Home | परत-दर-परत | कितना कामयाब होगा मुलायम का माफीनामा

कितना कामयाब होगा मुलायम का माफीनामा

image

जैसे तलाक देने के लिये तलाक को तीन बार बोला जाता है बिल्कुल इसी अंदाज मे सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने कल्याण सिंह से अपने संबधो को लेकर माफी मांग कर मुसलमानो को रिझाने के लिये फिर से ट्रांपकार्ड फेंका है। अब देखना है कि मुलायम का यह ट्रांपकार्ड क्या हकीकत मे मुसलमानो को रिझाने मे कामयाब होगा।

लोकसभा चुनाव से ऐन पहले भाजपा को देश मे शीर्ष पर ले जाने मे अहम भूमिका अदा करने वाले कल्याण सिंह से दोस्ती के कारण खफा हुये मुसलमानों को फिर से समाजवादी पार्टी में वापसी के लिए सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों से जहां माफी मांगी वहीं कल्याण सिंह और दूसरे अन्य नेताओं ने इसे मुलायम की अवसरवादिता करार देकर मुलायम की इस माफी को मुसलमानो को गुमराह करने वाला करार दिया है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की छवि कभी देश मे मुल्ला मुलायम वाली रही है लेकिन अयोध्या में छह दिसम्बर 1992 की घटना के आरोपी और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से दोस्ती के बाद श्री यादव से उनके परम्परागत मतदाता रहे मुसलमानों ने कन्नी काट ली थी। 2009 मे हुए लोकसभा चुनाव में सपा को कल्याण की दोस्ती की वजह से करारी हार का सामना करना पडा था । हालात इतने खराब रहे है कि फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में मुलायम की पुत्र बधू डिम्पल यादव तक चुनाव हार गयी थी। विधानसभा उपचुनाव में भी मुलायम पार्टी को लगातार हार झेलनी पड रही थी। इतना ही नही मुस्लिम प्रत्याशी होने के बावजूद डुमरियागंज विधानसभा सीट के उपचुनाव में सपा चौथे नम्बर पर खिसक कर दूसरे दलो के मुकाबले चारो खाने चित्त हो गयी ।

इन परिणामों से परेशान मुलायम सिंह यादव ने मुसलमान मतदाताओं को फिर से अपनी पार्टी में वापसी के लिए मुसलमानों से सार्वजनिक रुप से माफी मांगी और वादा किया कि भविष्य में मस्जिद गिराने के जिम्मेदार लोगों से कभी भी हाथ नहीं मिलाऊंगा। कल्याण सिंह से राजनीतिक गठबंधन की वजह से मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक जमीन ही खिसकती जा रही थी और इसी वजह से मुलायम समेत उनकी पूरी पार्टी इससे विचलित नजर आ रहे थे। कभी मुलायम के हनुमान रहे सपा से निष्कासित अमर सिंह ने भी राज्य के पूर्वी क्षेत्र में सक्रिय पीसपार्टी जैसे दलों से हाथ मिलाकर मुलायम सिंह यादव की मुश्किलें बढा दी है। माना जा रहा है कि इस सबसे निबटने और विधानसभा के 2012 में प्रस्तावित चुनाव को देखते हुए मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों से माफी मांग कर दूर की कौडी खेली है। हालांकि माफीनामे के पत्र में उन्होने एक बार भी कल्याण सिंह का नाम नहीं लिया है।

