आमने-सामने
दलित के हाथ में सत्ता नहीं देना चाहती कांग्रेस- अली अनवर
अली अनवर पश्मान्दा मुस्लिम महाज के नेशनल प्रेसीडेन्ट हैं और राज्यसभा में जद (यू) के मुख्य सचेतक हैं. रंगनाथ मिश्रा आयोग की रिपोर्ट को सदन में प्रस्तुत करवाने में अकेले अली अनवर की ही भूमिका है. पिछले दो साल से लगातार वे इस रिपोर्ट को सदन में पेश किये जाने के लिए अभियान चला रहे थे. रंगनाथ मिश्रा आयोग के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर हमने उनसे लंबी बात की. प्रस्तुत है अली अनवर से पूरी बातचीत-
सत्ता प्रतिष्ठान का दस्तावेज है लिब्राहन की रिपोर्ट-चंपत राय
चंपत राय विश्व हिन्दू परिषद के संयुक्त महामंत्री हैं. लिब्राहन आयोग के दोषियों की सूची में चंपत राय का भी नाम है. लेकिन चंपत राय का कहना है कि उन्हें एक बार भी अपना पक्ष रखने के लिए आयोग ने नहीं बुलाया. रिपोर्ट में चंपत राय को स्थानीय ठेकेदार बताया गया है जबकि उस समय भी वे विश्व हिन्दू परिषद का काम देख रहे थे. प्रस्तुत है चंपत राय से बातचीत जिसमें वे लिब्राहन आयोग पर ही कई तरह के सवाल उठा रहे हैं.
कांग्रेस मराठी माणुस को बांट रही है-उद्धव ठाकरे
शिवसेना की ओर से इस बार महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की सारी कमान उनके कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के हाथ में है. शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे की अस्वस्थता को देखते हुए यह चुनाव न सिर्फ शिवसेना के लिए बल्कि खुद उद्धव ठाकरे के लिए भी परीक्षा की घड़ी है. उद्धव ठाकरे इस चुनाव को महाराष्ट्र की मुक्ति का चुनाव मान रहे हैं और उनका कहना है कि कांग्रेस प्रदेश में मराठी माणुस की मानसिकता के साथ खिलवाड़ कर रही है और एक साजिश के तहत उसे बांट रही है. मराठी सामना के कार्यकारी संपादक संजय राऊत ने उनसे विस्तृत बात की जिसका संपादित हिस्सा हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं- संपादक...उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी भाजपा - सुदर्शन
के.एस. सुदर्शन संघ के लोकप्रिय व्यक्तित्व के रूप में प्रतिष्ठित हैं। नौ साल तक आरएसएस के सरसंघचालक रहे सुदर्शन के काल में ही भाजपा ने सत्ता संभाली. जाहिर है वह वक्त भाजपा संघ संबंधों को लेकर सबसे संवेदनशील वक्त था जब कई बार संघ और भाजपा आमने-सामने आ खड़े हुए थे. अब सुदर्शन सरसंघचालक तो नहीं है लेकिन भाजपा को लेकर उनके अपने अनुभव क्या रहे हैं? संघ और भाजपा के बीच बढ़ी दूरियों के लिए कौन जिम्मेदार हैं, ऐसे ही कई सारे सवालों के साथ अवधेश आकोदिया ने उनसे बात की....भारतीय दृष्टि से ही निकलेगा समस्याओं का समाधान - समदौंग रिन्पोछे
यह महज संयोग ही नहीं है कि सरकार से इतर जो लोग विरोध के स्तर तक समाज कार्य में सक्रिय हैं उनमें से अधिकांश कहीं न कहीं महात्मा गांधी से प्रेरित हैं. 15 अगस्त की आधीरात जब देश आजादी का जश्न मना रहा था तो महात्मा गांघी बंगाल में बंटवारे से पैदा हुए शूल पर मरहमपट्टी कर रहे थे. आजादी के बाद भी समाज का वह शूल और नासूर कम नहीं हुआ है बल्कि और अधिक जटिल और भयावह हो गया है. इस शूल और नासूर को मिटाने के लिए जो लोग काम कर रहे हैं उनमें निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री समदौंग रिन्पोछे भी हैं. हिन्द स्वराज के लेखन के सौ साल पूरे हो गये हैं. स्वतंत्रता दिवस के इस मौके पर हमने समदौंग रिन्पोछे से बातचीत की. ...दंगों की राजनीति कांग्रेस ने शुरू की- जरनैल सिंह
देश विदेश में सूचनाओं से जुड़े किसी व्यक्ति के लिए जरनैल सिंह शायद ही अपरिचित नाम हो. दिल्ली दंगों के मसले पर चिदंबरम पर जूता फेंककर उन्होंने न केवल राजनीति को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का संदेश दिया बल्कि मीडिया को भी मुद्दों पर पत्रकारिता करने के लिए प्रेरित किया. जरनैल सिंह जिस जज्बे और मुद्दे को लेकर पत्रकारिता में आये थे उसी जज्बे और मुद्दे के कारण वे पत्रकारिता से छुट्टी पर भेज दिये गये. उनका वह जज्बा और मुद्दा क्या है, कांग्रेस के बारे में वे क्या सोचते हैं और वे अब क्या करेंगे जैसे अनेकों सवालों पर विस्फोट न्यूज नेटवर्क ने उनसे बात की.
