क्रिकेट बड़ा न भइया सबसे बड़ा रुपइया
20-20 विश्वकप में भारत की बुरी पराजय के बावजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में कोई हंगामा नहीं हुआ। 2007 में जब भारतीय टीम एकदिवसीय विश्वकप में बुरी तरह हार कर लौटी थी तब मीडिया और बोर्ड सहित संसद में भी हंगामा खड़ा हुआ था। इस बार टीम के कोच गैरी कस्टर्न बयान दे रहे हैं कि विश्वकप के ठीक पूर्व आईपीएल का टूर्नांमेंट कराना भारतीय खिलाड़ियों को थकाने का सबसे बड़ा कारण बना।
श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख और पूर्व खिलाड़ी अर्जुन रणतुंगा ने अपने एक बयान में आश्चर्य व्यक्त किया कि `बीसीसीआई ने एक प्राइवेट टूर्नांमेंट के लिए राष्ट्रीय हितों के साथ समझौता क्यों किया? अर्जुन रणतुंगा को राष्ट्रीय हित की चिंता सता रही है। हर मुद्दे पर अपनी नाक घुसानेवाले भारी के पूर्व क्रिकेट कप्तान द्वय सुनील गावस्कर और रवि शास्त्री चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? क्योंकि ये दोनों बीसीसीआई की मोटी कमाई में मलाई छानकर ही जिंदा हैं। इनके लिए राष्ट्रीय हित का कोई मायने नहीं। दोनों आईपीएल की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य हैं। दोनों को आईपीएल मैचों के प्रसारण अधिकार प्राप्त करने वाले चैलनों में बीसीसीआई स्वयं कमेंटेटर के तौर पर उपलब्ध कराने का अनुबंध देती है। यही दोनों बीसीसीआई की आंखों के सितारे हैं। जिन अखबारों में बीसीसीआई अपना प्रचार कराना चाहती है वहां इन्हीं दोनों के स्तंभ प्रकाशित होते हैं। सुनील गावस्कर एकदिवसीय और 20-20 के मापदंड पर इस देश के सबसे घटिया खिलाड़ी साबित होते। 20 ओवरों में वे 20 रन बनाने की भी कभी औकात नहीं रखते थे। लगभग यही हाल रवि शास्त्री की भी बल्लेबाजी का रहा। लेकिन ये दोनों क्रिकेट के सबसे बड़े विशेषज्ञ हैं। बीसीसीआई मेहरबान तो शास्त्री-गावस्कर पहलवान। बीसीसीआई को रवि शास्त्री और सुनील गावस्कर की सेवाएं क्यों लगी हैं? क्योंकि ये दोनों क्रिकेट के सबसे बड़े गिरोहबाज हैं और इन दोनों गिरोहबाजों ने मौके-बेमौके भारत में क्रिकेट का गौरव बढ़ाने वाले कपिलदेव के पीठ पर छुरा भोंकने का काम किया है। 1983 में कपिलदेव जब विश्वकप जीतकर ले आए थे उसके तत्काल बाद उन्हें बदनाम करने की मुहिम इन्हीं सुनील गावस्कर ने शुरू की थी।
कपिलदेव के नाम लगातार 100 टेस्ट मैच खेलने का रिकार्ड न दर्ज हो जाए, इसलिए सटोरियों से मिलकर उन्हें टेस्ट मैच से `ड्रॉप´ करने का पराक्रम भी गावस्कर के नाम पर ही दर्ज रहा है। बीसीसीआई को विश्वकप जीतने से कहीं ज्यादा आईपीएल खेलना क्यों महत्वपूर्ण लगता है? क्योंकि बीसीसीआई ने आईपीएल के माध्यम से अकूत धन जमा किया है। आईपीएल की टीमों की नीलामी से उसे करोड़ों की कमाई हुई है। सबसे सस्ती टीम राजस्थान रॉयल्स 67 मिलियन डॉलर में नीलाम हुई थी। जबकि मुंबई इंडियंस की नीलामी से बीसीसीआई को 112 मिलियन डॉलर प्राप्त हुए थे। सोनी डब्लएजी को 10 वर्षों के लिए आईपीएल के प्रसारण का अधिकार 62 मिलियन डॉलर प्रतिवर्ष के दर से दिया गया था। मार्च 2009 में बीसीसीआई ने सोनी के साथ इस सौदे पर फिर से मोल-तोल किया और यह दर अब 1.6 बिलियन डॉलर कर दी गई है। आईपीएल शुरू किए जाने के पहले बोर्ड की कमाई और आज बोर्ड की हो रही आय में व्यापक अंतर है। बोर्ड की बैलेंसशीट के अनुसार वित्त वर्ष 2004-05 में बोर्ड को कुल 42 मिलियन डॉलर की आय हुई थी। आईपीएल के पहले सीजन में सिर्फ टेलीविजन प्रसारण के अधिकार से 67 मिलियन डॉलर की आय हुई। आईपीएल सीजन-2 में यह आय 1.6 बिलियन डॉलर हो गई। स्पष्ट है कि आईपीएल शुरू करने के पहले बोर्ड की कुल आय की तुलना में आईपीएल के सिर्फ प्रसारण अधिकार से चार गुना कमाई हो रही है। ऐसे में ललित मोदी भारतीय टीम को सोने का अंडा देने वाली मुर्गी समझकर अगर इकट्ठे हलाल करा दें तो भी बीसीसीआई के बोर्ड में कोई हंगामा नहीं मचता। हंगामा करेगा कौन?