मुलायम सिंह यादव ने मुसलमानों के नाम जारी अपने बयान में कहा है - "मेरा जीवन साम्प्रदायिक शक्तियों के विरद्ध संघर्ष करने की खुली किताब रहा है। मैंने सदैव साम्प्रदायिक ताकतों को नाकाम करने में पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाया है। सन 1990 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुये अपने संवैधानिक दायित्व का पालन करते हुए मैने बाबरी मस्जिद को बचाने का काम किया। अपने बयान में मुलायम ने छह दिसम्बर 1992 को उत्तर प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार रहते हुये बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें में मस्जिद गिराने के जिम्मेदार तत्कालीन मुख्यमंत्री को एक दिन के कारावास की सजा भी दी। उन्होंने कहा कि 2009 लोक सभा चुनाव में साम्प्रदायिक शक्तियों की सरकार को केन्द्र में सत्तारूढ होने से रोकने में उन्हें कुछ गलत तत्वों को साथ लेना पडा जिससे भ्रमित होकर सभी धर्मनिरपेक्ष विशेषकर मुसलमान भाईयों को मानसिक कष्ट हुआ और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने कहा मैं इसे अपनी गलती स्वीकार करता हूं और इसलिए मस्जिद गिराने के जिम्मेदार लोगों को भविष्य में कभी साथ ना लेने की सार्वजनिक घोषणा भी कर चुका हूं। मैं इस घटना के लिए देश के सभी विशेषकर अपने मुसलमान भाइयों से माफी मांगता हूं और उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि भविष्य में उनके हितों को सर्वोपरि मानते हुए उनके सम्मान की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करता रहूंगा।"

बार बार मुसलमानो से माफी मांग चुके मुलायम सिंह यादव ने एक बार फिर से मुसलमानो से किस इरादे से माफी मांगी है यह तो साफ तौर पर समझ नही आ रहा है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर जा रहे मुसलमान मतदाताओ को रोकने के लिये मुलायम ने जो माफी मांगी है अब वो कितनी कारगर होती है यह देखने वाली बात होगी।

मुलायम ने लिखा है कि "मेरा जीवन साम्प्रदायिक शक्तियों के विरद्ध संघर्ष करने की खुली किताब रहा है। मैंने सदैव साम्प्रदायिक ताकतों को नाकाम करने में पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य निभाया है। वर्ष 1990 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री रहते हुये अपने संवैधानिक दायित्व का पालन करते हुए मैने बाबरी मस्जिद को बचाने का काम किया।" अपने बयान में श्री यादव ने छह दिसम्बर 1992 को उत्तर प्रदेश में तत्कालीन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की सरकार रहते हुये बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें में मस्जिद गिराने के जिम्मेदार तत्कालीन मुख्यमंत्री को दोषी मानते हुये अदालत उठने तक की सजा भी दी। उन्होंने कहा कि गत लोक सभा चुनाव में साम्प्रदायिक शक्तियों की सरकार को केन्द्र में सत्तारूढ होने से रोकने में उन्हें कुछ गलत तत्वों को साथ लेना पडा जिससे भ्रमित होकर सभी धर्मनिरपेक्ष विशेषकर मुसलमान भाईयों को मानसिक कष्ट हुआ और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची। उन्होंने कहा मैं इसे अपनी गलती स्वीकार करता हूं और इसलिए मस्जिद गिराने के जिम्मेदार लोगों को भविष्य में कभी साथ ना लेने की सार्वजनिक घोषणा भी कर चुका हूं।मैं इस घटना के लिए देश के सभी विशेषकर अपने मुसलमान भाइयों से माफी मांगता हूं और उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि भविष्य में उनके हितों को सर्वोपरि मानते हुए उनके सम्मान की रक्षा के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करता रहूंगा।

मुलायम सिंह यादव के माफीनामे से तिलमिलाये पूर्व मुख्यमंत्री और अयोध्या में छह दिसम्बर 1992 की घटना के आरोपी कल्याण सिंह ने समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम के मुसलमानों से माफी मांगने को हताशा भरा कदम बताते हुए कहा है कि यदि माफी ही मांगनी है तो उन्हें पिछडों से मांगनी चाहिए। कल्याण सिंह बंहद तल्ख शब्दो मे कहते है कि  मुलायम ने हिन्दुओं की भावनाओं को हमेशा आघात पहुंचाया है और हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है। उन्होंने कहा कि मुलायम से हाथ मिलाते समय उनके समर्थकों ने उन्हें आगाह किया था कि वह धोखेबाज हैं। फरेब उनकी फितरत है लेकिन अपने सरल स्वभाव के कारण पिछडों की लडाई लडने के लिए उन्हें समर्थन दिया गया। श्री सिंह का कहना था कि श्री यादव ने केवल उनसे ही नहीं बल्कि करोडों पिछडों के साथ विश्वासघात किया है। वास्तव में उन्हें पिछडों को धोखा देने के लिए माफी मांगनी चाहिए ।

मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह के बीच दोस्ती का खमियाजा सबसे ज्यादा मुलायम सिंह यादव को ही हुआ है। कल्याण सिंह कभी भारतीय जनता पार्टी के शिखर पुरूष राजनेता हुआ करते थे लेकिन वक्त की मार ने कल्याण सिंह को शून्य पर लाकर खडा कर दिया.संसदीय चुनाव से पूर्व कल्याण सिंह का सहयोग अचानक समाजवादी पार्टी ने लेने की घोषणा से राजनैतिक हलको में खलबली मचा दी, खासकर मुस्लिम तबके में कल्याण सिंह की मुलायम सिंह से करीबी के चलते नाराजगी देखी गई. इतना ही नहीं समाजवादी पार्टी के किले को ढहने में सपा मुखिया द्वारा की गई धुर विरोधी कल्याण सिंह की दोस्ती भी कयामत ढहा गई. सब जानते है कि कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में बाबरी मिस्जद रामजन्म भूमि विवादित स्थल को ढहा दिया गया,जिसकी हिंदुओं के मुकाबले मुसलमानों को खासी टीस हुई और मुसलमानों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. मुसलमान कल्याण सिंह को बाबरी मस्जिद का हत्यारा करार देते है,ऐसे नारे बाबरी मिस्जद विध्वंस के बाद लगाने वाले मुसलमान इस बात को कैसे बर्दास्त कर लेते कि मुसलमानों के हितों की बात करने वाले मुलायम सिंह यादव कल्याण सिंह को गले हुये मिलते कैसे देख लेते?

कल्याण सिंह से दूरी बनाने की कोशिश में सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के बाद उनकी पार्टी के दूसरे सांसद भी उन पर विभीषण कह कर उगुंली उठाने लगे है.रामपुर की सपा सांसद जयाप्रदा ने मुलायम सिंह यादव की हां में हां मिलाते हुये कल्याण सिंह को विभीषण करार दे डाला है।संसदीय चुनाव से पहले भाजपा और लोधी वोट को अपनी ओर खीचंने के इरादे से सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कल्याण सिंह को अपने दल में कथित तौर पर शामिल कर लिया और उनके बेटे राजवीर को सपा का राष्ट्रीय महासचिव बना कर वोट पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन नाकायाब रहे.संसदीय चुनाव के नतीजे आने के बाद साफ हो गया कि कल्याण के शामिल होने का कोई फायदा सपा को हासिल नहीं हुआ दूसरे सपा का परंपरागत मुसलमान मत सपा से दूरी बना गया.सपा को कल्याण से एक फायदा जरूर हुआ कि सपा को एक संसदीय सीट जरूर बढ गई। असल में कल्याण सिंह ने एटा जिले से लोकसभा सीट के लिये निर्दलीय किस्मत आजमाई जिसमें सपा ने कल्याण का दिल से सर्मथन किया और अपना कोई भी प्रत्याशी कल्याण सिंह के मुकाबले खडा नहीं किया। मुलायम सिंह यादव सोच रहे थे कि भाजपा से अलग हट चुके कल्याण का बाबरी विध्वंस वाला चेहरा मुसलमान भूल गया होगा लेकिन हुआ इसके ठीक विपरीत। कल्याण की मुलायम से नजदीकी मुसलमानों को शूल की तरह से चुभ गई। और नतीजा संसदीय चुनाव के बाद उप चुनाव में सपा को भुगतने को मिल गया है। भले ही कहा गया हो सपा से मुसलमान और लोध अभी कटा नही है लेकिन हककीत में सपा से मुसलमान और लोध तो कटा ही दूसरी और कई जातियों ने भी सपा से दूरी बना ली। सबसे ज्यादा दुख तो मुलायम को अपनी बहू के हारने पर हुआ क्यो की फिरोजाबाद सीट के समीकरण के अनुसार वहा पर लोधी, यादव और मुसलमानों के बाहुल्यता को देखते हुये ही डिंपल यादव को सपा ने चुनाव मैदान में उतार था। लेकिन चुनाव नतीजों ने साबित कर दिया कि सपा को उसका परंपरागत वोट मिला ही नहीं है। ऐसा ही कुछ मुलायम के गृह नगर इटावा की भी सीट पर पर हुआ जहां सपा के कब्जे वाली सीट बसपा के हाथों में जा पहुंची, इस सीट पर भी लोधी और मुसलमान निर्णायक भूमिका में है। जिसने सपा के बजाये बसपा में वोट देना जरूरी समझा।

