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विदर्भ के दर्द की दवा दे गये हरित प्रदेश के हिमायती

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विदर्भ की मांग का लेकर दिन प्रति दिन ज्वाला भड़कती जा रही है। इस आंदोलन को आज उस समय और अधिक बढ़ावा मिला, तब लोकदल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान नेता चौधरी अजीत सिंह नागपुर पहुंचकर इस मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि संसद के घेराव से ही पृथक विदर्भ के गठन के लिए सरकार जागेगी।

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (एकीकृत) द्वारा विदर्भ राज्य संकल्प परिषद का आयोजन सिविल लाइन्स स्थित वसंतराव देशपांडे सभागृह में दिया गया था। सभा की अध्यक्षता रिपा नेता प्रा. जोगेंद्र कवाडे ने की। सभा का उदघाटन एवं सांसद रामदास आठवले ने किया। मंच पर नेताओं ने उपस्थितों के समक्ष सब के साथ मिल कर शपथ भी ली। और इस आंदोलन को अंतिम क्षणों तक जाने की बात कही।

मुख्य अतिथी चौधरी अजीत सिंह ने कहा कि किसानों की मांगो को लेकर उन्होंने कई धरने दिए। उत्तर प्रदेश से हरियाणा तक प्रदर्शन लिए, कोई लाभ नहीं मिला। लेकिन चक्का जाम करते हुए जब संसद का घेराव किया गया तब दो दिन में सरकार का ध्यान हमारी मांगों पर गया और किसानों की  समस्याओं पर निर्णय लिया गया। अजीत सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुर्नगठन की मांग को लेकर विदर्भवादी हमारे साथ समन्वय बनाए हम और आप मिलाकर संसद घेर लेंगे, फिर देखना सरकार कैसे आप की मांग को सुनती है।

उन्होंने तेलंगाना राज्य के गठन का हवाला भी दिया। यहां छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड के गठन वि. के विभिन्न उदाहरण भी यहां पेश किए गए। अजीत सिंह ने कहा कि हम नहीं चाहते कि किसी भी प्रकार की कानून व्यवस्था को धक्का लगे। शांति के साथ हम इस आंदोलन को चलाएंगे। लेकिन यह हमारा अनुभव है कि दिल्ली में बैठी कोई भी सरकार इस प्रकार के आंदोलन पर ध्यान नहीं देती। उन्होने कहा कि बसों को झेकना, रोज रोकना तोड फोड जैसे आंदोन पर सरकार का ध्यान जाता है और आप की सुनवाई होती है। उन्होंने कहा कि 2004 में कांग्रेस की यूपीए सरकार तेलंगाना के पक्ष में भी पिछले 5 वर्षों में उत्तर  प्रदेश के पक्ष में समर्थन दिया गया। झांसी में राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश समन्वय समिति की बैठक कर 2008 जनवरी में बुंदेलखंड का प्रस्ताव पास किया है। वाराणसी में पहुंच का प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुनर्गठन का समर्थन किया है। उन्होने कहा कि जब तक आप विदर्भवादी अपनी शक्ति का प्रदर्शन नही करोंगे तब तक सरकार कुछ करनेवाली नही है। उन्होंने कहा कि आप लोग बातचीत करें, शांति के साथ अपनी मांग करें लेकिन किसी को घेरने की ताकत भी बनाए रखे। वरना कोई आप की सुनवाई नहीं हो सकती।

अजीत सिंह ने कहा कि अब तक विदर्भ संतरा और किस कपास के लिए जाना जाता था। लेकिन आज किसान आत्महत्या विदर्भ की पहचान बन गई है। यह शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि विदर्भ में संसाधनों की कमी नहीं है, खनीज, उर्जा उत्पादन की क्षमता है लेकिन उसका लाभ विदर्भ की जनता को नहीं मिल रहा है। यहां के लोग अपनी किस्मत खुद बना सकते है। उन्होंने इस आंदोलन को व्यापक बनाने पर जोर दिया। बलिदान और त्याग की भावना हमारे भीतर होनी चाहिए। उन्होंने इस लड़ाई को नवयुवकों के भविष्य के लिए आवश्यक बताया। हरित क्रांति हो या विदर्भ की मांग हमें आपस में तालमेल बनाकर इसे लडऩा चाहिए।

