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कब रुकेगी इज्जत की खातिर मौत?

image दिल्ली के अशोक विहार में कुलदीप और मोनिका की जघन्य हत्या कर दी गयी

इज्जत के खातिर मौत देने का सिलसिला आखिर कब रुकेगा? आखिर कब तक मान सम्मान के नाम पर युवाओं की हत्या होती रहेगी ? कौन है ! जो इस जघन्य कृत्य को चुनौती देने की हिम्मत करेगा ? इसका जवाब कानून नहीं है, इसका जवाब हम सभी को अपने आप से पूछना है, इस समाज से पूछना है, जिसके बीच हम रहते है।

इज्जत के खातिर मौत (ऑनर किलिंग) का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। यह सब सम्मान के नाम पर हो रहा है। सम्मान के नाम पर प्रति वर्ष सैकड़ों युवक और युवतियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है। देश में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान ऐसे राज्य है जहां से लगातार ऑनर किलिंग की घटनाएँ सामने आ रही हैं । बीते रविवार को दो प्रेमी जोड़े को ऑनर किलिंग के भेट चढ़ा दिया गया यह घटना दिल्ली में कुलदीप और मोनिका के साथ तथा हरियाणा में रिंकू और मोनिका के साथ घटी। दिल्ली के अशोक विहार में कुलदीप और मोनिका की जघन्य हत्या कर दी गयी वहीं हरियाणा के भिवानी में रिंकू और मोनिका की हत्या कर फाँसी पर लटका दिया गया ।

इसी बीच महिलाओं और बच्चों के हितों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन [एनजीओ] शक्ति वाहिनी द्वारा दायर की गयी जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय नें काफी सख्त रूख अपनाते हुए केंद्र सरकार और ८ राज्य सरकारों को नोटिस भेजा है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा और न्यायाधीश ए. के. पटनायक नें केंद्र तथा हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, झारखण्ड, बिहार, हिमांचल प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों को जवाब-तलब किया है। गैर सरकारी संगठन शक्ती वाहिनी नें उक्त जनहित याचिका के माध्यम से आरोप लगाया था कि केंद्र और राज्य सरकारें इस तरह के अपराधों के रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठा रही हैं। और न ही ऐसे प्रेमी जोड़ों को सुरक्षा देने के लिए कोई पॉलिसी या मैकेनिज्म तैयार कर रही हैं।

गैर सरकारी संगठन नें जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकारें इस अपराध को चुप्पी साधे मूक दर्शक की तरह देख रही हैं । इनके खिलाफ कानून बनाये जाने के बारे में भी कोई कदम नहीं उठा रहीं है । याचिका के माध्यम से गैर सरकारी संगठन के वकील रविकांत ने  मांग की है कि सरकारें इस बावत तैयार की गई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय योजना का खुलासा करें साथ ही सरकारें ऑनर किलिंग के रोकथाम और इसे बढ़ावा देनें वालों (खाप पंचायतों तथा अन्य) के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने हेतु प्रभावित राज्यों के प्रत्येक जिलों में एक स्पेशल सेल बनाएं जहां ऐसे नव विवाहित युवा जोड़े अपनी सुरक्षा के लिए गुहार कर सकें, तथा ऑनर किलिंग रोकनें में मदद मिल सके। इस याचिका में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को पक्षकार बनाया गया है।

इस मामले पर पत्रकारों से बात करते हुए केन्द्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोईली नें बताया है कि केंद्र सरकार अगले माह संसद के मानसून सत्र में ऑनर किलिंग मामले पर एक विधेयक लाने पर विचार कर रही है। वीरप्पा मोईली नें बताया है कि इस विधेयक का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इस विधेयक में कई धाराओं को संशोधित कर दोषियों को उचित और आवश्यक सजा देनें के प्रावधान को उल्लेखित किया गया है। उन्होंने कहा है कि इस विधेयक के लागू हो जाने पर ऑनर किलिंग को रोकने में काफी मदद मिलेगी। ऑनर किलिंग के लिए पूरी  पंचायत को दोषी ठहराने संबंधी कानून का समावेश इस विधेयक में होना लगभग तय माना जा रहा है।

