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जन-जीवन

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मजहबी रंगों में छिपी मुस्लिम औरतें और मीडिया

बीते दिनों बिट्रेन के मशहूर अखबार ‘द गार्जियन’ ने मोबाइल से दो मिनिट का ऐसा वीडियो बनाया जिसमें पाकिस्तान की स्वात घाटी के कट्टरपंथियों ने 17 साल की लड़की पर 34 कोड़े बरसाए थे। इसी तरह के अन्य वीडियो के साथ अब यह भी यू टयूब में अपलोड है, जो संदेश देता है कि वहां कोई लड़की अगर ऐसे लड़के के साथ भागती है जो उसका पति न हो तो उसका अंजाम आप देख लीजिए। इस घटना को अपने देश की मीडिया ने भी खूब जगह और जोर-शोर के साथ उछाला।
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जवाब मांग रहा है झारखण्ड

जंगल में आदिवासी ही नहीं रहते. वहां के मूलवासी भी रहते हैं लेकिन माफी मिली केवल आदिवासियों को. कहीं ऐसा तो नहीं कि ये केंद्र की साज़िश है? झारखंड को बचाने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष कर रहे आदिवासियों और मूलवासियों में फूट डालना चाहती है. बहरहाल, इतना तो तय है कि कि केंद्र सरकार का ये कदम आदिवासियों के घाव पर महरम नहीं नमक का काम करेगा. ये कदम आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए नहीं बल्कि उनको गुमराह करने के लिए उठाया गया है. गृह-मंत्रालय का ये फैसला आदिवासियों को विश्वास में लेने की बात कहकर गुमराह किया जा रहा है.
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बीटी बैंगन को मंजूरी की मजबूरी

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लंबे समय तक विरोध करने के बाद भी केन्द्र सरकार की जेनेटिकल अप्रूवल कमेटी ने बीटी बैंगनों को मंजूरी दे दी. बुधवार को जीएईसी की बैठक हुई जिसमें जैव प्रसंस्कृत बैंगन को देश में उत्पादन और वितरण की अनुमति प्रदान कर दी गयी. ऐसे वक्त में जब पूरी दुनिया जैव प्रसंस्कृत खाद्यान को खत्म करने की दिशा में कदम उठा रही है तो भारत सरकार ने बीटी बैंगन को मंजूरी दे दी? सरकार की इस मंजूरी के पीछे की मजबूरी क्या है?...
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मरा नहीं है मारनेवाला कपास का मुद्दा

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देश के प्रमुख औद्योगिक राज्य महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में ठाकरे बंधुओं के वाकयुद्ध और नेताओं के ग्लैमरस बच्चों के बनते राजनीतिक करियर की खबरों के बीच प्रदेश के बेदम होते किसानों (जो अपनी आत्महत्या की प्रवृत्ति के लिए देश ही नहीं दुनिया भर में चर्चित हो चुके हैं) के मुद्दे कहीं दब से जा रहे हैं। मीडिया भी इन मुद्दों को नीरस मान तरजीह नहीं दे रहा है। जानकार कहते हैं कि बीते आठ सालों में छह हजार किसानों की आत्महत्या के साक्षी बने विदर्भ क्षेत्र में यह कोई मुद्दा ही नहीं है। लेकिन यह पूर्ण सत्य भी नहीं है। खेती-किसानी और गांव-गरीबी के मुद्दे अंदर ही अंदर सुलग रहा है।...
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औजार का असर उसके इस्तेमाल पर निर्भर

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सूचना का अधिकार कानून न कोई देवता है और न ऐसा जिन्न जो पलक झपकते ही सब कुछ कर दे। इसे हथियार,अश्त्र शस्त्र कहना भी ठीक प्रतीत नहीं होता है। यह लोकतंत्र में जनता को मिला साफ सुथरा एक सभ्य साधन है जिसे काम में लेकर समाज में सच्चाई और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था को बढावा दिया जा सकता है। आरटीआई कानून को पूजिये मत, न ही इससे किसी को अनावश्यक डराइये। इससे शासन ,समाज और लोकतंत्र में अपना और लोगों का विश्वास बहाल कीजिये।...
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हीरे की मण्डी में मौत का साया

