शिक्षा के अभेद्य किले में स्थाई सुरंग
माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर. यही नाम है राजस्थान में 10 वीं और 12 वीं की शिक्षा व्यवस्था का बोझ उढाने वाले संस्थान का. कहने को इसका अपना इतिहास है जिसकी शिक्षा और परीक्षा व्यवस्थाओं को विदेशों तक अपनाया गया है. लेकिन गत शिक्षा सत्र में बोर्ड के अभेद्य किले में सुरंग लग गई. लाख कोशिशों और अरोप प्रत्यारोपों के बीच बोर्ड अपने प्रश्न पत्रों को लीक होने से नहीं बचा पाया. ऐसे में सवाल है कि क्या इस बार बोर्ड अपने खेत को बाड़ के खाने से बचा पायेगा या नही?
बोर्ड परीक्षाओं को लेकर ही ‘‘बाड ही खेत को खाये तो कोई क्या कर सकता है". ये कहना है हॉल ही में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन बने सुभाष गर्ग का. वैसे देखा जाये तो इस वयान को देकर बोर्ड अध्यक्ष ने गत बर्ष की परीक्षाओं को लेकर मचे बवाल पर बहुत कुछ कह दिया है. इस बयान को अगर बोर्ड प्रशासन से जोडा जाये तो ये पूर्व अध्यक्ष पर निशाना है. और अगर ऐसा नही है तो फिर उन्होंने केन्द्राधीक्षकों को कटघरे में खडा करने की कोशिश की है. गत बर्ष जब रोजाना बोर्ड के प्रश्नपत्र लीक हो रहे थे तो परीक्षा केन्द्र और उससे जुडे लोगों को शक की दृष्टि से देखा जा रहा था.
बोर्ड अध्यक्ष ने बाड के खेत खाने की बात को सामान्य बात माना है. उनका मानना है कि उन्होंने तो सिर्फ इतना कहा है कि इस बार अपनी ओर से सब व्यवस्थाऐं चौंक चौबंद कर दी है. इतना ही नहीं केवल परीक्षाओं की निगरानी के लिए 5 करोड रूपये का अतिरिक्त खर्चा भी किया है. कुछ व्यवस्थाऐं तो ऐसी कि है जो उनके अनुसार देश में अपने तरह की पहली व्यवस्थाऐं होगी. उनका मानना है कि प्रश्न पत्रों और कॉपियों को क्रमबद्व करने के अलावा उनकी जो पैकिंग व्यवस्था है वह अपनी तरह की संभवत पहली है. इसके लिए उन्हें पहले तो पॉलिथिन में स्टिच किया गया है. उसके बाद मजबूत आउट कवरिंग की गई है. इतना ही नहीं पुलिस थानों से प्रश्न पत्र लाने वालों के लिए आई कार्ड जारी किये गये है.
वैसे इस बार बोर्ड के स्तर पर अतिरिक्त सावधानी वरती गई है. जिसमें तकनीकी के साथ अन्य संसाधनों को भी शामिल किया गया है. इसमें माइक्रो आँब्जर्वर,फलाइंग स्क्वैड के साथ चिंहित स्थानों पर वीडियोग्राफी की भी व्यवस्था की गई है. गर्ग कहते है उन्होंने अपने स्तर पर विशेष उडन दस्तों की भी व्यवस्था की है जो गोपनीय है.
गर्ग अपनी तमाम व्यवस्थाओं के बाद अन्तिम जिम्मेदारी ईश्वर पर छोड रहे है. इस बीच बाड और खेत की बात भी जब करते है तो बोर्ड से लेकर केन्द्राधीक्षक तक को नैतिकता से काम करने की नसीहत भी देते . बातचीत में आश्वस्त होने के साथ ही किसी ऐसे गिरोह को लेकर आशंकित भी नजर आते है जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को चौपट करने की नीयत से काम करता दिखाई पड रहा है. उनका मानना है कि प्रदेश में कुछ शिक्षा माफिया गिरोह भी हो सकते है जो सरकार और उसकी व्यवस्थाओं को धता बताने पर उतारू हो सकते है. वो कहते है हमने इस बार अपनी ओर से हो सकने वाली हर एक व्यवस्था और सावधानी बरती है. फिर भी...... बाड़ ही खेत को खाऐ तो कोई क्या करे, इस बात में गत बर्ष की परीक्षा गडबडियों की ओर भी इशारा है. गत बर्ष की परीक्षाओं में 10 वीं के अधिकांश प्रश्नपत्रों को लेकर सुर्खियॉ रही थी. जिनमें से कुछ एक परीक्षाऐं बोर्ड ने दुवारा आयोजित कराई थी. जिनके चलते परीक्षा परिणाम बिलम्व से आ पाये थे.
इस बार बोर्ड ने एक और सख्त कदम उठाया है. जिसके चलते एक बार फिर निजी क्षेत्र को कटघरे में खडा करने की कोशिश की गई है. वीक्षक डयूटियों से निजी विद्यालयों के शिक्षक को दूर कर दिया गया है. हर संभव स्थिति में सरकारी शिक्षक ही परीक्षा कक्ष में लगाने को कहा गया है. इससे सवाल पैदा होता है कि एक ओर जहॉ शिक्षा को पूरी तरह से निजी हाथों में सोंपने के प्रयास चल रहे है वही निजी क्षेत्र के शिक्षकों को परीक्षा डयूटियों से दूर रख कर उनके उपर अविश्वास व्यक्त किया जा रहा है. सूत्रों की माने तो बोर्ड की चौंक चौंबंद व्यवस्थाओं के बावजूद लोगों को लगता है कि इस बार भी परीक्षाओं से पहले उन्हें प्रश्न पत्र मिलेगें. इस बावत विधार्थी भी आशांवित है. वो अपने मोबाईल रिचार्ज करा रहे है तो कुछ ने अपने लिए नऐं मोबाईल खरीद भी लिए है. दवे स्वर में वो इस बात को भी स्वीकार कर रहे है कि उनके पास ऐसी सूचनाऐं है कि पेपर तो लीक होगें.
ऐसे में अब ये देखना दिलचस्प होगा कि राजस्थान बोर्ड अपनी किलेबंदी में किस हद तक सफल हो पाता है. इस बीच एक और चर्चा है कि इस बार ऐसा कुछ नहीं होगा. ऐसा कहने वालों का मानना है कि गत बर्ष सब कुछ बोर्ड अध्यक्ष जो कि भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त थे को जल्दी हटाने के लिए किया गया था. बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष भी ऐसी बातों से इत्तफाक रखते है. गौर करने लायक बात ये भी है कि आरोप प्रत्यारोपों के बीच तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष भरतराम कुम्हार को इस्तीफा देना पडा था. हम तो ये ही उम्मीद करेगें की राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की खोई हुई साख फिर से लौट आये. लेकिन इतना जरूर है कि राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. कक्षा आठवीं,जिसकी कि अभी परीक्षा चल रही है. में मैरिट आने को लेकर भी तरह तरह की चर्चाऐं आऐ दिन सुनी जा सकती है. गौर करने लायक बात ये है कि मैरिट अधिकांश निजी स्कूलों से आती है. और एक बार जिस स्कूल से मैरिट आ जाये उसकी फिर चॉदी ही चॉदी हो जाती है. ऐसा लगता है कि शिक्षा के इस अभेद्य दुर्ग में निजी खिलाड़ियों ने सुलह समझौता करके स्थाई सुरंग का निर्माण कर लिया है.
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