आपरेशन ब्लू स्टार के जख्म भरे नहीं हैं- दलजीत सिंह
दलजीत सिंह बिट्टू पंजाब के उन प्रभावी अलगाववादी नेताओं मे से हैं जिनका युवाओं पर काफी प्रभाव है. अस्सी और नब्बे के दशक में वे करीब 10 साल भूमिगत रह कर अलग सिख राष्ट्र आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाते रहे. अप्रैल 1996 में गिरफ्तार होने के के बाद वे करीब 10 साल तक नाभा और तिहाड़ जेल में रहे. जेल से बाहर आने के बाद दलजीत सिंह फिर से युवाओं को एकजुट कर लोकतांत्रिक तरीके से अलग सिख राष्ट्र की मांग कर हैं. आपरेशन ब्लू स्टार से लेकर मौजूदा आंदोलन के बारे में अनिल पांडेय ने उनसे बातचीत की.
सवाल- आपरेशन ब्लू स्टार पर आप की क्या प्रतिक्रिया है?
जवाब- हम इसे “आपरेशन” नहीं दरबार साहिब पर “अटैक” कहते हैं. यह हमारे गुरु ग्रंथ साहिब, सिख आइडेंटटी और सिख नेशन पर हमला था. इस हमले को हम कभी भूल नहीं सकते. आपरेशन ब्लू स्टार ने हमें जो जख्म दिया है उसे हम सिख राष्ट्र की मांग की प्रेरणा के रूप में रखना चाहते हैं. अकाल तख्त और दरबार साहिब पर पहले भी मुगलो द्वारा हमले किए गए. सिखों ने इसे कभी भुलाया नहीं, बल्कि इसका बदला भी लिया.
सवाल- लेकिन सरकार और सेना का कहना था कि स्वर्ण मंदिर में आतंकवादी छिपे थे, इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी.
जवाब- जनरैल सिंह भिंडरवाला आतंकवादी नहीं, महान सिख थे. उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब की नए सिरे से व्याख्या की. स्टेट सोचता है कि भिंडरवाला टेरिरिस्ट थे, लेकिन आम सिख मानता है कि वे एक ऐसे संत योद्दा थे, जिन्होंने सिख ग्लोरी को रिवाइज किया. भिंडरवाला हमारे सिखों के हीरों हैं और रहेंगे.
सवाल- फिर आप आपरेशन ब्लू स्टार की क्या वजह मानते हैं?
जवाब- इतिहास गवाह है कि दिल्ली की गद्दी पर जो भी बैठा उसे गुरु ग्रंथ साहिब और सिख विचारधारा से हमेशा डर लगता रहा है. दरबार साहिब पर जितने हमले हुए वह इसी वजह से हुए.
सवाल- आखिर दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाला व्यक्ति गुरु ग्रंथ साहिब से क्यों डरता है.
जवाब- हमारे गुरुद्वारे केवल प्लेस आफ वर्सिप नहीं हैं. यह हमारी पहचान और अस्मिता से जुडा है. अकाल तख्त केवल सिखों की एक सर्वोच्च संस्था भर नहीं है, बल्कि एक अलग सिख राष्ट्र बनाने की विचारधारा भी है. इसीलिए दिल्ली की सरकार इससे डरती है.
सवाल- कभी अलग सिख राष्ट्र की मांग को भारी जनसमर्थन था, अब वह नहीं दिखाई देता. इसका मतलब अब यह मांग खत्म हो गई है.
जवाब- नहीं, यह आंदोलन खत्म नहीं हुआ है. बल्कि अभी यह दबा है. आज भी हर सिख रोज अरदास करता है, “राज करेगा खालसा”. अगर आप को इस आंदोलन की सच्चाई जाननी है तो युवाओं के बीच जाइए. कालेज में पढ़ने वाले युवकों के मोबाइल स्क्रीन पर संत भिंडरवाले की तस्वीर लगी मिलेगी. उनकी रिंगटोन के रूप में भिंडरावाले के प्रेरणावाले भाषण और गाने मिलेंगे. आज पंजाब में भगत सिंह से ज्यादा भिंडरावाले की तस्वीर बिक रही है.
सवाल- क्या खालसा राज की स्थापना भारतीय राष्ट्र राज्य के खिलाफ नहीं है.
