मैं अकेला आया हूं और निरंतर चलता रहूंगा- नितिन गडकरी
भारतीय जनता पार्टी के नवनियुक्त अध्यक्ष नितिन गडकरी ने गुरुवार को नई दिल्ली में विधिवत भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान संभाली. इस मौके पर उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस में पत्रकारों से भी बातचीत की. लगभग एक घण्टे चली इस प्रेस कांफ्रेस में नितिन गडकरी से पत्रकारों ने खुलकर सवाल पूछे. इस प्रेस कांफ्रेस में पूछे गये कुछ महत्वपूर्ण सवाल और उस पर गडकरी के जवाब यहां प्रकाशित कर रहे हैं- संपादक
सवाल- कहा जाता है कि आप निर्णय लेने के मामले में काफी जिद्दी हैं. इसमें कितनी सच्चाई है?
जवाब- मैं हमेशा कहता हूं कि किसी भी कार्यकर्ता से चूक हो सकती है लेकिन किसी को भी एक गलती करने का अधिकार है. वह एक गलती को दोबारा रिपीट न करे. फैसले लेने के समय मैं न तो किसी के दबाव में आता हूं और न ही परिणाम की चिंता करता हूं. जो सही है उसे ठोक कर करता हूं लेकिन ऐसा करते वक्त मैं सबकी सहमति से काम करने की कोशिश करता हूं. मैं मानता हूं कि किसी की पसंद नापंसद पर निर्णय नहीं होने चाहिए. और कार्यकर्ता के परफार्मेन्स के आधार पर कोई निर्णय होना चाहिए.
सवाल- आपने अभी हाल में कहा है कि भाजपा के कुछ ऐसे कार्यकर्ता हैं जो पहले पार्टी के लिए काम करते रहे हैं और पार्टी से उनको फायदा हुआ है लेकिन अब वे पार्टी में नहीं हैं. क्या उन्हें पार्टी में आप दोबारा लाएंगे?
जवाब- अभी तक उन लोगों से ऐसा कोई प्रस्ताव आया नहीं है. कभी आता है तो जरूर उसके ऊपर पार्टी सोचेगी.
सवाल- जिन राज्यों में जहां भाजपा की कोई खास उपस्थिति नहीं है वहां अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए क्या करनेवाले हैं?
जवाब- ऐसे राज्यों में जहां भाजपा की कोई खास मौजूदगी नहीं है वहां भाजपा को मजबूत करने के लिए मेरे पास एक प्लान है और हम उस पर काम करेंगे.
सवाल- राजनाथ सिंह का एक बयान आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि अध्यक्ष के आसन को चुनौती नहीं दिया जाना चाहिए और इसी से मिलता जुलता बयान लालकृष्ण आडवाणी का आया है कि भारतीय राजनीति में व्यक्ति का एक स्थान है. क्या आपके कार्यकाल के दौरान व्यक्ति संगठन पर महत्वपूर्ण होगा? क्या आप इन दोनों बयानों से सहमत हैं?
जवाब- दोनों जो कहेंगे मैं उसे मानूंगा. दोनों हमारे वरिष्ठ नेता हैं.
सवाल- महाराष्ट्र की भाजपा नेता विहीन हो गयी है क्योंकि वहां के तीनों महत्वपूर्ण नेता दिल्ली आ गये हैं. क्या वहां कोई सेकेण्ड लाइन लीडरशिप है?
जवाब- महाराष्ट्र में कोई नेता विहीन की स्थिति नहीं है. सबसे बड़ा कार्यकर्ता बूथ पर काम करता है. मैं खुद ऐसा ही हूं. हमसे पहले प्रमोद जी थे, फिर गोपीनाथ जी आये और उसके बाद में मैंने काम संभाला. तो यह कहना गलत है कि वहां नेता नहीं है. हमारे पीछे वहां अनेक लोग हैं.