बीसीसीआई को वैसे तो गैर मुनाफा वाली संस्था करार दिया जाता है लेकिन असलियत कुछ और है। इन दिनों बीसीसीआई के सेक्रेटरी एन. श्रीनिवासन हैं। ये महोदय चेन्नई सुपर किंग्स के मालिक हैं। सनद रहे कि टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ही चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान हैं। इस समय राष्ट्रीय टीम के मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत हैं। ये किसी जमाने में भारतीय टीम के गैर भरोसेमंद सलामी बल्लेबाज हुआ करते थे। श्रीकांत टीम इंडिया के चयनकर्ता के साथ-साथ इन दिनों चेन्नई सुपरकिंग्स के ब्रांड एंबेसडर भी हैं। निश्चित तौर पर उन्हें चेन्नई सुपरकिंग्स की ओर से मोटी कमाई प्राप्त होती होगी। जब किसी गैर मुनाफावाली संस्था का कोई अधिकारी उसी संस्था के किसी उपक्रम से मुनाफा कमा रहा होगा तो निश्चित तौर पर उसकी निरपेक्षता संदिग्ध रहेगी। इन दिनों जो टीम वेस्टइंडीज खेलने गई है उसमें चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाड़ियों की भरमार है। टीम इंडिया की कप्तानी का जिम्मा स्वयं महेंद्र सिंह धोनी पर है जो कि चेन्नई सुपर किंग्स के भी कप्तान हैं। धोनी के अलावा इस टीम में सुरेश रैना, एस. बद्रीनाथ को भी टीम में स्थान मिला है। इसके अलावा दक्षिण के खिलाड़ियों में मुरली विजय और अभिषेक नायर को भी दक्षिण भारतीय होने का ही लाभ प्राप्त हुआ है। श्रीनिवासन और कृष्णमाचारी श्रीकांत की जोड़ी ने टीम इंडिया के चयन में जो पक्षपात पूर्ण रवैया अपना रखा है उसके लिए कोई हंगामा क्यों नहीं खड़ा करता? हंगामा कौन खड़ा करे। हर किसी ने समय-समय पर बहती गंगा में हाथ धोने का काम किया है। विजय माल्या इन दिनों बीसीसीआई की मार्केटिंग कमेटी के सदस्य हैं। मार्केटिंग कमेटी बीसीसीआई की सबसे मलाईदार कमेटी मानी जाती है। ये खुद रॉयल चैलेंजर्स ऑफ बंगलौर के मालिक भी हैं। टीम इंडिया के कार्यक्रमों में मार्केटिंग कमेटी की भूमिका अति महत्वपूर्ण हुआ करती है। जब खुद विजय माल्या को यह तय करना होगा कि आईपीएल खेला जाय या नहीं, अपने मुनाफे का ख्याल रखेंगे या टीम इंडिया की प्रतिष्ठा का? क्रिकेट पर आर्थिक लाभ पहुंचाने का गणित कितना हावी है इसका अंदाज आईपीएल के प्रसारण और वेस्टइंडीज के दौरे पर गई भारतीय टीम के मैचों के प्रसारण की विज्ञापन दरों से आसानी से लगाया जा सकता है। आईपीएल के मैचों के प्रसारण का अधिकार सोनी-डब्लूएसजी के पास था। कैरेबियाई जमीन पर खेले जाने वाले मैचों के प्रसारण का अधिकार टेन स्पोर्ट्स के पास है। टेन स्पोर्ट्स में जी टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा की भागीदारी है। बीसीसीआई के फेवरेट सूची से सुभाष चंद्रा बाहर हैं। प्रसारण अधिकारों के लिए 2005 में हुई लड़ाई में सुभाष चंद्रा शरद पवार की तिरछी नजर के शिकार हो गए। प्रसारण अधिकार सोनी और निंबस टेलीविजन के हरीश थवानी के नए चैनल नियो स्पोर्ट्स को मिल गया। इससे नाराज सुभाष चंद्रा ने बीसीसीआई के बागी कपिलदेव को साथ लेकर इंडियन क्रिकेट्र्स लीग आईपीएल का गठन किया। भारत की धरती पर 20-20 क्रिकेट को लोकप्रिय बनाने का और क्रिकेटरों को लंबी कमाई कराने का फार्मूला सुभाष चंद्रा और कपिलदेव की जोड़ी ले आई। बीसीसीआई के संचालकों को लगा कि भारतीय क्रिकेट पर उनका एकाधिकार समाप्त हो सकता है। शरद पवार ने तुरंत तुरूप का इक्का फेंक कर आईपीएल क्रिकेट की संकल्पना को आगे बढ़ा दिया।
