मुकेश अंबानी के खिलाफ एक आम आदमी की गांधीगीरी
किरीटभाई जानी कोई हस्ती नहीं है. एक सामान्य नागरिक हैं. वे बडोदरा में रहते हैं और आईपीसीएल कम्पनी के रिटायर्ड कर्मचारी है. लेकिन 5 नवम्बर 2007 से उन्होने देश के जाने माने उद्योगपति के खिलाफ अनोखी गान्धीगीरी छेड़ रखी है और वह उद्योगपति कोई मामूली नही मुकेश भाई अम्बानी है.
शायद इस तरह की मिसाल बहुत कम मिलती है. किरीट भाई 5 नवम्बर 2007 से नियमित रुप से रिलायंस समूह के मालिक मुकेश भाई अम्बानी को एक रु. का मनीआर्डर भेजते हैं. किरीट का कहना है कि वे अब तक करीबन 800 मनीआर्डर भेज चुके है.
आखिरकार गान्धीगीरी के लिए किरीटभाई को क्यो मजबूर होना पड़ा? बड़ोदरा मे आरपीसीएल कम्पनी है जिसका नाम पहले आईपीसीएल था. जहां 1976 मे किरीटभाई इस कम्पनी में पर्सनल सेक्रेटरी के रुप मे काम करते थे. रिलायंस के प्रमुख मुकेशभाई अम्बानी ने आईपीसीएल कम्पनी को टेकओवर कर लिया और इस कम्पनी का नाम आरपीसीएल हो गया उस समय कम्पनी से कर्मचारियो और अधिकारियो की छ्टनी करने के लिए वीआरएस की योजना प्रस्तावित की गई थी.
उस समय आईपीसीएल कम्पनी की पॉलिसी के अनुसार जो छोटे कर्मचारी थे उनकी रिटायरमेन्ट की उम्र 60 साल और अधिकारियों की उम्र 58 साल निर्धारित की गई थी और वीआरएस के लिए 15 लाख की बात की गई थी. किरीटभाई का कहना है कि उनको 58 साल की रिटायरमेन्ट योजना के तहत मात्र 9 लाख की रकम दी गई जबकि उन्हे 15 लाख मिलने चाहिए थे. किरीटभाई का कहना है कि जब उन्हे अपने साथ अन्याय होने का एहसास हुआ और उन्होने बड़े अधिकारियो से अपील की लेकिन परिणाम कुछ नही निकला.
इसके बाद किरीटभाई ने कोर्ट के दरवाजे खटखटाने की बजाय गान्धीगीरी करना उचित समझा. वे स्वयं कहते हैं कि क्या न्याय की चौखट पर सिर पटकने के बाद किसी को न्याय मिला है. इसलिए वे मनीओर्डर फोर्म मे लिखते है “ मेरे प्रिय मुकेश भाई ......धीरुभाई अम्बानी के पुत्र और भी धनवान बनो ....... वन्दे मातरम...... आर्शीवाद साहित.
वे बताते है कि अब तक एक मनीओर्डर के सिवाय सभी मनीओर्डर वापिस आये हे. शायद एक मनीओर्डर गलती से किसी और के हाथ लग गया होगा. पर ना जाने क्यों उन्हे विश्वास है कि उनकी गान्धीगीरी एक दिन रंग लायेगी. फिलहाल इन दिनो किरीट भाई लोगो को ज्योतिष सिखाकर अपनी जिंदगी चला रहे हैं.
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