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हिन्दुओं ने खोल दिए दिल के दरवाजे

image पाकिस्तान में आई भयावह बाढ़ का एक िचत्र

पिछले एक सदी के भयंकर बाढ़ से जूझ रहे पाकिस्तान ने भले ही भारत की पांच मिलियन डॉलर की सहायता लेने में आनाकानी की हो लेकिन यहां के हिंदू समुदाय ने संकट की इस घड़ी में मुसलमान भाइयों की ऐसी मदद की है जिसने नफरत की राजनीति करनेवाले पाकिस्तान के हुक्मरानों की आंखें खोल दी है। बाढ़ प्रभावित इलाके में हिंदू समुदाय के लोग जहां आर्थिक सहायता दे रहे है, वहीं रमजान के महीनें में लोगों को सहरी और रोजा खोलने के वक्त खाना बनाकर भी ला रहे है। हिंदुओं के इस भावना से पाकिस्तान के दछिणपंथी राजनीति करने वाले नवाज शरीफ भी खासे प्रभावित हो गए है। वे अपने भाषणों में हिंदुओं की जोरदार तारीफ कर रहे है।

सिंध में हिंदू समुदाय की संख्या काफी है। सक्खर, जैकोबाबाद, कराची में हिंदू खासी संख्या में है। इनके हाथ में व्यापार है। अच्छा पैसा भी है। कुछ जमींदार हिंदू भी है। जिसमें भारत के पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा नेता जसवंत सिंह के चचेरे भाई भी शामिल है। सिंध के कई जिले इस समय बाढ़ से तबाही के शिकार हो गए। इस मौके पर हिंदू समुदाय के लोग खुलकर मुसलमानों की मदद करने को आगे आए है। सिंध के सक्खर में हिंदू परिवार की महिलाएं नियमित रुप से अपने घरों में खाना बनाकर बाढ़ प्रभावित लोगों को मदद की है।

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस राणा भगवान दास भी बाढ़ प्रभावित लोगों को मदद करने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे है। और तो और सरकार पर लगे आरोपों को देखते हुए बाढ़ राहत कार्य के लिए बनाए गए कमिशन में भी राणा भगवान दास को रखा गया है। नवाज शरीफ जब खुद सक्खर पहुंचे तो इस भावना को देख उसकी प्रशंसा करने से नहीं चुके। टीवी चैनलों पर हिंदू समुदाय के लोगों को धन्यवाद दिया। गौरतलब है कि इस समय बाढ़ से से तबाही के बाद पाकिस्तान में सरकारी सहायता नाममात्र की है। सरकार को लोग दान देने से भी गुरेज कर रहे है। लोगों का कहना है कि बाढ़ पीड़ितों तक पैसा पहुंचेगा या नहीं इसकी गारंटी नहीं है। इसलिए एनजीओ को पैसे देने में कोई गुरेज उन्हें नहीं है।

लाहौर के अमीर हिंदू परिवार के महिला-पुरूष भी बाढ़ पीडितों के लिए जोरदार काम कर रहे है। लाहौर के अमीर हिंदुओं में से एक हर्ष मेहरा की बहन पिछले कुछ दिनों से स्वात घाटी में है। नौशेरा जिले में बाढ़ पीड़ितों के लिए काम कर रही है।हर्ष मेहरा के अनुसार उनकी बहन एक एनजीओ के साथ है। वे पिछले कुछ दिनों से स्वात में ही है। हर्ष मेहरा के अनुसार सरकार पर लोगों को भरोसा नहीं है। अमेरिकी सहायता भी शायद एनजीओ के माध्यम से बंटे। इस समय अमेरिका से सहायता प्राप्त लगभग १०० एनजीओ के कार्यालय सिंध, पंजाब और खैबर पख्तूनखवा राज्य में खुल चुके है।

