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सरकारें पहले से अधिक उदासीन, काहिल और भ्रष्ट- प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नौकरशाहों को आगाह किया कि जनता की आकांक्षाए बढ़ गई हैं और सरकार में व्याप्त उदासीनता, काहिली और भ्रष्टाचार से वह बेहद क्रुध है। विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया सहित सभी ओर से जवाबदेही का कोलाहल उठ रहा है। प्रधानमंत्री सोमवार को नई दिल्ली में मुख्य सचिवों के दो दिवसीय वार्षिक सम्मेलन में बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि बढ़ती जनाकांक्षाएं हमारी नतीजे दे सकने की रफ्तार को लेकर उन्हें अधीर बना रही हैं। जनता में सरकार की उदासीनता, काहिली और भ्रष्टाचार को लेकर आज पहले से कहीं अधिक नाराजगी है। सिंह ने कहा कि इसके साथ ही भविष्य की संभावनाओं के बारे में देश में अभूतपूर्व आशावादिता भी है और ऐसी कई नई चुनौतियां हैं जो बतौर प्रशासक हमारे समक्ष मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में शासन करना बेहद जटिल हो गया है। देश की सुरक्षा का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद, विद्रोह और उग्रवाद से सख्ती के साथ प्रभावी और संवेदनशील तरीके से निपटने की जरूरत है। सिंह ने कहा कि कानून का राज सुनिश्चित कराना किसी भी सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी होती है,लेकिन तेज आर्थिक प्रगति के लिए शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द का माहौल भी अपेक्षित होता है।

बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की आलोचनाओं के बीच प्रधानमंत्री ने राज्यों से दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें गरीब और आम जनता को वाजिब कीमत पर जरूरी सामान उपलब्ध कराने के लिए अपने सभी साधनों का इस्तेमाल करना चाहिए। सिंह ने कहा कि आपके पास कई अधिकार हैं और यह उम्मीद की जाती है कि आप उसका जरूरत के हिसाब से पूरा इस्तेमाल करे। केंद्र सरकार की तरफ से मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि राज्यों को इन मामलों के अलावा सभी क्षेत्रों में हर संभव मदद दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से खाद्य उत्पादन बढ़ाने की रणनीति तैयार करने और जरूरी सामानों की आपूर्ति की कमी को दूर करने के लिए जरूरी उपाय करने को कहा। सिंह ने कहा कि प्रमुख फसलों के उत्पादन में बढ़ोतरी की अपार संभावनाएं हैं और उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्च उत्पादन प्राप्त करने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।

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