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हमारी तुलना सिमी से मत करिए

image बजरंग दल के संयोजक प्रकाश शर्मा

बजरंग दल एक बार फिर चर्चा में है. विभिन्न राजनीतिक दल यह मांग कर रहे हैं कि सिमी पर प्रतिबंध है तो बजरंग दल पर क्यों नहीं होना चाहिए? इस सवाल के जवाब में बजरंग दल के संयोजक प्रकाश शर्मा का कहना है कि सिमी से उनके संगठन बजरंग दल की तुलना करना गलत है. उनका कहना है कि आप एक देशद्रोही संस्था की एक देशभक्त संस्था से तुलना नहीं कर सकते. ऐसे और भी सम-सामयिक सवालों पर बजरंगदल प्रमुख प्रकाश शर्मा से खास बातचीत.

सवाल- अभी तक आप लोग कहते थे कि बजरंग दल प्रतिक्रिया स्वरूप कार्यवाही करता है. लेकिन अब आपके ऊपर आरोप है कि बजरंग दल हिंसक संगठन हो गया है. इसलिए इस पर प्रतिबंध लग जाना चाहिए?

जवाब- आप बताईये हम हिंसक संगठन कब से हो गये? क्या उड़ीसा में जो कुछ हुआ वह हिंसक नहीं था? एक वयोवृद्ध सन्यासी की हत्या करवा दी गयी. उनका वहां व्यापक प्रभाव था. उन्होंने अपना पूरा जीवन लगाकर वहां जरूरतमंद लोगों के लिए ४० साल काम किया था. अब उनकी हत्या के विरोध में लोग वहां प्रतिक्रिया कर रहे हैं तो इसे आप हिंसा कहेंगे? इसका क्या आधार है?

सवाल- यानी आपका संगठन उसमें शामिल नहीं है?

जवाब- यह पूरी तरह से स्थानीय समाज के लोगों की प्रतिक्रिया है. बाकी जो कुछ कहा जा रहा है वह सीधे तौर पर राजनीतिक खेल है. आगामी चुनावों में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के लिए बजरंग दल को निशाना बनाया जा रहा है.

सवाल- तो क्या बजरंग दल का नाम लेने के पीछे कोई और कारण है?

जवाब- यह उड़ीसा और कर्नाटक की घटनाओं में हमारा नाम बाद में आया है. इसके पहले से यह कोशिश की जा रही थी कि सिमी को बचाने के लिए बजरंग दल को बदनाम करना जरूरी है. इससे चीजें बैलेंस हो जाती हैं. बजरंग दल पर प्रतिबंध की बात तब से शुरू होती है जब से इस देश में कुछ राजनीतिक लोगों ने सिमी का समर्थन शुरू किया. यह उनकी मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति है. उड़ीसा की घटनाओं को उसके साथ जोड़ दिया गया ताकि उनकी बात में और वजन आ जाए.

सवाल- लेकिन कर्नाटक में भाजपा की ही सरकार है और वहां मैंगलौर में जो आदमी पकड़ा गया वह बजरंग दल का है. इससे आप कैसे इन्कार करेंगे?

जवाब- हां, वे बजरंग दल के संयोजक हैं औ उन्होंने जो कुछ सार्वजनिक रूप से कहा वह उनका अपना निजी मत था. उन्होंने जो कुछ कहा उसका संगठन के स्तर पर कोई निर्णय नहीं हुआ था. जब हम लोगों ने उनसे बात की तो उन्होंने कहा कि हां, उनसे गलती हुई है और उन्होंने अपने पद से मुक्त होने का निर्णय ले लिया है. 

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सवाल- क्या आपने उन्हे सच्चाई सार्वजनिक रूप से बोलने का दण्ड दिया?

जवाब- नहीं हमने कोई दण्ड नहीं दिया. संगठन का अपना एक अनुशासन होता है और उन्होंने जो कुछ कहा वह संगठन का अनुशासन भंग करता है. यह बात उन्हें भी समझ में आयी इसलिए उन्होंने खुद पदमुक्त होने का निर्णय लिया. इस बारे में हमारी उनसे बात भी हुई.

