परत-दर-परत
सऊदी, सईद और इस्लामी आतंकवाद
एक ओर तो भारतीय प्रधानमंत्री सऊदी अरब से मधुर रिश्ते स्थापित करने की गऱज़ से सऊदी अरब जा रहे हैं तथा अरब का शाही परिवार उनका अभूतपूर्व स्वागत कर रहा है और दोस्ती की राह पर आगे बढ़ने का संदेश दे रहा है तो दूसरी ओर यही सऊदी अरब पाकिस्तान में जमात-उद- दावा सहित ऐसे कई संगठनों की आर्थिक सहायता भी कर रहा है जोकि भारत के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय हैं।
इस्लामी आतंक को सऊदी धन और समर्थन
सऊदी द्वारा अहले इस्लाम की सुरक्षा के अपने संकल्प के साथ ही सऊदी अरब के सभी मस्जिदों, मदरसों, सुपर मार्केट्स में जकात के लिए बड़े-बड़े डब्बे लगा दिए गये. अल्जीरिया, बोस्निया, गज़ा और कश्मीर में जेहाद के लिए करोड़ों डालर जमा होने लगा. सऊदी चैरिटी में धन आ रहा था मदरसे खोलने, यतीमखाने बनवाने और अस्पताल बनवाने के लिए. पर वह धन असल में कहाँ खर्च हो रहा था इस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं था.
सऊदी से क्यों करते हो कश्मीर का सौदा?
प्रधानमन्त्री डॉ. मनमोहन सिंह हज़रत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के अवसर पर सउदी अरब के दरबार में भारत में जारी पाकिस्तानी जेहादी युद्ध में अमन बरपाने की गुहार लगाकर लौट आये हैं. जब से केंद्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार सत्तानशीं हुई है तबसे लगातार हमारा वैश्विक मंच पर व्यवहार एक हताश राष्ट्र की तरह रहा है....ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार के झोलाछाप प्रयास
केन्द्र सरकार ने अपनी ग्रामीण स्वास्थ्य योजना को पूरा करने के लिए महात्वाकांक्षी लेकिन भेदभावपूर्ण ग्रामीण मेडिकल कोर्स को अमलीजामा पहनाने के लिए तैयार हो गयी है. स्वास्थ्य मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति ने इसे मान्यता दे दी है. लेकिन यह पूरी योजना न केवल भेदभावपूर्ण है बल्कि जिस तरह से गांव के नागरिकों को दोयम दर्जे का इंसान समझा जाता है उसी तरह यहां के डॉक्टरों को भी दोयम दर्जे की मान्यता देने की कवायद की जा रही है....पुणे विस्फोट: फिर वही जांच, फिर वही ढाक के तीन पात
यदि हमें ११/९, २६/११ और १३/२ जैसे आतंकी हमलों से बचना है तो सुरक्षा उपकरणों पर पानी की तरह पैसा बहाने, कसाब और अफजल गुरु पर करोड़ों रुपये खर्च करने और पाकिस्तान तथा अमेरिका के सामने रिरियाने की बजाय डायरेक्ट एक्शन लेना चाहिए. जब तक हमारी सुरक्षा एजेंसियां दाऊद इब्राहीम, हाफिज सईद, मसूद अजहर आदि को उनके बिलों में घुसकर नहीं मारतीं तब तक पुणे जैसे हमलों से इस देश को नहीं बचाया जा सकता....बीटी बैंगन की कहानी
बीटी बैंगन को लेकर मच रहा है इतना शोर, पर अभी भी ज़्यादातर लोग समझ नहीं पा रहे की आखिर बैंगन को लेकर यह हो-हल्ला मचा और आखिरकार सरकार ने तात्कालिक तौर पर देश में बीटी बैंगन के उत्पादन को मंजूरी देने से मना कर दिया है. बीटी बैंगन क्या है? इसका विरोध क्यों हो रहा है? इन सभी विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाल रही हैं वसुधा मेहता.
मंहगाई का रोना आखिर क्यों रोएं?