इटावा में जहां पर कल्याण का जादू चलने की उम्मीद की गई थी और वे मतदान केंद्र लोधी प्रभाव वाले थे वहां पर सपा को मुहं की खानी पडी. इनमें नमला छंद में बसपा को 192 और सपा को 146, जसोहन बगिया में बसपा को 675 और सपा को 234, सकौआ में बसपा को 233 और सपा को 96, जैनपुर नागर में बसपा को 455 और सपा को 134, दतावली में बसपा को 386 और सपा को 233, खादर में बसपा को 533 और सपा को 24,बमनपुर में बसपा को 204 और सपा को 12,सुदंरपुर में बसपा को 501 और सपा को 106,कुनैरा में बसपा को 538 और सपा को 350,डूंगरी में बसपा को 576 और सपा को 60,विचारपुरा में बसपा को 367 और सपा को 157,सरायदयानत में बसपा को 545 और सपा को 90,नगलाउदय में बसपा को 207 और सपा को 23,काधंनी में बसपा को 514 और सपा को 74,पूठनसकरौली में बसपा को 494 और सपा को 67,हरदासपुर में बसपा को 537 और सपा को 26,रूरा में बसपा को 311 और सपा को 47,लुहन्ना में बसपा को 717 और सपा को 132,कुरट मे बसपा को 408 और सपा को 15,फूफई में बसपा को 441 और सपा को 97,बीलमपुरा में बसपा को 395 और सपा को 31,कल्याणपुर में बसपा को 377 और सपा को 73,सूखाताल में बसपा को 981 और सपा को 200,नेवरपुर में बसपा को 262 और सपा को 9, इसके अलावा अनगिनत ना जाने कितने ऐसे मतदान केंद्र है जहां पर कल्याण सिंह का कोई असर नहीं हुआ। फिर भी मुलामय सिंह को ऐसा क्यों लगा कि कल्याण सिंह के कारण मुसलमान सपा से दूर हो रहे हैं, यह तो वे ही जाने. लेिकन कल्याण सिंह को खलनायक साबित करके प्रदेशभर में घटते मुस्लिम जनाधार को बढ़ाने की उनकी कोशिश साफ दिख रही है.

Subscribe to comments feed Comments (6 posted):

brijkishore dangayach on 18 July, 2010 16:32;29
avatar
jab apne saath dhoka denneylag gaye hon tab dusra rasta kholney ka bahana bhi cahaiye kuch bura bhi nahin musulman bhai jantey hain abhi rashta bhool gaya jaanedo ab humey koi galat rastey per nahin hum khud hi apne pratindhi dhundh kar election ladna jaantey hain yeh desh lkoktantrik hai aur bhi rastey hain per mulaymji apni galityon ko samjh kar maafi maang rahe hain per muslim bhai bhi dekh rahaey hain dekho untt kis karvatbetheyga intezar karna padeyga
Thumbs Up Thumbs Down
0
R K GUPTA on 19 July, 2010 14:27;16
avatar
"सभी धर्मनिरपेक्ष विशेषकर मुसलमान भाईयों को मानसिक कष्ट हुआ और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची"

आज की तारीख में हिन्दू होना ही सबसे बड़ी कट्टर वादिता है बाकी सभी लोग बेचारे धर्मनिरपेक्ष है खासकर मुस्लिम.

