अभी नहीं बोलूंगा मैं- राजदीप
भाजपा प्रायोजित स्टिंग आपरेशन में सीएनएन-आईबीएन और राजदीप सरदेसाई की भूमिका पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. विस्फोट पर अभी तक पाठकों की ओर से जितने सवाल उठाये गये हैं उनका जवाब पाने के लिए कल शाम हमनें सीएनएन-आईबीएन के एडीटर इन चीफ राजदीप सरदेसाई से फोन पर बात करने की कोशिश की. उनसे बात हुई भी लेकिन अधूरी.
क्योंकि बात करते हुए अचानक फोन कट गया. थोड़ी देर बाद दोबारा फोन किया तो उन्होंने फोन उठाया नही. इसके बाद फिर कोशिश करना बेकार ही था. उनकी अपनी व्यस्तताएं होंगी. लेकिन ऐसे बहुत से सवालों के जवाब अनुत्तरित रह गये जिनका मिलना बहुत जरूरी है. आखिरकार राजदीप हमारे देश के पत्रकारों के युवा तुर्क कहे जाते हैं और जहां-जहां से जो भी काल आयेगी उनको जवाब देना चाहिए. उनसे जो बातचीत हुई उसमें उन्होंने कहा कि उनको जो कहना है वे लोकसभा स्पीकर को लिखकर दे चुके हैं. इससे ज्यादा और किसी से वे कुछ नहीं बोलेंगे.
मैंने पूछा लेकिन आपके ऊपर जिस तरह के आरोप लग रहे हैं उसको देखते हुए तो आपको जवाब देना ही चाहिए. राजदीप सरदेसाई का जवाब था कि कुछ लोग राजनीतिक साजिश के तहत उनको घेरने की कोशिश कर रहे हैं. मीडिया और लोकसभा स्पीकर के सामने भी वे अपना यही पक्ष रख चुके हैं. लेकिन जनता की ओर से जो सवाल उठाये गये हैं उनके जवाब तो जनता को चाहिए. विस्फोट पर ही जो प्रमुख रूप से सवाल और सुझाव आये हैं, वे हैं-
1.सीएनएन-आईबीएन ने वाकई नैतिकता का उल्लंघन किया है. इस अनैतिक काम से सीएनएन-आईबीएन की विश्वसनीयता घटी है.
राजदीप सरदेसाई अब राजदीप बेअसर देसाई हो चुके है.
2. स्टिंग आपरेशन में ऐसा कोई विजुअल आया ही नहीं है जिसे वे दिखा सकते. अगर ऐसा था तो आधे अधूरे विजुअल को ही क्यों नहीं दिखाया गया?
3. सीडी जैसी भी थी उसे दिखाया जाना चाहिए था.
4. राजदीप की करनी गलत है. एकदम अनैतिक काम.
5. योगेन्द्र यादव ने सीडी के वेरीफिकेशन की बात कही है. एक पाठक कहते हैं कि वेरीफिकेशन की बात कहां से आती है. क्या पत्रकारों का अपने ही लोगों के ऊपर से भरोसा उठ गया है?
6. क्या राजदीप सरदेसाई का यह व्यवहार इस आशंका को सही साबित करता है कि वे लेन-देन के सौदागर हैं?
7. क्या उन्होंने किसी राज्यसभा सीट आदि के चक्कर में तो यह सब नहीं किया?
8. सीएनएन-आईबीएन ने जो किया है वह बेहूदा है. इसे भला वे कैसे जायज ठहरा सकते हैं.
9. प्रख्यात कानूनविद प्रशांत भूषण का कहना है कि सीडी दिखाने में कोई नैतिक, कानूनी या संसदीय अड़चन नहीं थी. आखिरकार जनतंत्र में जनता का हित सर्वोपरि होता है.
10. योगेन्द्र यादव जो कि सीएनएन-आईबीएन के नियमित विश्लेषक और राजदीप सरदेसाई के मित्र हैं, का भी कहना है कि अगर वह सीडी थी थो इसे दिखाना चाहिए था.
क्या राजदीप जवाब देंगे?
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- सुदर्शन का (कु) दर्शन
- सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
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अब राजदीप को नाम नहीं ईनाम चाहिये और ईनाम के लिये कभी ईमान को कुरबान करना ही पड़ता है भाई।
जब देश के नेता ही देश बेच रहे हों, तो पत्रकारों से क्या उम्मीद
गलती तो अरुण जेट्ली की है, क्यों भरोसा किया उसने राजदीप के ऊपर?
राजदीप की विश्वसनीयता इस कांड के बाद मिट चुकी है, सारी की सारी मिट चुकी है!
vichar karna chahiye
जनता ने असलियत पहचान ली, इतना ही बहुत है.
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