मंहगाई पर जारी वर्तमान बहस को पूरी तरह से खारिज करते हुए बजरंग मुनि तर्क देते हैं कि पिछले एक वर्ष में पहली बार आम उपभोक्ता वस्तुओं की मंहगाई ने उत्पादकों के मन में आशा की जो किरण जगाई है उन किरणों के स्वागत में उपभोक्ता भी शामिल हो तो उनका स्वयं का ही हित है। विशेष कर कलम के सिपाहियों को तो अवश्य ही गम्भीरतापूर्वक सोचना चाहिये।
झूठ को स्वीकार्य नहीं है बिहार का सच
प्रदीप श्रीवास्तव की रपट 'झूठ की परतों में छिपा बिहार का सच' 23 जनवरी को जनसत्ता के मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ था। श्री श्रीवास्तव का मानना है कि बिहार आज भी बीमारु राज्य है। इस राज्य के विकास के सम्बंध में सीएसओ के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ा महज नीतीश कुमार के आंकड़ों की बाजीगरी का पर्याय है, क्योंकि सीएसओ के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ा बिहार सरकार का ही आंकड़ा है। कृषि और उद्योग में पिछड़ा हुआ राज्य 11 फीसदी के औसत विकास दर को कभी प्राप्त नहीं कर सकता है।
सूचना का अधिकार बनाम निजता की दरकार
भारत के मुख्य न्यायधीश का कार्यालय भी सूचना के दायरे में आयेगा। सूचना के अधिकार से सम्बंधित इस फैसले ने पूरे देश में हलचल पैदा कर दी। पर अभी भी सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश इस निर्णय से कत्तई इत्तिफाक नहीं रखते हैं। इसी विषय के तारतम्य में कुछ दिनों पहले केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने भी कहा था कि आयकर का वैयक्तिक रिकॉर्ड भी सूचना के अधिकार के तहत मांगा जा सकता है।
विकास के पथ पर बिहार
यह बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित किसी विज्ञापन की पंक्तियां नहीं हैं बल्कि वो तथ्यात्मक सच्चाई है जो भारत सरकार का सांख्यिकी विभाग कह रहा है. सांख्यिकी विभाग ने विकास दर के जो ताजा आंकड़े जारी किये हैं उसमें बताया है कि बिहार गुजरात के बराबर विकास कर रहा है और बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत से भी ढाई फीसदी अधिक है.
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कुछ इस तरह पूरा हुआ आधी आबादी का आधा सफर
इतिहास नहीं बना, दोहरा इतिहास बनाया गया। चौदह साल में सरकारें आईं-गईं पर महिला बिल ढाई कोस भी नहीं चला लेकिन अबके संसद ने दोहरा इतिहास रचा। महज दो दिन में आधी आबादी का आधा सफर तय हो गया। पर मंजिल अभी आसान नहीं। राज्यसभा ने प्रचंड बहुमत के साथ संविधान के 108वें संशोधन को मंजूरी दे दी। पक्ष में 186 वोट पड़े, तो विरोध में महज एक, पर बिल के पैरोकार हों या विरोधी, राजनीतिक खुशी की लहर सबमें दौड़ी।...
एयरटेल की टेल उखाड़ दें
मुंबई। अभी सुप्रीम कोर्ट ने कल ही बड़े सुसंस्कृत शब्दों में राज ठाकरे से कहा था कि आपको शिष्ट भाषा का प्रयोग करना चाहिए. राज ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट का पूरा मान रखते हुए आज हिन्दी विरोधी नारा फिर बुलंद कर दिया और गाज गिराई एक निजी मोबाईल कंपनी एयरटेल पर. ...
मार्शल के बल पर पारित हो गया महिला विधेयक
दो बार स्थगन के बाद जैसे ही तीसरी राज्यसभा की कार्रवाई शुरू करने के लिए माननीय सभापति महोदय के आने की घोषणा हुई विरोधी फिर वेल में आ गये. मुर्दाबाद और भारत माता की जय के नारे भी लगे. राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने उन विरोधी तत्वों को सदन से बाहर निकालने के लिए आखिरकार मार्शल बुला लिया. देशभर में राज्यसभा टीवी पर जो कार्रवाई दिखाई जा रही थी उसमें यह नहीं दिखाया गया कि कैसे मार्शल ने महिला आरक्षण का विरोध करनेवाले नेताओं को सदन से उठाकर बाहर फेंक दिया. लेकिन नौंवी बार कार्रवाई उसके बाद ही शुरू हो सकी....
