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जंतर-मंतर

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शहीदों का यह कैसा सम्मान?

इंडिया गेट पर जिन सिपाहियों के नाम दर्ज हैं उनमें से ज्यादातर ब्रिटिश हुकूमत की ओर से अफगानों से लड़ते हुए मारे गये थे. उनकी ही याद में ब्रिटिश हुकूमत ने एक स्मारक बनाने का निर्णय लिया था. इंडिया गेट की नींव १० फरवरी १९२१ को डाली गयी थी. जिस साल भारतीय आजादी के तीन सपूतों राजगुरू, सुखदेव और भगत सिंह को फांसी दी गयी उसी साल १९३१ में इन शहीदों के हत्यारे लार्ड इरविन ने इण्डिया गेट को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा दे दिया था.
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राजा जनक की दरिद्र मिथिला

ऐसी पौराणिक मान्यता है कि एक बार इंद्रदेव राजा जनक के मिथिला राज्य की संपन्नता देखने आये थे. एक सेवक के घर की संपन्नता देखकर उन्होंने उसे ही राजमहल समझ लिया था. यह मिथिला की संपन्नता का ऐसा उदाहरण था जिसके किस्से आज भी कहे जाते हैं. लेकिन आज का मिथिला बिहार राज्य का एक हिस्सा है. आज के मिथिला की सच्ची तस्वीर देखनी हो तो अलग मिथिला राज्य के लिए आंदोलन चलानेवाले धनाकर ठाकुर के शब्दों में देख लीजिए.
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विरोध की 'एकल खिड़की' भी खुली रखिए

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आज सभी खदान परियोजनाओं को बगैर किसी रूकावट के पास करने का दबाव पैदा हो गया है। देश के विकास के लिए बिजली चाहिए। इसीलिए बिजली घरों को तो पर्यावरण नियमों से पूरी तरह मुक्त करने की आवाजें उठने लगी हैं। और तो और, जमीन-जायजाद का ताकतवर गुट भी अब मॉल, आवासीय कालोनियों व अन्य किस्म की शहरी परियोजनाओं को पर्यावरण विभाग से प्रमाणित करवाने जैसी बेमतलब की झंझटों से मुक्त करने की मांग करने लगा है।...
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जमीन की जंग में सब नाजायज

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क्या आंदोलन और खून-खराबे के बाद सरकार किसानों की मांग मानने की आदी हो चुकी है या फिर किसान दमनकारी नीतियों के सामने घुटने टेक देते हैं? आखिर क्यों किसान थोड़े से लालच में अपनी सभी मांगों को भूल शांत बैठ जाते हैं? उत्तर प्रदेश के जनपद गौतमबुद्ध नगर में स्थित मुख्यमंत्री मायावती के पैतृक गांव`बादलपुर´ और `दादरी´ विधान सभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत `घोड़ी-बछेड़ा´ के छह गांवों के किसानों का शासन से समझौता करने के बाद उनके आंदोलन का अंत नििश्चत रूप से यह सवाल पैदा करता है। ...
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विकास विस्थापन और उत्तराखण्ड

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अफवाह और खबर दोनों है िक रतन टाटा सिंगूर छोड़ उत्तराखण्ड आ रहे हैं. वे पन्तनगर में नैनो का मुख्य असेम्बली प्लांट बना सकते हैं. उत्तराखण्ड के लिए इसे सौभाग्य की बात बतानेवाले जरा उत्तराखण्ड के उस टीस को भी अनुभव करें जो टिहरी जैसी बड़ी परियोजनाओं के कारण उसे विरासत में मिली है. उद्योगपतियों को बिना टैक्स प्रदेश में घुसानेवाली सरकारें यह आंकलन क्यों नहीं करती कि इससे आम उत्तराखण्डी को क्या मिला? उनके हिस्से में तो पलायन, विस्थापन और विनाश ही आता है....
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पेट काटकर कार को रास्ता

सियासी चालों और कारोबारी नैनों के बीच चल रहे कार और पेट के इस खेल में जीत शायद कार की हो जाए, पर यह जीत देश के करोड़ों गरीबों को किसी नैनो के तले कुचलने जैसे अपराध से कमतर हरगिज न होगी। नेताओ, बस इतना जवाब दे दो-चुनाव नैनो के मसले पर पर लड़ते हो या पेट और भूख के मसले पर...
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बिजली की एक डील यहां भी हुई है

उत्तराखण्ड सरकार ने फैसला किया है कि वह प्रदेश की उन सभी 14 जलविद्युत परियोजनाओं को निजी हाथों में सौंप देगी जो पिछले 30-35 सालों से राज्य को बिजली मुहैया करा रहे हैं. ऐसे में केन्द्र में परमाणु समझौते के मुद्दे पर भाजपा कांग्रेस को घेर रही है तो यहां राज्य में कांग्रेस भाजपा पर डील करने का आरोप लगा रही है.
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विरोध का धंधा करनेवाले लोग

