जन-जीवन
सियासी डगर पर नौकरशाह
नौकरशाही का सफ़र तय करते हुए राजनीति की डगर पर बढ़ने वालों की फ़ेहरिस्त में डॉक्टर भागीरथ प्रसाद का नाम भी जुड़ गया है। इंदौर के देवी अहिल्याबाई विश्वविद्यालय के कुलपति रहे डॉ. भागीरथ प्रसाद चंबल घाटी के भिंड संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। पार्टी से हरी झंडी मिलते ही उन्होंने फौरन अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। संभवत: यह पहला मौका होगा जब मध्यप्रदेश में किसी कुलपति ने यूनिवर्सिटी का कैंपस छोड़कर चुनावी मैदान में खम ठोका हो। वे 32 साल की नौकरशाही के बाद आईएएस से इस्तीफा देकर डीएवीवी के कुलपति बने और अब उन्होंने कुलपति पद से इस्तीफा देकर सियासत की डगर पकड़ ली है।
आंवले ने बनाया उद्योगपति
वर्षों से परम्परागत खेती करने वाले अमर सिंह ने कभी खुशहाली की आहट भी नहीं सुनी थी। रात हो या दिन, वर्षा हो या सर्दी अथवा शरीर झुलसाने वाली गर्मी- पूरा परिवार खेती में लगा रहता। कभी अधिक वर्षा तो कभी सूखे की मार से फसल को नुकसान अवश्य होते रहने से अमर सिंह का पूरा परिवार गरीब का गरीब बना रहा। लेकिन आंवले से बनने वाले विभिन्न उत्पादों का व्यावसाय अमर सिंह और उनके परिवार के जीवन में रौशनी की एक किरण बन कर आया। उन्होंने जब आंवले के उत्पादों को तैयार कर बेचना प्रारम्भ किया तो वह एक वर्ष के भीतर ही वे लखपति बन गये।
दूसरों की मुरादों के लिए थिरकती बेड़नियाँ
करीला की जानकी मैया की कृपा से जुड़ी किंवदंतियाँ दूर - दूर तक मशहूर हैं। अशोकनगर ज़िले के करीला गाँव का जानकी मंदिर हर साल रंगपंचमी पर घुँघरुओं की झनकार और ढ़ोल की थाप से गूँज उठता है। माँ जानकी की कृपावर्षा से जुड़े किस्से कहने -सुनने वालों की तादाद लाखों में पहुँच चुकी है। मनौती माँगने वालों का सिलसिला साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। अगर कुछ नहीं बदला है तो सिर्फ़ दूसरों की मनौतियाँ पूरी होने की खुशियों में झूम-झूमकर नाचती बेड़नियों की तकदीर । ...विधिगत शिक्षा में विधिवत लूट
उत्तर प्रदेश शिक्षा माफियाओं का स्वर्ग बनता जा रहा है. प्रदेश में जिसके पास भी पैसा है और शिक्षा के व्यापार में हाथ आजमाना चाहता है तो वह विधि कालेज खोलता है. यह प्रदेश का सबसे फलता-फूलता कारोबार है. इस कारोबार के विरोध में अगर कोई आवाज उठाता है तो पूरा प्रशासन मिलकर उसकी रक्षा करता है. लखनऊ विश्वविद्यालय से जुड़े विधि कालेजों से जुड़ी लड़कियों की जिस तरह से पिटाई की गयी उससे साफ हो गया कि मायावती इन शिक्षा माफियाओं के साथ खड़ी है. ...मीणा को मिल गया पंचायत चलाने का जॉब
"मैं गोलमा देवी बोल रही हूं।" राजस्थान में वर्तमान कांग्रेस सरकार के मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में गूंजी इस आवाज ने देश भर में बुद्विजीवियों के साथ आम लोगों का ध्यान इस बात की ओर खीचां था कि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए क्या कोई योग्यता और अनुभव होना चाहिऐ या नहीं उसी प्रदेश से एक आई ए एस अधिकारी ने लोकतंत्र और खुद को उसका रक्षक मानने वाले मतदाताओं जन प्रतिनिधियों और उनके दलों के सामने 15 वीं लोकसभा के चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों के चयन की मशक्कतों के बीच एक संदेश भर देने की कोशिश की है जिसमें सभी तरफ से लोकतंत्र की जीत दिखाई देती हैं।...कंपनी का पानी है फूंक कर पीना
मध्य प्रदेश में पिछला दशक "पानी के निजीकरण" के नाम रहा है. इसी कड़ी में ठेका आधारित `देवास औद्योगिक जलापूर्ति योजना´ का कार्य अब अपनी समाप्ति पर है. 2002 को `मध्यप्रदेश राज्य ओद्यौगिक निगम´ ने इस योजना के लिये एक टेण्डर जारी किया था. इसमें नेमावर से देवास तक कुल 128 किलोमीटर पाइपलाइन डालकर नर्मदा का 23 एम.एल.डी. पानी शहर के उद्योगों को पहुँचाना था. योजनाकारों ने 26.50 रुपए प्रति हजार लीटर की दर से पानी बांटने का दावा भी किया. लेकिन पहले टेण्डर में जहां इसकी लागत 65 करोड़ रुपए बतलायी गई थी वहीं अब यह लागत बढ़कर 80 करोड़ को पार कर चुकी है. साथ ही योजनाओं से जुड़े चंद सवाल भविष्य में आशंकाओं को जन्म दे रहे हैं. इसलिए यह पूरी योजना अब विवादों के घेरे में खड़ी है.
