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विकास के पथ पर बिहार

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यह बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित किसी विज्ञापन की पंक्तियां नहीं हैं बल्कि वो तथ्यात्मक सच्चाई है जो भारत सरकार का सांख्यिकी विभाग कह रहा है. सांख्यिकी विभाग ने विकास दर के जो ताजा आंकड़े जारी किये हैं उसमें बताया है कि बिहार गुजरात के बराबर विकास कर रहा है और बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत से भी ढाई फीसदी अधिक है.

केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन के ताजा रपट को यदि सच मानें तो बिहार का विकास दर 11.03 फीसद है जो गुजरात के विकास दर  11.05 फीसद से मात्र 00.02 फीसद कम है, पर राष्ट्रीय औसत जोकि 8.49 फीसद है से 2.54 फीसद अधिक है। रपट प्रवासी बिहारी एवं गैर बिहारी दोनों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है, किन्तु है यह शत -प्रतिशत सही। बिहार से अलग हुए झारखंड का विकास दर राष्ट्रीय औसत से भी कम 8.45 फीसद है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तामिलनाडु, मध्यप्रदेश, कर्नाटक इत्यादि राज्य भी विकास के मामले में बिहार से पीछे चले गये हैं।

बीमारु राज्य के नाम से जाना जाने वाले बिहार में यह बदलाव तब है, जब वितीय वर्ष 2003-04 में यहाँ 5.15 फीसद का नकारात्मक विकास दर था। नीतीश कुमार ने हमेशा सम्पूर्ण विकास की बात की, जोकि कृषि, स्वास्थ, शिक्षा और अन्यान्य आधारभूत क्षेत्रों में विकास करके ही संभव था। वर्तमान में इन क्षेत्रों में आप विकास को आंकड़ों की बजाए अपनी खुली आँखों से देख सकते हैं। कृषि क्षेत्र में चार सालों में लगातार सुधार का ही नतीजा है कि बिहार विकास के इस उँची दर को पा्रप्त कर सका है। उत्पादन भी बढ़ा है और कृषि उत्पादों को बाजारों तक पहुँचाने के लिए सड़क भी बनी है। गाँव निकटतम तहसील स्थल से सड़क मार्ग द्वारा लगातार जुड़ते चले जा रहे हैं। नालंदा जिले के हिलसा प्रखंड के पखनपुर गाँव में तकरीबन 25 सालों से बिजली और सड़क नहीं थी। आज वहाँ विकास के दोनों वाहक मौजूद हैं। यह तो सिर्फ बानगी भर है।

पाँच साल पहले कावंर लेकर सड़क मार्ग से देवघर जाने के लिए कावंरिये कई बार सोचते थे। अब सावन के महीने में आप कावंरियों के हुजूम को सड़क मार्ग से जाते हुए देख सकते है। आज बिहार से कई गुना खराब झारखंड के सड़क मार्ग हैं।  झारखंड में प्रवेश करते ही इस फर्क को आप महसूस कर सकते हैं। जिन बिहारियों की आर्थिक स्थिति अच्छी है, वे प्रतियोगिता परीक्षा या उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा से अव्वल रहे हैं। मीडिया से लेकर हर क्षेत्र में इन बिहारियों ने सफलता के झंडे गाड़े हैं। साक्षरता के कम प्रतिशत के कारण जरुर बिहार सर्वदा चर्चा में रहा है। इसका मूल कारण बिहार में जनसंख्या का ज्यादा होना रहा है। स्थिति दयनीय होने के बावजूद भी नीतीश सरकार ने इस दिशा में सकारात्मक कार्य किये हैं।

हर पाँच गाँव पर एक प्राथमिक शाला खोलने की दिशा में काम तेजी से चल रहा है। प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र भी इसी तर्ज पर खोले जा रहे हैं। प्रशिक्षित शिक्षकों और नर्सों की हजारों नियुक्तियाँ संविदा आधार पर इसी सपने को पूरा करने के लिए किया गया है। उल्लेखनीय है कि संविदा नियुक्ति से पूर्व यह प्रशिक्षित श्रम शक्ति 800 से1200 रुपयों के वेतनमान पर निजी संस्थानों में 12 घंटों के लिए नौकर हुआ करते थे।