सवाल- भाजपा में कई बड़े कद के नेता हैं. आपको नहीं लगता है इन बड़े नेताओं के कद के बोझ तले आपका व्यक्तित्व दब जाएगा?
जवाब- भाजपा का नेतृत्व इतना अच्छा है कि दो दिन मैंने जो अनुभव किया वह बहुत अच्छा है. ये सभी नेता हमसे बड़े हैं और हमने उनका पैर छूकर आशिर्वाद लिया है. इसलिए सभी नेता मुझे कहते हैं कि वे सब मेरे पीछे खड़े हैं. वे मुझसे बड़े हैं और मेरी चिंता कर रहे हैं. मुझे कोई चिंता नहीं है कि मेरा कद दब जाएगा.
सवाल- आपके पदाधिकारियों में क्या नौजवानों को ज्यादा मौका मिलेगा? आपकी टीम का स्वरूप क्या होगा?
जवाब- टीम बनाने की प्रक्रिया चल रही है. लेकिन मेरी पहली प्राथमिकता है जो कि काम करेगा उसे मौका मिलेगा. रामलाल जी देश के सभी राज्यों से भाजपा से नामों को मंगा रहे हैं. हमारी कोशिश होगी कि हम कार्य वितरण और विकेन्द्रीकरण के आधार पर काम कर सकनेवाले कार्यकर्ताओं को मौका मिलेगा.
सवाल- राजस्थान में पहले लिया गया फैसला दबाव में आपको बदलना पड़ा?
जवाब- राजस्थान के बारे में हमने जो निर्णय लिया है उसमें किसी प्रकार का दबाव नहीं था. हम सब पांच छह घण्टे के लिए बैठे और हमने एक नतीजा निकाला. इसका परिणाम यह हुआ कि प्रदेश में पंचायत के चुनाव में सभी नेता मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. फिर जल्द ही मैं वहां के नेताओं से मिलनेवाला हूं. इसलिए यह कहना कि हमारे ऊपर कोई दबाव था यह सही नहीं है. राजस्थान में अब कोई समस्या नहीं है. मेरे लिए यह पहली समस्या थी और बहुत अच्छी तरह से सुलझाया गया.
सवाल- मंदिर आंदोलन के बाद अब भाजपा कौन सा नया आंदोलन शुरू करेगी?
जवाब- आपका सवाल महत्वपूर्ण है. लेकिन मैं इस पद पर नया आया हूं. थोड़ा लोगों से बातचीत करके फिर आपको बताएंगे.
सवाल- भाजपा के तीन प्रमुख मुद्दे रहे हैं. समान नागरिक संहिता, धारा 370 और राम मंदिर. अब आगे आपका इन मुद्दों के बारे में क्या रुख होगा?
जवाब- भाजपा का अध्यक्ष बदलने से बाकी कुछ बदलनेवाला नहीं है. इन मुद्दों पर पहले जो भाजपा का रुख रहा है वही आगे भी रहेगा.
सवाल- आपके निर्णय प्रक्रिया पर आरएसएस की कितनी छाया होगी?
जवाब- संघ हमारे निर्णय पर कोई छाया नहीं डालता.
सवाल- भाजपा में व्यक्तिवाद सबसे अधिक है. पिछले चार साल में यह और प्रबल होकर उभरा है. आप अनुशासन की बात कर रहे हैं लेकिन भाजपा में अनुशासनहीनता ही सबसे बड़ी बीमारी है. उसे दूर करने के लिए आप क्या करनेवाले हैं?
