प.बंगाल नगरपालिका चुनावों में वाम मोर्चे का पत्ता साफ
पश्चिम बंगाल में घोषित 16 नगरपालिकाओं चुनाव नतीजों में मात्र 03 पर वाममोर्चे को सफलता मिली है, शेष 13 स्थानों पर पर तृणमूल-कांग्रेस गठबंधन को जीत मिली है. लोकसभा चुनावों के बाद वामवोर्चो को प्रदेश में यह दूसरा बड़ा झटका लगा है.
इस जीत से वा.मो. ने जनता पर अपना प्रभाव कम होने की बात मान ली है। अब माकपा के दिग्गज नेता भी मानने लगे हैं कि राज्य में लगातार माकपा का जनाधार कम हो रहा है। इन नेताओं का मानना है कि सांगठनिक कमियों की वजह से लगातार उनके जनाधार में कमी आ रही है. ऐसा माननेवालों में सुभाष चक्रवर्ती और अब्दुल रज्जाक मोल्ला जैसे सीनियर कामरेड भी शामिल हैं.
इस बार प्रदेश में हुए नगरपालिकाओं के चुनाव में वा.मो. ने 7 न.पा. पर अपना वर्चस्व खोया है। वहीं आसनसोल, कुल्ती जैसे लालदुर्ग कहने वाले स्थानों पर एकदम प्रथम बार तृणमूल गठबंधन की विजय को तृणमूल के बर्दवान जिला अध्यक्ष मलय घट्क ने ऐतिहासिक और विराट सफलता करार दिया है। मलय बाबू ने इसके बाद रानीगंज और जामूरिया जैसे वाममोर्चा की मजबूत गढ़ पर भी जीत की अपेक्षा जताई है।
इस भारी जीत के बाद भी तृणमूल कांग्रेस बहुत संभलकर आगे बढ़ रही है. मसलन. मलय ने पत्रकारों से अनुरोध किया है कि आप हमारे समर्थन में न लिख कर सिर्फ सही तथ्यों को ही लिखें तो हमारा काम बन जाएगा? याने श्री घट्क को अपने संगठन की सूचिता पर इतना पक्का भरोसा है। उधर इन परिणामों पर कई वाम नेताओं ने प्रतिक्रिया देते हुए यह भी कहा है कि इसकी पहले से ही संभावना थी.
अब वामो.और माकपा अपनी ग़लतियों का चीर -फाड़ कर रहे हैं। हालांकि वाममोर्चा और माकपा दोनों ही मान रही हैं कि विधानसभा चुनाव (2011) के पहले वे अपनी स्थिति मजबूत कर लेंगे लेकिन फिलहाल पश्चिम बंगाल के जो हालात है उसमें उनकी यह आशावादिता कपोल कल्पना ही लगती है.



del.icio.us
Digg