यहाँ पर मुलायम सिंह धर्मनिरपेक्ष बाते करता है और एक धर्म विशेष की वकालत भी करता है, या मुलायम सिंह उम्र की इस अवस्था मे सठिया गया है कहते है की काठ की हांड़ी बार बार नहीं चढ़ती, मुस्लिम अब बेवकूफ नहीं रह गए है की अब फिर से मुलायम का विश्वास कैसे करेंगे.
Thumbs Up Thumbs Down
3
Jeet Bhargava on 20 July, 2010 02:23;16
avatar
अव्वल बात तो मुलायम को यूपी के लोगो से माफी मांगनी चाहिये. क्योंकि उनको बेवकूफ बनाकर वह इतने साल राज कर गए.
रही बात मुसलमानों की तो वह कोंग्रेस के साथ बिरयानी खा रहे है, भला मुलायम को क्यों मंजूर करेंगे.
हमारे देश में सेकुलर अतिवाद का यह क्रूर उदाहरण है.
Thumbs Up Thumbs Down
3
prashant on 20 July, 2010 17:31;55
avatar
very good
Thumbs Up Thumbs Down
0
बाप-ए-मुलायम on 21 July, 2010 01:08;25
avatar
मै मुलायम का बाप देश से माफी माँगता हूँ की मैंने ऐसा कमीना बेटा पैदा किया. जिसने मुस्लिम समाज से एहसानफ़रामोशी की.
Thumbs Up Thumbs Down
1
on 21 July, 2010 10:19;59
avatar
अब सवाल उन मुस्लिम नेताओं का है जिन्होंने कल्याण के समर्थन से चल रही सरकार में जम कर मज़े किये.... किया अब वो भी मुसलमानों से माफ़ी मांगने की पहल करेंगे.
Thumbs Up Thumbs Down
0
total: 6 | displaying: 1 - 6

Post your comment comment

Type in Hindi (हिन्दी में कमेन्ट करने के लिए यहां रोमन में लिखिए यह अपने आप हिन्दी में बदल देगा.)

Title :
Body
Powered by Vivvo CMS v4.1.2
Share |
  • email Email to a friend
  • print Print version

ईमेल से विस्फोटः अपना ईमेल यहां भरें और सब्सक्राइब करें:

Delivered by FeedBurner

Author info
image दिनेश शाक्य इटावा के रहनेवाले दिनेश शाक्य १९८९ से मीडिया में कार्यरत. १९८९ में पत्रिका हलचल से जुडे फिर साप्ताहिक चौथी दुनिया के बाद दिल्ली प्रेस प्रकाशन से जुडे,१९९६ से समाचार ए़जेसी वार्ता में २००३ मार्च तक इटावा में रिपोर्टर के रूप में काम किया, सहारा समय न्यूज चैनल में काम. उत्तर प्रदेश में विस्फोट.कॉम की ओर से स्पेशल स्टेट करेस्पांडेन्ट.
Rate this article
5.00
More from परत-दर-परत
Previous
image
इस्लामी रणनीति है हिन्दू आतंकवाद का हौव्वा
क्या देश में हिन्दू आतंकवाद पूरी तरह पैर पसार चुका है जो उतना ही खतरनाक है जितना कि अरब के पैसे से पलनेवाला बहावी आतंकवाद? भारत में कुछ छुटपुट ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्हें न केवल आतंकी घटनाओं के समान बनाकर पेश किया गया बल्कि उनका हिन्दू कनेक्शन भी साबित करने की कोशिश की गयी. प्रेम शुक्ल की पड़ताल है कि भारत में हिन्दू आतंकवाद का हौव्वा भी इस्लामिक चमपंथी विचारकों और रणनीतिकारों की "फेश सेविंग एक्सरसाइज" है िजसमें उन्हें मुस्लिम वोट की लालची सरकार का संरक्षण मिला हुआ है. ...
image
कंधमाल: सांप्रदायिक धुव्रीकरण नई चुनौती
कंधमाल की आग उड़ीसा से अधिक अब राजधानी दिल्ली में धधक रही है. पिछले महीने 22 से 24 अगस्त के बीच दिल्ली में चर्च संगठनों द्वारा एक जनसुनवाई करके यह साबित करने की कोशिश की गयी कि कंधमाल में दंगा पीड़ितों का पुनर्वास नहीं हो रहा है. इस जन-सुनवाई के संयाजकों में जॉन दयालॅ, कटक-भुवनेश्वर के बिशप रिफेल चैनथ एवं वामपंथी विचाराधरा सहमत की माला हाशमी प्रमुख थी....
image
सुलझी हुई समस्या को उलझाने पर आमादा
आज जो लोग भी कश्मीर की समस्या निपटाने निकले हैं सवाल पैदा होता है क्या उन्हें कश्मीर की समस्या का ओर-छोर भी पता है? क्या राहुल गांधी और ओमर अब्दुल्ला की नयी पीढी १९४७ से २०१० के बीच कश्मीर में क्या हुआ है उसकी प्रामाणिक जानकारी से लैस भी है? यदि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार कश्मीर की स्थिति को ठीक से समझ ही रही होती तो क्या पिछले ६ वर्षों के शासनकाल में उसने एक सुलझ चुकी समस्या को उलझा लेने की मूर्खता की होती?...
image
छत्तीस हुआ तिरसठ का आंकड़ा
सोनिया गांधी बीते शुक्रवार को चौथी बार कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गयी .उनके इस चयन के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में सत्ता परिवर्तन का निर्णायक दौर शुरू हो जाएगा. सोनिया गांधी अपने पति राजीव गांधी की १९९१ में हत्या के बाद राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखने के लिए जिस अंदाज में १०,जनपथ से कांग्रेस की राजनीति का नियंत्रण रखने का परोक्ष-अपरोक्ष प्रयास करती रही हैं उसका एकमेव उद्देश्य रहा है अपने पुत्र राहुल गांधी को एक दिन इस देश का प्रधानमंत्री बनाना....
image
चीन के सामने दीन हीन
पिछले कुछ वर्षों से चीन हिन्दुस्तान को पूर्वोत्तर तथा जम्मू एवं कश्मीर के मसले में अनावश्यक आँख तरेरने लगा है. चीन के इस दुस्साहस के लिए हिन्दुस्तान सरकार की अनावश्यक मिमियाहट जिम्मेदार है. जुलाई के महीने में चीन ने हिंदुस्तानी सेना के उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बी.एस.जसवाल को बीजिंग का वीजा यह कह कर नकार दिया कि वे विवादास्पद क्षेत्र के सैन्य प्रमुख हैं. लेफ्टिनेंट जनरल जसवाल का वीजा मध्य जुलाई माह में नकारा गया। इसके बाद ११ अगस्त को निर्वासित तिब्बतियों की सरकार के प्रमुख दलाई लामा हिंदुस्तानी प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह से मिले तो इस पर चीनी राजनायिक इतने गरम हो गए कि हिन्दुस्तान का सत्ता प्रतिष्ठान चीन के समक्ष याचना वाली मुद्रा में खड़ा हो गया....
image
संसद का हाल: सांसद को पसंद केवल बवाल