दिलचस्प बात है कि बाढ़ को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। कई कट्टर संगठनों से संबंधित लोग इसके लिए भारत को जिम्मेदार ठहरा रहे है। पर कई लोग खुलकर मौलाना राजनीति का विरोध कर रहे है। ग्रीन सर्कल आर्गेनाइजेशन के हेड और लाहौर में रहने वाले राणा शफीक के अनुसार भारत को ही हर चीज के लिए दोषी ठहराने की जरूरत नहीं है। अगर भारत ने बाढ़ नियंत्रण के लिए डैम बनाए तो पाकिस्तान को क्या समस्या है। पाकिस्तान को भी बाढ़ नियंत्रण के लिए समय पर डैम बनाना चाहिए था। इससे बा़ढ़ की नौबत ही नहीं आती। अब अगर बाढ़ आयी है तो अपनी गलती को देखने के बजाए भारत को दोष दे रहे है।

उधर प्राइवेट संगठनों में जनता का सबसे ज्यादा विश्वास ईदी फाउंडेशन और पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी इमरान खान पर है। लाहौर शहर में सारे राजनीतिक दलों ने कैंप लगा रखे है। पर लोगों के डोनेशन के सामान इमरान खान के कैंप में ही ज्यादा नजर आता है। उनकी पार्टी के कैंप में खासे लोग दान देने के लिए पहुंच रहे है। वहीं अब्दुल सतार ईदी का ईदी फाउंडेशन पर भी लोगों को काफी विश्वास है। वहां भी लोग दान के रुप में पैसे और अन्य सामान दे रहे है। हालांकि इस बाढ़ का एक और प्रभाव बाद में दिखेगा। जमाए-ए-इस्लामी, जमात-उल-दवा, तालिबान ने हर जगह कैंप खोल दिए है और सरकार को फेल बताने से नहीं चुक रहे है। इससे काफी सारे लोग कट्टरपंथी संगठनों की तरफ झुक सकते है, इससे नुकसान पाकिस्तान को होगा।

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दीपक डुडेजा on 20 August, 2010 21:48;18
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हिंदू कुछ नया नहीं कर रहे. हिंदू वर्षों से ही ऐसा करते आये है. देखा जाये तो "हिंदू" शब्द ही कुछ अजीब है - जो विदेशियों ने हमें दिया है. वेदों में रामायण में और भगवद गीता में हिंदू नाम कहीं नहीं है. एक शब्द होता था मानवता - या इंसानियत और ऐसे लोग सिंधु किनारे रहते तो - हमलावरों ने उन्हें हिंदू नाम दे दिया.
नमन