फिर लौटेंगे कार्टून के दिन - काक
हम अखबार के कोने में कार्टून न देखें तो अखबार अधूरा लगता है. लेकिन क्या हमने कभी किसी कार्टूनिस्ट की जिंदगी में झांककर देखने की कोशिश की है कि उसके अपनी जिंदगी का कोना कितना पूरा या अधूरा है? काक हम सबके लिए सुपरिचित कार्टूनिस्ट हैं. काकदृष्टि ब्लिट्ज के जमाने से अपने पाठकों को दृष्टि देती आयी है. एक और मशहूर कार्टूनिस्ट चंदर की काक से की गयी बातचीत.
भाजपा, कांग्रेस सबने धोखा दिया- कर्नल बैंसला
देश विदेश में अपनी और कौम की पहचान बनाने के बाद , सफलता के मंत्र चुनिंदा ऐतिहासिक आन्दोलनों से जुडी पुस्तकों के पन्नों में ढूंढते हुए कर्नल किरोडी बैसला को एक बार फिर से सर्व समाज को साथ लेकर आरक्षण की किसी बड़ी जंग के लिए इन दिनों अपने आवास पर आराम के साथ अध्ययन, मनन और चिंतन करते देखा जा सकता है। दिल में 'शोले ओर शिकायतों' का तूफान जब उबाल लेता है तो अपनी गलतियॉ पूछने लग जाते है, तो किताबों से इतिहास के उदाहरण देकर खुद को बेकसूर साबित करने का कोई मौका भी नहीं चूकते। महापंचायत के बाद अभी उन्हें मुख्यमंत्री के बुलावे का इंतजार है। यह बात दीगर है कि उनका लक्ष्य खुद उनको ही कोसों दूर दिखाई दे रहा है। उनका मानना है कि उनके पास जो भी है पाने के लिए है खोने को कुछ नही है। जीवन के कुछ अनछुए बिन्दुओं पर उनसे हुई एक बेबाक बातचीत-
आपरेशन ब्लू स्टार के जख्म भरे नहीं हैं- दलजीत सिंह
दलजीत सिंह बिट्टू पंजाब के उन प्रभावी अलगाववादी नेताओं मे से हैं जिनका युवाओं पर काफी प्रभाव है. अस्सी और नब्बे के दशक में वे करीब 10 साल भूमिगत रह कर अलग सिख राष्ट्र आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाते रहे. अप्रैल 1996 में गिरफ्तार होने के के बाद वे करीब 10 साल तक नाभा और तिहाड़ जेल में रहे. जेल से बाहर आने के बाद दलजीत सिंह फिर से युवाओं को एकजुट कर लोकतांत्रिक तरीके से अलग सिख राष्ट्र की मांग कर हैं. आपरेशन ब्लू स्टार से लेकर मौजूदा आंदोलन के बारे में अनिल पांडेय ने उनसे बातचीत की.
मेरा कोई राजनैतिक एजेंडा नहीं है-बाबा रामदेव
चुनावों का मौसम आया तो बाबा रामदेव भी योग शिविरों को छोड़कर स्भाभिमान अभियान पर निकल पड़े. हालांकि पूछने पर वे यही कहते हैं कि उनका कोई राजनीतिक एजेण्डा नहीं है लेकिन पूरे चुनाव के दौरान वे जिस तरह से सक्रिय रहे, उससे लगता है कि वे भी अपनी खुद की राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं. यह बाबा रामदेव की अपनी कार्यशैली है. उनके कार्य और कार्यशैली दोनों पर समय-समय पर हमने जो सवाल खड़े किये हैं उन्हीं सवालों को लेकर बाबा रामदेव से अवधेश आकोदिया से खुलकर बात की। प्रस्तुत हैं बातचीत के संपादित अंश -
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...


