परत-दर-परत
हमारे सूखे के लिए हम ही जिम्मेदार
आने वाले 15 वर्र्षो में भारत के खाद्यान्न का कटोरा अर्थात पंजाब और हरियाणा सूखाग्रस्त हो जाएंगे। वहां की धरती में सिंचाई के लिए पानी नहीं रह जाएगा। केंद्रीय भूमिगत जल बोर्ड की 2007 में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार 2025 में सिंचाई के लिए भूमिगत जल उपलब्धता ऋणात्मक हो जाएगी। उदाहरण के लिए पंजाब में जितना जल जमीन में समाता है उससे 45 प्रतिशत अधिक जल खींच लिया जाता है।
इंटरनेट पर हिन्दीः मिथक और यथार्थ
अपने वर्तमान यूनिकोडित स्वरूप में हिन्दी का इंटरनेट पर अवतरण इंटरनेट पर हिन्दी के आगाज की कहानी शुरू करता है. यूनिकोड मानक अपनाने से पहले भी हिन्दी में वेब पन्ने बनते थे लेकिन उनका बनना न बनना एक जैसा ही होता था. जो जानकारी उपलब्ध है उसके अनुसार अक्टूबर 2002 में पहली बार हिन्दी.ब्लागस्पाट.कॉम पर विनय जैन नामक व्यक्ति ने पहली बार यूनिकोडित हिन्दी में कुछ शब्द लिखे. इसके बाद वे नियमित लिखने लगे. विनय जैन के बाद दूसरे व्यक्ति आलोक कुमार हैं जिन्होंने हिन्दी में ब्लाग लिखना शुरू किया. उनका नौ-दौ-ग्यारह नाम का ब्लाग भारत में शुरू किया गया पहला ब्लाग बन गया क्योंकि विनय जैन अमेरिका में रहते हैं. कुछ शब्दों के सहारे इंटरनेट पर अवतरित होनेवाली हिन्दी ने सात साल के भीतर क्या उत्साहजन प्रगति की है?
जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू
जिन्ना को जवाहरलाल नेहरू ने पहली बार अप्रैल 1916 में देखा था जब मोतीलाल नेहरू के निमंत्रण पर वे आनंद भवन में रूके हुए थे. इसी साल दिसंबर में उन्होंने लखनऊ अधिवेशन में पहली बार गांधी जी को भी देखा था. इस अधिवेशन न तो गांधी जी की कोई खास हैसियत थी और न ही जवाहरलाल की. दोनों ही इस अधिवेशन में मौन पर्यवेक्षक की तरह मौजूद थे लेिकन जिन्ना इस अधिवेशन के केन्द्रबिन्दु थे. लखनऊ समझौते के शिल्पी के रूप में जिन्ना का योगदान इतिहास के पृष्ठों पर आदर के साथ दर्ज है. ...फिर अपनों से ठगा गया पहाड़
इन पहाड़ों की नियति शायद यही है. दरकते, पहाड़ों को देखकर लगता है की पहाड़ों के शरीर जिस तरह बिखर रहे हैं विकास के अभाव में उसकी आत्मा भी मर रही है. सूनसान होते इन पहाड़ों की आधी से ज्यादा आबादी मैदान को ठिकाना बना चुकी है तो बची आबादी भी वहां का रास्ता पकड़ने को है. कहाँ का विकास और कैसा पर्वतीय राज्य? राजधानी के नाम पैर पहाड़ पहले ही विकास के उन हिमायतिओ से धोखा खा चुका है जो पहाड़ के विकास के नाम पैर गैरसेन का ढोल पीट-पीटकर अपनी राजनीति का गाना चमका चुके थे, और मौका लगते ही उसी पहाड़ की पीठ में चुरा घोंपकर सत्ता के सौदेबाजों के रत्न बन गए...थोड़ा सा टेमी फ्लू हो जाए
भारत में अमेरिका की होड़ आत्महत्या की हद तक बढ़ गयी है. भारत में जब स्वाइन फ्लू के पहले रोगी का पता चला था तो हमारी मीडिया ने इस घटना पर इस तरह से रिस्पांस किया था मानों स्वाइन फ्लू का रोगी मिलना हमारे अंतराष्ट्रीय बिरादरी में शामिल होने का एक और प्रमाणपत्र है. खबर देने के बहाने इस खबर को "सेलिब्रेट" किया गया था. लेकिन अब परिस्थिति बिगड़ चुकी है. भारत स्वाइन फ्लू की महामारी के दरवाजे पर आ खड़ा हुआ है. वही लोग जो कल तक इसे भेड़िया आया कहकर हवा दे रहे थे आज सचमुच भेड़िया आ खड़ा हुआ है, और सरकार, मीडिया और चिकित्सा तंत्र किसी को नहीं सूझ रहा है कि क्या रास्ता अख्तियार करें?...भारत-चीन संबंध: प्यार और तकरार का सिलसिला बरकरार