पंद्रहवीं लोकसभा ने एक साल पूरे कर लिये हैं. यह साल वैसे तो कामकाज के लिहाज से ऐसी किसी खास उपलब्धि का नहीं रहा है जिसके लिए संसद का पिछला एक साल याद किया जाए लेकिन क्या पूरे साल सांसदों ने उस 'बिजनेस' में हिस्सा लिया जिसके लिए जनता ने उन्हें चुनकर सदन तक पहुंचाया है? संसद के कामकाज के बारे में आम धारणा यही है कि संसद में जनता के अपेक्षाओं के अनुरूप काम काज नहीं होता. संसद जितनी चलती है उससे अधिक ठप रहती है. अब वेतनवृद्धि के बाद एक नयी तोहमत और लग गयी है कि देश की जनता मंहगाई से परेशान है और सरकार ने जनप्रतिनिधियों का वेतन चार गुना बढ़ा दिया. सवाल है कि क्या हमारे सांसद सचमुच जनता की उम्मीदों और अपेक्षाओं पर पानी फेर रहे हैं?...
image
गांधी का स्वराज बनाम जिन्ना जवाहर का कुराज
देश का ६४ वां स्वतन्त्रता दिवस बीत गया. कुछ सरकारी-अर्ध सरकारी, निजी, राजनीतिक समारोहों की औपचारिकता के अलावा अब १५ अगस्त का दिन एक सार्वजनिक अवकाश के सिवा शायद ही किसी अन्य महत्त्व का शेष रह गया हो. साल दर साल आजादी के गौरव के प्रति आम आदमी उसी तरह अनभिज्ञ होता जा रहा है जिस तरह राही मासूम रजा के उपन्यास की एक स्त्री पात्र पाकिस्तान को नजदीकी शहर में बनने वाली कोई मस्जिद समझ रही थी. ऐसा क्यों? क्योंकि ६३ साल पहले इस देश को आज़ादी के नाम पर एक सत्तान्तारण जरूर मिल गया था पर जिस स्वराज की परिकल्पना लोकमान्य तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले और महात्मा गांधी कर रहे थे, वह स्वराज हिन्दुस्तान को आज दिन तक नसीब नहीं है....
image
हिंदू धर्म और हिंदुत्व में फर्क
हिंदू धर्म भारत का प्राचीन धर्म है। इसमें बहुत सारे संप्रदाय हैं। संप्रदायों को मानने वाला व्यक्ति अपने आपको हिंदू कहता है लेकिन हिंदुत्व एक राजनीतिक विचारधारा है जिसका प्रतिपादन 1924 में वीडी सावरकर ने अपनी किताब 'हिंदुत्व में किया था। सावरकर इटली के उदार राष्ट्रवादी चिंतक माजिनी से बहुत प्रभावित हुए थे। उनके विचारों से प्रभावित होकर ही उन्होंने हिंदुत्व का राजनीतिक अभियान का मंच बनाने की कोशिश की थी।...
image
जरूरी है जाति की जनगणना
जाति आधारित जनगणना आखिरी बार 1931 में हुई थी। 1941 में सरकार का पूरा ध्यान दूसरे विश्व युद्ध पर था जिसके चलते जनगणना नहीं हो पाई। आजादी के बाद जब 1951 में पहली जनगणना शुरू हुई तो जाति का मसला उठाया गया। तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने कहा कि जाति आधारित जनगणना से सामाजिक ताना-बाना बिखर जाएगा। उन्होंने इसे राष्ट्रभंजक मांग बताते हुए अस्वीकार कर दिया था।...
image
सारे जहां में धूम हमारे ज़बां की है
कभी उर्दू की धूम सारे जहां में हुआ करती थी, दक्षिण एशिया का बेहतरीन साहित्य इसी भाषा में लिखा जाता था और उर्दू जानना पढ़े लिखे होने का सबूत माना जाता था। अब वह बात नही है। राजनीति के थपेड़ों को बरदाश्त करती भारत की यह भाषा आजकल अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। वह उर्दू जो आज़ादी की ख्वाहिश के इज़हार का ज़रिया बनी आज एक धर्म विशेष के लोगों की जबान बताई जा रही है।...
image
लालू की करनी पर नीतीश की भरनी
हाल में ही बिहार की विधानसभा में जो कुछ हुआ उसने लोकतन्त्र को शर्मिन्दा तो किया ही है, लेकिन लोकतन्त्र भी अब ऐसी शर्मिन्दगी बार-बार झेलने को अभिशप्त है, और हम सब इसके आदी हो चुके हैं। बिहार विधानसभा में लालूप्रसाद और कांग्रेस ने जो हंगामा और तोड़फ़ोड़ की उसके पीछे कारण यह दिया गया कि महालेखाकार एवं नियंत्रक (CAG) ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है कि सन् 2002 से 2007 के बीच शासकीय कोषालय से करोड़ों रुपये निकाले गये और उनका बिल प्रस्तुत नहीं किया गया।...
image
पूर्वोत्तर की आत्मघाती उपेक्षा
