बाढ़ के बाद पाकिस्तान पर मंहगाई की मार
बाढ़ के कहर के बाद बढ़ी महंगाई ने पाकिस्तानी जनता की कमर तोड़ दी है। रमजान के महीनें में महंगाई ने पाकिस्तानी जनता को भारी परेशानी में डाल दिया है। बाढ़ के कारण सब्जियों की फसल तबाह हो गई है। आलू, टमाटर और मटर की कीमतें आसमान छू रही है। शहरों में टमाटर जहां १३० रुपये किलो बिक रहा है, वहीं आलू की कीमत भी चालीस से पचास रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। मजबूरी में पाकिस्तानी व्यापारियों ने अमृतसर से आलू, प्याज और टमाटर का आयात शुरू कर दिया है। उधर आम लोगों के पास अब इस बढ़ती महंगाई के कारण टमाटर और आलू खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है।
भारी बाढ़ ने सिंध में सारी सब्जियों की फसल को तबाह कर दिया है। टमाटर सबसे ज्यादा सिंध में होता है। लेकिन आधा सिंध इस समय बाढ़ की चपेट में है। टमाटर की कीमत इस समय लाहौर में १३० रुपये प्रति किलो है। जबकि आलू और प्याज की कीमतों में भी इजाफा हो गया है। उधर लाहौर के व्यापारियों ने अमृतसर के व्यापारियों को आलू, टमाटर और प्याज के बारी आर्डर दिए है। बुधवार को वाघा बार्डर से ६० ट्रक टमाटर और आलू लाहौर पहुंचे। वाघा सीमा पर पाकिस्तानी साइड में आलू और टमाटर से भरे ट्रकों की लाइन लगी थी जो कस्टम क्लीयरेंस ले रहे थे। वाघा सीमा पर तैनात पाकिस्तानी कस्टम के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पहले जहां प्रतिदिन दस भारतीय ट्रक सामान लेकर पाकिस्तान में आते थे वही अब यह बढ़कर प्रतिदिन पचास तक पहुंच गया है।
रमजान के महीनें में चिकन और मीट की कीमतों में इजाफा है। चिकन जहां पाकिस्तान में इस समय २५० रुपये से ३०० रुपये किलो तक मिल रहा है, वहीं मटन की कीमत ५०० रुपये से ६०० रुपये किलो के बीच है। लाहौर में रहने वाले जावेद अक्कासी के अनुसार आम अवाम जिसमें पाकिस्तानी की ९० प्रतिशत जनता शामिल है इस समय महंगाई के दौर में चिकन और मीट नहीं खा सकते है। महीनें में एक बार चिकन और मीट मिल जाए तो उनकी किस्मत है। पाकिस्तानी व्यापारियों के अनुसार भारत के साथ कोर मुद्दे पर बहस बाद में होनी चाहिए, पहले दोनों मुल्कों के बीच व्यापार को बढ़ावा देना चाहिए। आलू और प्याज भारत से काफी सस्ते मिल सकते है और इससे सबसे ज्यादा फायदा पाकिस्तान को होगा। लाहौर के व्यापारी हनीफ अहमद के अनुसार मटर पाकिस्तानी बाजार में २०० रुपये किलो तक पहुंच चुका है। आम पाकिस्तानी के बस में मटर खरीदना नहीं है।
हालांकि अभी तक यह मंजर बाढ़ के समय का है। इसका खौफनाह चेहरा बाढ़ खत्म होने के बाद नजर आएगा। क्योंकि सारी फसलें तबाह हो चुकी है। लेकिन बाढ़ के बाद आम जनता को जो बाढ़ पीड़ित है, सस्ता सामान नहीं मिलेगा तो हंगामा खड़ा हो जाएगा। जनता हंगामे पर उतर आएगी। विद्रोह की स्थिति पैदा हो सकती है। बाढ़ से पीडि़त जनता लाहौर और इस्लामाबाद की सड़कों पर लूटपाट के लिए खड़ी हो जाएगी। कराची जैसा शहर जो हिंसा की चपेट में पहले से ही और खौफनाक स्थिति में पहुंच जाएगा। दिलचस्प बात है कि बाढ़ के कारण सेब की फसलों को भी नुकसान हुआ है। सेब बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनखवा इलाके में होता है। यहां पर बाढ़ से भारी तबाही हो गई है।
दिलचस्प बात है कि पाकिस्तानी मुद्रा स्थायित्व की स्थिति में नहीं है। इससे मंहगाई कब क्या रूख लेगी यह पता नहीं है। इस समय एक्सचेंज के तहत एक डालर के बदले जहां ८८ पाकिस्तानी रुपये मिल रहे है वहीं एक भारतीय रुपये के बदले १.८० पाकिस्तानी रुपये मिल रहे है। इससे महंगाई और बढ़ रही है। लाहौर के रहने वाले आबिद हुसैन के अनुसार एक जमाने में एक रुपये पाकिस्तानी मुद्रा के बदले १.२५ रुपये भारतीय मुद्रा मिलता था। लेकिन अब स्थिति बदल गई है और पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था तबाही की स्थिति में है। इसलिए भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती के अलावा कोई चारा नहीं है। पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था को सम्हालने में भारतीय लोगों की अहम भूमिका हो सकती है।
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