सांसद दत्ता मेघे ने कहा कि लोग हमसे त्यागपत्र नही मांगे, क्योंकि हम इस मांग को संसद में उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि कांग्रेस बचानी हो तो हमें आशिर्वाद देना पड़ेगा। जो लोग इस आंदोलन का समर्थन नहीं करेंगे वे नेता विदर्भ में रहने का अधिकार नहीं रख सकते। मेघे ने कहा वे 35 वर्षो से सत्ता का सुख भोग रहे हैं, एक बार जेल जा चुके हैं लेकिन अब वे फिर जेल जाने के इच्छुक हैं। सांसद विलास मुत्तेमवार ने कहा कि भाजपा के सभी नेताओं तथा विशेष रुप से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी का अभिनंदन करते हैं। माया नगरी मुंबई में पहुंचने वाले विदर्भ के लोगों की दुर्दशा पर चिंता करते हुए मुत्तेमवार ने कहा कि अब और अधिक बर्दाश्त नहीं होता। हमें अब हमारा विदर्भ अलग चाहिए। उन्होंने अभी नहीं तो कभी नही के तहत आम जनता से वचन भी लिया।

पूर्व सांसद बनवारीलाल पुरोहित ने कहा कि भाजपा ने गत 9 जनवरी को एक महत्त्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया था। जिसमें 11 जिलाध्यक्ष, 15 विधायक, 2 एम एल सी तथा 2 सांसदो ने समर्थन के पत्र देकर विदर्भ की मांग में कूद पड़ऩे पर रजामंदी दी थी। आरपीआई एकीकृत के अध्यक्ष पूर्व सांसद रामदास आठवले ने कहा कि पृथक विदर्भ समय की मांग है। हमारे बीच किसी तरह का विवाद  नहीं है। कोई ङ्क्षहदी बोले, कोई मराठी बोले, हमें इससे कोई मतलब नहीं है। पृथक विदर्भ के मुद्दे पर एकजुट हैं।
इस सभा में विदर्भवादी नेता नानाभाऊ अंबडवार, राजकुमार तिरपुडे, अनिल गोंडाने, उमाकांत रामटेके आदि ने भी संबोधित किया। 

भाजपा विधायक देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्हे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी से इस विषय में अनुमति मिल गई है। पूर्व सांसद बनवारीलाल पुरोहित ने 20 जनवरी की हड़ताल पर कहा कि उस दिन सभी अपने अपने झंडे लेकर निकालेंगे। बंद को दिन कफ्र्यू जैसा वातावरण की बात कहते हुए वक्ताओं ने कहा कि हम सब किसी पर जबरदस्ती नहीं करेंगे। यह हमारा कर्तव्य होगा कि इस आंदोलन में निष्पक्ष के साथ भाग लें। हस्ताक्षर अभियान के तहत रामदास आठवले ने पहले हस्ताक्षर किया। दत्ता मेघे ने एक रूपया के बजाय इस अभियान में एक हजार रुपए देकर हस्ताक्षर किये। पूर्व विधायक सतीश चतुर्वेदी ने भी इस अभियान में निष्ठा की बात पर जोर दिया।

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Sanjeet Tripathi on 13 January, 2010 00:01;58
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ramdas athwale ji sansad hai ya purva saansad???????

is khabar me ek jagah to unhe saansad likha gaya hai to ek aur jagah par purva saansad.

aisa kaise prabhu ;)
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image संजय स्वदेश किरोडीमल कॉलेज स्नातकोत्तर के बाद केंद्रीय हिंदी संस्थान दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा। दैनिक हिंदुस्तान, नवभारत टाईम्स, सहारा समय, दैनिक भास्कर में काम. कई पत्र-पत्रिकाओं में स्वतंत्र लेखन के साथ स्थानीय जनअभियानों से जुड़े हैं। sanjayinmedia@rediffmail.com
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