ऑनर किलिंग केवल भारत की ही समस्या है ऐसा नहीं है, यह एक वैश्विक समस्या है। पिछले दिनों संयुक्त राष्ट्र संघ नें संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष नामक एक रिपोर्ट जारी की थी। उस रिपोर्ट में बताया गया था कि विश्व में 5000  से भी अधिक प्रेमी जोड़े ऑनर किलिंग के शिकार हो जाते है । कई पश्चिमी देशों में ऑनर किलिंग की घटनाएँ देखने को मिल रही हैं इसमें फ़्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन आदि देश शामिल हैं। यह बात दीगर है कि यहां दूसरे देशों से आने वाले समुदाय के लोग ही ऑनर किलिंग के शिकार होते है। भारत के आलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, इजिप्ट, लेबनान, टर्की, सीरिया, मोरक्को, इक्वाडोर, युगांडा, स्वीडन, यमन, तथा खाड़ी के देशों में ऑनर किलिंग जैसे अपराध प्रचालन में हैं ।

दरसल सगोत्रीय और अंतरजातीय विवाह ही इस ऑनर किलिंग समस्या की जड़ में है। उत्तर भारत में सामाजिक मान्यता है कि सगोत्रीय और अंतरजातीय विवाह नहीं होने चाहिए। यहां समान गोत्र में विवाह परंपरा के विरुद्ध माना जाता है तो अंतरजातीय विवाह अपराध. सवाल यह है कि अगर एक गोत्र के लड़कों को भाई-बहन माना जाय तो फिर अंतरजातीय विवाह से क्या समस्या है? समाज को दोनों से ही समस्या है। अगर एक सगोत्रीय परिवार के युवा आपस में विवाह करते है तो पंचायतें उन युवाओं की हत्या का फतवा जारी कर देती है, साथ ही उन युवाओं के परिवारों से सजातीय समाज द्वारा रोटी-बेटी का संबंध तोड़ लेने की चेतावनी दी जाती है।

वहीं अंतरजातीय विवाह करने वाले युवाओं के परिवारों को क्रूर सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है । इस स्थिती में सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा परिवार (जिसमें परिवार के अन्य युवाओं की सजातीय विवाह रुक जाना भी शामिल है) इस स्थिती के लिए अपने ही बच्चे को दोषी मानने लगता है, और मौका मिलने पर ऑनर किलिंग जैसा जघन्य अपराध कर बैठता है । सगोत्रीय विवाह के बारे में कुछ लोगों का तर्क है कि हिन्दू धर्म के लोगों की पहचान गोत्र से होती है। इसका मतलब यह निकाला जाता है कि एक गोत्र के सभी लोग एक परिवार के होते है । वे इस मामले में विज्ञान का हवाला देते हुए कहते है कि एक गोत्र का मतलब जेनिटिक्स समानता । अगर एक ही परिवार या गोत्र में विवाह होता है तो उनके बच्चों में जेनिटिक्स  विकृतियाँ उत्पन्न हो सकती है । यह तर्क सगोत्रीय विवाह के विरोधियों का है किन्तु इस तरह का कोई वैज्ञानिक शोधपत्र अभी तक तो सामने नहीं आया है ।

दरसल ऑनर किलिंग समस्या का एक बड़ा कारण राजनैतिक है। अपने वोट बैंक को मजबूत करने के खातिर राजनैतिक पार्टियों और राजनेताओं द्वारा देश में जातीयता को बढ़ावा दिया जा रहा है । सगोत्रीय विवाह के सवाल पर रोहतक में हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा खाप पंचायतों के साथ खड़े नजर आते है और खाप पंचायतों को गैर सरकारी संगठन साबित करते है। तो कही नवीन जिंदल हिन्दू विवाह कानून में संशोधन कर सगोत्रीय विवाह पर रोक लगाने जैसी खाप पंचायतों की मांग को पार्टी में उठाने का आश्वासन देते नजर आते है ।

अगर यह सिलसिला रोकना है तो हमें अपने आप को बदलना होगा, रूढ़िवादिता के चंगुल से स्वयं को और समाज को छुड़ाना होगा, जातिवाद के दलदल से बाहर आकर, ऊँच-नीच के भेद-भाव को ख़त्म करना होगा, और सबसे बड़ी बात तो यह है कि उन परिवारों को भरोसा देना होगा कि अगर तुम्हारे बच्चे सगोत्रीय या अंतरजातीय विवाह करते है तो तुम्हे अपने समाज में सामाजिक बहिष्कार का दंश नहीं झेलना होगा. परिवार के दूसरे बच्चे के विवाह को लेकर सजातीय बहिष्कार नहीं किया जायेगा. तुम्हे किसी तरह की छीटाकशी और तानाकशी का सामना नहीं करना पड़ेगा. अगर हम यह सब नहीं कर पाए तो शायद आने वाला  विधेयक या कानून भी ऑनर किलिंग पर लगाम लगाने में सक्षम नहीं होंगें ?

