परत-दर-परत
डायरी से डब्बे तक सट्टे का सफरनामा
भारतीय खेलों के साथ सटोरियों का संबंध दशकों पुराना है. पश्चिम बंगाल के सटोरिए फुटबाल और राजस्थान के सटोरिए हाकी पर पिछले 100 वर्षों से सट्टा लगाते आ रहे हैं. क्रिकेट पर सट्टा लगाने की परंपरा भी दशकों पुरानी है. लेकिन ये सट्टे संगठित व्यापार के रूप में 1980 के दशक में शुरू हो पाये. सटोरियों और खिलाड़ियों के बीच मैच फिक्सिंग की शुरूआत 1980 के दशक में ही हुई. 1983 में विश्वकप जीतने से पहले भारतीय क्रिकेटरों पर सटोरियों का प्रभाव न के बराबर था. 1983 में विश्वकप जीतने के बाद टेलीविजन पर क्रिकेट का बड़ा दर्शक वर्ग खड़ा हो गया था.
ऐसे बिकने लगा क्रिकेट
भारत में क्रिकेट का इतिहास लगभग 100 वर्ष पुराना है। बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) का गठन 1928 में हुआ था। इस संस्था में अक्सर अफसरों, नवाबों और राजनीतिज्ञों का कब्जा रहा। 1980 तक बीसीसीआई राजनीतिक तौर पर कोई महत्वपूर्ण संगठन के रूप में प्रख्यात नहीं हुआ करता था। 1982 के एशियाड खेलों तक हॉकी भारतीयों का सबसे लोकप्रिय खेल हुआ करता था। 1982 में एशियाड का आयोजन दिल्ली में किया गया।
क्रिकेट बड़ा न भइया सबसे बड़ा रुपइया
20-20 विश्वकप में भारत की बुरी पराजय के बावजूद भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) में कोई हंगामा नहीं हुआ। 2007 में जब भारतीय टीम एकदिवसीय विश्वकप में बुरी तरह हार कर लौटी थी तब मीडिया और बोर्ड सहित संसद में भी हंगामा खड़ा हुआ था। इस बार टीम के कोच गैरी कस्टर्न बयान दे रहे हैं कि विश्वकप के ठीक पूर्व आईपीएल का टूर्नांमेंट कराना भारतीय खिलाड़ियों को थकाने का सबसे बड़ा कारण बना। ...चैंपियन बना या बनाया गया पाकिस्तान?
पाकिस्तान 20-20 विश्वकप का चैंपियन बन गया। पूरे 17 वर्षों बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम कोई चैंपियनशिप जीतने में कामयाब हुई है। 1992 में पाकिस्तान एकदिवसयी क्रिकेट का बादशाह बनने में कामयाब हुआ था। तत्कालीन क्रिकेट कप्तान इमरान खान आज भी हर पाकिस्तानी क्रिकेट प्रेमी के दिलों को धड़काने का माद्दा रखते हैं। इमरान की इस लोकप्रियता का प्रमाण 20-20 विश्वकप की विजेता टीम के कप्तान यूनुस खान ने स्वयं ट्रॉफी हाथ में लेने के बाद अपने बयान से दिया। ...क्रिकेट और राजनीति का युगान्तकारी रिश्ता
हर आम और खास भारतीय क्रिकेट और राजनीति का दीवाना होता है। राजनीति और क्रिकेट के खेलों की सफलता और विफलता पर भारतीयों की प्रतिक्रिया भी एक सरीखी होती है। जो जीते तो सभी सिकंदर, हार गए तो साथी बंदर। 1983 का विश्वकप जीत कर लाए तो कपिलदेव महान। 1984 में इंदिरा लहर पर ही सही कांग्रेस को 415 सीटें जिता लाए तो राजीव गांधी अद्वितीय। जैसे ही कपिलदेव के नेतृत्व में टीम इंडिया हारने लगी कपिलदेव पर सट्टेबाजी तक की तोहमत लगने लगी। क्रिकेट के बारे में उनकी समझ पर सवाल उठने लगे।...अहमदीनेजाद से निजात नहीं
ईरान के राष्ट्रपति चुनाव में महमूद अहमदीनेजाद का दुबारा चुने जाने की घोषणा के बाद उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पराजित प्रत्याशी मीर हुसैन मुसावी ने चुनावों में भारी धांधली का आरोप लगाते हुए परिणामों को खारिज कर दिया है। वे इस चुनाव को रद्द कर फिर से मतदान की मांग कर रहे हैं। उनके समर्थक देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। कई जगह प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है और लोगों के मारे जाने की भी खबरें आ रही हैं। मामला बिगड़ता देख गार्डियन काउंसिल ने चुनाव परिणामों पर अस्थाई घोषित कर दिया है। इस रोक को अहमदीनेजाद की कमजोर होती पकड़ के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। वैसे देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अभी भी अहमदीनेजाद के पक्ष में हैं। गार्डियन काउंसिल के ज्यादातर मौलवी भी उनके पक्ष में हैं। ऐसे में इस बात की संभावना बहुत कम है कि परिणामों को निरस्त किया जाएगा और देश में फिर से चुनाव होंगे।
