित व विकसित करने की आध्यात्मिक विद्या है। योग मात्र एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति नहीं अपितु परिणामों पर आधारित एक ऐसा प्रमाण है जो व्याधि को निर्मूल करता है। योग एलोपैथी की तरह कोई लाक्षणिक चिकित्सा नहीं अपितु रोगों के मूल कारण को निर्मूल कर हमें भीतर से स्वस्थता प्रदान करता है। योग की पौराणिक मान्यता है कि इससे अष्टचक्र जागृत होते हैं एवं प्राणायाम के निरंतर अभ्यास से जन्म-जमांतर के संचित रोग, अशुभ संस्कार व पाप नष्ट हो जाते हैं।
जवाब- महज प्राणायाम से सभी बीमारियों का निदान कैसे संभव है?
प्राणायाम से क्या-क्या हो सकता है यह एक अभ्यास एवं अनुभूतिजन्य सत्य है। हमनें अब तक करोड़ों लोगों पर प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से प्राणायाम के प्रयोग किए हैं। इस पूरी यात्रा के क्रमिक अभ्यास के दौरान कुछ सत्य अनुभूतियां प्रकट हुईं। योग के इस वैश्विक अभ्यास में सामान्य रोग से पीड़ितों ने ही नहीं बल्कि कैंसर, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, हैपेटाइटिस, डायबीटीज, थायराइड एवं अस्थमा जैसे जटिल रोगों से पीड़ित लोगों ने पूर्णतः मुक्ति पाई है। मैं यह सत्य प्रमाणों के आधार पर ही कह रहा हूं। हमारे पास करोड़ों लोगों के प्राणायाम करने से पहले और प्राणायाम करने के बाद की क्लीनिकल एक्जामीनेशन रिपोर्ट हैं। हमारे परिणामों पर कई क्लीनिकल ट्रायल भी हुए हैं। हम सभी परीक्षणों में खरे उतरे हैं। आज करोड़ों लोगों की जुबान से प्राणायाम का सत्य प्रकट हो रहा है जिसे दफनाया नहीं जा सकता है।
सवाल- फिर दिव्य फार्मेसी की दवाईयों की जरूरत क्या है?
जवाब- दवाईयां असाध्य रोगों को दूर करने में प्राणायाम की सहायता करती हैं। प्राणायाम 90 से 99 प्रतिशत तक लाभ प्रदान करता है। फिर दुनिया में करोड़ों लोग ऐसे भी तो हैं जो प्राणायाम नहीं करते हैं। कई छोटी-मोटी बीमारियों के निदान में भी दवाईयां काम आती हैं।
सवाल- पिछले दिनों इन दवाईयों पर काफी विवाद हुआ। दिव्य फार्मेसी के कई कर्मचारियों ने ही आपके ऊपर कई तरह के आरोप लगाए, क्या वजह मानते हैं आप?
जवाब- सब एक गंदी राजनीति का हिस्सा था। दुनिया में ऐसे लोगों को कमी नहीं है जो अच्छा होते हुए देख नहीं सकते। दिव्य फार्मेसी की दवाईयों के बारे में मैं आपको बता दूं कि कि जिन संयत्रों में दवाईयां निर्मित होती हैं वे विश्व स्तरीय मानकों जीएमपी, जीएलपी और आईएसओ 9001 से प्रमाणित हैं। यहां तक की हम तो जडी-बूटी भी अपने स्तर पर उगाते हैं। ब्रह्मकल्प चिकित्सालय में परिसर की वनस्पति वाटिका और पतंजलि योगपीठ के पास दिव्य नर्सरी में चिकित्सा उपयोगी जडी-बूटियों को उगाया जाता है। ऐसे में दिव्य फार्मेसी की दवाईयों में मिलावट की तो कोई गुंजाइश ही नहीं बचती है।
सवाल- योग को आप इतना प्रभावी मानते हैं तो इसके निशुल्क शिविर आयोजित क्यों नहीं करते?
जवाब- योग शिविरों के लिए जो शुल्क लिया जाता है वह मामूली होता है। स्वास्थ्य के प्रति सचेत व्यक्ति के लिए इतना शुल्क चुकाना मुश्किल नहीं है। काफी राशि तो शिविर में ही खर्च हो जाती है जो बचती है उसमें से अधिकांश गरीबों के ऊपर ही खर्च की जाती है। पतंजलि चिकित्सालय में गरीबों को मुफ्त इलाज किया जाता है। रियायती दर पर दवाईयां दी जाती है। यहां करीब 850 व्यक्तियों का स्टॉफ है। इन्हें 1 करोड़ रुपए सालाना वेतन दिया जाता है। अब तक हम यहां 500 करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं।
सवाल- गांवों तक योग अभी तक नहीं पहुंच पाया है, जबकि देश की 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है। आप गांवों की ओर कब रुख करेंगे?