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Sunil Kumar on 23 June, 2010 14:21;02
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बिल्कुल ठीक लिखा है, अगर यह सिलसिला रोकना है तो हमें उन परिवारों को भरोसा देना होगा कि अगर तुम्हारे बच्चे सगोत्रीय या अंतरजातीय विवाह करते है तो तुम्हे अपने समाज में सामाजिक बहिष्कार का दंश नहीं झेलना होगा. परिवार के दूसरे बच्चे के विवाह को लेकर सजातीय बहिष्कार नहीं किया जायेगा. तुम्हे किसी तरह की छीटाकशी और तानाकशी का सामना नहीं करना पड़ेगा. अगर हम यह सब नहीं कर पाए तो शायद आने वाला विधेयक या कानून भी ऑनर किलिंग पर लगाम लगाने में सक्षम नहीं होंगें ?
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tulsisinghbisht@gmail.com on 23 June, 2010 14:35;44
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कब रुकेगी इज्जत की खातिर मौत? राजेन्द्र जी लेख काफी अच्छा है आैर अपने कुछ कुछ दृष्टिकोण भी डाला है आज समाज में लोग अपनी इज्जत के खातिर अपनी बेटियों को मार रहे है जो गलत है। वर्तमान समाज एक गोत्र में लड़के लड़की की शादी को स्वीकार नहीं कर रहा है आैर साथ ही एक बरदारी से दूसरी बरादारी में भी शादी को स्वीकार कर नहीं रहा है। जैसे पंजाबी लड़का किसी महाराष्ट्रीय लड़की से शादी कर ले इत्यादि इत्यादि। लेकिन यह क्यों हो रहा है इसका कारण कोई भी नहीं जानता है सबसे पहले हम लोगों का यह मान लेना चाहिए कि लड़का हो लड़की दोनों में आकर्षण होता है आैर यह आकर्षण की उम्र 14 से 30 साल तक रहती है उस समय कोई भी लड़का या लड़की यह नहीं सोचता/सोचती की हम अगर किसी से प्यार कर रहे है, क्या यह गलत कर है? क्या सही? वर्तमान युग में आज सभी घरों में केबल टीवी आैर मोबाइल ने प्रवेश कर लिया है जिससे किशोर अवस्था में ही भटकावपन उभर रहा है। मां बाप इस चीज पर ध्यान नहीं देते आैर गलती लड़के आैर लड़की की बता देते है। जब तक हमारे समाज में दहेज प्रथा आैर मां बाप अपने बेटा आैर बेटी को सही ज्ञान नहीं देंगे तब तक यह भटकावपन चलता रहेगा। साथ ही अब देश में एक कानून भी बनाना होगा कि कोई भी लड़का या लड़की जो 14 से 21 साल तक के है अगर एक ही गोत्र में विवाह करते है तो यह कोई बेइज्जती नहीं है बल्कि लड़का आैर लड़की की राजामंदी से यह शादी हुई है इसमें मां बाप का कोई दोष नहीं है। अगर उनके रिश्तेदार उनकों कुछ सुनाते है तो रिश्तेदारों को भी सजा सुनाई जाए।
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Dr. Sudha Arora on 23 June, 2010 15:15;57