बीटी बैंगन पर सवाल ही सवाल
देश के नये पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा है कि वे बीटी बैंगन पर चल रहे प्रयोगों के परिणामों की बिना पूरी जांच-पड़ताल किये उसे बाजार में लाने की अनुमति नहीं देंगे. जयराम रमेश के इस बयान से उन आंदोलनकारियों को राहत मिली है जो लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं. बीटी बैंगन के फील्ड ट्रायल कभी बंद नहीं हुए. जबकि विरोध करनेवाले जन संगठन लगातार यह मांग कर रहे हैं कि जब पूरी दुनिया बीटी (बायो-टेक्नालाजी) जनित उत्पादों को नकार रहा है तो फिर भारत इतनी जल्दबाजी में बीटी बीजों को अपने खेतों तक क्यों पहुंचने दे रहा है. बीटी बैंगन का विवाद उसी में से एक है. बीटी बैंगन के बारे में विस्तार से बता रहे हैं खेती विरासत मिशन के संस्थापक उमेन्द्र दत्त.
रवांडा से भी बदतर हालत में है 'महाशक्ति भारत'
भय और भूख भारत की नियति बन चुके हैं. विकास की चारमीनार पर चढ़ने का दावा करनेवाले भारत के प्रगति की भूख जितनी विकराल दिखाई देती है उससे अधिक विकराल है भारत में पेट की भूख. ग्लोबल हंगर इंडेक्स बार-बार यह बता रहा है कि भूख के मामले में भारत अपने पड़ोसी पाकिस्तान और नेपाल ही नहीं बल्कि रवांडा से भी बुरी हालत में है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स बता रहा है कि भोजन के मामले में भारत अफ्रीकी देशों के ही बराबर खड़ा है.
अब तालिबान के सफाये की बारी
श्रीलंका में लिट्टे के सफाए के बाद पाकिस्तान की स्वात घाटी से भी एक अच्छी खबर आई है। पाकिस्तानी सेना ने यहां के सबसे बड़े शहर मिंगोरा से तालिबान को हटाकर फिर से नियंत्रण कर लिया है। पिछले एक हफ्ते से मिंगोरा में सेना और तालिबानियों के बीच भीषण संघर्ष चल रहा था। गौरतलब है कि पाकिस्तान और तालिबान के मध्य हुआ शान्ति समझौता पिछले महीने की शुरुआत में टूटते ही पाकिस्तानी सेना ने यहां अभियान शुरू किया था। संघर्ष शुरू होने के बाद से सैकड़ों लोग मारे गए हैं और बीस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। मिंगोरा फतह करने से यह साबित होता है कि पाकिस्तानी सेना की स्थिति यहां लगातार मजबूत होती जा रही है।
अमीरों और अपराधियों की संसद एक बार फिर
मुख्यधारा की मीडिया और प्रमुख सियासी दलों की तरफ से यह बात प्रचारित की जा रही है कि इस बार के चुनावों में अपराधियों को मुंह की खानी पड़ी। जबकि तथ्य इससे काफी अलग है। नेशनल इलेक्शन वाच ने सांसदों के हलफनामों का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला है कि दुनिया के सबसे ज्यादा गरीबों को अपने पेट में छिपाये सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की सबसे बड़ी पंचायत (लोकसभा) में इस बार आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सांसदों की संख्या डेढ़ सौ है। 2004 के चुनावों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 128 सांसद चुने गए थे और इस बार यह संख्या 150 है। इस तरह से देखा जाए तो इस मामले में 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
Latest on visfot
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



