जंतर-मंतर
पान बनाम खान की जंग
दक्षिण कोरियाई और विश्व की अग्रणी स्टील निर्माता बहुराष्ट्रीय कंपनी पोस्को के उड़ीसा स्थित जगतसिंहपुर जिले के प्रस्तावित स्टील फैक्ट्री परियोजना का पारादीप के समीप के गांओं में पान की खेती करने वाले किसानों का विरोध जारी है. पान बनाम लोहे के खान की इस जंग को जानते हुए हमें यह भी सोचना होगा कि आखिरकार हमें किसानों की पान अर्थव्यवस्था को बचाना है या फिर कोरियाई स्टील कंपनी की खान अर्थव्यवस्था को बढ़ाना है.
कैसे बांधोगे नर्मदा की विरोध धारा?
पिछले दिनों विकास संवाद के एक कार्यक्रम में महेश्वर जाने का मौका मिला। इस कार्यक्रम में काफी तादाद में मीडियाकर्मी जमा हुए। यूं तो बहस का एजेंडा- मीडिया के मानक और लोग- था, लेकिन चूंकि ये इलाका नर्मदा पर बन रहे बांध की वजह से नर्मदा बचाओ आंदोलन की कर्मभूमि है, सो फिजा में डूब से प्रभावित लोगों का सवाल भी घुला रहा। खुद आयोजकों ने भी कार्यक्रम कुछ इस तरह से ऱखा कि मीडियाकर्मी नर्मदा पर बन रहे बांध और उससे प्रभावित लोगों की हकीकत से दो-चार हुए और उन्हें ये मुद्दा उद्वेलित कर गया।
आंदोलन हो तो ऑनलाइन हो
गोपाल कृष्ण दिल्ली की एक संस्था टाक्सिक्स लिंक में काम करते थे. टाक्सिक्स लिंक जहरीले रसायनों पर काम करती है और उनके खिलाफ आंदोलन चलाती है. काम का तरीका एनजीओवादी है. इसलिए यहां काम करनेवाले लोग जमीन से ज्यादा कम्प्यूटर से जुड़े रहते हैं. गोपाल भी बाहर मैदान से ज्यादा बेसमेन्ट में अपने कम्प्यूटर पर सक्रिय रहते थे. तब आनलाइन दुनिया की अपनी कोई खास समझ नहीं थी. ...15 हजार मछुआरे क्या मराठी माणुस नहीं हैं?
मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर की दूरी पर महाराष्ट्र का एक जिला है- रत्नागिरी। जिले की आबादी लगभग 17 लाख है जिले में कुल 9 तालुकाएं है मंडनगढ़, दापोली, खेड़, चिपलून, गुहागर, संगमेश्वर, लोज़ा, राजापुर, और रत्नागिरी। रत्नागिरी तालुका में समुद्र के किनारे दो गाँव है (1) गोलप मोहल्ला (2) पावस, इन दोनों गावों में लगभग 5000 मछुआरों का परिवार रहता है जिसमें हिन्दू कोली समुदाय और मुस्लिम दाल्दी समुदाय के लोग है और यह दोनों समुदाय मिलजुल कर समुद्र से मछली पकड़कर अपनी आजीविका चलाते है।...राजनीति की पहली पाठशाला में चाहिए आरक्षण
राजस्थान में छात्र संघ चुनावों पर रोक थी. अब आगामी शिक्षण सत्र से ये चुनाव आरम्भ हो जाऐगें. इसके लिए मुख्यमंत्री घोषणा पत्र के किये वायदे के अनुरूप मंजूरी दे दी है. राजनीति की पहली पाठशाला माने जाने वाले कालेज छात्रसंघों की क्लास अब फिर से शुरू होने जा रही है. लेकिन इसके फिर से शुरू होने से पहले ही छात्राओं ने अपने लिए आरक्षण की माँग करके राजनीति को फिर से गरमा दिया है....विदर्भ के दर्द की दवा दे गये हरित प्रदेश के हिमायती
विदर्भ की मांग का लेकर दिन प्रति दिन ज्वाला भड़कती जा रही है। इस आंदोलन को आज उस समय और अधिक बढ़ावा मिला, तब लोकदल ने राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं किसान नेता चौधरी अजीत सिंह नागपुर पहुंचकर इस मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि संसद के घेराव से ही पृथक विदर्भ के गठन के लिए सरकार जागेगी।
महात्मा गांधी के नाम पर
वर्धा के महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में एक ओर आज जहां ’स्थापना दिवस’ मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर दलित विद्यार्थी पढ़ाई लिखाई पर अपने अधिकार को हासिल करने के लिए अनशन पर बैठे हैं। इन विद्यार्थियों ने इस दिन को ’शोक दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है।
दस थाली टूट गयी पर सरकार नींद में गाफिल
थाली बजाकर विरोध करने का तरीका बहुत निराला और मार्मिक होता है. थाली उस वक्त बजायी जाती है जब दरिद्र से मुक्ति पानी हो. नागपुर में धरने पर बैठी ये विधवा महिलाएं थाली बजाकर अपने दरिद्रपन से मुक्ति पाने की गुहार कर रही हैं लेकिन दस थालियों के टूट जाने के बाद भी अब तक सरकार को उनकी आवाज सुनाई नहीं दी है.
गांधी के शिक्षाग्राम में अंबेडकर कर रहे हैं विरोध
वर्धा गांधी की प्रयोगभूमि है. दुनिया वर्धा को इसीलिए जानती है क्योंकि अपनी कर्मभूमि के लिए गांधी ने इसका चुनाव किया था. लेकिन गांधी के नाम पर बने यहां के एक शिक्षाग्राम में अब अम्बेडकर को माननेवाले ही गांधी के नाम पर शिक्षा में हो रही धोखाधड़ी का विरोध कर रहे हैं. वर्धा में गांधी और अंबेडकर को माननेवाले आमने-सामने खड़े हैं.
लोकतंत्र के योद्धाओं की खानाबदोश बस्ती
वैसे तो देश भर में हर राज्य की राजधानी में एक ऐसा स्थान नियत किया गया है जहां लोकतात्रिक तरीके से लोग अपनी बात कह सकते हैं. लेकिन संसद और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र होने की वजह से दिल्ली का अपना महत्व है. देश भर से हताश और निराश लोग इस उम्मीद में जंतर मंतर आते हैं कि यहां उनकी बात सुनी जाएगी. लेकिन संवेदनशून्य हो चुकी हमारी व्यवस्था और प्रशासन या तो उनकी बात सुनता ही नहीं, या फिर कार्रवाई इतनी लंबी होती है कि न्याय मिलते-मिलते जीवन का एक लंबा अरसा गुजर जाता है. कहते हैं दिल्ली उंचा सुनती है. जंतर-मंतर पर यह सही साबित होती है.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
- आलोक तोमर की आपबीती
- वह गुजरात जिसे आप नहीं जानते
- हिन्दू आतंकवाद का अतिवाद
- सिमी से भी खतरनाक है संघ का स्वरूप
- बाबा रामदेव का दांव
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
बहुत अच्छा व सच्चाईयो पर आधारित लेख है। सेकुलर भारत के निर्माँण मे ऐसे लेख का अहम योगदान होगा. संपादक- आपकी आवाज़.कांम
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...
सिक्के के दुसरे पहलू की तरफ इशारा कर अनिल ज्जी ने सदा की तरह सार्थक हस्तक्षेप किया है. बहुत सशक्त लेखन. निश्चय ही लेख में ...