भारत और चीन ने आपसी समझ बढाने के मकसद से दिल्ली और बीजिंंग के बीच प्रधानमंत्री स्तर पर जीवंत संचार संबंध (हाटलाइन) स्थापित करने का फैसला किया है। उच्चस्तरीय वार्ता के ताजा दौर की यह अकेली, पर बडी उपलब्धि रही। वार्ता आरंभ होने के ऐन पहले गुगल मैप ने अरूणाचल प्रदेश को लेकर जिसतरह से सीमा-विवाद को हवा देने की कोिशश की, उससे वार्ता में गतिरोध आने का अंदेशा उत्पन्न हो गया था। हालांकि बाद में गूगल ने अपनी गलती मान ली और मानचित्र में आवश्यक सुधार करने का वायदा भी किया। ऐसा पहली बार नहीं हुआ। एक अंतराष्ट्रीय मानचित्र में तो वर्षों तक अरुणचल प्रदेश को चीन का हिस्सा बताया जाता है, बाद में उस नक्शें के उपर लाल स्याही से क्रास कर दिया गया।
धारा 377 और इतिहास से झांकता समलिंगी
केन्द्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोईली ने एक बार फिर यह कहकर केन्द्र सरकार की नीति साफ कर दी है कि वह सर्वोच्च न्यायालय में गे संबंधों से जुड़े दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं देगी. लेकिन पहले ऐसा नहीं था.
पाकिस्तान से संबंध सुधारने की आठ मिथ्या अवधारणाएं
पाकिस्तान हमेशा से भारत के दोस्ती के हाथ को झटकता आया है, फिर भी प्रत्येक विचारशील भारतीय उपमहाद्वीप में शांति और स्थिरता का आकांक्षी रहा है, लेकिन आत्मसम्मान के साथ। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भले ही एकतरफा तरीके से यह महसूस करते हों कि भारत को हमेशा पाकिस्तान के साथ शांति के मामले में आधे से ज्यादा रास्ता पार करना चाहिए, लेकिन भारत के लिए सही रास्ता यह है कि पाकिस्तान के साथ सहयोग की बात हो या मुकाबले की, हमें हमेशा आधे से अधिक सफर तय करना चाहिए।
भारतीय कृषि पर अमेरिकी कब्जे की कहानी
भारत का आर्थिक विकास भी एक विडंबना की तरह ही आया है. आर्थिक वृद्धि, भारी संख्या में पैदा हो रही तकनीकि क्षमता से लैस नौजवान पीढ़ी लेकिन अनुसंधान और अध्ययन की उसी मात्रा में कमी ने भारत को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए सबसे सुविधाजनक स्थान के रूप प्रस्तुत कर दिया है. इसमें भी खेती विकास का नया आधार है. भारत में भले ही इसका महत्व कम हो रहा हो लेकिन अर्थव्यवस्था का मूल आधार खेती ही है, इसे कम से कम दुनिया की बहुराष्ट्रीय कंपनियां समझने लगीं हैं. लेकिन उनकी इस समझ और पहल का एक आधार और है. एग्रीबिजनेस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा लाभ का माध्यम भी है. रोग और रोग का निदान निश्चित रूप से दुनिया का सबसे अधिक लाभ कमानेवाला उद्योग बना हुआ है.
गुनाह कबूल है, जनाब!
`सर, मुझे मेरा गुनाह कबूल है।´ इस एक लाइन की स्वीकारोक्ति ने मुंबई की भरी अदालत को भौचक्का कर दिया। ये कबूलनामा एक ऐसे शख्स का है जिसने आठ महीने तक जांचकर्ताओं की पूरी टीम के छक्के छुड़ा रखे थे। अपनी बाहियात बातें और बेशर्म अट्टाहासों से आठ महीने तक यही शख्स अदालत का मजाक भी बना रहा था। लेकिन 26/11 के मुंबई हमलों के आरोपी पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के दीपालपुर तहसील स्थित फरीदकोट के निवासी 21 वर्षीय मोहम्मद अजमल आमिर कसाब ने अचानक अपना गुनाह कबूल करते हुए अदालत से अपने लिए सजा की गुजारिश कर डाली।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