यह सब लिखते हुए भी मुझे इस बात का अंदाज और अंदेशा है कि पेस्टीसाईड कंपनियां शांत नहीं बैठेंगी. हो सकता है वे मेरे ऊपर नये सिरे से हमले की योजना बना रही हों.
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सुदर्शन का (कु) दर्शन
जबसे आरएसएस के लोगों की आतंकवादी घटनाओं में संलिप्तता सामने आयी है, तब से आरएसएस के नेता बौखला गए हैं। इस बौखलाहट में ही शायद संघ के इतिहास में पहली बार हुआ है कि इसके स्वयंसेवक विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर उतरे। इसी बौखलाहट में आरएसएस के एक्स चीफ केएस सुदर्शन का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और सोनिया गांधी के बारे में ऐसे शब्द बोल दिए, जिन्हें एक विकृत मानसिकता का आदमी ही बोल सकता है।...
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सीआईए नहीं केजीबी एजंट कहिए जनाब
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक ने 10 नवंबर को सोनिया गांधी पर सीआईए एजंट होने का आरोप लगाकर सनसनी पैदा कर दिया है. पूरी की पूरी कांग्रेस उत्तेजित है और संघ भी बैकफुट पर चला गया है. सुदर्शन के आस पास के लोगों का कहना है कि सुदर्शन जी भुलक्कड़ हो गये हैं और उन्हें कुछ ठीक से याद नहीं रहता. शायद इसीलिए उन्होंने इतनी बड़ी चूक कर दी. ...
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सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?
एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?...
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नये निजाम के दामन पर है ज्यादा बड़ा दाग
मुंबई। महाराष्ट्र के नए निजाम भी कोई दूध के धुले नहीं हैं। कांग्रेस आलाकमान ने अशोक चव्हाण को फर्जीवाड़े से फ्लैट पाने के आरोप में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की गद्दी से हटा दिया। लेकिन नए मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण भी उसी तरह के फर्जीवाड़े में गले तक डूबे हुए हैं। उन्होंने जितने बड़े बड़े झूठ बोलकर सरकार से फ्लैट हथियाए हैं वे कांग्रेस के लिए ज्यादा दागदार हैं।...
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अजमेर चार्जशीट और संघी उछल-कूद
बढ़ते पैमाने पर इसके साक्ष्य सामने आ रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से जुड़े लोगों का आतंकवादी हमलों में हाथ रहा है। इन हालात में आर एस एस इस पुराने सूत्र पर चल रहा लगता है कि हमला ही सबसे अच्छा बचाव है। उसने 10 नवंबर को देशव्यापी विरोध कार्रवाइयों का आह्वान किया है। इन कार्रवाइयों में संघ के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की बात कही जा रही है। बहरहाल, इसकी चर्चा हम जरा बाद में करेंगे।...
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अपने होने पर ही हैरान
‘चुप्पी-चुप्पी नहीं नहीं, बोलेंगे अब सभी-सभी’ इन्हीं नारों से दाहोद (गुजरात) का सीनियर रेलवे संस्थान परिसर 31 अक्टूबर को पूरे दिन गूंजता रहा। यहां गुजरात के बड़ोदरा, पंचमहल, सुरत, भड़ूच, डांग, बालसाड और साबरकांठा जिले से लगभग तीन हजार के आस पास विमुक्त एवं घुमंतू समाज से ताल्लुक रखने वाले लोग इकट्ठे हुए थे। मौका था, अधिकार अभियान की घोषणा का। उस समाज के लिए जो इस लोकतांत्रिक देश में अधिकार का अर्थ अभी तक समझ नहीं पाएं हैं। ...
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गोली लगने के बाद क्या गांधी ने कहा था- हे राम ?
यह एक ऐसा सवाल है जिस पर अब विवाद होने लगा है. 30 जनवरी 1948 को क्या जब महात्मा गांधी को नाथूराम गोडसे ने गोली मारी तो महात्मा गांधी ने अपने मुंह से हे! राम का संबोधन किया था? उस वक्त घटनास्थल पर मौजूद रहे एक प्रत्यक्षदर्शी के डी मदान का कहना है कि "मैंने नहीं सुना था कि उन्होंने हे राम कहा था या नहीं."...
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भद्दा और बेदम रहा संघ का विरोध प्रदर्शन
स्कूल जाते बच्चों के भी हाथ में भगवा थमाकर भले ही संघ ने शक्ति प्रदर्शन की भरपूर कोशिश की हो लेकिन 10 नवम्बर का दिन उसके इतिहास में कोई बडी घटना के रूप में याद नहीं किया जायेगा। हॉ हम बात कर रहे है राजस्थान के भरतपुर जिला मुख्यालय की जहॉ देश भर की ही तरह हिन्दुवादी संघटनों ने अपने उपर लग रहे ‘भगवा आतंकवाद’ के आरोपों के विरोध में शक्ति प्रदर्शन किया था। भरतपुर जहॉ संघ प्रचारक क रूप में भाजपा के पीएमइन वेंटिग लालकृष्ण आडवानी ने अपनी सेवाऐं दी है संघ का ये विरोध प्रदर्शन एक दम भददा और हल्का रहा।...