मनरेगा के तहत गाँव-गाँव में रोजगार मुहैया करवाया जा रहा है। मजदूरों का काफी हद तक पलायन रुक गया है। प्रवासी मजदूरों की वापसी तो पूरे तरीके से नहीं हो सकती, क्योंकि सालों-साल से बाहर रहने के कारण वे दूसरे प्रदेशों की सभ्यता-संस्कृति में घुल-मिल गये हैं। अस्तु उनका वापस लौटना व्यावहारिक नहीं है। पर इतना तो तय है कि नये पलायन में उल्लेखनीय कमी आई है। सूचना के अधिकार को हकीकत में तब्दील करने की दिशा में भी बिहार अग्रणी है। सूचना के अधिकार के तहत समय से सूचना मिलने में किसी को कोई परेशानी न हो, इसके लिए बिहार में हेल्पलाईन की शुरुआत की गई है। इस तरह की हेल्पलाईन  शुरु करने वाला बिहार देश का पहला राज्य है।

चार सालों में कुल 35364 हजार करोड़ रुपये बिहार में विकास के कार्यों को लागू करने पर खर्च किये जा चुके हैं। जबकि राजद और कांग्रेस के 15 सालों के कार्यकाल में कुल 25000 हजार करोड़ रुपये ही विकास के कार्यों पर खर्च किये गये थे। वितीय वर्ष 2008-09 में ही नीतीश सरकार ने 12 हजार 511 रुपये विकास के कार्यों पर खर्च किये हैं। विकास के कार्यों पर खर्च की राशि ही विकास की कहानी हमें सुना रही है। जुलाई के अपनी रिपोर्ट में विश्व बैंक ने बिजनेस शुरु करने के लिए अनुकूल राज्यों की श्रेणी में बिहार को 14वें नंबर पर रखा था, जोकि चेन्नई , कोलकत्ता और कोच्चि से भी आगे है।

इसी संदर्भ के बरक्स में यहाँ  यह भी बताना जरुरी होगा कि बिहार में होते बदस्तुर सुधार का ही परिणाम है कि 10 जनवरी को नीतीश कुमार को मुम्बई के ओबेरॉय होटेल में आयोजित ईटी पुरस्कार समारोह में केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बिजनेस रिफोर्मर ऑफ द ईयर के पुरस्कार से नवाजा। इस पुरस्कार समारोह में मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, राहुल बजाज, आनंद महेंद्रा सहित दर्जनों उघोगपति और सी ई ओ उपस्थिति थे।

आज की तारीख में पटना के सचिवालय का माहौल ही बदल चुका है। चपरासी से लेकर अधिकारी तक के दर्शन आप वहाँ जाकर कार्यालय समय में कभी भी कर सकते हैं। भष्ट्राचार की मोटी परत छीजने लगी है। रिश्वतखोरों पर लगाम कसा जा रहा है। प्रशासन अपने कार्यों को गंभीरता से करने लगा है। रंगदारी और अपहरण के मामलों में करिशमाई तरीके से कमी आई है। बरसों से लंबित पैतालीस हजार से अधिक मामलों का जन अदालतों ने निपटारा कर दिया है। भय का माहौल खत्म हो चुका है।
बिहार और बिहारी को कमतर आंकने वाले राज्यों के लिए यह आंकड़ा निश्चित रुप से आपाच्य हो सकता है, पर इसमें असामान्य और असहज कुछ भी नहीं है, क्योंकि बिहार बस अपनी खोई हुई पतिष्ठा को पाने की दिशा में फिर से अग्रसर हुआ है। ज्ञातव्य है कि स्वतंत्रता के समय और उसके कुछ सालों तक बिहार भारत के अग्रणी राज्यों में से एक था। यह तो कुछ अयोग्य और भ्रष्ट बिहारी नेतागण की करतूत थी, जिसकी वजह से बिहार विकास के सबसे निचले पायदान पर पहुँच कर सर्वत्र निंदा का पात्र बन गया।
जैसे ही बिहार की कमान एक योग्य नेता के हाथों में गयी, बिहार में पुन: विकास का रथ चल पड़ा। नीतीश कुमार ने यह कमाल तब कर दिखाया है, जब न तो बिहार को केन्द्र से बुन्देलखंड की तरह कोई विशेष आर्थिक पैकेज मिला है और न ही बिजली की सुचारु आपूर्ति में केन्द्र से कोई खास सहायता। इतना ही नहीं केन्द्र सरकार ने तो बिहार को गंगा के पानी का बिजली के उत्पादन में इस्तेमाल करने की इजाजत तक नहीं दी। उल्लेखनीय है कि बिहार को 1000 मेगावाट बिजली ही मिलती रही है, जबकि दरकार इससे कहीं अधिक है। दरअसल बिहार के विकास में मूल योगदान कृषि का रहा है। किसी तरह दूसरे राज्यों से बिजली खरीद कर के नीतीश कुमार ने अपने विकास के कार्यों को अमलीजामा पहनाया है। अगर बिहार गुजरात की तरह बिजली के मामले में आत्मनिर्भर होता तो बिहार में विकास किस दर से बढ़ता, इसकी कल्पना आप आसानी से कर सकते हैं।

