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जन-जीवन

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अधर में लटकी जिंदगी की पतंग

65 साल की नूरजहां अब पतंग की डोर नहीं बनाती. लेकिन जब वे यह काम करती थीं तो इतना भी नहीं कमा सकीं कि अपना इलाज करवा सकतीं. इसका नतीजा यह हुआ कि उनके आंखों का नूर हमेशा के लिए चला गया. पंतग बनाने की मजदूरी से इतना पैसा भी नही बचा कि वे अपना इलाज करवा पाती.
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किराये की कोख से पैदा होती 'वस्तु'

एक गरीब देश होने के कारण अमीर देश के नि:संतान दंपित्त भारत आकर यहाँ के जरुरतमंद महिलाओं की कोख को किराये पर ले रहे हैं। यह सिलसिला भारत में लगभग 5 वर्षों से चल रहा है। फिर भी इस संबंध में अभी तक किसी स्पष्ट दिशा- निर्देश का अभाव है। जरुरतमंद नि:संतान दंपित्त जरुरतमंद महिलाओं से दलालों के द्वारा संपर्क साधते हैं।
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30 साल, 21 हजार मौतें

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ये किसी मुठभेड़ या आतंकी घटनाओं में नहीं हुई हैं। न ही कोई बम ब्लास्ट हुआ, न ही जलजला आया और न ही भूकंप। बस एक बीमारी है इंसेफ्लाइटिस। जो सालाना हजारों जिंदगी लील रही है। लोग मर रहे हैं। योजनाएं बन रही हैं। कवायद हो रही है नतीजा सिफर है। यानी हर साल यह बीमारी बरसात की आहट मिलते ही जीवन छीनने में जुट जाती है।...
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बिहार पर छाया दुबई का संकट

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देश ही दुनिया के किसी भी हिस्से में बिहार का मजदूर सबसे सस्ते श्रम के साथ हाजिर हो जाता है. दुबई में भी बिहार से गये मजदूरों की बड़ी तादात है. लेकिन बिहार से गये मजदूरों से अलग दुबई ने सस्ते में अपना काम निपटाता है तो दुबई की कमाई से बिहार के कई जिले अपनी माली हालत को भी सुधारते हैं. दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर में आये भूचाल की खबरें तो गायब हो गयीं लेकिन बिहार के इन जिलों में संकट की छाया साफ नजर आ रही है. गोपालगंज और सीवान से लौटकर संजय स्वदेश की रिपोर्ट-...
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आईएमआई का खेल हो गया फेल

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एक दिसंबर से नकली ईएमआई नंबर के कारण भले ही लाखों चीनी मोबाइल खामोश हो गए हों, लेकिन इसके बाद भी लोगों को भ्रम इसके आकर्षण के प्रति नहीं टूटा है। हालांकि एक दिसंबर के देश भर में लाखों चीनी मोबाइल धारकों को हैंडसेट बंद हो गया। लेकिन इस बाद भी मोबाइल रिपेयर करने वालों ने किसी न किसी तरह का जुगाड़ अपना कर इसे फिर चालू कर दिया है। रहस्यम तकनीक के कारण देशभर के बाजार में अभी भी चाइना मोबाइल फोन के हैंडसेट धडल्ले से बगैर बिल और गारंटी के बिक रहे हैं।...
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बांस बिन कैसे बजे वंशकारों की बांसुरी

न रहेगा बांस, न बजेगी बांसुरी। यह कहावत प्रदेश के लाखों वंशकारों की आजीविका पर आये संकट का हाल बंया करती है। बांस पर निर्भर रहने वाले इन बांस कारीगरों के लिये बांस वनों में न कोई जगह है और न ही राज्य सरकार की कार्ययोजना में। राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत गठित होने वाली ज्यादातर जिला स्तरीय समितियां कागजों में है और उनका क्रियान्वयन न के बराबर दिखाई पड़ता है।
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गुमनाम दिलवालों की अनोखी दिल्ली

आजकल दिल्ली में एक एफ़.एम रेडियो चैनल पर दिल्ली के लोगों को अपने गरम कपडे का दान करके दरियादिली दिखाने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है. इन गरम कपड़ों के बदले में आप उस रेडियो स्टेशन पर अपने नाम से एक गाना खरीद पाएंगे और ऍफ़.एम चैनल का रेडियो जौकी गाने से पहले उनका नाम दुनिया को बताइएगा और उनके द्वारा दान किये गए गरम कपडे दिल्ली की सर्दियों में सड़क पर रहने वाले लोगों की सर्दियों को 'चिल्लाक्स' करने में काम आयेंगे. इस कार्यक्रम को रोज़ सुनने वालों में से एक मैं भी हूँ, सोच कर हैरान होती हूँ कि क्या "दरियादिली" दिखाने के लिए दिल्लीवालों को 'रेडियो पर उनका नाम आने' का प्रलोभन देना ज़रूरी है?
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बीटी बैंगन यानि खाने की थाली में जहर

आजकल जीन संशोधित फसलेें चर्चा में हैं।इनके प्रसंसक ऐसा प्रभाव बना रहे हैं कि पश्चिमी देशों में इन फसलों ने किसानों को मालामाल कर दिया है। किसानों की हर समस्या का समाधान इन्हीं में है।यदि हमने इन्हें नहीं अपनाया तो हम न केवल पिछड़ जाएंगे बल्कि बरबाद हो जाएंगे एवं विश्व व्यापार में अपना अस्तित्व खो देगें। इसी के चलते बीटी काटन के बाद अब कुछ ही महीनों में बीटी बैंगन हमारी रसोई में से होता हुआ हमारे खाने की थाली में आने वाला है।
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सभ्य समाज में कुत्तों का कत्लेआम

हर दिन हमारे अखबारों-टी वी चैनलों में कई दिल दहलाने वाली खबरें देखने-पढने को मिलती हैं तो लगता है कि क्या हमारा यह समाज अपनी मानवीयता खोता जा रहा है? पर पिछले शनिवार/रविवार (२३/२४ अक्टूबर, २००९) के दौरान दिल्ली के चार बड़े अखबारों में छपी एक खबर ने विचलित कर दिया. इन ख़बरों के अनुसार दक्षिणी दिल्ली की पूर्वी निज़ामुद्दीन कालोनी में कई गली के कुत्तों और कई पक्षियों को मरा हुआ पाया गया. इन जानवरों के मृत शरीर पूरी कालोनी में इधर उधर बिखरे पाए गए. आखिर ऐसा क्या हुआ था जो कि इतने सारे जानवर बेमौत इकट्ठे मरे हुए पाए गए?
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सूचना मिलने की राह में हैं रोड़े बड़े

यह सूचना का अधिकार नहीं चमत्कार है। अब बीडीओ साहब देखकर बैठने के लिए पूछते हैं। इज्जत से बात करते हैं। गांव के आदमी को और क्या चाहिए? कमलेश कामत मैनही पंचायत अमही प्रखंड मधुबनी के रहने वाले हैं। सूचना के अधिकार से उनका परिचय अभी नया-नया है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि हाल में जब प्रखंड कार्यालय से उन्होंने अपने पंचायत में होने वाले विकास संबंधी कार्यों में हो रहे व्यय का ब्यौरा मांग तो क्यों पंचायत से लेकर ब्लॉक तक में उनकी इज्जत पहले से कई गुना बढ़ गई है।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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