जवाब- अनुशासनहीनता को हम लिखने पढ़ने की बात नहीं मानते बल्कि व्यवहार का विषय मानते हैं. इसलिए अनुशासनहीनता को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
सवाल- आप परफार्मेंश की बात कर रहे हैं. लेकिन पिछले कुछ दिनों में इसका उलटा देखने को मिला है. राजनाथ सिंह जी उत्तर प्रदेश से आते हैं और भाजपा नेस्तनाबूत हो गयी लेिकन वे भाजपा के अध्यक्ष बन गये. सुषमा स्वराज हरियाणा से आती हैं और पार्टी की संसदीय दल की नेता हो गयी लेकिन हरियाणा में पार्टी का कोई जनाधार नहीं है. आप अध्यक्ष बने लेकिन महाराष्ट्र में ही भाजपा हार गयी. यह किस प्रकार का परफार्मेन्स है? आपकी बात और वास्तविकता में कोई तारतम्य है?
जवाब- देखिए जब मैं परफार्मेन्स की बात करता हूं तो मेरा कहना है कि कार्यकर्ता को जो जिम्मेदारी दी गयी उसे वह पूरा करे. लेकिन आप जो कह रहे हैं वह चुनावी राजनीति का हिस्सा है. और जब हार होती है तो उसके लिए कोई एक व्यक्ति दोषी नहीं होता है. विजय के पिता अनेक होते हैं लेकिन पराभव अनाथ होता है. हार है तो किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि इसकी जिम्मेदारी सबकी होती है. इसलिए किसी व्यक्ति विशेष को हम दोषी नहीं ठहरा सकते.
सवाल- आपने कहा है कि सब नेता आपके पीछे खड़े हैं. लेकिन यही नेता पीछे पड़ गये तो आप क्या करेंगें?
जवाब- मुझे ऐसा अनुभव हो रहा है कि सभी नेता मेरे पीछे खड़े हैं फिर आपको ऐसा क्यों लगता है कि वे मेरे पीछे पड़ जाएंगे?
सवाल- आप जो कह रहे हैं उससे तो लग रहा है कि आप भाजपा को राजनीतिक दल की बजाय एक गैरसरकारी संगठन के रूप में बदल देना चाहते हैं. क्या यह सच नहीं है?
जवाब- देखो मैंने ऐसा कभी नहीं कहा. मैं सिर्फ यह कह रहा हूं कि सत्ता की राजनीति को समाज से जोड़ने की जरूरत है. देखिए सत्ता की राजनीति तो होती रहेगी लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि राजनीति सामाजिक बदलाव का सबसे सशक्त माध्यम हो सकता है. इसलिए हम सत्ता की राजनीति को समाज से जोड़ने की बात करते हैं.
सवाल- एनडीए को साथ लेकर चलने की बात आप कर रहे हैं. लेकिन आपके ही राज्य में आपकी सहयोगी पार्टी शिवसेना से आपके संबंध तल्ख हैं. विदर्भ के मुद्दे पर भी आपकी और शिवसेना की राय अलग है. आप क्या कहेंगे?
जवाब- ऐसा कुछ नहीं है. बाला साहेब ठाकरे राजनीति में जिन कुछ लोगों को चाहते हैं उनमें से एक मैं भी हूं. जब मैं मुंबई जाऊंगा तो उनसे मिलने भी जाऊंगा.
सवाल- आपने कहा है कि राजनीति में क्रेडिबिलिटी का संकट है. आपको लगता है कि आप इतना बड़ा दिल लाये हैं कि आप सिर्फ क्रेडिबिलिटी के आधार पर फैसला कर पायेंगे?
जवाब- कल क्या होगा इसके बारे में कुछ सोचता नहीं और भविष्य की कोई बहुत योजना भी नहीं बनाई है. मैं चलता रहूंगा. जो अच्छा कहे वह भी मेरा. जो बुरा कहे वह भी मेरा. मैंने राजनीति में कभी झूठ नहीं बोला है और मैं हमेशा खुलेआम बोलकर अपनी योजना पर काम करता हूं. मैं अकेला आया हूं और चलता रहूंगा. मेरे पास गंवाने लायक कुछ नहीं है. मैं अपना काम करता रहूंगा.
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नहीं रुकना नहीं थकना सतत् चलना सतत् चलना
यही तो मन्त्र है अपना शुभंकर मन्त्र है अपना
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