सवाल-  तो क्या इससे कर्नाटक में चर्च पर हमलों से बजरंग दल दोषमुक्त हो जाता है?

जवाब- पहली बात वहां हमारी ओर से चर्च पर किसी प्रकार का हमला नहीं हुआ है. हकीकत यह है कि वहां चर्च की ओर से आयोजित प्रार्थना सभाओं में एक पुस्तिका सार्वजनिक रूप से वितरित की गयी जिसका नाम है- सत्यदर्शिनी. इम पुस्तक के पेज नंबर ४८ से ५० पर ऐसे कुछ पैराग्राफ हैं जिनमें हिन्दू देवी-देवताओं के लिए अत्यंत अनादरपूर्ण शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. इन प्रार्थना सभाओं में ईसाईयों के अलावा हिन्दू लोग भी भारी संख्या में आये थे. उन्होंने पढ़ा तो प्रतिक्रिया तो होनी ही थी. इसका समाज और गांव के लोगों ने विरोध किया. 

सवाल- आपने कहा कि जानबूझकर बजरंगदल को बदनाम करने के लिए सिमी के साथ आपकी तुलना की जा रही है? आपके ऐसा कहने का आधार क्या है?

जवाब- आप आईएसआई एजंटों की तुलना किसी राष्ट्रभक्त संगठन के साथ कैसे कर सकते हैं? क्या कोई आधार बनता है? यह इस देश की सेकुलर राजनीति का दुर्भाग्य है कि एक राष्ट्रद्रोही संस्था की एक राष्ट्रभक्त संस्था के समानांतर बताया जा रहा है. इस सेकुलर राजनीति की शुरूआत ७०-८० के दशक में कांग्रेस ने शुरू की थी. कांग्रेस ने ही यह परिपाटी शुरू की थी कि अगर कहीं दंगों के दोषी १० मुसलमानों को पकड़ा जाता था तो मुसलमान नाराज न हो जाएं इसलिए कुछ हिन्दुओं को भी पकड़ लिया जाता था.

सवाल- कानपुर में पिछले महीने बम बनाते हुए दो व्यक्ति मारे गये थे. कहा जाता है कि इसमें एक बजरंग दल का था?

जवाब- जो व्यक्ति मारा गया वह आज से आठ साल पहले बजरंग दल का स्थानीय संयोजक होता था. उसके बाद से हमारा उससे कोई नाता नहीं है. पुलिस उस मामले में जांच कर रही है और जांच पूरी होते ही सच्चाई सबके सामने आ जाएगी. 

सवाल- क्या बजरंग दल अयोध्या और लंका का फर्क भूल गया है?

जवाब- बिल्कुल नहीं. हम जानते हैं कि अयोध्या और लंका में क्या फर्क है. लेकिन हनुमान जी ने अयोध्या में आकर राक्षसों के पैर तो नहीं पकड़ लिये थे? क्या अयोध्या में मंदिरों को तोड़ा जा रहा था, महिलाओं की इज्जत लूटी जा रही थी. अगर अयोध्या में भी ऐसा होता और हनुमान जी चुप रहते तो हम जरूर आपकी बात मान लेतें. जहां भी आततायी होंगे हम उनके साथ एक जैसा ही व्यवहार करेंगे फिर वे अयोध्या में हों या लंका में.

सवाल- क्या अब हिन्दू धर्म के सामने और कोई चुनौती नहीं बची है?

सवाल- मेरा मानना है कि आज हिन्दुओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके खत्म हो जाने की है. उसके अस्तित्व पर संकट है. आप देखिए हिन्दुओं को अपने ही देश में अपने ही तीर्थयात्रियों के लिए १०० एकड़ जमीन लेने के लिए चार महीने आंदोलन करना पड़ता है? इस देश में राम के ही अस्तित्व को नकारा जा रहा है. क्या यह चुनौती नहीं है? इस देश में आज जो राजनीति चल रही है वह हिन्दुओं को समाप्त करने की राजनीति चल रही है. यहां खुलेआम आतंकवादियों का समर्थन करनेवाले दल राजनेता और समर्थक हैं. क्या यह हिन्दुओं के सामने कम बड़ी चुनौती है?

