हां, वह परमाणु युद्ध होगा- सुदर्शन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक के.एस.सुदर्शन ने दिल्ली में मंगलवार को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि आज की तारीख में अगर सारे उपाय और अन्य विकल्पों के आज़माने के बाद भी पाकिस्तान न सुधरे तो फिर आर-पार की लड़ाई जरूरी है। हो सकता है कि यह लड़ाई आणविक-युध्द में परिवर्तित हो जाए और बहुत सारे लोगों को अपनी जानें भी गवानी पड़े, मगर इस विनाश के बाद जो संसार बचेगा वो बहुत ही सुंदर होगा। वहाँ पर कुछ भी बुरा नहीं रहेगा और आतंकवाद भी गायब हो जाएगा।
प्रश्न: सुदर्शन जी, मुंबई पर हुए आतंकवादी हमलों के बाद देश का एक बहुत बड़ा वर्ग मानता है कि सरकार से कहीं न कहीं भारी चूक हुई है। इस पर आप क्या कहेंगे?
उत्तर: मैं इस घटना को अलग करके नहीं देखता। यह तो संपूर्ण साजिश का एक हिस्सा भर है। पिछली कुछ शताब्दियों से भारत के सामाजिक व सांस्कृतिक ताने-बाने को खत्म करने का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुचक्र रचा जा रहा है। ये शक्तियाँ भारत को टुकड़ों में बाँटना चाहती हैं, मगर हम हमेशा विजयी रहे हैं। हम सहनशील हैं, मगर साथ ही बहुत बहादुर भी। हाँ, लेकिन जब हमारी आपसी एकता में कोई कमी आई, तब-तब हमें गुलामी और पराजय भी मिली। लिहाजा पूरे देश का एक होना बहुत जरूरी है।
प्रश्नः सरकार को क्या करना चाहिए?
उत्तर: सरकार को जनता की आवाज़ सुननी चाहिए। लोगों में भारी गुस्सा व रोष है। लोग गुस्से में सड़कों पर उतर आए। ऐसा जबरदस्त आक्रोश पहले कभी भी नहीं देखा गया। और आपदा की इस घड़ी में देश की जनता व सरकार जो भी निर्णय लेगी, हम उसके साथ होंगे। आतंकवाद से निपटने के मुद्दे पर सरकार से किसी भी प्रकार के विरोध का सवाल नहीं है।
प्रश्न: सुदर्शनजी, अगर आप इस देश के प्रधानमंत्री होते तो इस समय करते?
उत्तर: देखिए यह तो काल्पनिक सवाल है। जब मैं राजनीति में हूँ ही नहीं तो प्रधानमंत्री बनाने का सवाल ही कहाँ उठता है? लेकिन हाँ, अगर होता तो वही करता जो देश की आम जनता निर्णय लेती। और आज भी मैं यही कहूँगा कि इस बात पर मंथन होना चाहिए कि इस देश का बुध्दिजीवी, नौकरीपेशा, व्यापारी और आम जन इस बारे में क्या चाहता है और फिर उसी के हिसाब से समस्या से निपटा जाए। जब पाकिस्तान और अमेरिका की सरकारों ने भी यह स्वीकार कर लिया है कि मुंबई हमलों में शामिल आतंकवादी पाकिस्तानी ही थे, तो ऐसे में हाथ पर हाथ धर कर बैठना भी कैसे संभव है? हमने उनसे बीस आतंकवादियों को भारत को सौपने की माँग की और वो नाना प्रकार के बहाने बनाकर अशांति को बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रश्न: क्या भारत को ऐसी स्थिति में युध्द का रास्ता अख्तियार करना चाहिए?
उत्तर: हाँ, अगर कोई और रास्ता नजर न आ रहा हो। जब-जब संसार में आसुरी शक्तियों का बोलबाला बढ़ने लगता है, तब युध्द आवश्यक हो जाता है। आप ही बताइए कि क्या और भी कोई रास्ता है? लेकिन मैं बता दूँ कि युध्द अन्तिम विकल्प होना चाहिए, उससे पहले भारत को अन्य सारे विकल्पों पर खूब अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए।
प्रश्न: क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि अगर इस बार युध्द हुआ तो वह गोली-बारूद तक नहीं सीमित रहेगा?