जवाब- योग शिविरों में बड़ी संख्या में ग्रामीण भी आते हैं। जो शिविरों में नहीं आ पाते हैं। टेलीविजन पर देख कर सीख सकते हैं। सीडी और डीवीडी से सीख सकते हैं। पूरी दुनिया में अब तक 100 करोड़ से ज्यादा लोग प्राणायाम सीख चुके हैं। ये सब लोग शिविरों में तो आए नहीं थे। योग ने वर्तमान में क्रांति का रूप धारण कर लिया है। गरीब-अमीर, शहरी-ग्रामीण जैसे भेद तो क्या इसने धर्म, जाति और देशों की सीमाओं को भी तोड़ दिया है। आज हजारों मुसलमान भाई नियमित प्राणायाम करते हैं। विदेशों में तो यह लोकप्रिय हो ही रहा है।
सवाल- अगर ऐसा है तो फिर आपके योग शिविरों में आनेवालों की संख्या निरंतर घट क्यों रही है। इस साल मार्च में आपका आखिरी शिविर हुआ था, ऐसा क्यों?
जवाब- योगधर्म के अलावा मेरा स्वधर्म और राष्ट्रधर्म भी है। योगधर्म और स्वधर्म मैं अच्छे से निभा रहा हूं। अब राष्ट्रधर्म निभाने की बारी है। इस वर्ष का बाकी समय मैं इसी में लगाऊंगा। इसके अंतर्गत भारत स्वाभिमान अभियान से हम 100 प्रतिशत राष्ट्रवादी चिंतन, 100 प्रतिशत स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग एवं 100 प्रतिशत योगमय भारत का निर्माण कर एक स्वस्थ, समृद्ध एवं संस्कारवान राष्ट्र की कल्पना को साकार करेंगे।
सवाल- कहीं यह राजनीति में आने की तैयारी तो नहीं?
जवाब- भारत स्वाभिमान कोई राजनीतिक अभियान नहीं है। वैसे भी मेरा कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है। हम राजनीति नहीं करेंगे, परंतु भ्रष्ट, बेईमान, अपराधी, कायर, कमजोर  और बुजदिल लोगों को सत्ता के सिंहासन पर नहीं बैठने देंगे। हम लोगों को जागरूक करेंगे कि किस तरह से देशभक्त व ईमानदार लोगों को वोट नहीं देने से सत्ता भ्रष्ट व बेईमान लोगों के हाथ में चली जाती है और हमारे खून-पसीने की कमाई की खूब लूट-खसोट होती है।
सवाल- जिन नेताओं को आप भ्रष्ट व बेईमान कह रहें हैं कई बार आप उन्हीं के साथ नजर आते हैं, उनसे चंदा भी लेते हैं...
जवाब- मैं ऐसे लोगों को अपने पास फटकने भी नहीं देता हूं। यदि राजनेताओं के साथ खड़ा भी हुआ हूं तो देश हित के किसी मुद्दे पर। मैं तो साफ कहता हूं कि देश के सारे भ्रष्टाचारियों को फांसी दे देनी चाहिए। कई देशों में ऐसा प्रावधान भी है फिर भारत में क्यों नही? जहां तक चंदा लेने का प्रश्न है। कुछ नेता योग को बढ़ावा देने के लिए स्वेच्छा से कुछ राशि देते हैं तो लेने में क्या हर्ज है?
सवाल- आतंकवाद की समस्या को आप किस रूप में देखते हैं?
जवाब- आतंकवाद एक बड़ी समस्या बन गया है। हमें शीघ्र ही इसका हल ढूंढ़ना होगा। सबसे पहली बात तो यह आतंकवादियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। उन्हें फांसी भी नहीं सरेराह गोली से उड़ा देना चाहिए। सरकार को दो समस्याओं नकली मुद्रा और घुसपैठ पर ध्यान देना होगा। देश में इस समय 15 से 20 प्रतिशत करेंसी नकली चल रही है। सब पड़ोसी देश से आई है। इसके अलावा देश में इस समय 4 से 5 करोड़ घुसपैठिए घुसे हुए हैं। आतंकवाद का नेटवर्क चलाने में ये लोग बड़ी मदद करते हैं।
सवाल- पब कल्चर पर इन दिनों खासा विवाद छिड़ा है, इस बारे में आपकी क्या राय है?