सवाल- क्या आपको नहीं लगता कि आप खुद भी जो कह रहे हैं वह एक खास राजनीतिक मकसद के लिए है?

जवाब- हमारा कोई राजनीतिक मकसद नहीं है. आजादी के बाद ईसाई तीन गुना बढ़े, मुसलमान पांच गुना बढ़े. यह सब ध्यान देने की बात नहीं है? आखिर ऐसा क्या हो रहा है कि एक तरफ वे तेजी से बढ़ रहे हैं और दूसरी ओर हिन्दुओं की संख्या लगातर उसी अनुपात में कम हो रही है. इन बातों को लोगों के सामने लाना क्या गुनाह है?

सवाल- तो आप जो कर रहे हैं उसका आगामी चुनावों में भाजपा को कोई लाभ नहीं होगा?

जवाब- विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल का कोई राजनीतिक एजण्डा नहीं है. अगर संत समाज राजनीतिक रूप से कोई एडण्डा तय करते हैं तो हम निश्चित रूप से संतों के आदेश का पालन करेंगे. बजरंग दल अपनी स्थापना के २५ साल पूरा कर रहा है इसलिए हम अपनी क्षमता का विस्तार करेंगे. इस मौके पर हम देशभर में जाएंगे और जो लोग बजरंग दल को सिमी के समानांतर स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं उनको जनता के सामने बेनकाब करेंगे. फिर इसमें कोई भी राजनीतिक व्यक्ति हो, हम ऐसे राजनीतिक लोगों को जनता के सामने उनका असली चेहरा रखेंगे कि वे कैसे आतंकवाद का समर्थन कर रहे हैं. ये सब भारत के जयचंद हैं जो मुस्लिम तुष्टीकरण के नाम पर देश के टुकड़े करने पर आमादा हैं.   

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मिहिरभोज् on 03 October, 2008 12:58;39
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भारत माता की जय ,वंदेमातरम् का जय घोष लगाने वालों की तुलना सिमी जैसे राष्ट्रदोही संगठन से की जा रही है यह देश की सैक्यूलर राजनीति की विडंबना नहीं तो और क्या है.पूरा कश्मीर हिंदुओं से खाली हो गया तो मीडिया ने इतना नहीं छापा जितना तवज्जो कर्नाटक और उङीसा की घटनाओं को दी गई है,मीडिया लक्ष्मणानंद सरस्वती जो कि अपनी जान हथेली पर लेकर वहां आदिवासी समाज मै जनजागरण कर रहे थे उनकी हत्या का पता देश के दूसरे हिस्सों मैं तब लगता है जब एकाध चर्च जला दिया जाता है ,वो कितने आदरणीय थे उस क्षैत्र मै तो आपके बता दूं कि उनकी शवयात्रा मैं करीब पांच लाख लोग थे संभवतया आजाद भारत की सबसे लंबी शवयात्रा थी....हम पोस्ट गोधरा की बात तो करते हैं पर गोधरा को भूल जाना चाहते हैं...
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Indian on 03 October, 2008 13:23;26
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Dear Mr Prakash Sharma