लोकतंत्र का गला घोंटता लोकतंत्र
भारत में लोकतंत्र की जड़े कमजोर हो रही है यह अनेक उदाहरणों से स्पष्ट हो सकता है । अब तो वोट देने के अधिकार को छोड़कर अन्य कही भी लोकतंत्र के दर्शन ही दुर्लभ है। किन्तु विचारणीय विषय यह है कि ऐसा हुआ क्यों ?...
तस्लीमा, रुश्दी और फिदा हुसैन
जब कोई चित्रकार कोई चित्र बनाता है तो उसके दिमाग में यह तो होता ही होगा कि वह चित्र के माध्यम के क्या कहना चाहते है। इस सारे विवाद के बाद भी सम्भवतः हुसैन से किसी ने यह सवाल नहीं किया कि आखिर जिस तरह की चित्रकारी वे करते हैं, उसके पीछे उनकी क्या भावना रहती है ? विवाद के दौरान हुसैन की तरफ से भी आज तक यह नहीं कहा गया कि जिन विवादित पेंटिंगों पर बवाल किया जा रहा है, उन्हें बनाने के पीछे उनकी अपनी क्या सोच रही थी ?...
कुत्तों के लिए भी संकट बना माओवाद
केंद्र सरकार के माओवादियों के खिलाफ छेड़े गए 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' के चलते, लगभग तीन हफ्ते पहले, पश्चिम बंगाल में पश्चिमी मिदनापुर, लालगढ़, बांकुरा, पुरुलिया और बर्दवान के अनेकों गाँवों में माओवादियों द्वारा एक अनोखा 'फतवा' जारी किया गया. इन गाँव में रहने वाले लोगों और आदिवासियों को कहा गया कि 'वह अपने इलाके के सारे पालतू और सड़क के कुत्तों को मार डालें नहीं तो उन्हें मार दिया जाएगा'....
हरिद्वार में शुरू हुआ राष्ट्र रक्षा सम्मेलन
हरिद्वार। ‘‘राष्ट्र रक्षा सम्मेलन रूपी कुम्भ से ऐसी गंगा की धारा निकलेगी जो विश्व को नया मार्ग प्रशस्त करेगी। जब देश सशक्त होगा तो आम नागरिक भी सुरक्षित होगा। हरिद्वार से दुनिया भर के लोग नया जीवन लेकर जाते हैं, यह सम्मेलन भी एक नया प्रण और संकल्प देकर जायेगा।’’ यह विचार उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने भारत माता मन्दिर के प्रांगण में फोरम फोर इंटीग्रेटेड नेषनल सिक्योरिटी (फिन्स) के दो दिवसीय राष्ट्र सुरक्षा सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए व्यक्त किये।...
कुशल प्रबंधक थे नानाजी देशमुख-आडवाणी
नई दिल्ली। नानाजी देशमुख को याद करने के लिए दिल्ली में सोमवार को एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया था जिसमें संघ, भाजपा और संघ से जुड़े अन्य सभी संगठनों के लोग शामिल हुए और नानाजी के प्रति अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये. इस मौके पर बोलते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने उन्हें एक कुशल प्रबंधक बताया. ...
कुंभ में पाप भी नहीं धो सकेंगे नित्यानंद
हरिद्वार/बेंगलूरू। हरिद्वार में चल रहे महाकुंभ पर्व में स्वामी नित्यानंद कांड को किया गया भूमि का आवंटन रद्द कर दिया गया है। स्वामी नित्यानंद पर अय्याशी का आरोप है और इस आशय की खबरें प्रकाशित हुई थीं कि स्वामी नित्यानंद मजे से कुंभ स्नान कर रहे हैं. ...
हिन्दी अकादमी पुरस्कारों की घोषणा, केदारनाथ सिंह को शलाका सम्मान
नई दिल्ली। हिन्दी अकादमी दिल्ली द्वारा एक साथ दो सालों के लिए पुरस्कारों की घोषणा कर दी गयी है. साल 2008-09 के लिए प्रतिष्ठित शलाका सम्मान नहीं दिया जा रहा है बल्कि साल 2009-10 के लिए शलाका सम्मान प्रो. केदार नाथ सिंह को दिया जाएगा. ...
