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जन-जीवन

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विस्थापित हुए तो बिखर जाएंगे ख्वाब

अब खबर आई है कि अफ्रीकी चीते को बसाने के लिए मध्यप्रदेश के नौरादेही अभयारण्य से २३ गांवों को उजाड़े जाने की पूरी तैयारी हो गई है। हालांकि यह कोई पहला गांव नहीं होगा जब जंगली जानवरों को बचाने के नाम पर इंसानों का घर उजाड़ा जाएगा। सरकार और उनके अधिकारियों का यह तर्क है कि जानवरों को बचाना जरूरी है। लेकिन जब उनसे पूछा जाता है कि किसकी कीमत पर तो सामने एक लंबी खामोशी छा जाती है।
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ससुराल गेंदा फूल के बाद अब चोला माटी के राम

छत्तीसगढ़ के लोक-गीत अब बालीवुड के रास्ते दुनिया भर में धूम मचा रहे हैं. दूरदर्शन में समृध्द लोक नाटकों, प्रहसनों का और आकाशवाणी में इस तरह की गीतों का खज़ाना भरा पड़ा है. वक्त आ गया है कि अब इन महान रचनाओं को लोगों को सामने लाने के लिए प्रसार-भारती अपना व्यावसायिक दायित्व निभाए, वरना भद्दे वीडियो एलबम और बेतुके छत्तीसगढ़ी फिल्म, यहां के महान कलाकारों का योगदान धूल-धुरसित करके रख देंगे.
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आधी लड़कियों के लिए राइट विदाउट एजुकेशन

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भारत में 6 से 14 साल तक के बच्चों के लिए ‘राईट टू एजुकेशन’ है, मगर 6 से 14 साल की कुल लड़कियों में से 50 प्रतिशत लड़कियां तो स्कूल से ड्राप-आऊट हो जाती हैं। यह आकड़ा मौटे तौर पर दो सवाल पैदा करता है, अव्वल तो यह कि इस आयुवर्ग की आधी लड़कियां स्कूल से ड्राप-आऊट क्यों हो जाती हैं, दूसरा यह कि इस आयुवर्ग की आधी लड़कियां अगर स्कूल से ड्राप-आऊट हो जाती हैं तो एक बड़े परिदृश्य में ‘राईट टू एजुकेशन’ का क्या अर्थ रह जाता है ?...
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बाल मजदूर अभी भी मजबूर

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बाल अधिकारों से जुड़ी लगभग सभी संधियों पर दस्तखत करने के बावजूद भारत बाल मजदूरों का सबसे बड़ा घर क्यों बन चुका है, और इसी से जुड़ा यह सवाल भी सोचने लायक है कि बाल श्रम निषेध एवं नियंत्रण कानून, 1986 के बावजूद हर बार जनगणना में बाल मजदूरों की तादाद पहले से कहीं बहुत ज्यादा क्यों निकल आया करती है ? मगर हकीकत इससे कहीं भयानक है। दरअसल बाल मजदूरी में फसे केवल 15% बच्चे ही कानून के सुरक्षा घेरे में हैं।...
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शासन, प्रशासन को चुनौती देती प्रलयंकारी बाढ़

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हरियाणा व पंजाब में गत् दिनों मॉनसून की शुरुआत में ही आई भारी बारिश तथा इसके बाद उत्पन्न हुई बाढ़ जैसी स्थिति के लिए एक बार फिर यही बताया गया कि घग्गर व टांगरी जैसी पहाड़ी नदियों तथा एस वाई एल नहर पर बने बांध में पड़ी दरार ने बारिश के पानी के साथ मिलकर बाढ़ जैसी स्थिति बना दी। जिसके कारण अंबाला, कुरुक्षेत्र तथा पटियाला जिलों का काफी बड़ा भाग जल प्रलय जैसे माहौल का सामना करने के लिए मजबूर हो गया। सवाल यह है कि इन नदियों के बांध आखिर प्राय: क्योंकर टूट जाते हैं?...
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कब रुकेगी इज्जत की खातिर मौत?

इज्जत के खातिर मौत देने का सिलसिला आखिर कब रुकेगा? आखिर कब तक मान सम्मान के नाम पर युवाओं की हत्या होती रहेगी ? कौन है ! जो इस जघन्य कृत्य को चुनौती देने की हिम्मत करेगा ? इसका जवाब कानून नहीं है, इसका जवाब हम सभी को अपने आप से पूछना है, इस समाज से पूछना है, जिसके बीच हम रहते है।
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शिक्षा के बाजार में बेजार होता बचपन

शिक्षा का नया सत्र शुरू होने जा रहा है. सरकार शिक्षा के अधिकार के कानून की प्रक्रिया में है. महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सरकारें माध्यमिक कक्षाओं तक विद्यार्थियों को अनुत्तीर्ण करने पर प्रतिबन्ध लाने के कानून बना रही हैं. एस.एस.सी.के विद्यार्थियों के लिए 'बेस्ट ऑफ़ फाइव"फ़ॉर्मूला लागू कर दिए जाने से विद्यार्थिओं के अंकों के प्रतिशत में जबरदस्त वृद्धि हुई है,जिसके चलते महाविद्यालयों में प्रवेश का संकट पैदा हो गया है.
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क्या धरती एलियंस के निशाने पर है?

ब्रीफ हिस्टरी ऑफ टाइम के विख्यात लेखक और एस्ट्रो-फिजिक्स से जुड़े विषयों पर विश्व के सर्वाधिक प्रामाणिक और अधिकार-संपन्न वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, विश्लेषक और चिंतक स्टीफन हाकिंग की बातों को गंभीरता से न लेने का कोई कारण नहीं है। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय को झकझोर दिया है। उनके बयान ने वैश्विक स्तर पर एक आशंका भरी बहस को भी जन्म दिया है- क्या धरती एलियंस के निशाने पर आ सकती है?
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शैतानों के हवाले स्वास्थ्य सुरक्षा

हाल ही में रूस में जीएम सोयाबीन के चूहों पर हुए प्रयोगों की रिपोर्ट आई है। रिपोर्ट बताती है कि जीएम फसलें मनुष्यों के खाने के लिए कतई सुरक्षित नहीं हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में सामने आयी है जब भारत में जीएम फसलों को जनता पर जबरदस्ती थोपने की भरसक कोशिश की जा रही है। यह प्रयास करने वालों में सरकार के कुछ मंत्रालय, जीएम बीज उत्पादक कम्पनियां, कृषि वैज्ञानिक, नौकरशाह और देश की भूख मिटाने की नौटंकी में शामिल योजनाकार और अर्थशास्त्रियों तथा मीडिया के एक खासवर्ग के शतुरमुर्ग शामिल है।
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बुनियादी समस्या तो खुद पीडीएस ही है

पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम जिसे हिंदी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली कहते हैं व संक्षिप्त में पीडीएस कहा जाता है। इस व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार द्वारा गरीबी रेखा से नीचे जीने वाले नागरिकों को सस्ता राशन उपलब्ध करवाया जाता है। यह व्यवस्था कितने लोगों के स्विस बैंक लबालब भर सकती है या भर रही है इसका अंदाज़ा लगाने के लिए कुछ आंकड़ों पर दृष्टिपात करते हैं।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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