उत्तर: हा, मैं जानता हूँ। यह परमाणु-युध्द होगा जिसमें बहुत सारे लोगों को अपनी जानें गँवानी पड़ेंगी। सिर्फ मैं नहीं, बल्कि दुनिया के बहुत सारे लोगों ने इस बात की आशंका जताई है कि आतंकवाद की परिणति तीसरे विश्व युध्द के रूप में हो सकती है और यह आणविक-युध्द होगा जिसमे जान-माल का बहुत भारी नुकसान होगा। लेकिन आज की परिस्थिति में दानवों के विनाश के लिए और कोई रास्ता नहीं है। लेकिन मैं एक बात बहुत विश्वास के साथ कहना चाहता हूँ कि इस विनाश के बाद जो संसार आएगा, वह बहुत ही सुंदर होगा। वहाँ पर कुछ भी बुरा नहीं होगा और आतंकवाद भी गायब हो जाएगा।
प्रश्न: हिन्दू आतंकवाद के बारे में आप क्या सोचते हैं?
उत्तर: एक हिन्दू कभी भी आतंकवादी नहीं हो सकता। किसी भी धर्म विशेष को आतंकवादी कहना पूर्ण रूप से अनुचित है।
प्रश्न: क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि इस्लामी जेहाद के प्रत्युत्तर में आने वाले दिनों में बंदूक, बम व ग्रेनेड से लैस हिन्दू लड़को की पौध आ सकती है?
उत्तर: हिन्दू धर्म का मूल स्वभाव ही हिंसा के खिलाफ है।
प्रश्न: लेकिन अगर ऐसी परिस्थिति आ ही जाए तो, जैसा शिवाजी ने किया था?
उत्तर: आत्म-रक्षा अलग बात है, मगर कोई भी सच्चा हिन्दू कभी भी आतंकवादी नहीं हो सकता। निरीह व बेगुनाह जनता को मारना हमारी बुनियादी शिक्षा के खिलाफ है सच तो यह है कि हम पूरे देश को एक साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं।
प्रश्न: तो क्या यह माना जाए कि एक धर्म के रूप में हिन्दू धर्म अपनी विराटता के सागर में अन्य लोगों को डूबा पाने में थोड़ा कमजोर रहा है? ऐसा तो नहीं कि अपने प्यार के आगोश में भरकर सभी को प्यार देने में कोई कमी रह गयी है?
उत्तर: नहीं, हमारी कोशिशें लगातार जारी हैं। हम समाज के सभी वर्गों और धर्मों के लिए लगातार काम कर रहे हैं। सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में जबरदस्त कार्य कर रहे है, हम सब। पिछले 7 नवम्बर् 2008 को हमने गौ रक्षा हेतु सम्मेलन किया था, जिसमें मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सक्रिय सहयोग से लगभग 170 उलेमाओं और अन्य बुध्दिजीवियों ने शिरकत की थी। इसके अलावा देवबंद को मानने वाले 6000 लोगों ने साझा रूप से गौ-हत्या के खिलाफ हस्ताक्षर किए। सच तो यह है कि खुद हज़रत मोहम्मद ने भी कहा है कि गाय का दूध शिफा है और गाय का मांस जहर। सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का जबरदस्त योगदान है। और मैं बता दूँ कि यह सिर्फ एक उदाहरण है। हम यह मानते हैं कि हर धर्म में ढेर सारे अच्छे लोग हैं। ऐसे सभी लोगों के प्रति हमारा पूरा सम्मान व प्यार है। यह हमारा सौभाग्य भी है और कर्तव्य भी कि हम सभी धर्मों र्को मानने वाले लोग आपस में प्यार-मुहब्बत से रहें। (शब्दार्थ)
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par shayad kuchh din pehle manniya sudarshan ji ka ye interview kahi padha hua lagta hai ho sakta hai aapne hi diya ho .puneh dhanyawad
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