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राजेश जी पहले तो इस सामयिक, ज्वलंत और सामाजिक लेख के लिए आपको साधुवाद, आपने लेख में इस समस्या का मूल कारण बता दिया है. समस्या का मूल कारण है उस कपल्स के परिवार का सजातीय बहिष्कार, उस परिवार के अन्य बच्चों का सजातीय शादी-ब्याह रूक जाना, परिवार को बाकी समाज द्वारा हेय दृष्टी से देखा जाना, छीटाकशी का शिकार होना, सगोत्रीय या अंतरजातीय विवाह के बाद युवाओं के परिवारों को इस समस्या से छुटकारा कोई नहीं कर रहा है सब पुलिस की निष्क्रियता और कड़े कानून की बात कर रहे है किन्तु यह वाकई कानून का विषय नहीं बल्कि सामाजिक विषय है अतः इसका समाधान सामाजिक जागरूकता में ही संभव है.
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sushil Gangwar on 23 June, 2010 20:35;06
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ऑनर किलिंग ke chakkar me apne hi apno ke khoon ke payse ho jaate hai. Ji Ejjat ko bachane ke liye , jo ghinnona apraad kud karte hai . Tab ऑनर किलिंग ka bhut kaha jata hai.
www.sakshakar.com
www.sakshatkar-tv.blogspot.com
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Prem Kumar on 23 June, 2010 21:44;45
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भाई यह जातिप्रथा और लोगों के बीच भेदभाव को बढ़ावा देने वाली बात है. इसपर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए.ऐसा लगता है कि उत्तर भारत में क़ानून व्य़वस्था नाम की कोई चीज नहीं है. वहाँ युवाओं के लिए कोई अधिकार नहीं है. यह पूरी तरह से मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों का हनन है. सरकार को लोगों को इसके प्रति जागरूक करना चाहिए. सरकार लोगों को उनके संवैधानिक अधिकार और अन्य सूचनाओं की जानकारी देने के लिए एक पाक्षिक पत्र भी शुरू कर सकती है.
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Anant Raghav on 23 June, 2010 22:14;05
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अरे मानवाधिकारी यहाँ भी आ गये. शर्म करो आधुनिकता के नाम पर और कानून की आड़ लेकर कुछ भी लिखने और बोलने से बचो. मैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गाँव में पैदा हुआ. बचपन से हमें ये सिखाया गया कि यह मेरा परिवार ही नहीं बल्कि पूरा गाँव, यहाँ तक की आपपास के सारे गाँव के लोग भाई-बहन हैं, चाहे उनकी जाति और धर्म कुछ भी हो. एक नौजवान जाट के लिए कोई बूढ़ा दलित तो चाचा ही होंगे. हमें संस्कार दिए गए हैं कि जाति और गोत्र से ऊपर उठकर गाँव की सारी लड़कियाँ बहन हैं. इसमें ग़लत क्या है.
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Rajesh Sawant on 23 June, 2010 22:58;56
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अनंत राघव जी सच हमेशा कडवा होता है मानवी हक्क के कार्यकर्ता और पत्रकार राजेश सिंग नें ऑनर किलिंग के खिलाफ उंगली उठाई है जो आपको बुरा लग रहा है.

