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परत-दर-परत

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बीटी बैंगन की कहानी

बीटी बैंगन को लेकर मच रहा है इतना शोर, पर अभी भी ज़्यादातर लोग समझ नहीं पा रहे की आखिर बैंगन को लेकर यह हो-हल्ला मचा और आखिरकार सरकार ने तात्कालिक तौर पर देश में बीटी बैंगन के उत्पादन को मंजूरी देने से मना कर दिया है. बीटी बैंगन क्या है? इसका विरोध क्यों हो रहा है? इन सभी विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाल रही हैं वसुधा मेहता.
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मंहगाई का रोना आखिर क्यों रोएं?

मंहगाई पर जारी वर्तमान बहस को पूरी तरह से खारिज करते हुए बजरंग मुनि तर्क देते हैं कि पिछले एक वर्ष में पहली बार आम उपभोक्ता वस्तुओं की मंहगाई ने उत्पादकों के मन में आशा की जो किरण जगाई है उन किरणों के स्वागत में उपभोक्ता भी शामिल हो तो उनका स्वयं का ही हित है। विशेष कर कलम के सिपाहियों को तो अवश्य ही गम्भीरतापूर्वक सोचना चाहिये।
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झूठ को स्वीकार्य नहीं है बिहार का सच

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प्रदीप श्रीवास्तव की रपट 'झूठ की परतों में छिपा बिहार का सच' 23 जनवरी को जनसत्ता के मुख्य पृष्ठ पर प्रकाशित हुआ था। श्री श्रीवास्तव का मानना है कि बिहार आज भी बीमारु राज्य है। इस राज्य के विकास के सम्बंध में सीएसओ के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ा महज नीतीश कुमार के आंकड़ों की बाजीगरी का पर्याय है, क्योंकि सीएसओ के द्वारा प्रस्तुत आंकड़ा बिहार सरकार का ही आंकड़ा है। कृषि और उद्योग में पिछड़ा हुआ राज्य 11 फीसदी के औसत विकास दर को कभी प्राप्त नहीं कर सकता है।...
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सूचना का अधिकार बनाम निजता की दरकार

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भारत के मुख्य न्यायधीश का कार्यालय भी सूचना के दायरे में आयेगा। सूचना के अधिकार से सम्बंधित इस फैसले ने पूरे देश में हलचल पैदा कर दी। पर अभी भी सर्वोच्च न्यायलय के मुख्य न्यायधीश इस निर्णय से कत्तई इत्तिफाक नहीं रखते हैं। इसी विषय के तारतम्य में कुछ दिनों पहले केन्द्रीय सूचना आयुक्त ने भी कहा था कि आयकर का वैयक्तिक रिकॉर्ड भी सूचना के अधिकार के तहत मांगा जा सकता है।...
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विकास के पथ पर बिहार

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यह बिहार सरकार द्वारा प्रायोजित किसी विज्ञापन की पंक्तियां नहीं हैं बल्कि वो तथ्यात्मक सच्चाई है जो भारत सरकार का सांख्यिकी विभाग कह रहा है. सांख्यिकी विभाग ने विकास दर के जो ताजा आंकड़े जारी किये हैं उसमें बताया है कि बिहार गुजरात के बराबर विकास कर रहा है और बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत से भी ढाई फीसदी अधिक है. ...
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भारत में खाद्यान्न संकट की आहट

रोटी, कपड़ा और मकान शायद हर इंसान की बुनियादी आवश्यकताओं में से एक है, यदि हम प्राथमिकता के क्रम में इन पर विचार करें तो संभवता कम कपड़े या मकान के बिना गुजारा संभव है परंतु बिना रोटी के नहीं। दुनिया भर में चारों तरफ बढ़ती चकाचौक और तरक्की के बीच यह भी भयावह सत्य है कि आज भी दुनिया में हर छह में से एक आदमी रोज भूखे पेट रह जाता है।
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यूरोप के गर्भ से पैदा हुए सोमालिया के समुद्री डाकू

एक बार फिर खबर आयी है कि सोमालिया के समुद्री डाकुओं ने एक ब्रिटश जहाज को अगवा कर लिया है जो भारत आ रहा था. आये दिन इस तरह की खबरें आती हैं जब सोमालिया के समुद्री डाकुओं के बारे में पढ़ने को मिलता है. लेकिन सोमालिया के ये समुद्री डाकू कहां से पैदा हो गये? इन डाकुओं के बनने की कहानी बता रहे हैं ब्रिटिश पत्रकार क्रिस मिल्टर.
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आतंक के बीस बरस बीत जाने के बाद

आज का कश्मीर 1989 के कश्मीर के बहुत अलग है। उस वक्त आंदोलित युवाओं ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट का गठन किया था। साथ ही भारत से युद्ध की घोषणा की थी। आज कुछेक कट्टर और दरकिनार हुए नेताओं को छोड़कर अधिकांश राजनीतिक नेता यहां तक कि अलगाववादी विचारधारा वाले भी अंतरसमीक्षा की स्थिति में हैं। इसका कोई खेद नहीं है कि उन्होंने क्या खोया है? बल्कि चिंता इसकी है कि अब और ज्यादा नहीं खोना चाहिए।
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कोपनहेगन सम्मेलन: सुखद सोच का दुखद अंत

हसरतों को पंख मिलने के उम्मीद में लोग कोपेनहेगन सम्मेलन को होपेनहेगन नाम से बुला रहे थे, पर अब लोग बहुत बुरी तरह गुस्से में और दुखी हैं। जब कई देशों के नेता कोपेनहेगन से रवाना हो रहे थे, तो ब्रिटेन के ग्रीनपीस के कार्यकारी निदेशक जॉन सॉवेन ने बीबीसी से कहा कि कोपेनहेगन एक ऐसी अपराधभूमि की तरह लग रहा है जहाँ से अपराधी स्त्री-पुरुष एयरपोर्ट की ओर रवाना हो रहे हैं।
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इस अभागे मुल्क पर तरस खाएं

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। फैसले के तहत उन सारे नेताओं के ऊपर भ्रष्टाचार का मामला चलाने के आदेश दिए गए है जिन्हें एक आर्डिनेंस(नेशनल रिकंसिलिएशन आर्डिनेंश) जारी कर भ्रष्टाचार के चल रहे मामले से बचा लिया गया था। जनरल परवेज मुशर्ऱफ के एनआरओ बिल को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है जिसके कारण एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति में भूचाल आ गया है।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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