देश के पूरबी छोर पर स्थित प्रदेश मणिपुर को देश के अन्य हिस्सों से जोडने वाले राजमार्गो पर करीब दो महीने तक चली नाकेबंदियों की वजह से आवाजाही बंद रही। पूरे प्रदेश में खाने-पीने की चीजों, जीवनरक्षक दवाओं और पेट्रोलियम पदार्थों की घोर किल्लत उत्पन्न हो गई। सेना के विमानों की सहायता से अत्यावश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने की व्यवस्था हुई, पर ऐसी व्यवस्थाओं की अपनी सीमाएं होती है और इनसे जनजीवन को सामान्य तरीके से संचालित नहीं किया जा सकता। हालत आज भी कोई सुधरे नहीं है क्योंकि समस्या की जड़ें उसी तरह मजबूती से गड़ी हुई हैं....
image
कश्मीर की विरासत है आजादी
कश्मीर में एक बार परिस्थितियां इतनी बिगड़ी कि केन्द्रीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ गयी. घाटी के मुहाने पर एक बार फिर सेना को बैठाना पड़ा. हालांकि अब घाटी में फौरी तौर पर शांति है लेकिन क्या कश्मीर में समस्या का समाधान सिर्फ केन्द्र सरकार का हस्तक्षेप है. शेष नारायण सिंह मानते हैं कि कश्मीर में अशांति के कारण गहरे हैं. कश्मीर पर पाकिस्तान का बेजा दावा और भारत का 'अनावश्यक' हस्तक्षेप समस्या का मूल कारण बन गया है. इसका निदान किये बिना कश्मीर समस्या का समाधान संभव नहीं है. ...
image
कितना कामयाब होगा मुलायम का माफीनामा
जैसे तलाक देने के लिये तलाक को तीन बार बोला जाता है बिल्कुल इसी अंदाज मे सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने कल्याण सिंह से अपने संबधो को लेकर माफी मांग कर मुसलमानो को रिझाने के लिये फिर से ट्रांपकार्ड फेंका है। अब देखना है कि मुलायम का यह ट्रांपकार्ड क्या हकीकत मे मुसलमानो को रिझाने मे कामयाब होगा।...
image
शिवाजी के शौर्य को कलंकित करने का षण्यंत्र
छत्रपति शिवाजी के अपमान के मुद्दे पर महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर गरम है. संभाजी ब्रिगेड जिसने पिछली बार भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बोरी) की तोड़-फोड़ की थी. इस बार महाराष्ट्र के गृहमंत्री आर आर पाटिल पर हमले का षण्यंत्र रचा था जिससे वे शनिवार को बाल बाल बच गये. सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से जेम्स लेन की विवादास्पद पुस्तक "शिवाजी- द हिन्दू किंग इन इस्लामिक इंडिया" की बिक्री के लिए जिस अंदाज में छूट मिली है, उस पर महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कई संगठन आंदोलनरत हैं. लेकिन हम पहले यह समझ लें कि यह जेम्स लेन महाशय हैं कौन और उन्होंने किताब आखिर किस इरादे से लिखी है?...
image
बेमतलब हो गया है विश्व जनसंख्या दिवस
हमारे देश में हर खास दिन को दिवस के रुप में मनाया जाता है। जनसंख्या दिवस उन्हीं दिवसों में से एक है जो 1987 से हर साल 11 जुलाई को मनाया जा रहा है। दरअसल 11 जुलाई 1987 में ही विश्व की जनसंख्या 5 अरब हुई थी, पर हकीकत में इस दिवस में ऐसा कुछ नहीं है कि इसे मनाया जाए। क्योंकि न तो हम 11 जुलाई को जनसंख्या कम करने के लिए कोई प्रण लेते हैं और न ही इस बाबत किसी तरह का सकारात्मक कदम उठाते हैं।...
image
रमन सिंह की दमनकारी औद्योगिक नीति
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह नक्सली आंदोलन के खिलाफ चलनेवाले अभियान के अगुआ मुख्यमंत्री बन चुके हैं. लेकिन रमण सिंह इस आंदोनल को किसके इशारे पर कुचल रहे हैं? क्या वे आम आदमी और आदिवासियों के हित में नक्सली आंदोलन को कुचलने का दृढ़ संकल्प दिखा रहे हैं या फिर उनका एजेण्डा कुछ और है. हाल में ही छत्तीसगढ़ की नयी औद्योगिक नीति की समीक्षा करें तो साफ हो जाता है कि असल में यह संघर्ष वे किसके लिए कर रहे हैं. ...
Next
Tags
No tags for this article
सर्वाधिकार (अ)सुरक्षित

विस्फोट.कॉम में प्रकाशित सामग्री पर हमारी ओर से कोई कापीराइट नहीं है.

Powered by Vivvo CMS v4.1.2