संजीव जी आपको भी आभार की एक अच्छा लेख प्रस्तुत किया.
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prashant mehrishi on 20 August, 2010 22:09;30
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पाण्डेय जी ने मान ही लिया की हिन्दू जैसा नेक कोई हो ही नहीं सकता
गर्व से कहो हम हिन्दू हैं
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Rajendra Jangid on 21 August, 2010 11:49;21
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संजीव जी पहली बार आपने कोई सच्चा लेख लिखा है, जिसे आपकी आत्मा ने गवारा किया है.. आज कई दिनों बाद विस्फोट पर कोई अनपेड अर्टिकल देखकर अच्छा लगा.. "हिन्दू" होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है,, और जो हिन्दू नहीं है वो कभी इन्सनियात और मानवता नाम की चीज़ समझ ही नहीं सकते..
एक बार फिर "गर्व से हम हिन्दू है"
जय हिंद - जय हिंदुत्व
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Shiv Shankar Kashyap on 21 August, 2010 12:46;43
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यह बात तो सबको पहले से ही पता है की हिन्दूओ का दिल बहुत बड़ा, साफ़ सुथरा, दयालु आदि होता है, तभी तो हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग दुसरो की परेशानी नहीं देख सकते और उनकी मदद करते है ! गीता में भी लिखा है की कर्म करते चलो फल की इच्छा न करो तो हिन्दू तो अपना कर्म कर रहा है........ "गर्व से बोलो हम हिन्दू हैं, जय आर्यव्रत, जय हिंदुस्तान"
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प्रशांत अरजरिया on 21 August, 2010 14:02;41
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मैंने माना की मानवता यही कहती है की आपदा में सहायता करनी चाहिए,परंतु इस बात की क्या गारंटी है की जो सहायता भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई है उसका पाकिस्तान सरकार द्वारा वही उपयोग किया जाएगा जिस उद्देश्य स्वरूप वह भेजी गई है।स्वतन्त्रता के समय भी भारत द्वारा 65 करोड़ की धनराशि पाकिस्तान को दी गई थी जिसका उपयोग उसने काश्मीर पर आक्रमण करने में किया। ऐसा न हो की हम यहाँ बैठे हिन्दू और हिन्दुत्व की महानता का राग आलापते रहें और वहाँ हमारे देशवासियों की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग हमारे ऊपर ही किया जाए।
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on 21 August, 2010 15:03;34
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achha lekh hai bhai sahab
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Satish Tripathi on 23 August, 2010 11:52;33
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कट्टरता इस्लाम की पहचान है जो जितना बेरहम और अमानवीय होता है वो उतना ही सच्चा मुसलमान होता है अगर दुर्भाग्य ( सौभाग्य ) से कोइ मुसलमान दयालू हो गया उसे काफ़िर माना जाता है ये मै नहीं कह रहा हूँ आप इन का इतिहास पढ़ सकते है अभी पाकिस्तान में बाढ़ में अहमदियो के साथ क्या हो रहा है पाकिस्तान में मुसलमानों के धर्मगुरूओं ने फरमान जारी किया है कि बाढ़ प्रभावित अहमदियों को सहायता नहीं पहुंचाई जाए.
अहमदी परिवार डेरा गाजी खान, मुजफ्फरगढ और राजनपुर जिलों के है और प्रलंयकारी बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों से ताल्लुक रखते हैं. और सरकारी अधिकारियों और कर्मियों ने पंजाब प्रांत में बाढ़ से बेघर हो गए अल्पसंख्यक अहमदी संप्रदाय के करीब 500 परिवारों को बसेरा मुहैया कराने से इंकार कर दिया है. अगर इस टिपण्णी को पड़ने के बाद कोई मुसलमान मुझसे सहमत न हो और वो समझे की उसमे इंसानियत मौजूद है तो शर्तिया उसके खून में हिन्दू नामक कोई विषाणु मौजूद है
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सलीम अख्तर सिद्दीकी on 23 August, 2010 15:22;51
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सतीश जी भारत और पाकिस्तान के ९९ फीसदी मुसलमानों में हिन्दुओं का ही खून है क्योंकी सब हिन्दुओं से ही इस्लाम में कन्वर्ट हुए हैं.
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vivek on 25 August, 2010 10:43;02
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यही तो इस्लाम और हिदुतव का अंतर है हिन्दुओ के रक्तंश होने के बाबजूद भी मुस्लिम उतने दयालू और समजदार नहीं होते क्योकि उन्हें बचपन से ही उनके धरम ग्रंथो में कट्टरता सिखाई जाती है और हिन्दू धरम के लोगो को सर्व धरम समभाव सिखाया जाता है
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aayush on 01 September, 2010 12:59;38
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जिस प्रकार केकड़े का स्वभाव डंक मारना होता है, पेड़ का स्वभाव पत्थर की चोट सहकर भी फल देना होता है, उसी प्रकार यह स्वभाव हर जाति, मज़हब के इंसानों में होता है लेकिन हिन्दुओं में यह भावना कूट-कूटकर भरी हुई है जिससे कभी वह विमुख नहीं होते। यही कारण है कि इतने आक्रमण, अत्याचार और धर्मांतरण आदि सहने के बाद भी यह संस्कृति फल-फूल रही है।
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image संजीव पाण्डेय छात्र राजनीति से पत्रकारिता में आये संजीव पाण्डेय ने कई अखबारों के लिए काम किया है. हाल-फिलहाल तक अमर उजाला में कार्यरत थे. वर्तमान में चंडीगढ़ में रहकर स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखन. विस्फोट.कॉम के नियमित स्तंभलेखक.
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