जवाब- यह मांग हिंदू या स्टेट के खिलाफ नहीं है. इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. खालसा राज की स्थापना तो हर सिख की तमन्ना है. हमारा तो अपना साम्राज्य भी था. खालसा राज यानी सिख धर्म के अनुसार जीवन पद्धति. लेकिन सरकार हमें हमारा अधिकार देने की बजाए हम पर जुल्म करती है. आंदोलन के दौरान भूमिगत रहने के क्रम में मैं जिन घरों में रहा पुलिस ने उन लोगों की नृशंस तरीके से हत्या कर दी.
सवाल- क्या आप लोग अपनी मांगे मनवाले के लिए फिर से हथियार उठा सकते है.
जवाब- देखिए, लड़ाई का तरीका समय पर निर्भर करता है. अभी तो हम लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं. लेकिन हालात अगर 1984 जैसा होता है तो तरीका बदल सकता है.
सवाल- क्या आप को लगता है कि भारत सरकार आप की मांग मान लेगी.
जवाब- सिख राष्ट्र का निर्माण कठिन जरूर है,लेकिन हम इसे हासिल करके ही रहेंगे.
सवाल- अपनी मांगे मनवाने के लिए जो आप लोग हथियार उठाते हैं, वह कितना जायज है?
जवाब- हमारे सिख धर्म में शस्त्र धारण करने की बात है. लेकिन हम शस्त्र अन्याय के विरुद्ध उठाते हैं, किसी के शोषण के लिए नहीं. हमारे गुरु ग्रंथ साहिब के सामने हथियार यानी कृपाण रखा जाता है. हमारे यहां तो परंपरा है कि “राज करैं या लड़ मरैं”.
सवाल- कहा जाता है कि भिंडरवाला ने स्वर्ण मंदिर को अपने छुपने का माध्यम बनाया?
जवाब- मुगलों से युद्ध के दौरान गुरु घरों यानी गुरुद्वारों में ही शरण लेकर सिखों ने लड़ाई लड़ी. भिड़रवाले भी स्वर्ण मंदिर में आकर तब रहने लगे जब दो महीने के दौरान उन पर छह हमले हुए. उन्हें डर था कि पुलिस और सुरक्षा बल उन्हें फर्जी इनकांउंटर में मार देंगे.
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thabhi to duniya ko pata chalega ki hindustani media kitni aajad hai jo apne desh ko todne walo ka interview lekar blog par chap marti hai.
bhai wah...
guruon aur sikhon ke mahan tyag ka jhansa de ye manav drohee ,kayar gaddar , bilon me jeete rahen bahut hai . sapane to shaItan bhee dekhta hai .
' ye ' sikh pahale sikhee kee seekh ' SANT ,SEWAK ,SIPAHEE ' jan le fir isase bat ho .
mana ki 'visfot' mukt abhivyakti ka teerth hai par bekar me ' kagaz kare ' bhee kyoon . upayogita bhee uddes hai ya naheen ?
AGAR IN DESH MANAV DROHEE SAPOLON KA ATA PATA LAGANA AUR UNAKE JAHAR KA AAKLAN HEE NIHIT HO IS PRAYAS ME TO BAT ALAG HAI .
कृपया दलजीत सिंह से पूछिए
पाकिस्तान में सिखों से ज़जिया लेने वालो के खिलाफ कोई सहादत देने की बात कर रहा है क्या ?
सिख गुरुओने हिन्दुओं को बचाने के लिए सिख होने का अवाहन किया था '
अनिल जी भी सब कुछ जानते है .लेकिन अनिल जी पत्रकारिता के उस वर्ग से हैं जो अपनी टी r p के लिए नफरतों को हवा देने का व्यापर करते हैं
कुछ लिख सकते हो अनिल बाबू तो स्वात जाओ और तालिबान आई एस आई पर कुछ लिखो
बरगलाये गए अतिवादियों को असली सिख बता कर गुरुओं का अपमान मत कीजिये
देश में ग्रहयुद्ध के बीजो को खाद पानी मत दीजिये '
लेकिन यदि यही लिखने से आपको पुरुस्कार मिलता है या रोटी मिलती है तो पापी पेट के लिए हमारे यहा कुछ भी करना जायज है
Satinder Singh,Chandigarh.
what u did with SIKHS in delhi,punjab.?
What u did with MUSLIMS in gujrat.?
What u did with CHRISTIANS in Goa ..?
And People says MERA BHARAT MAHAN..?
....Always attacked upon few people of other comunity.u r big asshole
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