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जंतर-मंतर

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दिल्ली में देश के दो लाख गन्ना किसान

रामलीला मैदान से जंतर-मंतर पहुंचना हो तो बीच में दिल्ली का प्रतिष्ठित कनाट प्लेस पड़ता है. लेकिन गुरुवार को गन्ना किसानों की रैली को देखते हुए इस प्रतिष्ठित व्यावसायिक जगह को एहतियातन बंद करवा दिया गया था. हो सकता है पुलिस ने दुकानदारों की जानमाल की रक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया हो लेकिन राष्ट्रीय लोकदल के कहने पर दिल्ली आये लगभग दो लाख गन्ना किसानों ने छुटपुट उपद्रव के अलावा ऐसा कुछ नहीं किया जिससे "कानून व्यवस्था" का संकट खड़ा होता.
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हमारी शक्लें चीनीयों से मिलती हैं इसका मतलब यह नहीं कि हम चीनी हैं

अरूणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है, हमलोग भारत के वासी हैं। यह हमलोग दिल और दिमाग से कह रहे हैं, हमलोगों की भावनाएं भारत के साथ वर्षों से जुड़ हुई है। चीन ने अरूणाचल में आ कर वहां चाइना लिख दिया और हमलोग चुप रह गये। भारत सरकार इस मसले पर चुप्पी साधे हुए है बल्कि वे तो यह भी कह रही है कि कुछ मीडिया इस तरह के गलत खबरे दे रहे हैं।´´
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सीमा पर बचे लेकिन सरकार से घायल

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मातृभूमि पर अपनी जान की बाजी लगा देने वाले सैनिकों को अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद पैंशन के असमान वितरण से जूझना पड़ रहा है। आज के दौर में सरकार सैनिकों को पैंशन उनके रिटायरमेंट के समयानुसार प्रदान करती है। जिससे एक समान रैंक वाले दो सैनिकों को अलग-अलग सत्र में रिटायर होने के कारण अलग-अलग पैंशन मिलती है, जिसमें काफी बड़ा अंतर है। समान रैंक, समान पैंशन की मांगों को लेकर पूर्व सैनिकों ने 25 अक्टूबर को रविवार के दिन जंतर-मंतर पर धरना किया और पांचवी बार अपने पदकों को राष्ट्रपति को वापिस लौटा दिया। ...
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डॉ कोठारी का 'दाल सत्याग्रह'

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अंग्रेजों द्वारा नमक पर कर लगाए जाने के विरोध में राष्ट्रपति महात्मा गांधी ने दांडी यात्रा कर 'सत्याग्रह' किया था। उस दौरान महात्मा गांधीजी के साथ हजारों लोगों का हूजूम उमड़ गड़ा था किन्तु इस दौर में गांधीजी को प्रेरणास्रोत मानकर उनकी विचारधारा पर पिछले कई सालों से संघर्षरत एक आधुनिक गांधी सरकार से बात मनवाने के लिए अन्न त्याग कर प्राण त्यागने की जिद पर अड़े हैं लेकिन अभी तक उनके आस-पास कोई इकट्ठा नहीं हुआ है....
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के छात्रों का आंदोलन

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इधर दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में जिस वक्त केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी देश में चार और आईआईएमसी खोले जाने की घोषणा कर रही थी उसी वक्त दिल्ली से दूर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के छात्र अपने ही कुलपति के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जुड़े पत्रकारिता के छात्रों का यह आंदोलन थोड़ा बेतुका जरूर है लेकिन अप्रासंगिक नहीं है. मसलन आंदोलन करनेवाले छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय परिसर में निजी पत्रकारिता संस्थान न खोला जाए भले ही विश्वविद्यालय के जर्जर पत्रकारिता संकाय में एक ही शिक्षक उन्हें पत्रकारिता पढ़ाता रहे. ...
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दोहा दौर का दोहरा संकट

तीन सितंबर से नई दिल्ली में शुरू हुए दो दिन के मिनी मिनिस्टीरियल कांफ्रेस और उसका विरोध दोनों शुरू हुए. दिल्ली में हो रही इस दो दिवसीय मिनी मिनिस्टीरियल कांफ्रेस का हजारों किसानों और प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया और भारत सरकार से किसी भी कीमत पर दोहा दौर से समझौता न करने की मांग की.
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नरेगा के प्याले में कर्मचारियों का तूफान

मजदूरों को काम का अधिकार देने वाले नरेगा कानून से अब उसके कार्मिक ही खफा हो गये है। राजस्थान भर में 15 हजार नरेगा कर्मचारियों ने कलमबंद हड़ताल कर रखी है। 17 जुलाई के राज्य सरकार के एक आदेश ने इन कार्मिकों की परेशानियॉ बढा दी है। सरकार की ओर से कर्मचारियों को उनके संविदा नियमों से हटकर प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से लगाने की योजना है। जबकि कर्मचारी नियमित नियुक्ति के सपने पाले हुऐ थे। देश भर में काम के हिसाब से नंबर वन राजस्थान में नरेगा भ्रष्टाचार और शिकायतों में भी नंबर वन ही है।
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24 साल बाद मिली 'काजू' को जमीन

आखिरकार उड़ीसा के कोरापुट जिले में पिछले 24 सालों से चला आ रहा आदिवासियों का आंदोलन थम गया है। आदिवासियों का यह आंदोलन काजू फल की खेती को लेकर था जिसमें वे फसल उगाने के लिए जमीन पर अधिकारों की मांग कर रहे थे। देश में उड़ीसा काजू के उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सबसे पहले इस आंदोलन की पृष्ठभूमि जानना आवश्यक है। उड़ीसा में 20 जिले ऐसे हैं जहां काजू की खेती बहुतायत में होती है। आदिवासी और दलित बहुल इस राज्य में काजू के उत्पादन पर इन दोनों वर्गों का अधिपत्य रहा है, लेकिन खेती-गृहस्ती का इनका सिलसिला बहुत दिनों तक चल नहीं पाया।
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जूता मारो आंदोलन के जनक मछिन्द्रनाथ

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब मछिन्द्र नाथ का स्थाई बसेरा है. हालांकि वे यहां आये थे अपनी व्यथा दिल्ली को सुनाने लेकिन अब वे अपनी व्यथा से आगे निकलकर समाज की व्यथा पर व्यापक सुनवाई करने का काम भी करते हैं. मछिन्द्र नाथ जब जंतर-मंतर आये थे तो एक सामान्य गृहस्थ थे जो महाराष्ट्र के भ्रष्ट नौकरशाही से लड़ने की मंशा रखते थे. लेकिन अब वे देश के प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक से लड़ रहे हैं. अपने लिए संघर्ष करनेवाले मछिन्द्रनाथ अब अपने जूता मारो आंदोलन के जरिए लोगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
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एक प्रस्तावित कानून के खिलाफ वास्तविक आंदोलन

जो जंतर-मंतर लगभग भूल चुके हैं वे आज जंतर-मंतर पर थे. मीडिया के लोग. वे कब के भूल चुके हैं कि दिल्ली में जन आंदोलनों की एक जगह है जिसे जंतर मंतर कहते हैं. लेकिन आज उन्हें याद आया. वे जंतर-मंतर पर पहुंचे. नारे लगाये. खबर देनेवाले खबर बने. काला कानून वापस लेने की मांग हुई. फिर उस काले कानून की प्रतियां जलाई गयीं जो अभी बना नहीं है. सबकुछ ठीक से निपट गया. लोग आये थे और वापस चले गये.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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