दुनिया के सभी धार्मिक ग्रंथों में लगभग यह बताया गया है कि पूरे जग भर की मानव जाति एक ही माता-पिता की संतान है सारी सृष्टि हिन्दू धर्मानुसार मनु और सतरूपा की संतान है और आप भी अपनी प्रतिक्रिया में लिखते है कि जाति और गोत्र से ऊपर उठकर गाँव की सारी लड़कियाँ बहन हैं. इसका मतलब यह हुआ कि आप भी जिस लडकी से शादी करने वाले होंगे या किये होंगे वह मनु और सतरूपा की संतान होने के कारण आपकी बहन हो गयी अब आपको भी सावधान रहने की जरूरत है... क्योंकि आपके ही अनुसार आप भी ऑनर किलिग़ के रेंज में है.
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वीरेन्द्र जैन् on 24 June, 2010 13:40;54
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इसे थोड़ा कुछ करने की दृष्टि से भी सोचें। समाज सुधार के काम अगर सरकार से होते होते तो सती प्रथा, दहेजप्रथा, वधुदहन,कन्या गर्भपात,बाल विवाह,परदा प्रथा,आदि बन्द हो चुके होते। यह संगठित गिरोह का एकल राहियों पर हमला है। पहली ज़रूरत इस बात की है कि ऐसे सभी दम्पत्तियों और मित्रों को संगठित होकर एक समाज बनाना चाहिए और फिर इस गिरोह का मुकाबला करना चाहिए तब ये वोट बैंक के लिए कुत्ते जैसी लोटती सरकारें गम्भीरता पूर्वक सुनेंगीं। क्या यह ज़रूरी नहीं है कि जे एन यू दिल्ली में केवेल दिल्लीवालों का बड़ा सम्मेलन हो और उसमें मॆ मीडिया की उपस्तिथि सुनिश्चित की जावे ताकि पूरे देश में सन्देश जा सके। इसके बाद फिल्मी और क्रिकेट की दुनिया को मिला कर ऐसे सारे सेलिब्रिटीस को बुला कर एक और राष्ट्रीय आयोजन हो और दुश्मनों की साफ साफ पहचान की जावे। इसी अवसर पर सरकार अपना रुख साफ करे। अभी तो कांग्रेस के मुख्य म्ंत्री और केन्द्रीय मंत्री तक भटकाने वाले बयान दे रहे हैं। ये एक बेहद महत्वपूर्ण मसला है और इसे नक्सल समस्या से आगे माना जाना चाहिए।
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manav on 24 June, 2010 17:26;03
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Dear Raghav,plz apne zameer se pucho ke sach kya hai,Gaon me jati ki ladai sabse jyada hai, kuain ,chaupal, sab alag alag hain ,gaon me balatkar bhi hote hain awaidh sambandh bhi bante hai,jatio ke taane bhi mare jaate hain ,barat nikalne ghodi par chadhne par pabandi lagayi jaati hai aap kahte ho ki pura gaon behan bhai ki tarah rahta hai bilkul galat hai,apne dhrma grantho ko dekh lo ramayan, mahabharat, puran , ved ,manusmriti, etc sabhi me nafrat ki baaten hain , suni sunai baaten mat bolo tum padhe likhe ho khud puri kitab padho matlab puri kitab tab bolo, tumhe kai bhai behno ki sadi ke example mil jayenge,baap beti, ke bhi ,brhma ki kahni bhi padh lena jisne ye puri srishti banayi hai.
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अजय प्रकाश on 24 June, 2010 20:07;25
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राघव नें जो कहा है उसमें बुराई क्या है, यह मिडिया और मानवाधिकार वालों को समझना चाहिए. स्वस्थ और सामाजिक मूल्यों को मानने पर हमें क्यों रूढ़ीवादी और पिछड़ा कहा जाए. सामाजिक व्यवस्थाओं के ताने-बाने को तोड़कर अपने ही गाँव और गोत्र में शादी करना कतई उचित नहीं है. जो तथाकथित लोग इसका समर्थन करते हैं, उनकी समझ पर मुझे दया आती है. मैं पूछना चाहूँगा कि क्या आप अपने परिवार में विवाह कर सकते हैं, नहीं न. इसलिए मैं पूरे गाँव और गोत्र को अपना परिवार मानता हूँ. यह ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का छोटा प्रारूप ही तो हुआ. इस लिहाज से मेरी सोच अधिक आधुनिक और आदर्श है.
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image राजेश सिंह मुंबई में रहनेवाले राजेश सिंह मानवाधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार हैं. वर्तमान समय में नागरिक विकल्प नामक पत्रिका का संपादन और मानवाधिकार संस्था का संचालन.
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कब रुकेगी इज्जत की खातिर मौत?
इज्जत के खातिर मौत देने का सिलसिला आखिर कब रुकेगा? आखिर कब तक मान सम्मान के नाम पर युवाओं की हत्या होती रहेगी ? कौन है ! जो इस जघन्य कृत्य को चुनौती देने की हिम्मत करेगा ? इसका जवाब कानून नहीं है, इसका जवाब हम सभी को अपने आप से पूछना है, इस समाज से पूछना है, जिसके बीच हम रहते है।...
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शिक्षा के बाजार में बेजार होता बचपन
शिक्षा का नया सत्र शुरू होने जा रहा है. सरकार शिक्षा के अधिकार के कानून की प्रक्रिया में है. महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सरकारें माध्यमिक कक्षाओं तक विद्यार्थियों को अनुत्तीर्ण करने पर प्रतिबन्ध लाने के कानून बना रही हैं. एस.एस.सी.के विद्यार्थियों के लिए 'बेस्ट ऑफ़ फाइव"फ़ॉर्मूला लागू कर दिए जाने से विद्यार्थिओं के अंकों के प्रतिशत में जबरदस्त वृद्धि हुई है,जिसके चलते महाविद्यालयों में प्रवेश का संकट पैदा हो गया है....
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