Sharm magar apko nahin aati. Orissa main ek sanyasi ki hatya bhi hinsa hai to uski pratikriya bhi hinsa hai. Aapko yeh baat nahin samajh aayegi. aapka dekhne ka tareeka hi alag hai. aapk liye to bas eisaayeion ki ya musalmanon ki hinsa hinsa hai baki sab to pratikriya hai aur pratikriya to hinsa nahin hoti. wah kya tark hai.
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संजय बेंगाणी on 03 October, 2008 14:02;02
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मैं तोड़फोड़ व हिंसा का समर्थक नहीं हूँ, मगर मेरा मानना है की सिमी से बजरंगदल या अन्य हिन्दू संगठनो की तुलना करना बेईमानी है.
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विष्‍णु बैरागी on 04 October, 2008 01:10;53
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'आक्रमण ही सबसे बढिया बचाव है ।' 'झूठ बोलो, जल्‍दी बोलो, जोर से बोलो ।' झूठ बोलने वाले को और जमीन पर सोने वाले को कोई कमी नहीं होती । 'उनकी' हिंसा, हिंसा, 'इनकी' हिंसा, राष्‍ट्भक्ति । 'उनके' द्वारा प्रयुक्‍त अपशब्‍द तो राष्‍ट् की अस्मिता का अपमान और 'इनके' द्वारा बरते गए अपशब्‍द, स्‍वाभिमान की रक्षा का प्रयत्‍न ।
ये न तो हिन्‍दू हैं और न ही राष्‍ट्भक्‍त । इन्‍होंने 'हिन्‍दू आतंकवादी' जैसा विशेषण समूचे हिन्‍दू समाज के लिए पैदा कर दिया । हिन्‍दू धर्म के सबसे बडे अपराधी तो यही हैं ।
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sanjay mishra on 06 October, 2008 14:56;45
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bajrang dal is a cultural organisation. it can not become terrorist organisation.
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chandan bangari on 06 October, 2008 16:37;33
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jo log desh ka vibhajan kisi bhi roop me karte hai wo aapni rajneti chamkane ke liye ye sab karte hai.aise logo or sangathano pe ban hona jaruri hai
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Manish on 14 November, 2008 14:23;05
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बजरंग दल की तुलना सिमी से करने से पहले किसी भी दिमाग वाले इंसान को कम-से-कम एक उदाहरण तो ऐसा देना चाहिए जो बजरंग दल और सिमी में समानता दिखाता हो. अगर आपके पास कोई सबूत नहीं है तो कृपया कुछ ना ही बोलें.

और जहां तक प्रतिक्रया की बात है, किसी को क्या लगता है? सिर्फ बजरंग दल के लोग ही थे गोधरा की प्रतिक्रिया में, उड़ीसा और कर्णाटक में सिर्फ बजरंग दल ने ही सारी प्रतिक्रियाएं दी हैं? जी नहीं, ये आम हिन्दू-समाज है जो सदियों से अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को बर्दाश्त करके भी चुप था. और अब इस बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो रही है, और ये बात किसी के गले नहीं उतर रही है. लेकिन सच्चाई यही है. मजबूरी में इंसान को आत्म-रक्षा के लिए कभी-कभी ऐसे कदम उठाने पड़ते हैं और इसे ग़लत कहने वाले पहले ये सोचें कि अगर साबरमती एक्सप्रेस के S-6 में उनके माँ-पिता या भाई-बहन में से कोई जलता तो भी क्या वे ऐसे ही भाषण देते? नहीं, वो इस से कहीं ज्यादा आक्रामक रुख अपनाते....
|| भारत माता की जय ||
|| वन्दे मातरम् ||
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ummed Singh Baid Saadhak on 02 January, 2009 15:58;04
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वाह विष्णु वैरागी को, करें स्वयं की हानि.
सह्रदयता की अति हुई, करते आत्म-ग्लानि.
करते आत्म-ग्लानि, आत्म-रक्षा ना करते.
सेकूलर बनने की खातिर, खुद ही मरते.
कह साधक ये नाम से लगते महात्मा त्यागी.
करें स्वयं की हानि, वाह विष्णु- बैरागी.
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rahul k on 18 May, 2009 00:49;14
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dear indian...yadi aapki ghar me kisi bade bujurg ki hatya kar di jaye aur aap pratikar na kare keval isliye ki pratikar ek hinsa he... to aapko to dub ke mar jana chahiye....
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sandeep on 21 May, 2010 01:08;26
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उड़ीसा में संत लक्ष्मणानंद का कतल कर दिया गया [जवाब में अगर बजरंग दल करवाई करता है तो क्या गलत है [हिन्दुओ को बदनाम किया जा रहा है [साध्वी प्रज्ञा को बेवजह फसाया जा रहा है [बजरंग दल ग्रेट है
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