Home | जंतर-मंतर | हमारी शक्लें चीनीयों से मिलती हैं इसका मतलब यह नहीं कि हम चीनी हैं

हमारी शक्लें चीनीयों से मिलती हैं इसका मतलब यह नहीं कि हम चीनी हैं

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अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है, हमलोग भारत के वासी हैं। यह हमलोग दिल और दिमाग से कह रहे हैं, हमलोगों की भावनाएं भारत के साथ वर्षों से जुड़ हुई है। चीन ने अरूणाचल में आ कर वहां चाइना लिख दिया और हमलोग चुप रह गये। भारत सरकार इस मसले पर चुप्पी साधे हुए है बल्कि वे तो यह भी कह रही है कि कुछ मीडिया इस तरह के गलत खबरे दे रहे हैं।´´

ये कहना है ऑल इण्डिया अरूणाचल प्रदेश स्टूडेन्ट्स युनियन के वाइस प्रसिडेन्ट नाबम तमर का। चीन यह दावा करता है कि अरूणाचल भारत का हिस्सा नहीं है और न ही चीन का । वह एक विवादित भूभाग है। हालांकि चीन अप्रत्यक्ष रूप से अरूणाचल पर अपना अधिकार जताना चाहता है। परंतु अरूणाचल प्रदेश के निवासियों का कहना है कि हमलोग भारत के वासी हैं न कि विवादित प्रदेश का। हमलोग इस बात के खिलाफ हैं कि हम चीन के भूभाग में रह रहे हैं। हमलोग जोर दे कर यह कहते हैं कि हमलोग भारत के हिस्सा हैं।

भारत और चीन युद्ध 1962 में हुआ था, उसके बाद आज 2009 यानी 57 वर्षों के बाद भी चीन अरूणाचल को अपनी हिस्सा बताता है। भारत सरकार से हमलोग यह मांग करते है कि इस मसले पर चीन से बात करे और उसके गुण्डागर्दी से हमें मुक्त करवाएं। अरूणचल प्रदेश की उपेक्षा कर भारत सरकार क्या जताना चाहती है? वहॉं के निवासियों के लिए कोई सुविधा भी मुहैया नहीं कराया जाता है। वहॉं न तो रेल है, न रोड है और न ही एयरपोर्ट है। यह उपेक्षा क्यों? शिक्षा भी हमलोग बाहर ग्रहण करने जाते हैं। शिक्षित होने के बाद हमलोगों को यह लगने लगा है कि भारत के दूसरे राज्यों से अरूणाचल काफी पिछड़ा है। भारत सरकार को इस राज्य पर कोई ध्यान नहीं है।

अरूणाचल प्रदेश चार देशों से घिरा है पर किसी भी राज्य के साथ कोई चारदीवारी नहीं यानी काई बाड़ नही लगाया गया है। बाड़ न होने के कारण हमलोग हमेशा असुरि़क्षत महसूस करते हैं, हमलोग भय के साए में जीने को मजबूर हैं। चीन आज अरूणाचल पर अपना दावा दिखा रहा है, भारत सरकार चुप है। कल वह पूर्वोत्तर राज्यों पर अपना दावा दिखा सकता है। यह सोचकर भारत को अभी तुरंत चीन से बातचीत कर विवादित मुद्दे का हल करे। वहॉं के निवासियों का कहना है कि यह केवल अरूणाचल का मुद्दा नहीं और न ही यह पूर्वी क्षेत्र का प्रश्न नहीं है बल्कि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है जिसपर समय रहते विचार नहीं किया गया तो भारत के लिए खतरा है। चीन ने अरूणाचल में आकर चाइना लिख दिया यह भारत पर घाव की तरह है पर भारतीय नेता बताते हैं कि यह सब झूठ है आगे कहते हैं कि कुछ पत्रकार भारत विरोधी खबरे दे कर चीन के साथ विवाद पैदा करना चाहते है और यहॉं तक कि कुछ पत्रकारों को इस बात के लिए कटघरे में खरा कर दिया।

हमारी शक्लें चीनियों से मिलती है इसका मतलब ये नहीं कि हमलोग चीनी हैं यो हो जाएंगे, भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाली जनता की शक्लें, रंग-रूप और भाषा अलग है इस आधार पर अगर हम अलग हो गये तो भारत के सौवों टुकड़े हो जाएंगे। हम लोग भारत के वासी है और हमेशा रहेंगे हमे चीन के द्वारा विचलित करने की कोशिश के खिलाफ मिलकर आवाज उठाना पड़ेगा। मेजर संगीता तोमर का कहना है कि भारतीय युवा सोया हुआ नहीं है, हमलोग जागे हुए हैं। अगर हमलोग पर कोई ऑख दिखाएगा तो हम उनकी ऑंखें निकाल लेंगे।

अरूणचल प्रदेश के अलावे भारत के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों ने `` भारत माता की जय´´ ``चीनी चोर बुरी नीयत छोड़´´ ``भारत के लिए जिएंगे, भारत के लिए मरेंगे´´, आओ मिलकर साथ रहे और चीनी गुण्डों को दूर भगाएं।´´ आदि हिन्दी और अंग्रेजी मे लिखे नारो के साथ एकदीवसीय भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी इस भूख हड़ताल में दिल्ली विश्वविद्यालय, जामिया, जेएनयू, एएमयू के छात्रों के अलावा दिल्ली के अन्य हिस्सों में रहनेवाले छात्रों ने अरुणाचल के साथ होने की सहानुभूति दिखाई है.

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mehta .....bharat rashtra on 06 November, 2009 16:37;31
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sahi mayno me arunanchal pardesh bharat ka abhinn ang hai
or chin ka muh bharat ko tor dena chahiye
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ajay sahu on 10 November, 2009 16:31;34
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govt of india should think seriously about the developement of so the people of arunachal pradesh can also realize that they r also a part pf shining INDIA
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