राशन की दुकान पर नहीं हुआ 'भारत निर्माण'
देश में उचित दर राशन के दुकानों की कुल संख्या 4,97,715 है. इनमें से पिछले तीन सालों में 76,249 राशन की दुकानों का लाईसेंस या तो निलंबित कर दिया गया या स्थाई रूप से रद्द कर दिया गया. सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री ने पिछले दिनों खुद संसद में इस आशय की जानकारी देते हुए कहा था कि इन तीन सालों में कुल 13,348 लोगों को गिरफ्तार किया गया, मुकदमा चला और दण्डित किया गया. सरकार जनता के सामने अपने काम काज का ढिंढोरा पीट रही है लेकिन सरकार के अपने आंकड़े ही यह बताते हैं कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में आज भी किस कदर भ्रष्टाचार मौजूद है और आम आदमी को उचित दर पर राशन भी मुहैया नहीं है.
पहाड़ प्रदेश बना 'हड़ताल' प्रदेश
उत्तरखाण्ड पहाड़ प्रदेश की बजाय हड़ताल प्रदेश बन गया है. लोकसभा चुनावों को देखते हुए जहां प्रदेश सरकार लोक लुभावन घोषणाओं करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर राज्य कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के विकास का पहिया जाम कर दिया है। ये कर्मचारी अपना काम छोड़ सडक़ों पर नजर आ रहे हैं। प्रदेश के लगभग सभी स्कूल अध्यापकों की हड़ताल के चलते बंद है, सरकार को पांचवीं व आठवीं की परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी हैं। वहीं, परिवहन निगम कर्मचारी भी आन्दोलनरत है.
विवादों का विशालकाय सरोवर
इन दिनों सरदार सरोवर परियोजना और डूब प्रभावितों के लिए किये जा रहे पुनर्वास कार्य में भ्रष्ट्राचार कुछ इस प्रकार व्याप्त है कि अनियमितताओं का सिलसिलेवार ब्यौरा जुटाना और उसके आधार पर लगातार कार्यवाहियों की रणनीतियां तैयार करना कठिन हो चुका है. इस विशालकाय बांध की तरह ही इससे प्राप्त होनेवाले लाभों, लागतों और पुनर्वास संबंधित तमाम फर्जीवाड़ों की लम्बी सूचियां विवादों की मोटी गठरी बन चुकी है.
अपना देश रेल में
भारतीय रेल की कहानी अधूरी हो अगर इसमें सफर करनेवाले उन बच्चों की चर्चा न हो जो रेल के सहारे अपना और अपने परिवार दोनों का भरण-पोषण कर रहे हैं. पान-गुटका बेचने से लेकर पानी पिलाने तक रेलवे के ऊपर इन बच्चों की निराली दुनिया फैली हुई है. की कोई रेलमंत्री उनके बारे में सोचेगा यह कहना तो मुश्किल है लेकिन रेल बजट के इस मौके पर आईये इस देश की ऐसी ही एक रेलयात्रा करते हैं-
Latest on visfot
सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...