महिला आरक्षण विधेयक का मंहगा सौदा
महिला आरक्षण के सवाल पर सरकार खुद ही फंस गई है। अब सरकार से कोई पूछे, इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई? बिल के विरोधी तो खुल्लमखुल्ला कह ही रहे थे कि बर्दाश्त नहीं करेंगे। अभी तो सिर्फ कुर्सी और बैंच तक चढ़े हैं, जरूरत पड़ी तो लक्ष्मण रेखा के आगे जाएंगे। वाकई राज्यसभा में तो महज आठ-दस सांसद बवाली फिर भी मानो, बिल पास हो गया तो लोकसभा में क्या होगा? वहां तो बवालियों के सरदार लालू-मुलायम-शरद बैठे हुए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि सरकार महंगाई से ध्यान बंटाने के लिए राज्यसभा से महिला आरक्षण का बिल पास कराए, फिर लोकसभा में चुनाव तक पेंडिंग कर दे?...
संजय जोशी के सवाल पर भाजपा में बवाल
नई दिल्ली। भाजपा की नयी कार्यकारिणी की घोषणा होनेवाली है. उम्मीद है कि अगले एक दो दिनों में भाजपा की नयी कार्यकारिणी की घोषणा हो जाएगी लेकिन संजय जोशी के नाम को लेकर अभी भी भाजपा में कोई फैसला नहीं हो पा रहा है. नितिन गडकरी हर हाल में उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाकर रखना चाहते हैं जबकि आडवाणी और उनके करीबी संजय जोशी की इन्ट्री नहीं होने देना चाहते. ...
राजस्थान में नर्क का दूसरा नाम है नरेगा
अगर भ्रष्टाचार नर्क है तो इस नर्क का दूसरा नाम नरेगा ही होना चाहिए. कम से कम राजस्थान की हकीकत यही है. देश के ग्रामीण विकास मंत्री सीपी जोशी राजस्थान से आते हैं. यही वह मंत्रालय है जो मनरेगा को देशभर में लागू करता है. लेकिन विडम्बना देखिए कि राजस्थान में मनरेगा के ऊपर जो भी सर्वे आ रहे हैं वे सब इसे भ्रष्टतम व्यवस्था साबित कर रहे हैं. पहले सोशल आडिट में यह बात सामने आयी और अब एक सर्वे नरेगा की पोल खोल रहा है. ...
नारी मुक्ति का नाजायज नारा
आज अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस का अनुष्ठान है. आज सरकारी तौर पर लम्बे -चौड़े वक्तव्य,विज्ञापन,संकल्प, धूमधडाका, विमर्श, कार्यशालाओं आदि के आयोजन होंगे. सवाल पैदा होता है कि क्या एक दिन महिलाओं के नाम पर इस तरह के औपचारिक अनुष्ठान संपन्न करा लेने भर से महिलाओं का समग्र कल्याण हो जाना निश्चित है?...
महिला आरक्षण से बनेगा इतिहास या बिगड़ेगा भविष्य?
सदन पटल पर आ रहे महिला आरक्षण विधेयक के लिए उम्मीद है कि यह बहुमत से भी अधिक मतों से पारित हो जायेगा. हालांकि सरकार इस विधेयक को संसद में सर्वमत की मुहर लगवाना चाहती है लेकिन इतना साफ दिख रहा है कि तेरह सालों के अथक प्रयास के बाद बिल के पास होने घड़ी नजदीक आ गयी है. जिस वक्त महिला आरक्षण विधेयक पर बात शुरू हुए तब से अब तक तेरह साल बीत चुके हैं. इन तेरह सालों में बहुत कुछ बदला है. वह बदलाव क्या-क्या है?...
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- अब भोजपुरी में बोलेगा बाजार
- तालिबान के देसी संस्करण
- विस्फोट पर अस्थाई कार्य विराम
Salim Saaheb, please read this recent editorial.
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/5664125.cms
भोसड़ी के ...साले खाते यहाँ की हैं और गीत वहां के गाते हैं..सारी दुनिया जानती हैं के आतंकवादी कौन हैं और क्या है...मादरचोद..और इतना होने ...
R u sure ki bas loksabha me parit hone aur uske baad president ki manjuri k bad hi yah laagu h jayega???
kya ise desh ki ...
घक्की लगता है तुम हमेशा संघ की चक्की पीसते रहते हो. थोड़ा अपना विकास कर लो. ज्यादा संघ की चक्की मत पीसो.
salim sahaab aap is per kya kahege
http://nirmal-anand.blogspot.com/2010/03/blog-post_08.html
मेरा मानना है कि कला के नाम पर किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना सही बात नहीं है।