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एनसीपी के 'दादा' का दांव
महाराष्ट्र में कांग्रेस में परिवर्तन हुआ तो राष्ट्रवादी कांग्रेस ने भी अपने पत्ते खोल दिये. राज्य में लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही सत्ता के दावेदारी पर एनसीपी ने आखिरकार प्रदेश की प्रशासनिक कमान अपनी ओर से शरद पवार के भतीजे अजीत पवार को सौंप दी है. अब गुरुवार को शाम साढ़े चार बजे पृथ्वीराज चव्हाण के साथ अजीत "दादा" पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे....
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पीएमओ वाले पृथ्वीराज
महाराष्ट्र के नये मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण यूपीए सरकार पार्ट वन और पार्ट टू में बतौर पीएमओ मिनिस्टर जाने जाते हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय में रहते हुए भी उन्होंने कभी ताकतवर होने का दंभ नहीं पाला और चुपचाप काम करते रहे. बिट्स पिलानी से बीई और बर्कले विश्वविद्यालय से एमएस की डिग्री हासिल करनेवाले पृथ्वीराज की राजनीतिक कमेस्ट्री ने उनके सार्वजनिक जीवन में पहली बार इतना गाढ़ा रंग उड़ेला है....
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सुलग रहा है मेरठ 'हिन्दुस्तान'
एक ओर हिन्दुस्तान अखबार अपनी अलग कंपनी बनाकर अखबार को चमकाने और अखबार का विस्तार करने में लगा है वहीं दूसरी ओर हिन्दुस्तान के विभिन्न संस्करणों में हालात ठीक नहीं है. हिन्दुस्तान के मेरठ संस्करण में इन दिनों इस्तीफे दिये जा रहे हैं लेकिन प्रचारित किया जा रहा है कि जो आफिस नहीं आ रहे हैं वे छुट्टी पर चले गये हैं....
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आलोक तोमर के बगल में बसे किशोर मालवीय
सीएनईबी में पहले से एक सलाहकार संपादक थे- आलोक तोमर. अब दूसरे सलाहकार संपादक भी वहां नियुक्त हो गये हैं किशोर मालवीय. उन्होंने सीएनईबी चैनल के साथ बतौर कंसल्टिंग एडिटर अपनी नई पारी की शुरुआत की है। सीएनईबी से पहले वे ‘वायस ऑफ इंडिया’ न्यूज चैनल के साथ जुड़े हुए थे। उन्होंने करीब दो दशक के कॅरियर में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों में कई जिम्मेदारियां निभाईं हैं।...
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सुरक्षा परिषद की छांव में खेती पर दांव
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद में दिये गये अपने भाषण में भारत से मिले प्यार की भूरि भूरि प्रशंसा जरूर की लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों को छिपा नहीं सके. बराक ओबामा ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए जहां एक ओर भारत को महाशक्ति करार देकर उसके लिए संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता को अपना समर्थन दिया वहीं भारत और अमेरिका द्वारा मिलकर खेती के क्षेत्र में एक और हरित क्रांति के आगाज की घोषणा की....
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आतंक नहीं कश्मीर केन्द्रित हुई ओबामा यात्रा
रविवार की देर शाम भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित भोज में ओमर अब्दुल्ला के शामिल होने से जो आशंका पैदा हुई थी वह सोमवार को हैदराबाद हाउस में और प्रबल रूप में सामने आ गयी जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में स्वीकार किया कि वे पाकिस्तान से बात करते वक्त "के" शब्द पर बात करने से नहीं कतराते हैं....
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भारत से धंधा, पाक को चंदा
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने अपना तीन दिवसीय दौरा पूरा कर लिया. मुंबई उतरकर दिल्ली दरबार तक उनकी दस्तक भारत पर अमेरिका के मजबूत पकड़ की मिसाल बन गया. निश्चित रूप से उनका दौरा भारत के लिए उतना महत्वपूर्ण नहीं जितना खुद अमेरिका के लिए है. मंदी के दौर से जूझ रहे अमेरिका को "कारपोरेट" जगत का धंधा दिलाने के लिए उन्होंने न केवल भारत को महाशक्ति करार दे दिया बल्कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का समर्थन भी कर दिया....
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