खैर, अब बिहार ने विकास में बिजली की महत्ता को अच्छी तरह से समझ लिया है। इसलिए बिहार ग्रामीण इलाकों में पन बिजली के विस्तार और विकास के लिए पिछले 4 बरसों से लगातार काम कर रहा है। बिहार के लिए कुल बिजली की आवश्यकता 11500 मेगावाट की है। इसके उत्पादन के लिए बिहार नहरों और नदियों पर 15 बिजली परियोजनाओं का निमार्ण करवा रहा है। 46 अन्य परियोजनाओं के लिए स्थान चिन्हित किये जा चुके है। वृहद परियोजनाओं में कैमूर क्षेत्र में सिनाफदर (345 मेगावाट), तेलहरकुण्ड (400 मेगावाट ), पंचगोटिया (225 मेगावाट) और हथियादह-दुर्गावती (1600 मेगावाट) इत्यादि प्रमुख हैं। इसी तरह कोशी क्षेत्र में इन्द्रपुरी में (450 मेगावाट) एवं डागमारा में (126 मेगावाट) की कार्य योजनायें भी प्रगति पर हैं। आज मोंटेक सिंह आहूलवालिया, अमर्त्य सेन, विश्व बैंक से लेकर यू एन ओ तक कह रहा है कि बिहार लगातार चमत्कार करता चला जा रहा है। अब केन्द्रीय सांख्यकीय संगठन के ताजा रपट ने भी उनकी बातों की सच्चाई पर अपनी मुहर लगा दी है। पूरे बिहार में परिवर्तन की बयार चल रही है। दिल्ली में 9 जनवरी को संपन्न 8वें प्रवासी भारतीय दिवस पर आये भारतीय प्रवासियों ने भी बिहार में निवेश करने रुचि दिखायी है। पटना से लेकर बिहार के हर जिले में विकास के कार्य हो रहे हैं। पटना में भी भारत के दूसरे नामचीन शहरों की भाँति मॉल, रेस्तरां, शोरुम इत्यादि खुल रहे हैं। जमीन की कीमत लगातार बढ़ती चली जा रही है।

दैनिक भास्कर का पटना संस्करण जल्द ही शुरु होने वाला है। प्रभात खबर मुज्जफरपुर और भागलपुर संस्करण शुरु करने जा रहा है। प्रभात खबर का मुज्जफरपुर और भागलपुर संस्करण शुरु करने की मंशा में यह स्पष्ट संकेत अंतर्निहित है कि बिहार के दूसरे जिलों में भी स्थिति तेजी से सुधर रही है। बिहार ने बता दिया है कि वह प्रतिकूल परिस्थितियों में भी विकास करने का माद्वा रखता है। अब केन्द्र सरकार की बारी है। अगर बिहार को भी बुन्देलखंड की तरह विशेष आर्थिक पैकेज मिल जाये, तो वह और भी बहुत कुछ कर सकता है। विशेष आर्थिक पैकेज के साथ बिहार को बिजली की भी जरुरत है। बिजली की सुचारु आपूर्ति में यदि केन्द्र सरकार बिहार की मदद करे तो निश्चित रुप से बिहार और भी चमत्कार दिखा सकता है।

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Chinmay on 12 January, 2010 12:38;51
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Thats great!! Bihar ko tarakki karta dekh khushi hui. Baki states ko bhi bihar se sikh le kar kaam karna chahiye
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सोनू on 12 January, 2010 19:05;35
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ये लेख ज़रूर पढ़िए--

हाशिया: बिहार : ग्रोथ रेट को लेकर क्यों बरपा है हंगामा

http://hashiya.blogspot.com/2010/01/blog-post_11.html
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Jitendra Dave on 13 January, 2010 02:40;21
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Great News. It is Good to Know that Bihar & Nitish is doing nice.
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aayush on 16 January, 2010 15:02;57
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Bihar se Rail mantri ke roop main Lalu (Railway ko profit main laya) aur State se Nitish kumar ne badhiya kaam kiya hai. In donon ko phir se mauka milana chahiye.
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varnika on 16 January, 2010 15:06;11
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इस सरकार को बिहारी मजदूरों को अधिक से अधिक रोजगार देना चाहिए जोकि पलायन कर पूर्वोत्तर राज्यों की ओर रुख करते हैं और गैर हिन्दी भाषी राज्यों में अनेक बार हिंसा के शिकार होते हैं।
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image सतीश सिंह लंबे समय तक मुख्यधारा की पत्रकारिता करने के सतीश सिंह पिछले एक साल से स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन कर रहे हैं. दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर, हिन्दुस्तान टाईम्स के लिए काम किया. वर्तमान समय में दिल्ली में कार्यरत.
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