मंदी की उठा-पटक के बीच सूरत का चेहरा भले कई लोगों के लिए अब भी चमकदार लग रहा हो लेकिन इस चमक के पीछे एक ऐसा अंधेरा फैलता जा रहा है, जिसमें जिंदगी हारती जा रही है. मंदी के तूफान ने हीरे की मण्डी सूरत की सूरत कुछ ऐसी बिगाड़ी कि पिछली दीवाली से इस जुलाई के पहले हफ्ते तक हीरा-कारखाने के 39 मजदूरों ने अपनी जान दे दी. हालांकि गैरसरकारी आकड़ों में यह संख्या 90 के पार ठहरती है.
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रामनाम संकीर्तन भी चढ़ा टीआरपी की भेंट

रामधुन से शुरू हुआ भगवान के गुणानवाद का एक रूप कीर्तन भी आजकल टीआरपी की भेंट चढ चुका है। भले ही वो अधिकांश कम पढे लिखे लोगों के एक समूह का अपना लोकरंजक, मंनोरंजनपूर्ण कार्य है लेकिन अब उन्हें भी लगता है कि दर्शकों के बिना उनका भी काम नहीं चलने वाला है। ऐसे में प्रभू नाम स्मरण के रामधुनी कीर्तन दंगलों में आजकल नाटक और फिल्मों के द्विअर्थी संवादों की भरमार होती जा रही है। इतना ही नहीं नारी ने भी ऐसे दंगलों में अपनी उपस्थिति की खनक से मामले को और अधिक रोचक बना दिया है।
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पत्थर में पिसती जिन्दगी

रायखेड़ा के बालमुकुन्द वर्मा के घर इस साल 19 अगस्त की तारीख बड़ी मनहूसियत लेकर आई। वे नहींं भूलते उस दिन को जब दो लोग इनके घर आए, यह खबर लेकर की उनका 22 वर्षीय लड़का दीपक वर्मा अस्पताल में भर्ती है। उसे गंभीर चोट लगी है। वे दो लोग बालमुकुन्द को अपने साथ लेकर अस्पताल जाना चाहते थे। बालमुकुन्द को पहले गड़बड़ की आशंका हुई और उसने साथ जाने से इंकार कर दिया। लेकिन बेटे के मोह में वे अपने को रोक भी नहीं पाए।
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घाट घाट पर घोटाला

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में जब सांसद प्रेमदास कठेरिया ने जल निगम से वर्ष 2008-09 में नए स्थापित करवाए गए हैंडपंप एवं रिबोर हैंडपंपों की सूची मांगी तो वह सन्न रह गए। जल निगम ने जो सूची उपलब्ध कराई उसमें 462 नामों को दो बार दर्शाया गया है। इस प्रकार से जल निगम में फौरी तौर पर 1.80 करोड़ रूपये का घोटाला सामने आया है लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि शुद्ध पानी मुहैया कराने के नाम पर करोड़ों रूपये का घोटाला किया गया है।
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नरेगा के लोकतंत्र में दलित बहुमत की हार

जिस देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक वोट से सरकारें गिर जाती है, उसी संसद के द्वारा देश में पहली बार मजदूरों को दिये गये रोजगार के अधिकार कानून में 98 दलित मजदूर हार गये और 52 सवर्ण बाहुबली जीत गये है। सरकारी जॉच की रफ्तार कछुआ चाल से कुछ कदम भी नही चल पाई की गॉव के दबंग समूहों और जनप्रतिनिधियों ने दलित मजदूरों पर चाणक्य नीति के साम, दाम, दण्ड औरद भेद के सभी प्रयोग कर दिये गये। आखिर पहले से ही बमुश्किल अपने शोशण के खिलाफ आवाज उठाने कि हिम्मत जुटा पाये मजदूरों ने हार मान ली। वो बहुमत में होते हुये भी लोकतंत्र में हार गये।
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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