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जन-जीवन

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समितियों और रपटों की बाढ़

बिहार में बाढ़ पीछे छूट गयी है. एक बार फिर समितियों और रपटों के भरोसे बाढ़ से निपटने की कवायद शुरू हो चुकी है. इस तरह की कवायद पहली बार नहीं हो रही है. यह रिपोर्ट बताती है कि जब से हम लोकतंत्र हुए हैं बिहार में बाढ़ से ज्यादा समितियों और रपटों की बाढ़ आयी है. जब समाज को अपने तरीकों से बाढ़ से निपटने से मना कर दिया गया तो सरकार ने हमेशा बाढ़ से ज्यादा समितियों और रपटों पर ध्यान दिया, लेकिन नतीजा कभी कुछ नहीं निकला.
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पोप पोषित मिशनरियों के पाप

चर्च पर हिन्दू चरमपंथियों द्वारा हमला तो खबर बनती है लेकिन यह खबर कभी क्यों नहीं बनती कि चर्च के अंदर कितना शोषण, अत्याचार और दमन हो रहा है. चर्च संगठन अपने ही कर्मचारियों का शोषण करते हैं, नन्स और पादरी की संदेहास्पद हत्याओं के मामले भी प्रकाश में आये हैं, जिनमें चर्च प्रशासन से जुड़े लोग ही शामिल पाये गये हैं, फिर भी हमारा प्रबुद्ध समाज चर्च संगठनों के बीच फैली इन कुरीतियों के बारे में कभी अपनी जबान नहीं खोलता.
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कंधमाल में क्या हुआ?

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वह २३ अगस्त की शाम थी. स्वामी लक्ष्मणानंद अपने आश्रम के स्टोर रूम में थे. बगल वाले कमरे उन्हीं के वनवासी कन्या छात्रावास की छात्रा लक्ष्मी (बदला हुआ नाम) कुछ दैनिक कामों को निपटा रही थी. इतने में चार नकाबपोश लोग अंदर दाखिल होते हैं. चारों के सामने पहले लक्ष्मी आती है. चारों उसे चुप रहने का इशारा करते हुए वहां से जाने के लिए कहते हैं. कदमों की आहट और सन्नाटे से स्वामी लक्ष्मणानंद भी थोड़े चौकन्ने हो जाते हैं. लगता है उन्हें इस बात का अहसास हो गया था कि कुछ लोग अंदर आये हैं जिनके इरादे नेक नहीं हैं. ...
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मण्डप में कन्डोम गान

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टीवी का विज्ञापन सबने देखा होगा जिसमें शादी के मण्डप में एक मोबाईल पर वह शाश्वत तराना गूंजता है जो आज के इस भोगवादी युग में प्राणरक्षा का एकमात्र उपाय बन गया है. तरह-तरह की मुरकी और फिरकी मारते हुए रूपर्ट फर्नांडीज की धुन पर गायक विजय प्रकाश बार-बार कण्डोम शब्द को आपकी रगों में उतार देने की कोशिश करते हैं. ...
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आतंक का गढ़ नहीं, मेरा आजमगढ़

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मेरा आजमगढ़.... कैफी आजमी और राहुल सांस्कृत्यायन का आजमगढ़... गंगा जमुनी संस्कृति का आजमगढ़... लेकिन मेरा आजमगढ़ तो ऐसा नहीं था, जैसा आज दिखाई दे रहा है. नब्बे के दशक में हमारे राजनेताओं ने अपने चंद स्वार्थों के लिए हिंदू-मुसलमान के बीच नफरत के जो बीज बोए, 18 साल बाद आज हम उसी की फसल काट रहे हैं. मुझे अपने प्यारे दोस्त साजिद का वह मासूम चेहरा आज भी अच्छी तरह याद है. कैसे मंदिर आंदोलन ने हम दोनों की दोस्ती को अलविदा कर दिया था. ...
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गंभीर बांध पर कुछ गंभीर बातें

गम्भीर बाँध के कैचमेंट इलाके में यानी लगभग बीस वर्ग किलोमीटर के इस उथली मिट्टी वाले इलाके के आसपास लगभग चालीस गाँव बसे हुए हैं। इनमें बसने वाले किसानों की ज़मीनें बाँध के पानी वाले इलाके से लगी हुई हैं। इन ज़मीनों पर ये किसान दोनों मौसमों में सोयाबीन और गेहूं की फ़सलें लेते हैं। लगभग सभी किसानों के खेतों में ट्यूबवेल लगे हुए हैं और बाँध नजदीक होने के कारण वाटर लेवल भी काफ़ी ऊँचा है, लेकिन बाँध के रोके गये पानी से लगातार साल भर पानी चोरी की जाती है।
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मराठों की हिन्दी

आज कुछ लोग असमिया-हिंदी और मराठी-हिंदी में मार-काट करवाना चाहते हैं। ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है जिससे भारतीय भाषाएं हिंदी से लड़ें और अंग्रेजी बकरियों के बीच बंदर बन कर हक की रोटी चट कर जाए। हिंदी के विरोध में प्रांतिक भाषा का झंडा फहरानेवाले समग्र राष्ट्रराज्य के प्रति विभाजनकारी रूख अपना रहे हैं। वे चाहे जया बच्चन हों या राज ठाकरे। वे करूणानिधि हों या परेश बरूआ। ध्यान रहे हिंदी देश की एकता, भावात्मक ऐक्य एवं सांस्कृतिक अस्मिता की भाषा है।
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जम्बूद्वीपे भारतखण्डे

पर्यावरण संरक्षण के नाम पर हम कई बार उन परंपरागत साधनों और तरीकों को भी बंद करवा देते हैं जिनका अनादिकाल से उपयोग मनुष्य अपनी आजीविका के लिए करता आ रहा है. जम्बूद्वीप में यही हुआ है. सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण बता रही हैं कि कैसे पर्यावरण संरक्षण की एक दलील स्थानीय लोगों के लिए संकट का कारण बन गयी.
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बाढ़ से ज्यादा राहत का कहर

बथनाहा रेलवे स्टेशन पर पनाह लिए बाढ पीडितों की सुरक्षा के इंतजामों का मुआयना करने गया वह अफसर नशे में था। बेसुध पडी एक महिला के शोर मचाने पर लोगों ने उसे मारपीट कर दूर तक खदेड दिया। घटना स्टेशन की थी, इसलिए थानेदार केके चौधरी को निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन बिहार पुलिस के प्रवक्ता एडीजी अनिल सिन्हा ने पुलिस-मुख्यालय की तत्परता का उल्लेख करते हुए जो स्पष्टीकरण दिया और बाढ पीडित इलाके में कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए पुलिस मुख्यालय के पूरीतरह सचेत होने का जो दावा किया, उससे भी इलाके की हालत पर काफी रोशनी पडती है।
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कोसी को क्यों कोसते हो?

एशिया की दो नदियों को दुखदायिनी कहा जाता है. एक है चीन की ह्वांग-हो जिसे पीली नदी के नाम से जाना जाता है और दूसरी है बिहार की कोसी नदी. अगर चीन की ह्वांग-हो को 'चीन का शोक' कहा जाता है तो कोसी नदी 'बिहार का शोक' है. इन नदियों की शोकदायिनी क्षमता ही बिहार और चीन के बीच विकास का अंतर भी स्पष्ट करती हैं. ह्वांग-हो की बाढ़ पर चीन ने पूरा नियंत्रण स्थापित कर लिया है. अब वहां बाढ़ की विभीषिका नहीं झेलनी पड़ती जबकि कोसी साल-दर-साल डूब और विस्थापन का दायरा बढ़ाती जा रही है.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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