जवाब- इसका किसी भी रूप में समर्थन नहीं किया जा सकता है। आधुनिकता और खुलेपन के नाम पर पबों में युवाओं को नशे और चारित्रिक पतन के दलदल में धकेला जा रहा है। सभ्य समाज में इसके लिए कोई जगह नहीं है। शराब के नशे में हमेशा धुत्त रहने वाला बाप भी यह नहीं चाहेगा कि उसका बेटा शराब को हाथ तक लगाए, एक चैन स्मोकर भी नहीं चाहेगा कि उसकी संतान सिगरेट का एक कश भी ले। नशे के अलावा पबों में जो खाना परोसा जाता है वह भी जहर है।
सवाल- आप योगधर्म की बात करते हुए योग गुरू, स्वधर्म की बात करते हुए समाज सुधारक और राष्ट्रधर्म की बात करते हुए राजनीतिज्ञ लगते हैं। आप स्वयं को क्या मानते हैं?
जवाब- मैं सबसे पहले मां भारती का पुत्र हूं। देश न होता तो मैं कहां होता। राष्ट्र ही मेरा सर्वस्व है। मेरे योगधर्म और स्वधर्म से पहले राष्ट्रधर्म है। मेरे देश का सम्मान मेरा सम्मान है और मेरे देश का अपमान मेरा अपमान है। मैं अपने देश की गरिमा, गौरव और सम्मान का आहत नहीं होने दूंगा।

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RAJKUMAR SINGH on 21 May, 2009 13:44;07
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मै बाबा राम्देव से सामान्यतह सह्मत हून . सिर्फ़ ’ चारित्रिक पतन ’ की परिभाशा का अन्तर सत्य छोड .
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लिमटी खरे on 14 August, 2009 15:22;38
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बाबा रामदेव जी क्या यह बताने का कष्ट करेंगे कि आपके पास एसी कोई दवा है, जिससे जिव्हा पर काबू रखा जा सके। अगर है तो आप उसका सेेवन अवश्य करें। क्योकि कभी आप विदेशों से काला धन वापसी ेक लिए सड़कों पर उतरने की बात करते हैं, कभी आदि शंक्राचार्य के सिद्धांत को गलत बताते हैं!
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Pushkar on 21 August, 2009 12:39;02
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Do people who comment on swami ramdev, know about his contribution towards indian health care? Million have benifited from his techniques and whats problem in brininging money black form swiss banks?
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Raj on 22 August, 2009 16:39;01
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Very Nice Interview.....Weldone.
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YASHPAL UBHAN on 12 September, 2010 12:38;53
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AAPNE LIKHA HAMANE PADA ,RAMDEV SATYA ,DESH PREM, RASHTRAVAD KI BAAT KARATE HE , UNKI BAATO SE LAGATA HE KI VO HUTHI HE AUR JO VOH KAHATE HAI SAHI HAI BAAKI SAB GALAT,JO UNSE ASAHAMAT HAI VO RASHTR SE PREM NAHI KARATE , EK RAJNETIK DAL BANANE KE BAD BHI KHUD KO RAJNETIK NAHI MANATE, RAMDEV KE PAAS EK HI MUKHYA MUDDA HAI VIDESHO ME KAALA DHAN, YEH TO JANATA SAMAJHATI HAI LEKIN BEBAS HAI , JANATA KO NETA ISTEMAAL KARATE HAI ,RAMDEV KI LOKPRIYATA ME VRIDHI HO GAYI HAI ,JISKA KAHI NA KAHI UNHE AHANKAR BHI HO GAYA HAI ,RAMDEV SE PUCHHA JAYE KI HARIDWAR ME RASHTRIYA RAAJMAARG PAR JAAM LAGAANE SE UNHONE RASHTR KA KAUN SA HITT KIYA HAI, JIS PROJECT KO RAMDEV NE BAND KARVAYA HAI ,USASE HUA NUKSAAN KYA RASHTR KA NAHI THAA ,AUR ISS KARAN BEROJGAR HUE NAUJAWAN KYA RASHTA KE NAGRIK NAHI HAI, KYA RAMDEV KA ASHRAM BINA BIJALI KE CHAL SAKATA HE,BABA NE APNI JIDD KO PURE DESH KI AVAAJ KAHA EK BAAR UTTARAKHAND KI JANATA SE PUCHH TO LETE ,KI YAHA KI JANATA KYA CHAHATI HAI
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sdas sadasdasd on 23 September, 2010 02:01;39
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asdasdasd
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image Avadhesh Akodia युवा पत्रकार अवधेश आकोदिया समसामयिक विषयों पर धारदार तरीके से लिखते हैं। राजनीति के अलावा अंतरराष्ट्रीय विषयों पर इनकी अच्छी पकड़ है। नामचीन मीडिया समूहों में काम करने के बाद पिछले दो वर्ष से समसामयिक विषयों की पत्रिका प्रतियोगिता दृष्टिं का संपादन कर रहे हैं, साथ ही स्वतंत्र लेखन भी करते हैं।
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