आईपीएल का कमिश्नर राजस्थान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष ललित मोदी को बनाया गया। कारपोरेट जगत में मारवाड़ी समुदाय के प्रभाव को सुभाष चंद्रा अकेले दोहन करने में कामयाब न हो पाए इसलिए ललित मोदी को आगे बढ़ाया गया। ललित मोदी भारतीय जनता पार्टी नेत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के करीबी हैं। शरद पवार ने इस लड़ाई में अरूण जेटली को भी अपने साथ ले लिया। भारतीय जनता पार्टी में सुभाष चंद्रा का व्यापक प्रभाव रहा है। उनके इस प्रभाव को निस्तेज करने के लिए पवार ने जेटली-सिंधिया के प्रभाव का सदुपयोग किया। बीसीसीआई ने आईसीएल खेलनेवाले खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय टीमों में प्रवेश पाने से प्रतिबंधित कर दिया। इससे आईसीएल को झटका लगना स्वाभाविक था। अब आप बीसीसीआई की आर्थिक मार को भी देखें। आईपीएल सीजन-2 के मैचों का सोनी को जब प्रसारण अधिकार मिला तब क्रिकेट की लोकप्रियता उफान पर थी। ऐसे में सोनी सेटमैक्स को आईपीएल के प्रसारण के दौरान दस सेकेंड के विज्ञापन के स्पॉट 2.8 लाख रूपए से लेकर तीन लाख रूपए तक के भाव में बिका। विश्वकप 20-20 में भारतीय टीम की दुर्गति ने उसकी लोकप्रियता को बुरी तरह से झटका दिया। सुभाष चंद्रा के टेन स्पोर्ट्स के पास वेस्टइंडीज, श्रीलंका, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और जिंबाव्बे में होने वाले मैचों के प्रसारण अधिकार हैं। टीम इंडिया की अलोकप्रियता के चलते अब टेन स्पोर्ट्स को 10 सेकेंड के विज्ञापन के लिए 1.25 लाख रूपए से अधिक का भाव नहीं मिल रहा है। मतलब साफ है कि सोनी सेटमैक्स ने आईपीएल में जो कमाई की टेन स्पोट्Zस वेस्टइंडीज के दौरे में उसकी 40 फीसदी कमाई कर पाने में कामयाब नहीं हो पाएगी। वेस्टइंडीज के अलावा टेन स्पोट्Zस के पास जिन देशों में होने वाले मैचों के प्रसारण अधिकार हैं उन देशों में जल्द ही भारतीय टीम का कोई और दौरा नहीं होना है। यानी साफ है कि टेन स्पोर्ट्स की झोली में टीम इंडिया की तरफ से कुछ खास नहीं जाएगा। बीसीसीआई जिसे पसंद नहीं करती उसे वह घाटे में डालने का हर तरह का इंतजाम कर देती है। बीसीसीआई क्रिकेट से कहीं ज्यादा कमाई की तिकड़मों में अपना समय गंवाती है। उसके लिए न राष्ट्र निष्ठा बड़ी है, न राष्ट्रीय गौरव बड़ा है उसके लिए सबसे बड़ा है सिर्फ और सिर्फ रुपैया।
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- आतंकवाद की राजनीति और मीडिया
- राजनीतिक हिन्दुत्व पर दिग्गी का दांव
- कृष्णं वन्दे जगतगुरुम्
- हरिप्रसाद का लोकतंत्र 'हठ'
- 'हिंदुस्तान' ने पूर्णिया को शर्मसार कर दिया
- सुखाड़ का शिकार हो गया बिहार
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